बांग्लादेश में संसदीय चुनाव के लिए मतदान कल

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ढाका, 11 फरवरी (हि.स.)। बांग्लादेश में 13वें संसदीय चुनाव के लिए मतदान गुरुवार सुबह 7ः30 बजे शुरू हो होगा। इस बीच मतदाताओं की भागीदारी को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। यह अवसर इसलिए भी खास है कि चुनाव के साथ ऐतिहासिक राष्ट्रीय जनमत संग्रह भी आयोजित किया जा रहा है। जनमत संग्रह का मुख्य उद्देश्य ‘जुलाई नेशनल चार्टर 2025’ को मंजूरी देना है। यह 2024 के छात्र आंदोलन के बाद शासन प्रणाली में सुधार के लिए तैयार किया गया है। अभी तक कम से कम 394 अंतरराष्ट्रीय चुनाव पर्यवेक्षक और 197 विदेशी पत्रकार ढाका पहुंच चुके हैं।

ढाका ट्रिब्यून की रिपोर्ट के अनुसार देश के 300 में से 299 निर्वाचन क्षेत्रों में मतदान होगा। शेरपुर-3 में एक उम्मीदवार की मौत के बाद मतदान स्थगित कर दिया गया है। मतदान सुबह 7:30 से शाम 4:30 बजे तक होगा। चुनाव आयुक्त अबुल फजल एमडी सनाउल्लाह ने कहा कि आयोग शांतिपूर्ण और सही तरीके से चुनाव कराने के लिए पूरी तरह तैयार है। देश में 127,612,384 पंजीकृत मतदाता हैं। इनमें 64,760,382 पुरुष, 62,850,772 महिलाएं और 1,230 ट्रांसजेंडर मतदाता हैं।

इस बार 50 दल मैदान में हैं। कुल उम्मीदवार 2,028 हैं। इनमें स्वतंत्र उम्मीदवार भी शामिल हैं। हर निर्वाचन क्षेत्र में औसतन लगभग सात उम्मीदवार हैं। चुनाव में 81 महिलाएं भी अपनी किस्मत आजमा रही हैं। मतदान खत्म होते ही मतगणना शुरू हो जाएगी। मतों की गिनती 42,659 मतदान केंद्रों और डाक मतपत्रों की गिनती 299 केंद्रों में होगी। आयोग ने किसी भी तरह की दखल को रोकने के लिए आधे मतदान केंद्रों को संवेदनशील श्रेणी में रखा है। इसके अलावा पुलिस, बॉर्डर गार्ड बांग्लादेश, रैपिड एक्शन बटालियन और सहायक बलों सहित कानून लागू करने वाली एजेंसियों के लगभग 958,000 सदस्यों को तैनात किया गया है। इसके अलावा 2,100 कार्यकारी मजिस्ट्रेट और 657 न्यायिक मजिस्ट्रेट भी चुनाव पर नजर रखेंगे।

पहली बार कुछ चुने हुए इलाकों में हवाई निगरानी के लिए ड्रोन भी तैनात रहेंगे। 90 फीसद से ज्यादा मतगणना केंद्रों पर सीसीटीवी लगाए गए हैं। मंगलवार सुबह तक रिटर्निंग ऑफिसर्स को करीब 730,000 डाक मतपत्र मिल चुके थे। आयोग के अनुसार चुनाव 45,330 घरेलू चुनाव पर्यवेक्षक और करीब 350 विदेशी पर्यवेक्षकों की निगरानी में होंगी। अंतिम समय में यह संख्या बढ़ सकती है। 156 विदेशी पत्रकारों समेत करीब 9,700 मीडिया कर्मचारियों को चुनाव कवर करने के लिए पंजीकृत किया गया है।

राष्ट्रीय जनमत संग्रह में दो महत्वपूर्ण प्रावधान किए गए हैं कि प्रधानमंत्री के कार्यकाल को अधिकतम दो बार के लिए सीमित और देश में 100 सदस्यों वाले एक ‘ऊपरी सदन’ का गठन किया जाए। इसलिए इस बार मतदाताओं को दो मतपत्र दिए जाएंगे। संसदीय चुनाव के लिए मतपत्र का रंग सफेद और जनमत संग्रह के लिए गुलाबी रखा गया है। जनमत संग्रह के पक्ष में हां और विपक्ष में नहीं में वोट देना होगा। अपदस्थ प्रधानमंत्री शेख हसीना की पार्टी अवामी लीग को चुनाव से प्रतिबंधित कर दिया गया है। मुख्य मुकाबला बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) और जमात-ए-इस्लामी के बीच माना जा रहा है। चुनाव और जनमत संग्रह नोबेल पुरस्कार प्राप्त मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार की देखरेख में हो रहे हैं।

इस बार के चुनाव को कई मायनों में ऐतिहासिक और असाधारण माना जा रहा है। यह चुनाव ऐसे समय में हो रहा है जब देश की पारंपरिक राजनीति पूरी तरह बदल चुकी है। दो दशक तक सत्ता में रहीं अपदस्थ प्रधानमंत्री शेख हसीना अब देश से बाहर हैं और उनकी पार्टी अवामी लीग का पंजीकरण निलंबित किया जा चुका है। बांग्लादेश की दूसरी प्रमुख नेता और पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया का हाल ही में निधन हो चुका है।

अवामी लीग की गैरमौजूदगी ने समीकरण बदल दिए हैं। मुख्य मुकाबला बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी और जमात-ए-इस्लामी के नेतृत्व वाले गठबंधनों के बीच माना जा रहा है। बीएनपी की कमान इस समय तारिक रहमान के हाथों में है। वो खालिदा जिया के बेटे हैं। वह अपनी पार्टी को राष्ट्रवादी और रूढ़िवादी विकल्प के रूप में पेश कर रहे हैं।

जमात-ए-इस्लामी पार्टी शेख हसीना के कार्यकाल में प्रतिबंधित थी। कट्टरपंथी दल के तौर पर मशहूर इस पार्टी ने साल 2024 के आंदोलन से निकले छात्र नेताओं की गठित नेशनल सिटिजन पार्टी (एनसीपी) के साथ गठबंधन किया है। एनसीपी खुद को सुधारवादी और नागरिक-आधारित राजनीति का प्रतिनिधि बता रही है। जातीय पार्टी के दो गुट जेपी-कादर और जेपी-इरशाद भी मैदान में हैं। वामपंथी दलों का लेफ्ट डेमोक्रेटिक अलायंस और अमार बांग्लादेश पार्टी जैसे नए दल भी चुनाव में किस्मत आजमा रहे हैं।

आयोग के अनुसार सबसे अधिक 291 उम्मीदवार बीएनपी ने खड़े किए हैं। बांग्लादेश जमात-ए-इस्लामी ने 229 और जातीय पार्टी ने 198 उम्मीदवार उतारे हैं। राष्ट्रीय संसद में कुल 350 सीटें होती हैं। इनमें से 300 सीटों पर सीधा चुनाव होता है। बहुमत का आंकड़ा 151 सीटों का है। बाकी की 50 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होती हैं और इन्हें आम चुनाव के बाद दलों को मिली सीटों के अनुपात में आवंटित किया जाता है। राष्ट्रीय संसद के सदस्यों का कार्यकाल पांच साल होता है।

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