चंडीगढ़, 03 फ़रवरी (हि.स.)। हरियाणा के पूर्व तथा मौजूदा सांसदों, विधायकों के विरूद्ध लंबित मामलों की सुनवाई में हो रही देरी पर हाईकोर्ट सख्त हो गया है। हाईकोर्ट ने स्वत:संज्ञान की सुनवाई के दौरान करनाल और नूंह (मेवात) के जिला एवं सत्र न्यायाधीशों को 15 दिन के भीतर सभी लंबित मामलों की विस्तृत स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने के निर्देश जारी किए हैं। मुख्य न्यायाधीश शील नागू की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने मंगलवार को रजिस्ट्रार जनरल को आदेश दिया कि वह तत्काल दोनों न्यायाधीशों से रिपोर्ट तलब करें और तय समय सीमा में उसे रिकार्ड पर लाएं। अदालत ने स्पष्ट किया कि इससे पहले भी 10 नवंबर 2025 और फिर 16 दिसंबर 2025 को ऐसे ही निर्देश जारी किए जा चुके हैं, लेकिन लगभग दो महीने बीत जाने के बावजूद संबंधित जिलों से कोई रिपोर्ट दाखिल नहीं हुई, जिसे कोर्ट ने न्यायिक आदेशों की गंभीर अवहेलना की श्रेणी में माना। सुनवाई के दौरान पीठ को बताया गया कि आदेशों के बाद भी कोई ठोस प्रगति सामने नहीं आई, जिससे उच्च न्यायालय की निगरानी प्रक्रिया बाधित हो रही है।
हाईकोर्ट के रिकॉर्ड और वेबसाइट पर उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार इस समय पूर्व और वर्तमान सांसदों एवं विधायकों से जुड़े कम से कम 183 आपराधिक मामले हाईकोर्ट में लंबित हैं, जबकि 159 दीवानी मामले भी ऐसे ही नेताओं से संबंधित हैं, जिनका निस्तारण वर्षों से अधर में लटका हुआ है। अदालत ने दो टूक कहा कि जनप्रतिनिधियों से जुड़े मामलों को फास्ट ट्रैक पर लाना न्यायिक प्राथमिकता है, क्योंकि इनका सीधा संबंध सार्वजनिक जीवन की शुचिता और कानून के राज से जुड़ा है।