घरेलू बाजार में विदेशी निवेशकों की वापसी,फरवरी में 2 अरब डॉलर की खरीदारी

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नई दिल्ली, 10 फ़रवरी (हि.स.)। साल 2025 के दौरान लगातार बिकवाल (सेलर) की भूमिका में बने रहे विदेशी निवेशकों की भारतीय शेयर बाजार में एक बार फिर दिलचस्पी बढ़ती हुई नजर आने लगी है। फरवरी के महीने में विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) ने अभी तक दो अरब डॉलर से अधिक की खरीदारी की है। शेयर बाजार की चाल में आई तेजी की एक बड़ी वजह विदेशी निवेशकों की वापसी को भी माना जा रहा है।

1 फरवरी 2026 से लेकर आज तक के कुल आठ कारोबारी दिनों में सिर्फ दो दिन ऐसे रहे हैं, जब विदेशी संस्थागत निवेशकों ने घरेलू शेयर बाजार में बिकवाली की है। दूसरी ओर, शेष छह दिन विदेशी निवेशकों ने जम कर खरीदारी की। विदेशी निवेशकों की ये खरीदारी ऐसे समय पर हो रही है, जब भारतीय बाजार बिकवाली के भारी दबाव से गुजर चुके हैं। पिछले दिनों हुई जोरदार बिकवाली के कारण घरेलू शेयर बाजार का वैल्यूएशन दूसरे एशियाई बाजार की तुलना में अधिक आकर्षक हो गया है।

मार्केट एक्सपर्ट्स का कहना है कि सेंसेक्स अपने एक साल फॉरवर्ड के प्राइस-टू-अर्निंग (पीई) मल्टीपल के 20.50 गुना के स्तर पर कारोबार कर रहा है। इसी तरह निफ्टी 20.10 गुना के स्तर पर बना हुआ है। ये स्तर सेंसेक्स और निफ्टी दोनों के 10 साल के औसत के बराबर है। वहीं ब्रॉडर मार्केट में बीएसई का मिडकैप इंडेक्स अपने एक साल के फॉरवर्ड प्राइस-टू-अर्निंग के करीब 28 गुना के स्तर पर है। हालांकि इसका लॉन्ग टर्म एवरेज 27.3 गुना के आसपास माना जाता है।

धामी सिक्योरिटीज के वाइस प्रेसिडेंट प्रशांत धामी के अनुसार जापान को छोड़ कर एशिया के दूसरे बाजार की तुलना में भारत का फॉरवर्ड पीई प्रीमियम अपने लॉन्ग टर्म एवरेज पर लौट आया है। दरअसल, पिछले एक दशक के दौरान मार्केट में कोरियाई और चीनी के स्टॉक्स के कमजोर प्रदर्शन की वजह से भारत का प्रीमियम वैल्यूएशन लगातार बढ़ा था। हालांकि, 2025 के दौरान भारतीय बाजार में लगातार हुए उतार-चढ़ाव और एशिया के अन्य शेयर बाजार में आई मजबूती की वजह से भारत का प्रीमियम वैल्यूएशन घट कर 40.10 प्रतिशत रह गया है, जो इसके 15 साल के एवरेज वैल्यूएशन 39.20 प्रतिशत के काफी करीब है। प्रशांत धामी का कहना है कि प्राइस-टू-बुक वैल्यू (पी/बीवी) के आधार पर भी इसी तरह का रुझान दिखता है। फिलहाल भारतीय स्टॉक मार्केट का 12 महीने का फॉरवर्ड प्राइस-टू-बुक वैल्यू अपने ऐतिहासिक एवरेज से ऊपर जरूर बना हुआ है, लेकिन एशिया के दूसरे बाजार के मुकाबले इसके स्तर में अधिक अंतर नहीं है।

इसी तरह जेरोधा कैपिटल्स एंड इन्वेस्टमेंट्स के सीईओ विक्रम मूलचंदानी का कहना है कि अक्टूबर 2024 से लगातार बिकवाली का दबाव बनाने के बाद विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयर बाजार को लेकर अपने कारोबारी रुख में बदलाव किया है। सिर्फ साल 2025 के दौरान ही विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयर बाजार में 18.88 अरब डॉलर की बिकवाली की थी। मूलचंदानी का कहना है कि विदेशी निवेशकों की घरेलू शेयर बाजार में फरवरी के महीने में हुई वापसी कितनी टिकाऊ होगी, इसको लेकर अभी कुछ भी नहीं कहा जा सकता है। अमेरिका के साथ हुई ट्रेड डील के पूरी तरह से लागू हो जाने के बाद ही विदेशी निवेशकों की भविष्य की रणनीति का अनुमान लगाया जा सकेगा।

खासकर, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा मनमाने अंदाज में भारत पर टैरिफ लादे जाने की वजह से विदेशी निवेशकों की नजर में भारतीय बाजार की स्थिति लगातार गिरती चली गई थी। इसके साथ ही हाई वैल्यूएशन, वीक अर्निंग्स और डॉलर की मजबूती ने विदेशी निवेशकों के लिए भारतीय बाजार में नकारात्मक माहौल बना दिया था। हालांकि भारत और अमेरिका के बीच हुई ट्रेड डील ने अमेरिका के साथ होने वाले परस्पर व्यापार की अनिश्चितता को कम करने का काम किया है। इसके साथ ही इस ट्रेड डील ने अमेरिकी बॉन्ड यील्ड्स को स्थिरता देने के साथ ही जोखिम लेने की क्षमता में भी सुधार करने का काम किया है।

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