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नए आपराधिक कानूनों में ऐतिहासिक सुधार, औपनिवेशिक विरासत से मुक्ति का प्रतीक: गृहमंत्री अमित शाह

नई दिल्ली, 26 जनवरी (हि.स.)। केंद्रीय गृह मंत्री एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने कहा कि गणतंत्र दिवस परेड में गृह मंत्रालय द्वारा प्रस्तुत तीन नए आपराधिक कानूनों की झांकी औपनिवेशिक विरासत को समाप्त करने वाले ऐतिहासिक कानूनी सुधारों का प्रतीक है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में ये सुधार भारत को दंड-केंद्रित व्यवस्था से न्याय-केंद्रित व्यवस्था की ओर ले जाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम हैं।

गृह मंत्री अमित शाह ने सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर एक पोस्ट में कहा कि नए आपराधिक कानूनों की झांकी भारत की न्याय प्रणाली में हो रहे व्यापक और ऐतिहासिक परिवर्तन को दर्शाती है। यह झांकी न्याय को तेज, सटीक और नागरिक-केंद्रित बनाने की सरकार की प्रतिबद्धता को रेखांकित करती है।

उन्होंने कहा कि झांकी में ई-साक्ष्य, ई-समन, न्याय श्रुति, नेशनल ऑटोमेटेड फिंगरप्रिंट आइडेंटिफिकेशन सिस्टम और इंटर-ऑपरेबल क्रिमिनल जस्टिस सिस्टम जैसे आधुनिक डिजिटल प्लेटफार्म को प्रदर्शित किया गया, जो नई भारत की न्याय प्रणाली को अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनाने में सहायक होंगे।

गृह मंत्री ने कहा कि यह झांकी नागरिकों को यह संदेश देती है कि नई आपराधिक न्याय व्यवस्था का मूल उद्देश्य त्वरित और जन-हितैषी न्याय सुनिश्चित करना है, जिससे आम लोगों का न्याय प्रणाली पर विश्वास और अधिक मजबूत होगा।

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