
नई दिल्ली, 17 फरवरी (हि.स.)। उच्चतम न्यायालय ने उच्च संवैधानिक पदों पर बैठे लोगों की ओर से दिए जा रहे हेट स्पीच वाले बयानों के खिलाफ दाखिल याचिका को कुछ खास लोगों के खिलाफ बताया। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने याचिकाकर्ता से कहा कि वे राजनीति से परे जाकर याचिका दाखिल करें। कोर्ट ने कहा कि नफरत की शुरुआत सोच से होती है और हमें उस सोच को हटाना होगा जो संविधान के खिलाफ है।
लखनऊ की सामाजिक कार्यकर्ता रुप रेखा वर्मा समेत 12 लोगों ने दायर याचिका में असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्रियों और अजीत डोभाल के बयानों का जिक्र किया था। कोर्ट ने कहा कि हम किसी एक राजनीतिक दल या शख्स को निशाना बनाने वाली याचिकाओं पर विचार नहीं कर सकते, लेकिन हेट स्पीच का मुद्दा काफी संवेदनशील और गंभीर है।
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि राजनीतिक दलों को अपने नेताओं पर लगाम लगानी चाहिए और मीडिया को भी ऐसे नफरती भाषणों को बार-बार दिखाने से बचना चाहिए। कोर्ट ने कहा कि अगर कोर्ट दिशा-निर्देश जारी भी कर दे, तो क्या नेता उसका पालन करेंगे। कोर्ट ने कहा कि सियासी दल खुद अपने आंतरिक संविधान में हेट स्पीच को लेकर नियम क्यों नहीं बनाते हैं। कोर्ट ने कहा कि भारत एक परिपक्व लोकतंत्र है और यहां उचित सिद्धांतों की उम्मीद की जाती है। सरकार कर्मचारी और सार्वजनिक सेवक ऑल इंडिया सर्विसेज रुल्स से बंधे हैं। जस्टिस नागरत्ना ने कहा कि नफरत की शुरुआत सोच से होती है और हमें उस सोच को हटाना होगा जो संविधान के खिलाफ है।
