
नई दिल्ली, 25 जनवरी (हि.स.)। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने रविवार को अपने मासिक रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ में भारत की परिवार व्यवस्था और परंपरा के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि दुनिया के कई देशों में इसे कोतुहल के साथ देखा जाता है। उन्होंने कहा कि परिवार और समाज की ताकत मिलने से हम बड़ी-बड़ी चुनौतियों को परास्त कर सकते हैं।
‘मन की बात’ के 130वें एपिसोड में प्रधानमंत्री ने परिवार व्यवस्था को बढ़ाने को लेकर यूएई में हो रहे प्रयासों के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि यूएई के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान ने हाल ही में अपनी भारत यात्रा में उन्हें बताया कि वे अगला वर्ष परिवार के वर्ष के तौर पर मना रहे हैं। इसका मकसद है कि वहां के लोगों के बीच सौहार्द और सामूहिक भावना मजबूत हो ।
उन्होंने इस संदर्भ में गुजरात के चंदनकी गांव की सामुदायिक रसोई परंपरा का उल्लेख किया और इसे पारिवारिक और सामाजिक एकता का उदाहरण बताया। उन्होंने कहा, “गुजरात में बेचराजी के चंदनकी गांव की परंपरा अपने आप में अनूठी है। .. यहां के लोग, विशेषकर बुजुर्ग, अपने घरों में खाना नहीं बनाते तो आपको हैरत होगी। इसकी वजह गाँव का शानदार सामुदायिक रसोई। इसमें एक साथ पूरे गांव का सबका खाना बनता है और लोग एक साथ बैठकर भोजन करते हैं। बीते 15 वर्षों से यह परंपरा निरंतर चली आ रही है। इतना ही नहीं, यदि कोई व्यक्ति बीमार है तो उसके लिए टिफिन सेवा भी उपलब्ध है, यानि होम डिलिवरी का भी पूरा इंतजाम है।”
साथ ही सामुदिक भावना से किए गए सराहनीय प्रयास का उदाहरण देते हुए उन्होंने अनंतनाग में चले नशा मुक्ति और सामाजिक जागरूकता अभियान को अपने कार्यक्रम में शामिल किया। उन्होंने बताया कि अनंतनाग के शेखगुन्ड गाँव में ड्रग्स, तंबाकू, सिगरेट और शराब से जुड़ी चुनौतियाँ काफी बढ़ गई थी। इन सबको देखकर यहां के स्थानीय मीर जाफ़र इतना परेशान हुए कि उन्होंने इस समस्या को दूर करने की ठान ली। उन्होंने गाँव के युवाओं से लेकर बुजुर्गों तक सभी को एकजुट किया। उनकी इस पहल का असर कुछ ऐसा रहा कि वहाँ की दुकानों ने तंबाकू उत्पादों को बेचना ही बंद कर दिया। इस प्रयास से ड्रग्स के खतरों को लेकर भी लोगों में जागरूकता बढ़ी है।
भजन क्लबिंग जनरेशन जी के बीच हो रही लोकप्रिय
प्रधानमंत्री ने मन की बात में भक्ति और आधुनिकता के संगम ‘भजन क्लबिंग’ की युवाओं के बीच बढ़ती लोकप्रिय का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि यह भजनों की पवित्रता को बनाए रखते हुए आध्यात्मिकता को आधुनिकता के साथ जोड़ने का एक अद्भुत प्रयास है।
उन्होंने कहा कि हमारे देश में भजन और कीर्तन सदियों से हमारी संस्कृति की आत्मा रहे हैं। आज के युवाओं ने भक्ति को अपने अनुभव और अपनी जीवन-शैली में ढाल दिया है। इसी सोच से एक नया सांस्कृतिक चलन उभरकर सामने आया है। सोशल मीडिया में इसके वीडियो सामने आ रहे हैं।
उन्होंने कहा, “देश के अलग-अलग शहरों में बड़ी संख्या में युवा इकट्ठा हो रहे हैं। मंच सजा होता है, रोशनी होती है, संगीत होता है, पूरा ताम-झाम होता है और माहौल किसी कोनसर्ट से जरा भी कम नहीं होता है। ….लेकिन वहाँ जो गाया जा रहा होता है वो पूरी तन्मयता के साथ, पूरी लगन के साथ, पूरी लय के साथ भजन की गूंज। इस चलन को आज ‘भजन क्लबिंग’ कहा जा रहा है और यह खासतौर पर जेनजी के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रहा है।”
इसके साथ ही प्रधानमंत्री ने विदेशों में भारतीय संस्कृति की पहचान बनाए रखने के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने मलेशिया में भारतीय समुदाय के प्रयासों की सराहना की, जहां तमिल, तेलुगु और पंजाबी सहित भारतीय भाषाओं और संस्कृति को संरक्षित किया जा रहा है। ‘मलेशिया इंडिया हेरिटेज सोसाइटी’ के कार्यों का भी उल्लेख किया।
सर्दियों में श्रीअन्न का जरूर करें सेवन
प्रधानमंत्री ने अपने कार्यक्रम में श्रीअन्न के प्रति बढ़ते जन-लगाव पर प्रसन्नता व्यक्त की और लोगों से सर्दियों में इसका सेवन जरूर करने की सलाह दी। तमिलनाडु और राजस्थान में महिला किसानों और एफपीसी द्वारा किए जा रहे नवाचारों का उल्लेख करते हुए उन्होंने इसे स्वास्थ्य व आय दोनों के लिए लाभकारी बताया। उन्होंने कहा, “श्रीअन्न अन्नदाताओं की कमाई बढ़ाने के साथ ही लोगों की स्वास्थ्य में भी सुधार की गारंटी बनता जा रहा है। श्रीअन्न पोषण से भरपूर होते हैं। हमारे देश में सर्दियों का मौसम तो खानपान के लिए बहुत ही अच्छा माना जाता है। ऐसे में इन दिनों हमें श्रीअन्न का सेवन जरूर करना चाहिए।”
