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जल्द ही मिलेगा कम सोडियम वाला नमक व प्रोटीन युक्त चावल

सीएसआईआर ने विकसित की तकनीक

नई दिल्ली, 19 फ़रवरी (हि.स.)। वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर) के तिरुवनंतपुरम स्थित प्रयोगशाल राष्ट्रीय अंतर्विषयी विज्ञान तथा प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईआईएसटी) ने एक ऐसी तकनीक विकसित की है जिससे चावल को उच्च प्रोटीन एवं निम्न ग्लाइसेमिक इंडेक्स युक्त बनाया जा सकता है।

इस नई तकनीक से उत्पन्न धान आयरन, फोलिक एसिड और विटामिन बी12 से समृद्ध होगा, जिससे एनीमिया और मधुमेह जैसी समस्याओं से निपटने में सहायक होगा। इस तकनीक को भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) ने टाटा कंपनी को हस्तांतरित की है, जो इसे बाजार में जल्दी ही लॉन्च करेंगे। इसके साथ आईसीएमआर ने ऐसी तकनीक विकसित की है जिससे नमक में सोडियम की मात्रा को आधे से भी कम किया जा सकेगा। इससे उच्च रक्तचाप वाले मरीजों को लाभ मिल सकेगा। इसके सीएसआईआर ने कई तकनीक को उद्योग जगत को सौंपा है।

तकनीकी हस्तांतरण कार्यक्रम में सीएसआईआर की महानिदेशक एन. कलाईसेलवी ने बताया कि इस अनुसंधान की शुरुआत बाजार की जरूरतों को ध्यान में रखकर किया गया है जिससे विकसित तकनीक सीधे समाज और उद्योग के लिए उपयोगी बन सकेगी। आज अधिकांश लोगों को मधुमेह और उच्च रक्तचाप की समस्या देखी जा रही है। आधुनिक जीवनशैली और गलत खानपान के चलते लोग इस तरह की बीमारियों के गिरफ्त में आ रहे हैं। कलाईसेलवी के मुताबिक नमक में मौजूद सोडियम की मात्रा 5 मिली ग्राम से भी कम होनी चाहिए, लेकिन भारत में यह औसतन 10 मिली ग्राम से ज्यादा है। इस मात्रा को कम करने के लिए ऐसी तकनीक तैयार की गई है जिससे नमक में सोडियम की मात्रा को घटाकर 30 प्रतिशत तक कम कर दी डाए। इसी तरह की तकनीक को आज टाटा कंपनी को हस्तांतरित की गई है।

(सीएसआईआर प्रयोगशालाओं और उद्योगों के बीच सहयोग अब एक केंद्रीय लक्ष्य बन चुका है, जो आत्मनिर्भरता, सतत विकास और पोषण सुरक्षा जैसी राष्ट्रीय प्राथमिकताओं से जुड़ा है। राष्ट्रीय अनुसंधान विकास निगम (एनआरडीसी) के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक कमोडोर (रि.) अमित रस्तोगी ने कहा कि एनआरडीसी अब केवल लाइसेंसिंग तक सीमित नहीं है, बल्कि इनक्यूबेशन, टेक्नोलॉजी रेडीनेस लेवल आकलन, डिजाइन क्लीनिक, वित्तीय सहायता और आईपी सुविधा जैसे क्षेत्रों में भी सक्रिय भूमिका निभा रहा है।

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