प्रधानमंत्री ने डॉ. बाबासाहेब अंबेडकर को महापरिनिर्वाण दिवस पर श्रद्धांजलि दी

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केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने महापरिनिर्वाण दिवस पर डॉ. बाबासाहेब अंबेडकर को पुष्पांजलि अर्पित की

प्रधानमंत्री ने डॉ. बाबासाहेब अंबेडकर को आज महापरिनिर्वाण दिवस पर श्रद्धांजलि अर्पित की।

प्रधानमंत्री ने कहा कि न्याय, समानता और संविधानवाद के प्रति डॉ. अंबेडकर की अटूट प्रतिबद्धता भारत की राष्ट्रीय यात्रा का मार्गदर्शन करती रहेगी। उन्होंने कहा कि मानवीय गरिमा को बनाए रखने और लोकतांत्रिक मूल्यों को मज़बूत करने के प्रति डॉ. अंबेडकर के समर्पण से पीढ़ियों ने प्रेरणा ली है।

प्रधानमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि डॉ. अंबेडकर के आदर्श राष्ट्र के पथ को आलोकित करते रहेंगे, क्योंकि देश एक विकसित भारत के निर्माण की दिशा में काम कर रहा है।

प्रधानमंत्री ने एक्स पर एक अलग पोस्‍ट में कहा;

“महापरिनिर्वाण दिवस पर डॉ. बाबासाहेब अंबेडकर का स्मरण करते हैं। उनका दूरदर्शी नेतृत्व और न्याय, समानता और संविधानवाद के प्रति डॉ. अंबेडकर की अटूट प्रतिबद्धता भारत की राष्ट्रीय यात्रा का मार्गदर्शन करती रहेगी। उनसे मानवीय गरिमा को बनाए रखने और लोकतांत्रिक मूल्यों को मज़बूत करने की पीढ़ियों ने प्रेरणा ली है।

ईश्वर करे कि उनके आदर्श हमें एक विकसित भारत के निर्माण की दिशा में अग्रसर करते रहें।”

डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर के 70वें महापरिनिर्वाण दिवस के अवसर पर केंद्रीय रेल, सूचना एवं प्रसारण, तथा इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री  अश्विनी वैष्णव ने नई दिल्ली स्थित रेल भवन में पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी।

केंद्रीय मंत्री ने एक्स पर एक पोस्ट में भारत रत्न डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर को नमन करते हुए उन्हें समानता और न्याय का मार्गदर्शक बताया।इस कार्यक्रम में रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी श्री सतीश कुमार, वरिष्ठ अधिकारी, रेलवे बोर्ड के सदस्य और अखिल भारतीय अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति रेलवे कर्मचारी संघ के प्रतिनिधि उपस्थित थे। कार्यक्रम में बाबासाहेब के योगदान संविधान निर्माण में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका और समानता, न्याय एवं निष्पक्षता पर आधारित उनके विचारों को याद किया गया।

महापरिनिर्वाण दिवस प्रतिवर्ष 6 दिसंबर को भारत रत्न डॉ. भीमराव रामजी आंबेडकर, जिन्हें बाबासाहेब आंबेडकर के नाम से भी जाना जाता है की पुण्यतिथि के उपलक्ष्य में मनाया जाता है। वे भारतीय संविधान के मुख्य शिल्पी थे। 14 अप्रैल, 1891 को मध्य प्रदेश के महू में जन्मे डॉ. भीमराव आंबेडकर ने अपना जीवन उपेक्षित समुदायों, विशेषकर दलितों, महिलाओं और मजदूरों के उत्थान के लिए समर्पित कर दिया जिन्हें व्यवस्थागत सामाजिक भेदभाव का सामना करना पड़ा था। देश में लाखों लोग इस पावन दिवस पर उनकी शिक्षाओं और एक न्यायपूर्ण एवं समावेशी समाज के निर्माण के प्रति उनकी प्रतिबद्धता पर विचार करके उनकी विरासत को श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं।

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