धारा 420 व धारा 406 की कार्यवाही एक साथ नहीं चल सकती : हाईकोर्ट

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-सीजेएम के संज्ञान व सम्मन आदेश रद्द, नये सिरे से आदेश पारित करने का निर्देश

प्रयागराज, 29 जनवरी, (हि.स)। इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने कहा है कि भारतीय दंड संहिता की धारा 420 व धारा 406 के अपराध की कार्यवाही एक साथ नहीं चल सकती। इसी के साथ गाजीपुर के दबंग आतिफ राजा उर्फ शरजील राजा व दो अन्य के खिलाफ सीजेएम गाजीपुर द्वारा इन धाराओं मे पुलिस चार्जशीट पर संज्ञान लेकर सम्मन जारी करने के आदेश

तीनजुलाई 23 को अवैध करार देते हुए रद्द कर दिया और मजिस्ट्रेट को तीस दिन में नये सिरे से संज्ञान आदेश पारित करने का निर्देश दिया है।

यह आदेश न्यायमूर्ति पी के गिरी ने दिया है। याची का कहना था कि सैयद बाड़ा निवासी महमूद आलम ने याची व दो अन्य के खिलाफ कोतवाली में एफआईआर दर्ज की। आरोप लगाया कि उसकी रवींद्र नारायण सिंह व बैस खान की मेसर्स विकास कांस्ट्रक्शन नाम की भागीदारी फर्म है। जिसमें याची ने 2010 में शामिल करने को कहा, नहीं करने पर जान से मारने की धमकी से डरकर उसे व उसके साथियों को भी फर्म में भागीदार बना लिया गया।

फर्म के एसबीआई खाते में शिकायतकर्ता का 76 लाख रूपये के अलावा अन्य भागीदारों का जमा करोड़ों रुपए याची ने हड़प लिया। शिकायतकर्ता के बेटे की 2015 में मौत हो गई। इसके बाद उसने घपले व धोखाधड़ी के आरोप में एफआईआर दर्ज कराई। पुलिस की चार्जशीट पर कोर्ट ने संज्ञान लेकर सम्मन जारी किया है। जिसकी वैधता को चुनौती दी गई थी।

याची का कहना था कि धारा 420 व 406 एक साथ नहीं लगाई जा सकती। सुप्रीम कोर्ट ने देलही रेस क्लब केस में साफ कहा है कि दोनों धाराओं में एक साथ केस कार्यवाही नहीं चल सकती। इसलिए केस कार्यवाही रद्द की जाय। कोर्ट ने सम्मन आदेश रद्द कर दिया और सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार नये सिरे से आदेश पारित करने का निर्देश दिया है।

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