पहाड़ों पर हो रही बर्फबारी का असर गर्म कपड़ों को भेद नस्तर की तरह चुभ रही गलन

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—कंपकपाती ठंड से राहत दिलाने के लिए नगर निगम ने 370 स्थानों पर जलाए अलाव

वाराणसी,27 दिसंबर (हि.स.)। उत्तर प्रदेश के वाराणसी सहित पूर्वांचल के ​जिलों में सर्द हवाओं और धुंध के बीच गलन ने लोगों की कंपकपी बढ़ा दी है। शनिवार को वाराणसी में कोहरे का तो असर कम रहा लेकिन धुंध और सर्द हवाओं ने लोगों को खूब छकाया। दोपहर में सूर्य देव के दर्शन भी हुए लेकिन सर्द हवाओं का साथ पाकर गलन गर्म कपड़ों को भेद कर लोगों को नस्तर की तरह चुभ रही थी। कई परत कपड़े पहनने के बाद भी गलन को देख लोग अलाव जलाकर शरीर को गर्म करते दिखे।

मौसम विशेषज्ञों के अनुसार पश्चिमी विक्षोभ के गुजरने के बाद पहाड़ों पर हो रही बर्फबारी का असर दिख रहा है। पछुआ हवाओं के साथ गलन मैदानी भागों में पहुंच रही है, जिससे लोग ठिठुरन महसूस कर रहे हैं। मौसम विभाग के अनुसार शनिवार को रात आठ बजे अधिकतम तापमान 16 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। वहीं,दिन का अधिकतम तापमान करीब लगभग 22—23 डिग्री के आसपास रहा। रात 8 बजे का तापमान दिन के अधिकतम तापमान से काफी कम और रात के न्यूनतम तापमान से ज़्यादा होता है, जो इस समय लगभग 15-16 डिग्री सेल्सियस है और रात भर में और कम होकर 9-10 डिग्री तक पहुँच सकता है। कड़ाके की ठंड के कारण दोपहर और शाम बाजारों में रौनक कम रही।

उधर,वाराणसी में कंपकपाती ठंड से गरीबों और राहगीरों को राहत दिलाने के लिए नगर निगम ने शनिवार शाम 370 स्थानों पर अलाव जलवाया। नगर आयुक्त के निर्देश पर शेल्टर होम, रेलवे स्टेशन, बस अड्डे, कचहरी व प्रमुख चौराहों पर अलाव की व्यवस्था की गई। अलाव की यह व्यवस्था खास तौर पर शहर के शेल्टर होम, रेलवे स्टेशन, बस स्टेशन, कचहरी परिसर, प्रमुख मार्गों एवं व्यस्त चौराहों पर की गई है, ताकि रात के समय खुले में रहने वाले एवं आवागमन करने वाले लोगों को ठंड से बचाव मिल सके।

जोनवार विवरण के अनुसार दशाश्वमेध जोन में 60 स्थानों पर, भेलूपुर जोन में 65 स्थानों पर, ऋषि माण्डवी जोन में 40 स्थानों पर, रामनगर जोन में 20 स्थानों पर, कोतवाली जोन में 35 स्थानों पर, आदमपुर जोन में 45 स्थानों पर, वरुणापार जोन में 58 स्थानों पर तथा सारनाथ जोन में 48 स्थानों पर अलाव जलाए गए हैं। नगर आयुक्त हिमांशु नागपाल ने संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया है कि शीतलहर की स्थिति को देखते हुए अलाव की व्यवस्था नियमित रूप से बनाए रखी जाए तथा आवश्यकता पड़ने पर अतिरिक्त स्थानों पर भी अलाव की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। साथ ही अलाव स्थलों की सतत निगरानी एवं लकड़ी की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने के भी निर्देश दिए गए हैं।

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