
प्रयागराज, 24 जनवरी (हि.स.)। इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने कहा है कि बिना कारण बताए अभियुक्त को गिरफ्तार करने वाले पुलिस अधिकारियों के खिलाफ विभागीय कार्यवाही की जाय।
यह आदेश न्यायमूर्ति सिद्धार्थ तथा न्यायमूर्ति जय कृष्ण उपाध्याय की खंडपीठ ने दिया । कोर्ट ने कहा डीजीपी ऐसे अधिकारियों को निलंबित कर उनके खिलाफ विभागीय जांच कार्यवाही करने का निर्देश दे। कोर्ट ने कहा, गिरफ्तारी के समय पुलिस को गिरफ्तारी के कारणों की जानकारी देनी चाहिए। गिरफ्तारी का कारण जानना संविधान के अनुच्छेद 22 में प्राप्त मौलिक अधिकार है।
उमंग रस्तोगी और सिद्धार्थ रस्तोगी की बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका स्वीकार करते हुए कोर्ट ने गौतम बुद्ध नगर के सिविल जज (सीनियर डिवीजन) का रिमांड आदेश रद्द करते हुए उमंग को तुरंत रिहा करने का निर्देश दिया है। हालांकि कहा है कि पुलिस कानून के अनुसार कार्रवाई कर सकती है।
28 नवम्बर, 2025 शाम लगभग 5:40 बजे याचीगण के पिता को गौतमबुद्धनगर की पुलिस ने दिल्ली स्थित उनके व्यापारिक परिसर से उठा लिया। पुलिस स्टेशन में पांच दिनों तक अवैध हिरासत में रखा गया और बाद में बीएनएस की धारा 317(2) के तहत एफआइआर दर्ज कर मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश किया गया। कोर्ट ने रिमांड दे दी। इसे हाईकोर्ट में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका में चुनौती दी थी।