
नई दिल्ली, 17 फ़रवरी (हि.स.)।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मंगलवार को बुद्धिमत्ता, तर्कशीलता और निर्णय क्षमता को विज्ञान और प्रौद्योगिकी को जन-जन के लिए उपयोगी बनाने का आधार बताया। उन्होंने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) जैसी उन्नत तकनीक तभी सार्थक है, जब उसका उपयोग समाज के व्यापक कल्याण के लिए किया जाए।
इंडिया एआई इंपेक्ट समिट का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि इस शिखर सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य यही है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को किस प्रकार सर्वजन हित में प्रभावी ढंग से उपयोग किया जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत तकनीक को मानव-केंद्रित दृष्टिकोण के साथ आगे बढ़ा रहा है।
प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक संस्कृत सुभाषित साझा करते हुए बुद्धि के गुणों का उल्लेख करते हुए लिखा कि
“शुश्रूषा श्रवणं चैव ग्रहणं धारणां तथा।
ऊहापोहोऽर्थविज्ञानं तत्त्वज्ञानं च धीगुणाः॥”
इस सुभाषित का अर्थ सीखने की इच्छा, ध्यानपूर्वक सुनना, सही ढंग से समझना, उसे धारण करना, तर्क-वितर्क करना, अर्थ की गहरी समझ और सत्य का ज्ञान ये सभी ‘धी’ अर्थात् बुद्धि के गुण हैं।
प्रधानमंत्री ने कहा कि एआई के विकास और उसके जिम्मेदार उपयोग के लिए भी यही गुण आवश्यक हैं। केवल तकनीकी दक्षता पर्याप्त नहीं है बल्कि विवेक, नैतिकता और समाजहित की भावना भी उतनी ही जरूरी है।
उन्होंने विश्वास जताया कि शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि और सुशासन जैसे क्षेत्रों में एआई के माध्यम से सकारात्मक बदलाव लाकर भारत तकनीक को जनकल्याण का सशक्त माध्यम बनाएगा।