हुगली जिला प्राथमिक विद्यालय परिषद को अवैध ठहराने के आदेश पर कलकत्ता हाईकोर्ट की रोक

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कोलकाता, 05 फ़रवरी (हि. स.)। शिक्षक स्थानांतरण से जुड़े एक मामले में हुगली ज़िले की जिला प्राथमिक विद्यालय परिषद (डीपीएससी) को अवैध घोषित करने वाले एकल पीठ के आदेश पर कलकत्ता हाईकोर्ट की खंडपीठ ने अंतरिम रोक लगा दी है।

न्यायमूर्ति तपब्रत चक्रवर्ती की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने परिषद को फिलहाल अपना कामकाज जारी रखने की अनुमति दी है। हालांकि, अदालत ने परिषद को निर्देश दिया है कि वह इस मामले से संबंधित सभी आवश्यक दस्तावेज़ खंडपीठ के समक्ष प्रस्तुत करे। इस संबंध में आदेश की प्रति गुरुवार को हाईकोर्ट की वेबसाइट पर अपलोड की गई।

इससे पहले, कलकत्ता हाईकोर्ट की एकल पीठ ने अपने आदेश में कहा था कि हुगली डीपीएससी का गठन नियमों और कानूनों के अनुरूप नहीं हुआ है, इसलिए परिषद का कोई वैधानिक अस्तित्व नहीं है।

एकल पीठ ने यह भी टिप्पणी की थी कि परिषद को न तो अध्यक्ष और न ही अन्य पदाधिकारियों को निर्देश जारी करने का कोई अधिकार है। यदि ऐसे निर्देश जारी किए भी गए हों, तो वे मान्य नहीं होंगे। इस आदेश को चुनौती देते हुए हुगली जिला प्राथमिक विद्यालय परिषद ने हाईकोर्ट की खंडपीठ का रुख किया था। बुधवार को हुई सुनवाई के दौरान खंडपीठ ने परिषद के कामकाज पर लगी रोक को अस्थायी रूप से हटा दिया।

सुनवाई के दौरान परिषद की ओर से पेश हुए अधिवक्ता विश्वब्रत बसु मलिक ने अदालत को बताया कि डीपीएससी प्राथमिक शिक्षा से जुड़े सभी कार्यों, भर्ती से लेकर स्थानांतरण तक का संचालन करती है। उन्होंने कहा कि एकल पीठ के आदेश के चलते न केवल पूरी प्रक्रिया ठप हो गई थी, बल्कि परिषद के कर्मचारी भी गंभीर परेशानियों का सामना कर रहे थे।

कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि खंडपीठ के इस अंतरिम आदेश से राज्य भर की प्राथमिक विद्यालय परिषदों में उत्पन्न होने वाला गतिरोध टल गया है। अस्तित्व के संकट से जूझ रही हुगली डीपीएससी को फिलहाल बड़ी राहत मिली है।

गौरतलब है कि हुगली डीपीएससी द्वारा शिक्षिका चंदना भुई के स्थानांतरण का आदेश जारी किया गया था। इस स्थानांतरण को अवैध बताते हुए उन्होंने अदालत का दरवाज़ा खटखटाया था। इसी मामले की सुनवाई के दौरान एकल पीठ ने न केवल उनका स्थानांतरण रद्द कर दिया था, बल्कि परिषद को ही अवैध घोषित कर दिया था।

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