उप्र के एन राजम काे पद्मविभूषण और दस अन्य को मिलेगा पद्मश्री सम्मान

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लखनऊ, 25 जनवरी (हि.स.)। केंद्र सरकार ने गणतंत्र दिवस से एक दिन पहले रविवार को पद्म पुरस्कार-2026 की घोषणा कर दी है। इनमें उत्तर प्रदेश के ग्यारह लोगों के नाम शामिल हैं। इनमें कला क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य के लिए एन. राजम को पद्म विभूषण देने का ऐलान किया गया है। इसके अलावा शिल्पगुरु चिरंजी लाल यादव सहित दस अन्य लोगों को पद्मश्री सम्मान के लिए चयन किया गया है।

राजम ने वायलिन पर हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत की गायन शैली को किया विकसित प्रख्यात हिंदुस्तानी शास्त्रीय वायलिन वादक डॉ. एन. राजम को कला के क्षेत्र में उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए वर्ष 2026 के भारत का दूसरा सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्म विभूषण से सम्मानित करने की घोषणा की गई है। राजम का जन्म 1938 में चेन्नई में हुआ था और वे एक प्रसिद्ध संगीतकार परिवार से ताल्लुक रखती हैं। उन्होंने बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के परफॉर्मिंग आर्ट्स फैकल्टी में लगभग 40 वर्षों तक सेवा दी, जहां वे विभाग की प्रमुख और डीन भी रहीं हैं। एन. राजम काे वायलिन पर हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत के गायन शैली को विकसित और स्थापित करने के लिए जाना जाता है। राजम काे इससे पहले पद्म श्री (1984), पद्म भूषण (2004), और संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार (1990) से भी सम्मानित किया जा चुका है।

पीतल पर नक्काशी के हुनरदार हैं चिरंजी लालउत्तर प्रदेश की पीतल नगरी मुरादाबाद के शिल्पगुरु चिरंजी लाल यादव को कला में उनके शानदार योगदान के लिए पद्मश्री से सम्मानित किया जाएगा । 968 से पीतल की दुनिया में अपने हुनर के लिए चर्चित चिंरजी लाल बिना थके और बिना रुके अपना काम कर रहे हैं। पीतल की नक्काशी के अपने काम के साथ- साथ गुरु-शिष्य परंपरा को आगे बढ़ाते हुए हजारों कारीगरों को नक्काशी की ट्रेनिंग देकर उन्हें कुशल बनाया और ऐसा करने से भारत के हस्तशिल्प की दुनिया में काफी प्रशंसा भी हो रही है। शिल्पगुरु ने पीतल नगरी में शानदार नक्काशी की कला को सजाया संवारा और दुनिया तक इस कला को पहुंचाया है। चिंरजी लाल में ऐसा हुनर है कि वे एक बार चेहरा देख लें तो उसे हूबहू पीतल की सतह पर उतार देते हैं। उन्होंने यह कला आदर्शनगर के अपने गुरु अमर सिंह से सीखी थी। उनके गुरु अमर सिंह को तत्कालीन राष्ट्रपति जाकिर हुसैन ने राष्ट्रीय पुरस्कार दिया था।

प्रो. श्याम सुंदर कर रहे कालाजार बीमारी के उन्मूलन का कामदुनिया के नामचीन संस्थाओं में शुमार काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के वैज्ञानिक प्रो. श्याम सुंदर को पद्मश्री पुरस्कार के लिए चुना गया है। कालाजार जैसी बेहद खतरनाक बीमारी की रोकथाम के लिए किए जा रहे उनके प्रयासों के लिए यह सम्मान मिल रहा है। प्रोफेसर श्याम सुंदर को पिछले साल 9 नवम्बर को कनाडा में अमेरिकन सोसाइटी ऑफ ट्रॉपिकल मेडिसिन एंड हाइजीन के प्रतिष्ठित “क्लारा साउथमेड लडलो पदक” से भी सम्मानित किया जा चुका है। प्रो. श्याम सुंदर कालाजार खतरनाक बीमारी के खिलाफ लडाई लड़ रहे हैं, जो सैंडफ्लाई यानी कि बालू मक्खी के काटने से फैलती है। उल्लेखनीय है कि 2021 में काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के प्रोफेसर श्याम सुंदर और उनकी टीम ने इस बीमारी की जड़ को लेकर विस्तृत शोध किया। इसका परिणाम यह निकला कि बीएचयू के मेडिसिन विभाग, आइएमएस के डॉक्टर्स ने दुनिया में पहली बार जीनाडाइग्लोसिस तकनीक से कालाजार बीमारी के संक्रमण फैलाने वाले संवाहक की पहचान करने में सफलता पाई थी। प्रो.श्याम सुंदर काे लाइफ साइंस अनुसंधान के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए गोयल पुरस्कार (2018-19) से भी सम्मानित किया जा चुका है।

किसान रघुपत सिंह विकसित कर चुके हैं नई प्रजातियां

मुरादाबाद जिले के बेल्लारी निवासी किसान रघुपत सिंह को मरणाेपरांत पद्मश्री के लिए चुना गया है। उन्होंने अपने स्तर से 55 से अधिक सब्जियों की गायब हो चुकी किस्मों को फिर से किसानों के बीच पहुंचाया और इसी प्रकार 100 से अधिक नवीन किस्म की सब्जियां व वनस्पति की प्रजातियां विकसित की हैं। खेती—किसानी में उल्लेखनीय कार्य करने के लिए कई महत्वपूर्ण पुरस्कार मिल चुके हैं। रघुपत सिंह ने किसानों को खेती को एक लाभकारी के रूप में परिवर्तित किया है।

इन लाेगाें के अलावा उत्तर प्रदेश से अनिल कुमार रस्ताेगी काे कला क्षेत्र, अशाेक कुमार सिंह काे साइंस, बुद्धा रश्मि मणि काे आर्केलाॅजी, केवल कृष्ण ठकराल काे मेडिकल, मंगला कपूर काे साहित्य, प्रवीण कुमार काे खेल और राजेन्द्र प्रसाद काे मेडिसन के क्षेत्र में उत्कृष्ट याेगदान के लिए पद्मश्री सम्मान के लिए चयनित किया गया है।

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