
– रक्षा मंत्री ने प्रोजेक्ट में 1000 करोड़ रुपये से ज्यादा का निवेश होने की उम्मीद जताई
नई दिल्ली, 17 फरवरी (हि.स.)। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने कर्नाटक के वेमगल में टाटा-एयरबस के एच-125 लाइट यूटिलिटी हेलीकॉप्टर फाइनल असेंबली का मुंबई से वर्चुअली उद्घाटन किया। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और फ्रांस की रक्षा मंत्री कैथरीन वॉट्रिन भी उद्घाटन समारोह में शामिल हुए। रक्षा मंत्री सिंह ने कहा कि इस प्रोजेक्ट में 1000 करोड़ रुपये से ज्यादा का निवेश होने की उम्मीद है। इससे हमारी कुशल और मेहनती युवा पीढ़ी के लिए सीधे और अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार के मौके पैदा होंगे।
फ्रांसीसी रक्षा मंत्री कैथरीन वॉट्रिन आज 6वीं भारत-फ्रांस वार्षिक रक्षा वार्ता के लिए बेंगलुरु पहुंचीं। वार्ता में रक्षा सहयोग समझौता अगले दस साल के लिए नवीनीकरण करने और हैमर मिसाइल बनाने को लेकर संयुक्त उपक्रम के लिए समझौता करने पर फोकस होगा। इससे पहले राजनाथ सिंह के साथ फ्रांस की रक्षा मंत्री कैथरीन वॉट्रिन कर्नाटक के वेमगल में एयरबस एच-125 हेलीकॉप्टर की फाइनल असेंबली लाइन के उद्घाटन समारोह में शामिल हुए। कार्यक्रम में वायु सेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह भी मौजूद थे।
उद्घाटन समारोह में राजनाथ सिंह ने कहा कि पहले भारतीय रक्षा उत्पादन कई वजहों से ज्यादातर पब्लिक सेक्टर पर आधारित था। इस वजह से कुल रक्षा उत्पादन और निर्यात में निजी क्षेत्र का योगदान उतना नहीं था, जितना होना चाहिए था। अब हमारा रक्षा निर्यात कई गुना बढ़ गया है, जिससे भारत दुनिया के शीर्ष रक्षा निर्यातकों में शामिल हो गया है। इस रफ्तार ने लघु उद्योगों और सहायक क्षेत्र को भी बहुत बढ़ावा दिया है। अभी बहुत सारी विदेशी कंपनियां भारतीय लघु उद्योगों से कई उपकरण लेती हैं। हम कंपनियों को अच्छे प्रौद्योगिकी हस्तांतरण के जरिए इस साझेदारी को और मजबूत करने और दूसरे देशों की सुरक्षा जरूरतों को पूरा करने के लिए बुलाते हैं।
उन्होंने कहा कि यह ‘मेक इन इंडिया’ और एयरोस्पेस क्षेत्र में भारत की बढ़ती क्षमताओं की दिशा में एक बड़ा कदम है। ऑर्डिनेंस फैक्ट्रियों का कॉर्पोरेटाइजेशन, लिबरलाइज्ड इन्वेस्टमेंट स्कीम, डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर बनाने जैसे कई सुधारों और ऐसे कई कदमों की वजह से आज देश के कुल डिफेंस प्रोडक्शन में प्राइवेट सेक्टर का हिस्सा लगभग एक चौथाई हो गया है। हमारा फोकस छोटे और मीडियम इंडस्ट्री को सपोर्ट करना और खासकर स्टार्टअप इकोसिस्टम को मजबूत करना भी रहा है। कुल मिलाकर हमारा फोकस एक होलिस्टिक इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट पर रहा है, जो न सिर्फ हमारी घरेलू डिमांड को पूरा करता है, बल्कि दूसरे देशों का भी ध्यान रखता है।