जबलपुर, 27 जनवरी (हि.स.)। मध्य प्रदेश में प्रमोशन में आरक्षण नियम 2025 की सुनवाई लेकर जबलपुर हाईकोर्ट में सुनवाई मंगलवार को चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की डिवीजन बेंच में हुई। मध्य प्रदेश मार्केटिंग बोर्ड में पदस्थ अधिकारी की ओर से दायर की गई याचिका पर यह सुनवाई हुई। और यह याचिका हाल ही में दायर की गई है।
राज्य सरकार की ओर से महाधिवक्ता प्रशांत सिंह ने नई याचिका का जोरदार विरोध किया। उन्होंने कोर्ट को बताया कि बार बार नई याचिकाएं दायर कर मामले को जानबूझकर लंबा किया जा रहा है। इससे न केवल सुनवाई प्रभावित हो रही है, बल्कि अंतिम फैसले में भी देरी हो रही है। हालांकि, कोर्ट ने यह भी कहा कि हर याचिका को सुनने का अवसर मिलना चाहिए।
इस सुनवाई के चलते याचिकाकर्ता ने अपनी याचिका वापस लेने का फैसला कर लिया इससे मामले में स्पष्टता आ गई। कोर्ट ने पाया कि याचिकाकर्ता पहले सुप्रीम कोर्ट में प्रमोशन नियम लागू करने की मांग कर चुका है। अब वही व्यक्ति हाईकोर्ट में उसी नियम का विरोध कर रहा था। इन सवालों के बाद याचिकाकर्ता संतोषजनक जवाब नहीं दे सका और याचिका वापस ले ली गई।
महाधिवक्ता द्वारा बताया गया कि मध्य प्रदेश में कुल 54 विभाग और करीब 1500 कैडर हैं। क्लास वन और क्लास टू के कुल 14,860 स्वीकृत पदों में से केवल 6,232 पद भरे हुए हैं। इसका मतलब है कि सरकार लगभग 40 प्रतिशत अधिकारियों के सहारे प्रशासन चला रही है, जिससे कामकाज प्रभावित हो रहा है।
इसके बाद कोर्ट ने मुख्य याचिकाओं पर सुनवाई शुरु की। आरक्षित वर्ग की ओर से कहा गया कि प्रमोशन नियम 2025 में प्रतिनिधित्व की गणना सही तरीके से नहीं की गई है। उनका तर्क था कि जो अधिकारी मेरिट के आधार पर पहले ही प्रमोट हो चुके हैं, उन्हें आरक्षित वर्ग के प्रतिनिधित्व में नहीं जोड़ा जाना चाहिए। कोर्ट ने कहा कि अगर मेरिट से आए अधिकारियों को पूरी तरह अलग कर दिया गया, तो प्रमोशन में आरक्षण का उद्देश्य ही खत्म हो जाएगा। कोर्ट ने उदाहरण देकर समझाया कि आरक्षण का मकसद न तो पूरा भराव करना है और न ही कम प्रतिनिधित्व छोड़ना, बल्कि संतुलन बनाए रखना है।
अनारक्षित वर्ग की ओर से पेश वकीलों ने कहा कि वे भी इस बात से सहमत हैं कि मेरिट से आए अधिकारियों को अनारक्षित वर्ग में न गिना जाए। लेकिन उन्होंने शर्त रखी कि यह भी देखा जाए कि इन अधिकारियों ने अपने करियर में कभी आरक्षण का लाभ लिया है या नहीं।
राज्य सरकार ने कोर्ट को बताया कि प्रमोशन में आरक्षण नियम 2025 सुप्रीम कोर्ट के एम नागराज और आरबी राय मामलों के निर्देशों के आधार पर बनाया गया है। कोर्ट ने अगली सुनवाई के लिए 3 फरवरी दोपहर 12:30 बजे का समय तय किया है। इस दिन सरकार अपनी अंतिम दलील रखेगी।