एकल मामले में भी गैंगस्टर एक्ट की कार्रवाई संभवः हाईकोर्ट

0
12

–गाजियाबाद निवासी अपीलार्थी की अपील खारिज

प्रयागराज, 05 फ़रवरी (हि.स.)। इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने गैंगस्टर एक्ट को लेकर महत्वपूर्ण टिप्पणी की है। कोर्ट ने कहा है कि गैंगस्टर एक्ट के प्रावधान एकल मामले में भी लागू किए जा सकते हैं। रूल 22 के अनुसार अपराध का इतिहास अनिवार्य नहीं है। शर्त यह है कि प्राधिकारी ने संतुष्टि के बाद आदेश जारी किया हो।

न्यायमूर्ति विवेक कुमार सिंह की एकलपीठ ने गाजियाबाद निवासी ज्योति सिंह की याचिका खारिज करते हुए यह टिप्पणी की है। याची ने बीएनएसएस की धारा 528 के अंतर्गत सज्जन सूरी और अन्य के खिलाफ दर्ज केस की पूरी प्रक्रिया, चार्जशीट और संज्ञान आदेश रद करने की मांग की थी। अभियुक्त के खिलाफ सिहानी गेट थाने में 23 सितम्बर 2024 को गैंगस्टर के तहत केस दर्ज किया गया है। इससे पहले 21 सितम्बर, 2024 को गैंग चार्ट तैयार किया गया था, जिसमें आरोपित को एक मामले में शामिल दिखाया गया था। अभियुक्त की तरफ से वकील ने कहा है कि गैंग चार्ट में केवल एक मामले का उल्लेख है और उसमें भी जमानत मिली है।

इतना ही नहीं रूल 5(3)(ए) का पालन नहीं किया गया है, क्योंकि कोई संयुक्त बैठक नहीं हुई है। गैंग चार्ट को मूल मामले की जांच पूरी हुए बिना मंजूरी नहीं दी जा सकती थी। राज्य सरकार और पीड़ित के वकील ने कहा कि गैंग चार्ट संयुक्त बैठक में तैयार किया गया था और सम्बंधित अधिकारियों ने उचित चर्चा के बाद मंजूर किया था। गैंग चार्ट को 21 सितम्बर, 2024 को पुलिस कमिश्नर ने मंजूर किया था, इसलिए इसमें कोई अवैधता या अनियमितता नहीं है। यह मूल मामले की जांच पूरी होने के बाद मंजूर किया गया था। आधार मामले की जांच 20 सितम्बर, 2024 को पूरी हुई थी और यह तथ्य गैंग चार्ट में उल्लेखित है।

अदालत ने कहा, गैंगस्टर एक्ट और रूल्स के प्रावधानों का उल्लंघन नहीं हुआ है। रूल 10(1) के अनुसार, चार्जशीट की प्रमाणित प्रति की आवश्यकता नहीं है, बल्कि जांच अधिकारी द्वारा तैयार चार्जशीट संलग्न करनी होती है। मामले में जांच अधिकारी ने 20 सितम्बर, 2024 को चार्जशीट तैयार की थी और गैंग चार्ट 21 सितम्बर, 2024 को तैयार किया गया था और यह रूल 5(3)(सी) का पालन माना जाना चाहिए। नियमों में यह नहीं कहा गया है कि चार्जशीट की प्रमाणित प्रति कोर्ट द्वारा जारी की जानी चाहिए, बल्कि यह कहा गया है कि चार्जशीट की प्रति संलग्न होनी चाहिए। कोर्ट ने शरद गुप्ता मामले में सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हवाला देते हुए कहा है कि गैंगस्टर एक्ट की परिभाषा में एक या अधिक व्यक्ति शामिल हो सकते हैं जो अपराध करते हैं और इसका उद्देश्य अनुचित लाभ कमाना होता है।

—————

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here