नेपाली कांग्रेस विभाजन की ओर,विशेष महाधिवेशन में नए नेतृत्व का चयन

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काठमांडू, 14 जनवरी (हि.स.)। शेर बहादुर देउवा के नेपाली कांग्रेस का कार्यकारी अध्यक्ष पद छोड़ने से इनकार किए जाने के बाद पार्टी विभाजन की ओर बढ़ रही है। नेपाली कांग्रेस के विशेष महाधिवेशन में नए नेतृत्व का चयन किया जाना तय माना जा रहा है।

सोमवार से लगातार चली आ रही चर्चाएं आज सुबह तक भी नेतृत्व के विवाद पर सहमति में नहीं बदल सकीं, जिसके चलते कांग्रेस औपचारिक रूप से विभाजन की ओर उन्मुख हो गई है। कार्यकारी अध्यक्ष शेरबहादुर देउवा और महामंत्रियों गगन थापा व विश्वप्रकाश शर्मा के बीच आज सुबह हुई बैठक भी किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंच सकी। इसके बाद भृकुटीमंडप में निर्वाचन कार्यक्रमों को आगे बढ़ा दिया गया है। उधर, देउवा पक्ष ने केंद्रीय कार्यसमिति की बैठक करके महामंत्रियों के खिलाफ कार्रवाई की तैयारी भी शुरू कर दी है। देउवा पक्ष ने केंद्रीय कार्यसमिति की आपात बैठक बुलाई है।

महामंत्रियों का कहना था कि विशेष महाधिवेशन केवल नीतिगत विषयों के लिए ही नहीं, बल्कि नेतृत्व परिवर्तन के लिए भी आयोजित किया गया है, इसलिए उसके सम्मान में पार्टी को हाईकमांड के माध्यम से चलाने पर सहमति बननी चाहिए। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय को समझिए, जेन-जी आंदोलन की भावना को समझिए, चुनाव में किससे मुकाबला करना है, यह ध्यान में रखकर निर्णय लीजिए। इससे आपका सम्मान भी बना रहेगा और नेतृत्व परिवर्तन का संदेश भी जाएगा। यदि चुनाव न होते, तो यह स्थिति पैदा नहीं होती। बहुत सी बातें चुनाव से जुड़ी हैं। जनता की भावना को क्यों नहीं समझा जा रहा? बाहर की परिस्थितियां अलग हैं, इन्हें समझकर फैसला कीजिए।

महामंत्रियों के साथ हुई बातचीत में देउवा पक्ष के नेता बालकृष्ण खाण और रमेश लेखक भी शामिल थे। देउवा ने कहा कि वे तीन महीने बाद 15वें महाधिवेशन से स्वयं नेतृत्व छोड़ने को तैयार हैं, लेकिन अभी नेतृत्व छोड़ने पर सहमति नहीं हो सकती, जिसके बाद महामंत्री वहां से बाहर निकल आए। नेता रमेश लेखक ने दावा किया कि हाईकमांड बनाने और चुनाव न लड़ने का प्रस्ताव विशेष महाधिवेशन समर्थक नेताओं ने मंगलवार की बैठक में पहले ही छोड़ दिया था।

उन्होंने कहा कि मुख्य मुद्दा यह था कि टिकट पर पार्टी अध्यक्ष के हस्ताक्षर न हों। इस विषय में निर्वाचन आयोग से भी परामर्श किया गया। यदि कानून और नियम इसकी अनुमति देते हैं, तो सभापति ने कहा कि वे हस्ताक्षर वापस लेने को तैयार हैं, लेकिन दूसरी ओर से इसे स्वीकार नहीं किया गया। लेखक के अनुसार विशेष महाधिवेशन को स्वीकार करने, उसके निर्णयों की जिम्मेदारी लेने तथा संसदीय समिति को आपसी सहमति से बनाने पर समझदारी बन चुकी है। उन्होंने कहा कि यदि आप दो महीने बाद खुद पद छोड़ने वाले हैं, तो अभी अपमानजनक तरीके से हटाना अच्छा संदेश नहीं देगा और इससे पार्टी को कोई लाभ भी नहीं होगा।

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