वाराणसी नगर निगम की नई गाड़ियां कागज पर हुईं डेड, तीन कर्मचारी निलंबित

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—नीलामी समिति में शामिल सदस्यों की जांच में खुली घोर लापरवाही की पोल, नगर आयुक्त ने की कार्रवाई,-अपर नगर आयुक्त को सौंपी पूरे प्रकरण की जांच

वाराणसी, 05 फरवरी (हि.स.)। वाराणसी नगर निगम के परिवहन विभाग ने दस साल की मियाद पूरी करने से पहले ही तमाम वाहनों को ‘डेड’ घोषित कर इसे नीलामी की सूची में शामिल कर लिया है । नगर आयुक्त हिमांशु नागपाल ने इसे गंभीरता से लिया है । उन्होंने गुरूवार को परिवहन कार्यशाला विभाग के तीन कर्मचारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। साथ ही पूरे प्रकरण की जांच अपर नगर आयुक्त अमित कुमार को सौंपी है और 15 दिनों के भीतर जांच रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया है । निलंबन अवधि में तीनों कर्मचारी जांच अधिकारी से संबंध किए गए हैं । इसके पहले नीलामी समिति में शामिल उपसभापति नरसिंह दास, व पार्षद हनुमान प्रसाद तथा मदन मोहन दुबे ने यार्ड का स्थलीय निरीक्षण किया था ।

रिपोर्ट में कहा गया है कि अगस्त 2022 में खरीदी गई विभिन्न प्रकार के 25 ई-गार्बेज मशीनें महज डेढ़ साल में ही कबाड़ घोषित कर दी गईं। वहीं, एक गोल्फ कॉर्ट वाहन का सिर्फ चेसिस बचा है, उसके पहिए, इंजन और बैटरी सब नदारद हैं। ​10-10 लाख की जटायु मशीनें और 75 लाख की स्वीपर मशीनों को बिना किसी एक्सपर्ट रिपोर्ट के डंपिंग यार्ड में डाल दिया गया। वर्कशॉप में खड़ी गाड़ियों के इंजन, बैटरी और पहिए तक गायब मिले। नई जेसीबी और महिंद्रा के वाहनों का कोई सर्विस रिकॉर्ड नहीं मिला। टाटा एस की जिन दो गाड़ियों पर 1.5 लाख रुपये से अधिक मरम्मत में खर्च किए गए, उन्हें भी ‘स्क्रैप’ लिस्ट में डाल दिया गया। समिति के सदस्यों ने इसकी रिपोर्ट के आधार पर महापौर व नगर आयुक्त ने भी यार्ड का स्थलीय निरीक्षण किया था । इसके बाद नगर आयक्त ने इसे गंभीरता से लिया । प्रथम दृष्टता कनिष्ठ लिपिक वैभव शरण मिश्र, सौरभ सान्याल व नृपेंद्र शंकर सिंह को वाहनों के रखरखाव में घोर लापरवाही और वित्तीय क्षति पहुंचाने के आरोप में निलंबित कर दिया । जारी निलंबल आदेश में कहा गया कि इन कर्मचारियों का कृत्य कर्मचारी आचरण नियमावली के विपरीत है और यह गंभीर दंड की परिधि में आता है।

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