
जयपुर, 26 दिसंबर (हि.स.)। राजस्थान हाईकोर्ट ने कहा है कि विदेश यात्रा करने का अधिकार संविधान की ओर से दिए गए मूलभूत अधिकार में शामिल है। ऐसे में याचिकाकर्ता के पासपोर्ट को जब्त रखना उसके जीवन व व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार का उल्लंघन होगा। इसके साथ ही अदालत ने याचिकाकर्ता का पासपोर्ट जारी करने के आदेश देते हुए याचिकाकर्ता को कहा है कि वह इसके नवीनीकरण के बाद कोर्ट में जमा कराएगा और बिना अनुमति देश नहीं छोडेगा। जस्टिस अनूप कुमार ने यह आदेश चरण सिंह की आपराधिक याचिका पर सुनवाई करते हुए दिए।
अदालत ने कहा कि याचिकाकर्ता संबंधित अदालत की अनुमति के बिना विदेश गया, ऐसे में उसके इस कृत्य को उचित नहीं कहा जा सकता। याचिकाकर्ता जेल में रहा है और उसके परिवार के सदस्य विदेश में रह रहे हैं। ऐसे में उसे पासपोर्ट की जरूरत है। इसलिए पासपोर्ट जब्त करने के आदेश को रद्द किया जाता है। याचिका में अधिवक्ता पीयूष नाग के अदालत को बताया कि याचिकाकर्ता के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज हुआ था। वहीं उसे अग्रिम जमानत इस शर्त पर मिली थी कि वह अदालत की अनुमति के बिना देश नहीं छोडेगा। इस दौरान अमेरिका में रह रहे बेटों के बीच पैदा हुए विवाद का निपटारा करने के लिए उसे विदेश यात्रा करनी पडी। वहीं संबंधित अदालत ने उसके पासपोर्ट को जब्त करने के आदेश दे दिए। याचिकाकर्ता के वापस लौटने पर उसकी जमानत जब्ती और गिरफ्तारी हुई। वहीं बाद में समान शर्त पर उसे नियमित जमानत मिली। याचिका में कहा गया कि उसके खिलाफ लंबे समय से सुनवाई चल रही है और पासपोर्ट जब्त होने के कारण उसका नवीनीकरण नहीं हो पा रहा है। जिस पर सुनवाई करते हुए अदालत ने उसका पासपोर्ट नवीनीकरण के लिए जारी करने को कहा है।


