Site icon Wah! Bharat

बजट 2026: ग्रीन एनर्जी को मिल सकती है नई उड़ान

– विवेक शुक्ला

वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण आगामी 1 फरवरी 2026 को देश का आम बजट पेश करने वाली हैं। यह बजट भारत की अर्थव्यवस्था के लिए बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि देश तेजी से विकास कर रहा है और पर्यावरण की रक्षा भी जरूरी है। ग्रीन एनर्जी यानी साफ और नवीकरणीय ऊर्जा, जैसे सोलर, विंड और हाइड्रोजन, भारत के भविष्य के लिए महत्वपूर्ण हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने साल 2030 तक 500 गीगावॉट नॉन-फॉसिल फ्यूल क्षमता हासिल करने और साल 2070 तक नेट-जीरो उत्सर्जन का लक्ष्य रखा है।

इस बजट से ग्रीन एनर्जी क्षेत्र को कई उम्मीदें हैं, जो देश को स्वच्छ ऊर्जा की दिशा में मजबूत बनाएंगी।

सबसे पहले, ग्रीन एनर्जी क्षेत्र को उम्मीद है कि बजट में मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा दिया जाएगा। भारत में सोलर पैनल, विंड टरबाइन और बैटरी स्टोरेज जैसी चीजों का उत्पादन बढ़ाने के लिए विशेष योजनाएं आ सकती हैं। अभी भारत इनमें से कई सामान आयात करता है, जो महंगा पड़ता है। भारत में ग्रीन एनर्जी सेक्टर के एक्सपर्ट और येमनोको लिमिटेड के प्रमुख शैलेन्द्र बेबोरठा ने बीते दिनों राजधानी में हुई इंटरनेशनल कांफ्रेंस के दौरान कहा था कि बजट में नई मैन्युफैक्चरिंग कंपनियों के लिए 15 प्रतिशत की रियायती आयकर दर फिर से शुरू की जा सकती है। इससे लोकल उत्पादन बढ़ेगा और नौकरियां पैदा होंगी। साथ ही, टेक्नोलॉजी और उपकरण विकास पर फोकस होगा, ताकि भारत आत्मनिर्भर बने। उदाहरण के लिए, सोलर मॉड्यूल और सेल बनाने वाली फैक्टरियों को सब्सिडी या टैक्स छूट मिल सकती है। इससे ग्रीन एनर्जी सस्ती हो जाएगी और आम लोग इसे अपनाएंगे।

दूसरी बड़ी उम्मीद स्टोरेज टेक्नोलॉजी से जुड़ी है। सोलर और विंड एनर्जी दिन-रात उपलब्ध नहीं रहती इसलिए बैटरी स्टोरेज बहुत जरूरी है। बजट में पंप्ड हाइड्रो स्टोरेज और बैटरी सिस्टम के लिए ज्यादा फंडिंग की उम्मीद है। देश के ग्रीन एनर्जी सेक्टर से जुड़े सब लोगों की चाहत है कि सरकार रिसर्च एंड डेवलपमेंट पर ज्यादा खर्च करे, जैसे टेक्नोलॉजी इनक्यूबेटर्स और यूनिवर्सिटी-इंडस्ट्री सहयोग। इससे नई तकनीकें विकसित होंगी और एनर्जी स्टोरेज सस्ता होगा। साथ ही, ग्रिड इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत बनाने के लिए हाई-कैपेसिटी ट्रांसमिशन लाइन्स और सब स्टेशनों पर निवेश बढ़ सकता है। यह इसलिए जरूरी है क्योंकि बड़ी मात्रा में रिन्यूएबल एनर्जी को ग्रिड में जोड़ना पड़ता है, वरना बिजली बर्बाद हो जाती है।

ग्रीन हाइड्रोजन भी एक महत्वपूर्ण क्षेत्र है, जहां बजट से बड़ी उम्मीदें हैं। ग्रीन हाइड्रोजन साफ पानी और रिन्यूएबल एनर्जी से बनता है और यह ट्रांसपोर्ट, इंडस्ट्री और पावर सेक्टर में इस्तेमाल हो सकता है। शैलेन्द्र बेबोरठा मानते हैं कि भारत ग्रीन हाइड्रोजन मिशन चला रहा है, लेकिन इसे तेज करने के लिए बजट में ज्यादा आवंटन चाहिए। इंडस्ट्री चाहती है कि उत्पादन, स्टोरेज और ट्रांसपोर्टेशन के लिए सब्सिडी दी जाए। साथ ही, एक्सपोर्ट को बढ़ावा देने के लिए टैक्स इंसेंटिव्स आ सकते हैं। इससे भारत दुनिया में ग्रीन हाइड्रोजन का बड़ा उत्पादक बन सकता है और विदेशी मुद्रा कमा सकता है।

