वेटलैंड सिर्फ पारिस्थितिकी तंत्र ही नहीं, संस्कृति -आजीविका का भी आधार

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नई दिल्ली, 02 फ़रवरी (हि.स.)।

केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने कहा कि वेटलैंड (आर्द्रभूमि) केवल प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्र ही नहीं, बल्कि समुदायों, संस्कृति और आजीविका को भी संजोते हैं। जल ही जीवन है और वेटलैंड पृथ्वी की जीवनरेखा हैं।

विश्व आर्द्रभूमि दिवस 2026 के अवसर पर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर अपने संदेश में मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के पर्यावरण-संवेदनशील नेतृत्व में भारत ने वेटलैंड संरक्षण को समुदाय और संस्कृति से जोड़ा है। उन्होंने बताया कि 2014 में जहां भारत के केवल 26 रामसर स्थल थे, वहीं अब इनकी संख्या बढ़कर 98 हो गई है, जो देश की बड़ी उपलब्धि है।

इसके साथ सोमवार को

असोला भाट्टी में विश्व आर्द्रभूमि दिवस पर विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस वर्ष का विषय था—

“वेटलैंड और पारंपरिक ज्ञान: सांस्कृतिक विरासत का उत्सव”।

कार्यक्रम में वेटलैंड संरक्षण में स्थानीय समुदायों और पारंपरिक ज्ञान की भूमिका पर विशेष जोर दिया गया। इस मौके पर पर्यावरण राज्यमंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने कहा कि वेटलैंड केवल जल संसाधन नहीं हैं, बल्कि लोगों के सामाजिक जीवन, त्योहारों और धार्मिक परंपराओं से गहराई से जुड़े हुए हैं।

उन्होंने कहा कि पहले वेटलैंड ऐसे स्थान हुआ करते थे, जहां बच्चे, बुजुर्ग और परिवार एक साथ समय बिताते थे।

सिंह ने उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले स्थित पार्वती अर्गा पक्षी अभयारण्य का उल्लेख करते हुए कहा कि यह स्थल न केवल जैव विविधता का केंद्र है, बल्कि स्थानीय लोगों के लिए सांस्कृतिक और भावनात्मक महत्व भी रखता है। कार्यक्रम के दौरान इस रामसर स्थल पर आधारित एक वीडियो टीज़र भी जारी किया गया।

इस मौके पर दिल्ली के पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा भी मौजूद थे। उन्होंने कहा कि तेज शहरीकरण, अतिक्रमण और मानवीय गतिविधियों के कारण वेटलैंड को भारी नुकसान हुआ है। दिल्ली सरकार ने अगले दो वर्षों में जलाशयों के पुनर्जीवन का लक्ष्य रखा है।

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