हजारों वर्षों के इतिहास में भारत ने कभी किसी दूसरे राष्ट्र का शोषण नहीं किया: दत्तात्रेय होसबोले

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—युवा विद्यार्थी सम्मेलन में बोले आरएसएस ​के सरकार्यवाह

वाराणसी, 24 जनवरी (हि.स.)। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबोले ने कहा कि ईश्वर की कृपा एवं मनुष्य के प्रयत्न दोनों से युवा राष्ट्र का पुनर्निर्माण करेंगे। किसान सारे प्रयत्न करता है पर ईश्वर ने यदि वर्षा और धूप नहीं दी तो कोई लाभ नहीं होता इसी प्रकार ईश्वर द्वारा प्रदत्त वर्षा और धूप होने के बाद भी यदि किसान प्रयत्न न करें तो अन्न नहीं पैदा हो सकता। संघ के शताब्दी वर्ष के अवसर पर सरकार्यवाह शनिवार को काशी हिंदू विश्वविद्यालय परिसर स्थित स्वतंत्रता भवन सभागार में आयोजित युवा विद्यार्थी सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि परमेश्वर और पुरुष का प्रयत्न ही एक साथ पुरुषार्थ को जन्म देता है।

सरकार्यवाह ने काशी हिंदू विश्वविद्यालय की स्थापना दिवस की शुभकामना देते हुए कहा कि इस विश्वविद्यालय की ही तरह 1909 में जमशेदजी टाटा द्वारा भारतीय विज्ञान संस्थान की स्थापना हुई। जिसके प्रेरणा स्रोत स्वामी विवेकानंद रहे। महामना पंडित मदन मोहन मालवीय, जमशेदजी टाटा एवं विवेकानंद जैसे महापुरुषों ने शिक्षा, विज्ञान और अनुसंधान के क्षेत्र में पराधीन भारत में भी विद्यार्थियों को स्वतंत्र बुद्धि का प्रयोग करने के लिए प्रेरित किया।

सरकार्यवाह ने कहा कि अनेकों बार भारत के बारे में विकृत इतिहास प्रस्तुत किया जाता है, परंतु धर्मपाल नाम की एक बड़े गांधीवादी विचारक ने अपनी पुस्तक ब्यूटीफुल ट्री में भारतीय शिक्षा प्रणाली के गुणों का वर्णन किया है। प्राचीन भारतीय ग्रंथों में केवल धर्म परंपरा का संग्रह नहीं है अपितु आज हम जिसे आधुनिक विज्ञान कहते हैं उस ज्ञान परंपरा का भी संग्रह है। भारतीय वांग्मय में अर्थ, काम, धर्म सभी विषयों के बारे में चिंतन मंथन हुआ है। युवा विद्यार्थियों को प्राचीन भारतीय समाज का उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि भारत का समाज कुटुम्ब व्यवस्था, ग्रामीण व्यवस्था, लोकतंत्र व्यवस्था में अत्यंत विकसित था। उन्होंने कहा कि वसुधैव कुटुम्बकम कहने का भारत को नैतिक अधिकार है क्योंकि हजारों वर्षों के इतिहास में भारत ने कभी किसी दूसरे राष्ट्र का शोषण नहीं किया। सैकड़ों वर्षों से भारत में पारसी, यहूदी एवं तिब्बती शरणार्थियों ने शरण लिया है। परम पावन दलाई लामा ने भारत के संदर्भ में कहा है कि भारत गुरु है और तिब्बत उसका शिष्य है। भारत की इच्छा कभी भी शक्ति के बल पर दादागिरी करने की नहीं रही है। उन्होंने कहा कि भारत विरोधी शक्तियां प्रति क्षण जागृत रहती हैं अतः बिना कानून को हाथ में लिए समाज के प्रत्येक व्यक्ति का कर्तव्य है कि वह सावधान रहकर राष्ट्र की सुरक्षा का कार्य करता रहे स्वतंत्रता की कीमत जागरूकता है। विमर्श को भारतीय समाज के अनुकूल होना चाहिए। विद्यार्थियों के साथ जिज्ञासा समाधान करते हुए बांग्लादेश पर उठे प्रश्न के जवाब में सरकार्यवाह ने बताया कि 71 देश के स्वयंसेवकों ने अपने-अपने देश में बांग्लादेश के हिंदुओं के समर्थन में जागृति फैलाने का कार्य प्रारंभ कर दिया है। सम्मेलन की अध्यक्षता करते हुए विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो.अजित चतुर्वेदी ने कहा कि जब विद्यार्थी सोशल मीडिया पर समाचार देखते हैं तो उन्हें यह भ्रम होता है कि समाज में बहुत ज्यादा बुरे लोग हैं। इस प्रकार का भ्रम उचित नहीं है समाज में कई लोग मर्यादित आचरण करने वाले अपने परिवार के संस्कारों को आगे बढ़ाने वाले हैं। कुलपति ने भारतीय ज्ञान परंपरा के प्रति आदर भाव रखने को आवश्यक बताया। विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों से उन्होंने आह्वान किया कि विद्यार्थी किसी भी कार्य क्षेत्र में जाएं तो यह प्रयास करें कि भारतीय ज्ञान परंपरा का ज्ञान समाज में बांटा जा सके। मंच पर विभाग संघचालक प्रो. जयप्रकाश लाल भी मंचासीन रहे। विषय स्थापना काशी प्रान्त महाविद्यालयीन प्रमुख शशांक ने किया। एकल गीत पुण्यांश ने प्रस्तुत किया। कार्यक्रम का संचालन सह विभाग कार्यवाह डॉक्टर आशीष ने किया।

कार्यक्रम में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय प्रचारक प्रमुख स्वांतरंजन, क्षेत्र कार्यवाह डॉ वीरेन्द्र, सह क्षेत्र कार्यवाह अनिल श्रीवास्तव, क्षेत्र प्रचारक अनिल, क्षेत्र शा. शिक्षण प्रमुख अखिलेश, क्षेत्र सेवा प्रमुख युद्धवीर, क्षेत्र कार्यकारिणी सदस्य हरमेश, प्रान्त कार्यवाह डॉ मुरली पाल, सह प्रांत कार्यवाह डॉ रोकश तिवारी, प्रान्त प्रचारक रमेश, सह प्रान्त प्रचारक सुनील, प्रान्त प्रचारक प्रमुख रामचन्द्र, सह प्रान्त सम्पर्क प्रमुख अजीत आदि की खास मौजूदगी रही।

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