सबके प्रयास से हुआ तमसा नदी का पुनरुद्धार
प्रधानमंत्री प्रत्येक माह के अंतिम रविवार को होने वाले मन की बात कार्यक्रम में सकारात्मक प्रयासों को उठाते हैं। इसी क्रम में उन्होंने तमसा नदी के पुनरुद्धार का विषय रखा। उन्होंने कहा कि सबके प्रयास से लोगों ने जनजीवन की धूरी रही तमसा को फिर से अविरल किया। उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ से होकर गुजरने वाली तमसा नदी अयोध्या से निकलकर गंगा में समाहित होती है। संस्कृति पर आध्यात्मिक विरासत की संजीव धारा है।
इसके पुनरुद्धार में लोगों की भूमिका की सराहना करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि नदी की सफाई की गई और उसके किनारे छायादार, फलदार पेड़ लगाए गए। स्थानीय लोग कर्तव्य भावना से इस काम में जुटे और सबके प्रयास से नदी का पुनरुद्धार हुआ।
इसके अलावा उन्होंने आंध्र प्रदेश के अनंतपुर जिले में ‘अनंत नीरू संरक्षणम परियोजना’ का उल्लेख करते हुए बताया कि जलाशयों की सफाई, वृक्षारोपण और जल संरक्षण से क्षेत्र का पूरा पारिस्थितिकी तंत्र पुनर्जीवित हुआ।
युवा के पहली बार मतदाता बनने पर हो सामूहिक उत्सव
प्रधानमंत्री ने बताया कि वर्ष 2026 का यह पहला ‘मन की बात’ कार्यक्रम है और 26 जनवरी को देश गणतंत्र दिवस मनाने जा रहा है। उन्होंने कहा कि इसी दिन संविधान लागू हुआ था, जो संविधान निर्माताओं को नमन करने का अवसर देता है। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि 25 जनवरी को राष्ट्रीय मतदाता दिवस मनाया जाता है और मतदाता लोकतंत्र की आत्मा होते हैं।
उन्होंने कहा कि 18 वर्ष की आयु में मतदाता बनना केवल एक औपचारिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि जीवन का बड़ा पड़ाव है। उन्होंने सुझाव दिया कि जब कोई युवा पहली बार मतदाता बने, तो उसे सामूहिक रूप से उत्सव के रूप में मनाया जाना चाहिए। इससे मतदान के प्रति जागरूकता बढ़ेगी और मतदाता होने का महत्व और गहराई से समझ में आएगा।
आगामी इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट
अपने संबोधन के प्रधानमंत्री ने रवरी में होने वाले इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट का उल्लेख किया और कहा कि यह भारत की एआई क्षेत्र में प्रगति को विश्व के सामने प्रस्तुत करेगा। उन्होंने कहा, “इस सम्मेलन में दुनियाभर से, विशेषकर तकनीक के क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञ भारत आएंगे। यह सम्मेलन एआई की दुनिया में भारत की प्रगति और उपलब्धियों को भी सामने लाएगा। मैं इसमें शामिल होने वाले हर किसी का हृदय से अभिनंदन करता हूं। अगले महीने ‘मन की बात’ में इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट पर हम जरूर बात करेंगे।”
इसके अलावा प्रधानमंत्री ने स्टार्टअप इंडिया की दस वर्षों की यात्रा को याद दिया। उन्होंने इस दौरान हुए नवाचारों को ऐतिहासिक बताया और युवाओं को इस यात्रा का नायक बताया। साथ ही उन्होंने कहा कि भारत आज दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप इकोसिस्टम बन चुका है। स्टार्टअप्स एआई, स्पेस, सेमीकंडक्टर, ग्रीन हाइड्रोजन, बायोटेक्नोलॉजी जैसे क्षेत्रों में कार्य कर रहे हैं। उन्होंने स्टार्टअप से जुड़े युवाओं के योगदान को सराहना की।
उन्होंने गुणवत्ता पर विशेष जोर देते हुए आग्रह किया कि इसे सर्वोच्च प्राथमिकता देनी चाहिए। उन्होंने कहा कि ‘चल जाएगा’ की सोच अब स्वीकार्य नहीं है और ‘क्वालिटी, क्वालिटी और क्वालिटी’ ही मंत्र होना चाहिए। उन्होंने ‘जीरो डिफेक्ट–जीरो इफेक्ट’ के संकल्प को दोहराया।
निस्वार्थ सामाजिक सेवा के उदाहरण
प्रधानमंत्री ने पश्चिम बंगाल की ‘विवेकानंद लोक शिक्षा निकेतन’ संस्था के कार्यों की सराहना की, जो वर्षों से शिक्षा और समाज सेवा में जुटी है। अरुणाचल प्रदेश, असम, बेंगलुरु और चेन्नई में युवाओं और स्वयंसेवी समूहों द्वारा चलाए जा रहे स्वच्छता अभियानों का उल्लेख करते हुए उन्होंने इसे प्रेरणादायक बताया। पश्चिम बंगाल के बेनॉय दास और मध्य प्रदेश के जगदीश प्रसाद अहिरवार के प्रयासों का उन्होंने उल्लेख किया, जिन्होंने व्यक्तिगत स्तर पर पर्यावरण और जैव विविधता संरक्षण में उल्लेखनीय योगदान दिया।
उन्होंने ‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान से करोड़ों लोगों के जुड़ने की जानकारी दी और बताया कि अब तक 200 करोड़ से अधिक पेड़ लगाए जा चुके हैं।
