तबादलों में व्यस्तता के कारण राजनेताओं का विद्यार्थियों पर ध्यान नहीं

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सर्दी में भी खुले में हो रही पढ़ाई-हाईकोर्ट

जयपुर, 02 फरवरी (हि.स.)। राजस्थान हाईकोर्ट ने प्रदेश में सरकारी स्कूलों की जर्जर हालातों को लेकर बडी टिप्पणी की है। अदालत ने कहा कि तबादलों में व्यस्तता के कारण राजनेता विद्यार्थियों पर ध्यान नहीं दे रहे हैं और जनवरी माह की सर्दी में भी वे खुले में बैठकर पढ रहे हैं। इसके साथ ही अदालत ने राज्य सरकार को एक बार फिर रोडमैप पेश करने के लिए 16 फरवरी का समय दिया है। जस्टिस महेन्द्र गोयल और जस्टिस अशोक कुमार जैन की एकलपीठ ने यह आदेश झालावाड में हुए स्कूल हादसे के बाद लिए स्वप्रेरित प्रसंज्ञान पर सुनवाई करते हुए दिए।

सुनवाई के दौरान अदालती आदेश की पालना में शिक्षा सचिव कृष्ण कुणाल और शिक्षा निदेशक अदालत में हाजिर हुए। अदालत ने अफसरों की मौजूदगी में टिप्पणी करते हुए कहा कि अधिकारी शाम के समय पांच सितारा होटलों में बैठक करते हैं, लेकिन उसमें शिक्षाविद् होते ही नहीं है। अदालत ने कहा कि छात्राएं आधा लीटर पानी लेकर स्कूल जाती है, लेकिन यह पानी भी पूरा खत्म नहीं होता, कारण बालिकाओं के लिए या तो शौचालय नहीं है या उनमें सफाई नहीं होती है। अदालत ने कहा कि बूंदी में स्कूल की गिरी छत के लिए दो लाख रुपए दिए गए हैं, लेकिन यदि कोर्ट कक्ष ही सफेदी कराए तो उसमें ही आठ लाख रुपए लग जाएंगे। हमारी मानसिकता है कि कोई व्यक्ति यदि पैसा देता है तो जांच एजेंसी कालाधन-सफेद धन का पता लगाने लग जाती हैं। अदालत ने शिक्षा सचिव से कहा कि आप स्वच्छ भारत मिशन की बात करते हो, लेकिन आप स्कूल में छात्राओं के लिए टॉयलेट की व्यवस्था तक भी नहीं कर पा रहे हैं। इसके लिए क्या अफसरों को शर्म नहीं आती।

वहीं राज्य सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि स्कूलों की मरम्मत के लिए करीब 21 हजार करोड रुपए चाहिए। प्रदेश में 3768 स्कूल भवन पूरी तरह जर्जर हो गए हैं और वहां नए भवन बनेंगे। वहीं 85 हजार कमरे काम के लायक नहीं है। इसके अलावा 47 हजार शौचालयों को मरम्मत की जरूरत है। राज्य सरकार 175 करोड देती है, लेकिन उसका आधा भी खर्च नहीं किया जाता। वहीं केन्द्र सरकार से दो हजार करोड रुपए मांगे गए हैं। राज्य सरकार सीएसआर फंड से बजट जुटा रही है। इसके अलावा एमपी-एमएलए फंड से भी करीब बीस फीसदी राशि स्कूलों के लिए देने को कहा गया है। इस दौरान महाधिवक्ता राजेन्द्र प्रसाद ने कहा कि वे मुख्य सचिव और वित्त सचिव से मिलकर इस संबंध में जानकारी देंगे और मुख्यमंत्री को इस संबंध में बताया जाएगा।

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