
जयपुर, 15 जनवरी (हि.स.)। राजस्थान हाईकोर्ट ने प्रदेश में बेची जा रही शराब की बोतलों पर कैंसर की स्पष्ट और सचित्र वैधानिक चेतावनी नहीं करने पर स्वास्थ्य मंत्रालय, सामाजिक न्याय मंत्रालय, मुख्य सचिव, प्रमुख आबकारी सचिव, एफएसएसएआई और आबकारी आयुक्त से जवाब तलब किया है। एक्टिंग सीजे संजीव प्रकाश शर्मा और जस्टिस संगीता शर्मा की खंडपीठ ने यह आदेश अवनीन्द्र मिश्रा की जनहित याचिका पर प्रारंभिक सुनवाई करते हुए दिए।
जनहित याचिका में अधिवक्ता गीतेश जोशी ने अदालत को बताया कि खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम के तहत मादक पदार्थों के लेबल पर अंग्रेजी भाषा में वैधानिक चेतावनी प्रकाशित करने का प्रावधान किया गया है। वहीं एम्स, दिल्ली के तीन वरिष्ठ विशेषज्ञ चिकित्सकों ने भी अपनी रिपोर्ट में माना है कि मादक पदार्थों के कैंसर की वैधानिक चेतावनी का प्रकाशन किया जाना चाहिए। इसके बावजूद शराब की बोतलों पर कोई स्पष्ट और प्रभावी वैधानिक चेतावनी प्रकाशित नहीं की जाती। याचिका में यह भी कहा गया कि अधिकांश शराब पीने वाले लोग निरक्षर या बहुत कम पढे-लिखे होते हैं। ऐसे में शराब की बोतल पर स्वास्थ्य संबंधी चेतावनी सचित्र और स्थानीय भाषा में होनी चाहिए। इसके अभाव में शराब का उपभोग करने वालों को यह जानकारी ही नहीं मिल पाती कि इसे पीने से कैंसर जैसी गंभीर बीमारी भी हो सकती है। याचिका में कहा गया कि याचिकाकर्ता ने संबंधित अधिकारियों को अभ्यावेदन देकर शराब की पैकेजिंग पर सचित्र और स्थानीय भाषा में वैधानिक चेतावनी प्रकाशित करने की गुहार की, जिससे इसके उपभोक्ताओं में कैंसर को लेकर जागरूकता फैल सके और स्वास्थ्य संबंधी खतरा कम हो सके। इसके बावजूद भी अधिकारियों ने कोई कार्रवाई नहीं की। जिस पर सुनवाई करते हुए खंडपीठ ने संबंधित अधिकारियों से जवाब तलब किया है।
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