
नैनीताल, 24 दिसंबर (हि.स.)। उत्तराखंड क्रांति दल की नैनीताल इकाई ने बुधवार को नैनीताल नगर कार्यालय में उत्तराखंड के गांधी कहे जाने वाले इंद्रमणि बड़ोनी की जयंती श्रद्धापूर्वक मनाई। इस अवसर पर कार्यकर्ताओं ने बड़ोनी की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्वलित कर पुष्पांजलि अर्पित की।
केसी उपाध्याय की अध्यक्षता में आयोजित कार्यक्रम में मुख्य वक्ता पूर्व विधायक डॉ. नारायण सिंह जंतवाल ने बड़ोनी के व्यक्तित्व और कृतित्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि वे गांधीवादी विचारधारा के अनुयायी थे और समाज के लिए समर्पित राजनीति में विश्वास रखते थे। उनका मानना था कि राजनीति में पद से नहीं, बल्कि समाज की भलाई और जनता की लड़ाई लड़ने से वास्तविक प्रतिष्ठा मिलती है। उत्तराखंड राज्य आंदोलन में बड़ोनी के योगदान को कभी भुलाया नहीं जा सकता, उन्हीं के मूल्यों, सिद्धांतों और आदर्शों के कारण राज्य आंदोलन अपने लक्ष्य तक पहुंच सका।
उन्होंने हाल ही में नैनीताल के समीप मंगोली क्षेत्र में मूल निवासियों की जमीनों पर अतिक्रमण का मामला उठाते हुए शासन-प्रशासन की चुप्पी को चिंताजनक बताया और कहा कि उक्रांद अब चुप नहीं बैठेगा।
उन्होंने प्रदेश की बिगड़ती आर्थिक स्थिति और बढ़ती बेरोजगारी पर भी चिंता जताई। कार्यक्रम को वरिष्ठ अधिवक्ता प्रकाश पांडे, लीलाधर फुलारा, मनोज साह और सज्जन साह ने भी संबोधित किया। संचालन मदन सिंह बगड़वाल ने किया।
इस अवसर पर धीरेन्द्र बिष्ट, चंद्र प्रकाश साह, संजय गुप्ता, नंदन सिंह, खीमराज बिष्ट, लीला बोरा सहित अनेक कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
उत्तराखण्ड निर्माण में नींव का पत्थर हैं महानायक इंद्रमणि बडोनी का संघर्ष: प्रो बत्रा
हरिद्वार, 24 दिसंबर (हि.स.)। महानायक इंद्रमणि बडोनी की 100वीं जयन्ती पर एसएमजेएन कॉलेज परिवार द्वारा आयोजित कार्यक्रम में प्राचार्य प्रो सुनील बत्रा सहित प्राध्यापकों, शिक्षणेत्तर कर्मचारियों तथा छात्र-छात्राओं ने इंद्रमणि बडोनी की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उन्हें नमन किया।
इस अवसर पर प्रो सुनील बत्रा ने कहा कि महानायक इंद्रमणि बडोनी का संघर्ष ही उत्तराखण्ड राज्य निर्माण में नींव का पत्थर बना है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड आंदोलन के लिए अपना सर्वस्व न्यौछावर करने वाले उत्तराखंड के वीर सपूत इंद्रमणि बडोनी का विचार था कि आदमी की पहचान उसकी अपनी संस्कृति और परंपरा से ही होती हैं।
उत्तराखण्ड आंदोलन के सूत्रधार इन्द्रमणि बडोनी की आंदोलन में भूमिका वैसी ही थी जैसी आजादी के संघर्ष के दौरान भारत छाड़ो आंदोलन में राष्ट्रपिता महात्मा गांधीवादी ने निभायी थी। इसी कारण अमरीकी अखबार वाशिंगटन पोस्ट ने स्व.इन्द्रमणि बडोनी को पहाड के गॉधी की उपाधि दी थी।
कार्यक्रम में डॉ मनमोहन गुप्ता, प्रो जेसी आर्य, प्रो विनय थपलियाल, डॉ सुषमा नयाल, डॉ शिव कुमार चौहान, डॉ मोना शर्मा, डॉ लता शर्मा, डॉ विजय शर्मा, वैभव बत्रा, दिव्यांश शर्मा, डॉ हरीश चंद्र जोशी, डॉ मीनाक्षी शर्मा, कार्यालय अधीक्षक मोहन चंद्र पाण्डेय, विवेक चंद्र उनियाल सहित अनेक छात्र छात्राएं उपस्थित रहे।