Site icon Wah! Bharat

फिल्मी जगत में बड़ा योगदान है मृणाल सेन का

मृणाल सेन भारतीय सिनेमा के उन महान रचनाकारों में गिने जाते हैं जिन्होंने चलचित्र को केवल मनोरंजन का साधन न मानकर उसे समाज से संवाद करने का सशक्त माध्यम बनाया। उनका जन्म चौदह मई उन्नीस सौ तेरह को तत्कालीन बंगाल के फरीदपुर क्षेत्र में हुआ था, जो आज बांग्लादेश का भाग है। उनका बचपन सामान्य आर्थिक परिस्थितियों में बीता, किंतु अध्ययन और विचार की गहरी रुचि ने उन्हें प्रारंभ से ही अलग पहचान दी। उन्होंने कोलकाता में शिक्षा प्राप्त की और विज्ञान विषय में अध्ययन किया, परंतु साहित्य, कला और समाजशास्त्र में उनकी रुचि निरंतर बढ़ती चली गई।
युवा अवस्था में मृणाल सेन पुस्तकों, पत्रिकाओं और सांस्कृतिक चर्चाओं से गहरे जुड़े रहे। वे विश्व साहित्य और भारतीय समाज की जटिलताओं को समझने का प्रयास करते रहे। इसी वैचारिक पृष्ठभूमि ने आगे चलकर उनके चलचित्रों को विशिष्ट स्वरूप दिया। आरंभिक जीवन में उन्होंने औषधि कंपनी में कार्य भी किया, परंतु उनका मन रचनात्मक अभिव्यक्ति की ओर अधिक आकर्षित था। धीरे-धीरे वे चलचित्र निर्माण की दुनिया में आए और अपने समय की रूढ़ धारणाओं को चुनौती देने लगे।
मृणाल सेन ने अपने सृजन में आम जन के जीवन, संघर्ष, असमानता और नैतिक द्वंद्व को प्रमुखता दी। उनके चलचित्रों में चमक-दमक से अधिक विचार और संवेदना दिखाई देती है। उन्होंने समाज में व्याप्त गरीबी, बेरोजगारी, राजनीतिक अस्थिरता और मध्यम वर्ग की बेचैनी को ईमानदारी से प्रस्तुत किया। उनके पात्र काल्पनिक न होकर जीवंत प्रतीत होते हैं, जिनके सुख-दुख दर्शक को भीतर तक छूते हैं।
उनकी आरंभिक रचनाओं में प्रयोगधर्मिता दिखाई देती है, परंतु समय के साथ उनका शिल्प और अधिक सुदृढ़ हुआ। उन्होंने कथा कहने के पारंपरिक ढांचे को तोड़ा और नए रूपों की खोज की। संवादों की सादगी, दृश्य संयोजन की गंभीरता और कथ्य की तीव्रता उनके सृजन की पहचान बनी। वे दर्शक को केवल कहानी नहीं सुनाते थे, बल्कि उसे सोचने के लिए विवश करते थे।
मृणाल सेन का मानना था कि कलाकार का दायित्व केवल सौंदर्य रचना नहीं, बल्कि समाज के प्रश्नों को सामने लाना भी है। इसी कारण उनके चलचित्र सत्ता, व्यवस्था और सामाजिक अन्याय पर तीखी दृष्टि डालते हैं। उन्होंने अपने समय की राजनीतिक हलचलों को भी संवेदनशीलता के साथ प्रस्तुत किया। उनके कार्य में मानवीय करुणा और वैचारिक स्पष्टता का सुंदर मेल दिखाई देता है।
उनके योगदान को देश और विदेश दोनों में सराहा गया। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उनके सृजन ने भारतीय सिनेमा की गंभीर छवि को सुदृढ़ किया। उन्हें अनेक राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय सम्मानों से सम्मानित किया गया। भारत सरकार द्वारा उन्हें सर्वोच्च चलचित्र सम्मान प्रदान किया गया, जो उनके जीवन भर के रचनात्मक योगदान की स्वीकृति थी। इसके अतिरिक्त उन्हें नागरिक सम्मान भी प्राप्त हुए, जो उनके सांस्कृतिक महत्व को दर्शाते हैं।
व्यक्तिगत जीवन में मृणाल सेन सरल, अनुशासित और विचारशील व्यक्ति थे। वे दिखावे से दूर रहते थे और सदा नए रचनाकारों को प्रोत्साहित करते थे। उनका मानना था कि कला निरंतर सीखने की प्रक्रिया है और कलाकार को कभी आत्मसंतुष्ट नहीं होना चाहिए। उन्होंने अनेक युवाओं को वैकल्पिक सिनेमा की राह दिखाई और एक वैचारिक परंपरा को आगे बढ़ाया।
अपने दीर्घ जीवनकाल में मृणाल सेन ने भारतीय सिनेमा को नई दृष्टि दी। उनका निधन तीस दिसंबर दो हजार अठारह को कोलकाता में हुआ, परंतु उनके विचार और रचनाएं आज भी जीवित हैं। वे केवल निर्माता और निर्देशक नहीं थे, बल्कि एक सजग चिंतक और संवेदनशील नागरिक थे। उनका जीवन इस बात का उदाहरण है कि सच्ची कला समय की सीमाओं को पार कर समाज की चेतना को जाग्रत करती है।

Exit mobile version