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तंबाकू पर अतिरिक्त उत्पाद शुल्क, पान मसाला पर स्वास्थ्य उपकर एक फरवरी से होंगे लागू

नई दिल्‍ली, 31 जनवरी (हि.स)। केंद्रीय वित्‍त मंत्री निर्मला सीतारमण रविवार, 01 फरवरी को वित्‍त वर्ष 2026-27 का बजट पेश करेंगी लेकिन उससे पहले ही सिगरेट, तंबाकू और पान मसाला महंगे होने जा रहे हैं।

सरकार के मुताबिक सिगरेट और तंबाकू उत्पादों पर अतिरिक्त उत्पाद शुल्क तथा पान मसाला पर स्वास्थ्य उपकर 01 फरवरी से लागू हो जाएगा। ये वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) की उच्चतम 40 फीसदी की दर के ऊपर लगाया जाएगा। यह उपकर और उत्पाद शुल्क इन हानिकारक वस्तुओं पर 01 जुलाई 2017 से लागू 28 फीसदी जीएसटी और क्षतिपूर्ति उपकर का स्थान लेंगे।

इसके अलावा एक फरवरी से तंबाकू उत्पादों (चबाने वाला तंबाकू, फिल्टर खैनी, जर्दा युक्त सुगंधित तंबाकू और गुटखा) के लिए अधिकतम खुदरा मूल्य (एमआरपी) आधारित मूल्यांकन की नई व्यवस्था शुरू होगी। इसके तहत जीएसटी का निर्धारण पैकेट पर घोषित खुदरा बिक्री मूल्य के आधार पर किया जाएगा। सरकार ने ये नए टैक्स दिसंबर में संसद से पास करवा लिए हैं।

पान मसाला निर्माताओं को एक फरवरी से स्वास्थ्य और राष्ट्रीय सुरक्षा उपकर कानून के तहत नया पंजीकरण कराना होगा। ऐसे उत्पादों के निर्माताओं को सभी पैकिंग मशीनों को कवर करने वाली एक कार्यशील सीसीटीवी प्रणाली लगानी होगी और इसकी फुटेज को कम से कम 24 महीनों तक सुरक्षित रखना होगा। उन्हें उत्पाद शुल्क अधिकारियों को मशीनों की संख्या और उनकी क्षमता की जानकारी भी देनी होगी। यदि कोई मशीन लगातार कम से कम 15 दिनों तक बंद रहती है, तो वे उत्पाद शुल्क में छूट का दावा कर सकते हैं।

एक फरवरी से प्रभावी केंद्रीय उत्पाद शुल्क अधिनियम में संशोधन कर सिगरेट की लंबाई के आधार पर 2.05 रुपये से 8.50 रुपये प्रति स्टिक तक उत्पाद शुल्क लगाया गया है। इसके अलावा, स्वास्थ्य और राष्ट्रीय सुरक्षा उपकर कानून पान मसाला इकाइयों की उत्पादन क्षमता पर उपकर लगाता है। इसके तहत 40 फीसदी जीएसटी को शामिल करने के बाद पान मसाला पर कुल कर का भार मौजूदा स्तर यानी 88 फीसदी पर ही बरकरार रखा गया है।

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