
लखनऊ, 22 जनवरी (हि.स.)। चिकित्सा क्षेत्र में अभूतपूर्व नवाचार करते हुए संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान (एसजीपीजीआई) लखनऊ के चिकित्सकों की एक टीम ने एक ऐसे युवक पर सफलता पूर्वक अत्याधुनिक कॉक्लियर इम्प्लांट किया है, जिसने एक भीषण सड़क दुर्घटना में अपनी श्रवण शक्ति पूरी तरह खो दी थी। 23 वर्षीय युवक को चोट के बाद दोनों कानों मे गंभीर श्रवण हानि हुई थी! इसमें उसका बायां भीतरी कान पूरी तरह से नष्ट हो गया था और दायां कान फ्रैक्चर हो गया था।
चंडीगढ़ के पीजीआईएमईआर के प्रोफेसर रमनदीप के परामर्श से दाहिने कान की स्थिति की पुष्टि करने के लिए एक विशेष नैदानिक परीक्षण किया गया। इसके बाद सर्जरी का मार्ग प्रशस्त हुआ।
एसजीपीजीआई, लखनऊ की न्यूरोऑटोलॉजी टीम ने डॉ. एम. रवि शंकर के नेतृत्व में, जनवरी माह के दूसरे सप्ताह में जटिल कॉक्लियर इम्प्लांट प्रक्रिया को अंजाम दिया। सर्जरी में अत्याधुनिक तकनीक के इम्प्लांट प्रोसेसर का उपयोग किया गया, जो लगभग सामान्य वाक् कोडिंग प्रदान करने में सक्षम है। इससे रोगी को स्पष्ट रूप से बात को समझने का सर्वोत्तम संभव अवसर मिलता है। इस तकनीक का प्रयोग उत्तर प्रदेश में पहली बार किया गया। डिवाइस को आज सफलता पूर्वक सक्रिय कर दिया गया। रोगी ने ध्वनि के प्रति तत्काल सकारात्मक प्रतिक्रिया दिखाई, जो उसकी श्रवण शक्ति में वापसी की दिशा में एक विजयी मील का पत्थर है।
पीजीआईएमईआर, चंडीगढ की पारुल और एसजीपीजीआई, लखनऊ की ऑडियोलॉजी टीम, जिसमें आद्या, कीर्ति और मंगल शामिल थे, ने इस प्रक्रिया को कुशलतापूर्वक संपन्न किया गया। इस प्रक्रिया में विशेष ऑडियोलॉजी विशेषज्ञों, माथुर और शिवांगी का भी सहयोग रहा।
डॉ. एम. रवि शंकर ने बताया कि कॉक्लियर इम्प्लांट इलेक्ट्रॉनिक उपकरण होते हैं, जो आंतरिक कान के क्षतिग्रस्त हिस्सों को बाईपास करके सीधे श्रवण तंत्रिका को उत्तेजित करते हैं। अब यह युवक गहन श्रवण पुनर्वास शुरू करने के लिए तैयार है।
