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कानूनी सहायता के लिए विक्रांत जेटली से बात करना जरुरीः हाई कोर्ट

– यूएई में हिरासत में लिए गए सेलिना जेटली के भाई से जुड़े मामले में अगली सुनवाई 12 फरवरी को

नई दिल्ली, 10 फ़रवरी (हि.स.)। दिल्ली उच्च न्यायालय ने केंद्र सरकार से पूछा है कि क्या वो अभिनेत्री सेलिना जेटली को संयुक्त अरब अमीरात में कैद में रखे गए उनके भाई सेवानिवृत्त मेजर विक्रांत कुमार जेटली से वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये कोर्ट से बात करा सकती है। जस्टिस पुरुषेंद्र कुमार कौरव की बेंच ने कहा कि कानूनी सहायता के लिए विक्रांत जेटली से बात करना जरुरी है। मामले की अगली सुनवाई 12 फरवरी को होगी।

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि जीवन और स्वतंत्रता सबसे ज्यादा जरुरी है। भारतीय नागरिक को दुबई में हर संभव सहायता दी जानी चाहिए। केंद्र सरकार हर संभव सहायता करे। कोर्ट ने पूछा कि क्या कोर्ट से विक्रांत कुमार जेटली की बात हो सकती है। कोर्ट ने इसके लिए केंद्र सरकार के वकील से निर्देश लेकर कोर्ट को सूचित करने को कहा। बतादें कि तीन फरवरी को उच्च न्यायालय ने केंद्र को निर्देश दिया था कि वो मेजर विक्रांत कुमार जेटली का प्रतिनिधित्व करने के लिए दुबई के लॉ फर्म को अधिकृत करे। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने इस बात पर गौर किया था कि दुबई के एक लॉ फर्म ने मेजर विक्रांत जेटली को मुफ्त में अपनी सेवाएं देने का ऑफर किया है। दुबई के इस लॉ फर्म के ऑफर का मेजर विक्रांत जेटली ने भी विरोध नहीं किया है।

दरअसल, सेलिना जेटली ने याचिका दायर कर कहा है कि उनके सेना से रिटायर्ड भाई मेजर विक्रांत कुमार जेटली का संयुक्त अरब अमीरात में अपहरण कर लिया गया और वो करीब एक साल से कैद में हैं। याचिका में मांग की गई है कि मेजर विक्रांत कुमार जेटली को विदेश मंत्रालय की ओर से कानूनी सहायता, चिकित्सा सुविधा और राजनयिक सहायता उपलब्ध करायी जाए।

याचिका में कहा गया है कि मेजर विक्रांत ने भारतीय सेना और लेबनान में संयुक्त राष्ट्र शांति मिशन को अपनी सेवाएं दी हैं। वे संयुक्त अरब अमीरात में एक कंसल्टेंसी फर्म को अपनी सेवाएं दे रहे थे। वहां उनका एक मॉल से तब अपहरण कर लिया गया जब उनकी पत्नी उनके साथ थीं। उनके अपहरण की सूचना मिलने के बाद सेलिना जेटली ने केंद्र सरकार के मदद पोर्टल पर अपनी शिकायत दर्ज करायी। शिकायत दर्ज कराने के बावजूद उन्हें अपने भाई के बारे में कोई अपडेट नहीं मिली। सेलिना जेटली ने संयुक्त अरब अमीरात स्थित भारतीय दूतावास से भी संपर्क किया था, लेकिन कोई लाभ नहीं मिला। उसके बाद उन्होंने दिल्ली उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया है।

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