स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद धर्म और विकास विरोधी

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हर जगह डालते हैं बाधा: जगतगुरू सतुआ बाबा

प्रयागराज, 22 जनवरी (हि.स.)। मौनी अमावस्या के दिन से शुरू हुए विवाद पर गुरुवार को जगतगुरू सतुआ बाबा संतोषदास ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की कटु निंदा की। उन्हाेंने कहा कि वे धार्मिक कार्यों एवं विकास में बांधा डालने पहुंचते हैं। माघ मेला अध्यात्म जगत का सूर्य एवं ध्वज है। पूरा विश्व इस माघ मेले की आध्यात्मिक ऊर्जा पाने के लिए तरसता है।

गुरुवार काे जगतगुरू सतुआ बाबा संतोषदास से हिन्दुस्थान समाचार के प्रतिनिधि ने बात की। इस दाैरान सतुआ बाबा ने कहा कि यह निश्चित है कि यहां कल्पवासी एवं साधु संत निवास करते हैं, लेकिन जिस तरह स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद अपने आप हठपूर्वक यहां सनातन को तोड़ने काम करने के साथ ही आमजन में भ्रांतियां डाल रहे हैं। लोगों में अध्यात्म जगत के संदेश को बिगाड़ने में लगे हुए हैं। ठीक है, विवाद होते हैं, मतभेद होते हैं, लेकिन वे गोरक्ष‌ पीठ के पीठाधीश्वर योगी आदित्यनाथ, जो प्रदेश के मुख्यमंत्री हैं, उन्हें हुमायूं की औलाद कह रहे हैं।

सतुआ बाबा ने कहा कि मैं उन्हें कड़ी चेतावनी देता हूं कि शांति से तपस्या करें और माघ मेला में अशांति फैलाने कार्य बंद करें। आप जहां विवाद की आशंका होती है, वहां पहुंचते और विकास के कार्यों में बांधा डालने का काम करते हैं। जहां विकास होता है, वहीं रोड़ा डालते हैं। उन्हाेंने कहा कि माघ मेला की शुरुआत जगतगुरू वैष्णव संत बाला नन्दाचार्य ने किया था। आप दंडी संन्यासी है, शंकराचार्य का पद विवादित है। यह मामला विचाराधीन है। आमजनमानस के बीच नाबालिग छात्रों के साथ पहुंचते हैं और विवाद उत्पन्न कराते हैं। सदियों से चली आ रही परम्परा को तोड़ने का काम किया है। पुलिस और प्रशासन एवं संतों के विचार के बाद तैयार किये गए नियमाें काे नहीं चलने दिया। साधक कभी भी धर्म का बाधक नहीं बनता है।

सतुआ बाबा ने कहा कि हम भी काशी में रहते हैं और आप भी वहीं रहते हैं। संस्कृत पाठशाला में पढ़ने वाले छात्रों को पठन पाठन के कार्य से भ्रमित करके उन्हें हर विवादित स्थानों पर पहुंचाते और उन अज्ञान बच्चों को मारपीट करने के लिए प्रेरित करते हैं, यह उनके भविष्य के साथ खिलवाड़ है।

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