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गुजरात के सूरत में 200 करोड़ के अंतरराष्ट्रीय हवाला रैकेट का पर्दाफाश, चार गिरफ्तार

गुजरात, 26 दिसंबर (हि.स.)। गुजरात के सूरत के डिंडोली इलाके में ‘कृष्णा पैकर्स एंड मूवर्स’ के नाम से चल रही एक दुकान असल में सामान की नहीं, बल्कि काले धन की हेराफेरी का बड़ा अड्डा निकली। ग्रीन वैली बिल्डिंग के पहले मंजिल पर 200 करोड़ रुपये के हवाला रैकेट का पर्दाफाश होते ही एसओजी भी हैरान रह गई। यह रैकेट बीते करीब दो वर्षों से सक्रिय था। इस मामले में चार लोगों को गिरफ्तार किया गया है।

जांच में सामने आया कि मुख्य आरोपित प्रतीक वसावा ने वैध कारोबार का मुखौटा ओढ़कर देश की वित्तीय व्यवस्था को नुकसान पहुंचाने वाला नेटवर्क खड़ा कर रखा था। इस रैकेट का असली संचालक दुबई में बैठा एक रहस्यमय शख्स था, जिसे ‘बिग ब्रो’ कहा जाता है। वह एपीके फाइल के जरिए सूरत में किराये पर लिए गए बैंक खातों का सीधा एक्सेस हासिल करता था। ऑनलाइन गेमिंग और शेयर बाजार के नाम पर ठगे गए लोगों की रकम इन खातों में जमा कराई जाती और फिर तुरंत आगे बढ़ा दी जाती थी।

20–25 हजार में किराये पर खाते, मिनटों में निकासी

प्रतीक वसावा की कार्यशैली बेहद शातिर थी। वह सूरत और आसपास के ग्रामीण इलाकों के आर्थिक रूप से कमजोर लोगों के बैंक खाते मात्र 20 से 25 हजार रुपये में किराये पर लेता। इन ‘म्यूल अकाउंट्स’ में जैसे ही बड़ी रकम आती, उसे सेविंग अकाउंट में ट्रांसफर कर तुरंत नकद निकाल लिया जाता, ताकि साइबर क्राइम अलर्ट से पहले पैसा सिस्टम से बाहर हो जाए।

जांच का बड़ा खुलासा तब हुआ जब पता चला कि नकद रकम को यूएसडीटी क्रिप्टोकरेंसी में बदला जा रहा था। लिंबायत के सलीम उर्फ समीर के जरिए नकद के बदले यूएसडीटी खरीदी जाती और फिर वह क्रिप्टो सीधे दुबई में बैठे ‘बिग ब्रो’ के वॉलेट में ट्रांसफर कर दी जाती। इस तरह भारतीय मुद्रा हवाला के जरिए क्रिप्टो में बदलकर विदेश पहुंचाई जाती थी।

प्रतीक वसावा कोई नया नाम नहीं है। साइबर फ्रॉड के एक मामले में वह पहले 90 दिन जेल में रह चुका है। बाहर आते ही उसने दोबारा अपराध का रास्ता अपनाया और हवाला कारोबार को और बड़ा व डिजिटल बना दिया। उसके खिलाफ पहले से 6 आपराधिक मामले दर्ज हैं।

एसओजी के डीसीपी राजदीपसिंह नकुम ने बताया कि इस मामले में प्रतीक वसावा, दीपक पांडे, रूपेश डांडगे और भूषण पाटील को गिरफ्तार किया गया है। ये सभी दुबई में बैठे ‘बिग ब्रो’ के इशारे पर भारत में नेटवर्क ऑपरेट कर रहे थे। पुलिस अब पूरे नेटवर्क, विदेशी कनेक्शन और पैसों के अंतिम लाभार्थियों की गहराई से जांच कर रही।

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