संस्कृति मंत्रालय की झांकी ‘वंदे मातरम’ को मिला प्रथम पुरस्कार

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नई दिल्ली, 30 जनवरी (हि.स.)। गणतंत्र दिवस परेड में संस्कृति मंत्रालय ने दो बड़े पुरस्कार अपने नाम किए। ‘वंदे मातरम’ के 150 वर्षों के सफर को दर्शाती झांकी सर्वश्रेष्ठ चुनी गई, जबकि उसकी भव्य सांस्कृतिक प्रस्तुति “वंदे मातरम: भारत की शाश्वत गूंज” को इसकी विषयगत उत्कृष्टता के लिए विशेष सम्मान दिया गया।

संस्कृति मंत्रालय के अनुसार झांकी ने ‘वंदे मातरम’ गीत के 150 साल के सफर को बेहद प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया। इसमें दिखाया गया कि कैसे बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय की यह रचना राष्ट्रीय जागरण का प्रतीक बनी और स्वतंत्रता संग्राम से लेकर आधुनिक भारत की एकता तक अपनी भूमिका निभाती रही।

संगीत नाटक अकादमी और उत्तर क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र (पटियाला) द्वारा आयोजित विशेष नृत्य प्रस्तुति ने दर्शकों का मन मोह लिया। इस प्रस्तुति में सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के 2,500 कलाकारों ने भाग लिया और शास्त्रीय, लोक और आदिवासी कला रूपों के माध्यम से भारत की विशाल सांस्कृतिक विविधता को प्रदर्शित किया।

इस नृत्य प्रस्तुति ने भारत की आध्यात्मिक चेतना और अमर बलिदानों की गाथा को जीवंत कर दिया। संस्कृत मंत्रों और सधे हुए नृत्य के जरिए ‘वंदे मातरम’ की आत्मा को मंच पर उतारा गया, जिसका गौरवशाली समापन तिरंगे को दी गई भावपूर्ण सलामी के साथ हुआ।

संगीत नाटक अकादमी की अध्यक्ष डॉ. संध्या पुरेचा ने समग्र रचनात्मक निर्देशक के रूप में सांस्कृतिक प्रस्तुति का नेतृत्व किया। ऑस्कर विजेता संगीतकार एमएम कीरावानी ने संगीत निर्देशन किया, जबकि गीत सुभाष सहगल ने लिखे। राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता अभिनेता अनुपम खेर ने वॉइस ओवर दिया, संतोष नायर ने नृत्य प्रस्तुत किया और संध्या रमन ने वेशभूषा तैयार की।

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