कोरियाई भिक्षुओं ने लौरिया के नंदनगढ़ स्तूप पर की पूजा

धर्म्

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कोरियाई भिक्षु बोले— विश्व में ऐसा दूसरा कोई बौद्ध स्थल नहीं

बेतिया, 14 जनवरी (हि.स.)। पश्चिम चंपारण के ऐतिहासिक नंदनगढ़ बौद्ध स्तूप पर बुधवार को साउथ कोरिया से आए बौद्ध भिक्षुओं के दल ने विशेष पूजा-अर्चना की। इस दौरान भिक्षुओं ने इस स्थल को विश्व का एक अत्यंत महत्वपूर्ण आध्यात्मिक केंद्र बताते हुए कहा कि यहां भगवान बुद्ध के पवित्र अवशेष सुरक्षित हैं, जो इसे पूरी दुनिया में अद्वितीय बनाते हैं।

कोरिया के प्रसिद्ध बॉन मंदिर के मॉन्क हम हांगेजीउन ने सिल्क टूर इंडिया के द्विभाषीय गाइड सत्येन्द्र कुमार सिंह के माध्यम से कहा कि लौरिया का यह स्तूप उन्हें गहरे आध्यात्मिक भाव से भर देता है। वहीं दूसरे मॉन्क माईइयोनगजा ने इसे एक अद्भुत और दिव्य स्थल बताते हुए कहा कि यहां आकर उन्हें अत्यंत शांति और ऊर्जा की अनुभूति हुई। भिक्षुओं ने नंदनगढ़ स्तूप पर बुद्ध की प्रतिमा स्थापित कर अपने धर्मानुसार परिक्रमा की और घंटों तक मंत्रोच्चार के साथ पूजा की।

भिक्षुओं ने अशोक स्तंभ का भी दर्शन किया और वहां अगरबत्ती जलाकर ध्यान साधना की। उन्होंने कहा कि वे अपने देश लौटकर कोरिया के लोगों को इस पवित्र स्थल के बारे में बताएंगे और अगली बार सैकड़ों बौद्ध श्रद्धालुओं के साथ यहां आएंगे। इसे उन्होंने अपने जीवन का सौभाग्यपूर्ण क्षण बताया।

इसके बाद सभी भिक्षुओं ने स्थानीय लोगों के साथ तस्वीरें खिंचवाईं और इस यात्रा को यादगार बताया। उनका अगला पड़ाव कुशीनगर, सारनाथ, वैशाली, राजगीर होते हुए बोधगया रहेगा।

स्थानीय भोजपुरी गायक पप्पू परवाना ने कहा कि लौरिया में लगातार अंतरराष्ट्रीय पर्यटक आ रहे हैं, लेकिन उनके ठहरने और खाने की पर्याप्त व्यवस्था नहीं है। उन्होंने सरकार से यहां जल्द से जल्द गेस्ट हाउस और पर्यटक सुविधाएं विकसित करने की मांग की।इस अवसर पर कोरियाई बौद्ध प्रतिनिधिमंडल में ली जंग सुक, ली हिस्सुक, कीम यूं ही, चंग तैय जो, पार्क एकीयॉन्ग, सॉन्ग दुक्यो, कीम की ओन समेत कई अन्य श्रद्धालु शामिल थे।

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