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आलू फसल में झुलसा रोग, वैज्ञानिकों ने जारी की एडवाइजरी

कानपुर, 10 जनवरी (हि. स.)। उत्तर प्रदेश के कानपुर जनपद में कंपनी बाग़ स्थित चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के साकभाजी विज्ञान विभाग ने बदलते मौसम को देखते हुए आलू मे झुलसा रोग आने की सम्भावना पर एडवाइजरी जारी की है। यह जानकारी शनिवार को सीएसए के साकभाजी विज्ञान विभाग के प्रभारी डॉ केशव आर्य ने दी।

सकभाजी विभाग प्रभारी डॉ केशव आर्य ने बताया कि मौसम को देखते हुए आलू मे झुलसा रोग आने की सम्भावना दिख रही है।किसान भाइयों को पछेती झुलसा रोग से बचाव करना चाहिए।

आलू विशेषज्ञ डॉक्टर अजय यादव ने कहा कि केंद्रीय एवं पश्चिमी उत्तर प्रदेश मे किसानों की आलू एक मुख्य फसल है। जिसका समय रहते हुए देखभाल न किया जाए तो नुकसान हो सकता है। खड़ी फसल में झुलसा रोग महत्वपूर्ण होता है। जिसके लिए किसान को पहले से ही प्रबंधन करना है।

डॉ यादव ने बताया कि सायमोक्सनिल+ मैंकोजेब 2.5 ग्राम दवा प्रति लीटर पानी के दर से अथवा एजोक्सीस्ट्रॉबिन+टीनूकोना जोल एक ग्राम दवा प्रति लीटर पानी की दर से घोल बनाकर छिड़काव‌ करें।

उन्होंने कहा कि जिसमें झुलसा रोग से बचा जा सकता है। आलू की पत्तियों पर छोटी-छोटी बिंदी के रूप में बहुत सारे धब्बे दिखाई पड़ते हैं, जो अलटरनेरिया की वजह से आता है। यह बिंदिया पोषक तत्व की कमी को जैसे भी दिखाई देते हैं। जिसको मैनी लीफ कॉम्प्लेक्स डिजीज कहते हैं l इसका उपाय क्लोरोथेलोनील नाम की दवा ढाई ग्राम प्रति लीटर पानी की दर से घोल बनाएं जिसमें मल्टी माइक्रोन्यूट्रिएंट नाम से पैकेट बाजार में उपलब्ध होते है। जिसमें (आयरन, कॉपर, जिंक, कैल्शियम, मलिबडनम, बोरान, क्लोरीन) आदि तत्व होते हैं। जो एक किलोग्राम प्रति एकड़ के लिए पर्याप्त होता है। यदि एक एकड़ में 15 लीटर की एक टंकी है आठ से 10 टंकी में पूर्ण हो जाता है 100 ग्राम से लेकर के 120 ग्राम एक टंकी में डालना चाहिए जिससे काफी हद तक उसे रोग का कंट्रोल कर लेते हैं।

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