रूफटॉप सोलर को बढ़ावा देना भी एक बड़ी उम्मीद है। घरों और इमारतों पर सोलर पैनल लगाने से बिजली बिल कम होता है और पर्यावरण का बचाव होता है। बजट में रूफटॉप सोलर के लिए ज्यादा सब्सिडी या आसान लोन स्कीम्स आ सकती हैं। साथ ही, छोटे और मध्यम उद्योगों को ग्रीन एनर्जी अपनाने के लिए टैक्स ब्रेक्स मिल सकते हैं। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में भी सोलर एनर्जी फैलेगी और किसानों को फायदा होगा, जैसे सोलर पंप और इरिगेशन सिस्टम।

बजट से क्लीन एनर्जी इकोसिस्टम को मजबूत बनाने की उम्मीद है। इसका मतलब है कि एनर्जी सिक्योरिटी, अफोर्डेबिलिटी और सस्टेनेबिलिटी पर फोकस। सरकार पिछले सालों में रिन्यूएबल एनर्जी पर फोकस कर रही है, लेकिन अब कैपेसिटी एडिशन से आगे बढ़कर स्टेबिलिटी और परफॉर्मेंस पर ध्यान देना चाहिए। इसके लिए ग्रिड रिफॉर्म्स जरूरी हैं, जैसे स्मार्ट ग्रिड और डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम अपग्रेड। साथ ही, क्लीन एनर्जी फंड्स बढ़ाए जा सकते हैं, जो प्राइवेट इन्वेस्टमेंट को आकर्षित करेंगे।

एक और महत्वपूर्ण उम्मीद है कि बजट में ग्रीन फाइनेंसिंग को बढ़ावा दिया जाए। बैंक और फाइनेंशियल इंस्टीट्यूशंस को ग्रीन प्रोजेक्ट्स के लिए सस्ते लोन देने के लिए इंसेंटिव्स मिल सकते हैं। साथ ही, कार्बन टैक्स या ग्रीन बॉन्ड्स जैसी स्कीम्स आ सकती हैं, जो फॉसिल फ्यूल्स से दूर जाने में मदद करेंगी। इससे विदेशी निवेश भी बढ़ेगा, क्योंकि दुनिया भर में ग्रीन इन्वेस्टमेंट ट्रेंड है।

ग्रीन एनर्जी क्षेत्र को उम्मीद है कि बजट में लोकल मैन्युफैक्चरिंग और क्लीन फ्यूल्स पर ज्यादा जोर होगा। उदाहरण के लिए, बायोफ्यूल और इलेक्ट्रिक व्हीकल्स से जुड़ी इंडस्ट्री को सपोर्ट। इससे प्रदूषण कम होगा और अर्थव्यवस्था मजबूत बनेगी। साथ ही, आरएनडी पर ज्यादा बजट से नई इनोवेशंस आएंगी, जैसे एडवांस्ड सोलर सेल्स या विंड टरबाइन्स।

इन सब उम्मीदों से ग्रीन एनर्जी क्षेत्र में तेजी आएगी लेकिन चुनौतियां भी हैं, जैसे महंगे इक्विपमेंट और ग्रिड कनेक्टिविटी। बजट अगर इन पर फोकस करे तो भारत रिन्यूएबल एनर्जी टारगेट को आसानी से हासिल कर सकता है। साथ ही, क्लाइमेट चेंज से लड़ने में भारत लीडर बनेगा।

बजट 2026 ग्रीन एनर्जी के लिए टर्निंग पॉइंट हो सकता है। अगर सरकार मैन्युफैक्चरिंग, स्टोरेज, हाइड्रोजन और ग्रिड पर निवेश करे तो देश स्वच्छ ऊर्जा की दिशा में तेजी से आगे बढ़ेगा। इससे नौकरियां बढ़ेंगी, अर्थव्यवस्था मजबूत होगी और पर्यावरण बचेगा। सभी की नजरें अब 1 फरवरी पर टिकी हैं।

(लेखक, वरिष्ठ पत्रकार और जाने-माने स्तंभकार हैं।)

Exit mobile version