ज्ञान, चरित्र और संस्कार का संदेश देती है बसंत पंचमी

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बाल मुकुन्द ओझा

ज्ञान की देवी मां सरस्वती को समर्पित वसंत पंचमी से ही वसंत ऋतु का आरंभ माना जाता है। प्रकृति का हर परिवर्तन मनुष्य के जीवन में कुछ परिवर्तन अवश्य ही लाता है। वसंत पंचमी हमें जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और उत्साह का संदेश देता है। इस साल बसंत पंचमी का त्योहार 23 जनवरी 2026 को है। हमारे देश में ऋतु को 6 भागों में बांटा गया है। वर्षा, ग्रीष्म, शरद, हेमंत, शिशिर, वसंत। हर ऋतु  का अपना एक अलग ही आनंद और उत्साह लोगों में देखने को मिलता है। इनमें बसंत ऋतु को ऋतुराज के रूप में मान्यता दी गई है। बसंत एक ऐसा अनूठा और निराला मौसम है जिसमें न ज्यादा गर्मी पड़ती है और न ही ज्यादा ठंड होती है। लहलहाते पेड़ों में नए पत्ते आने लगते हैं, और खेत खलिहानों में सरसों के फूलों से भरे पीले दिखाई देते हैंI अपने सुहाने मौसम के कारण यह बच्चे से बुजुर्ग तक को प्रिय है।

हमारे देश में ऋतु को 6 भागों में बांटा गया है। वर्षा, ग्रीष्म, शरद, हेमंत, शिशिर, वसंत। हर ऋतु  का अपना एक अलग ही आनंद और उत्साह लोगों में देखने को मिलता है। इनमें बसंत ऋतु को ऋतुराज के रूप में मान्यता दी गई है। बसंत एक ऐसा अनूठा और निराला मौसम है जिसमें न ज्यादा गर्मी पड़ती है और न ही ज्यादा ठंड होती है। लहलहाते पेड़ों में नए पत्ते आने लगते हैं, और खेत खलिहानों में सरसों के फूलों से भरे पीले दिखाई देते हैंI अपने सुहाने मौसम के कारण यह बच्चे से बुजुर्ग तक को प्रिय है।

कवि ‘सुमित्रानंदन पन्त ने वसंत का वर्णन इस प्रकार किया है चंचल पग दीपशिखा के धर, गृह मृग वन में आया वसंत। सुलगा फागुन का सूनापन, सौन्दर्य शिखाओं में अनंत। सौरभ की शीतल ज्वाला से, फैला उर-उर में मधुर दाह। आया वसंत भर पृथ्वी पर, स्वर्गिक सुन्दरता का प्रवाह।

मां सरस्वती का जन्मोत्सव दिवस होने के कारण वसंत पंचमी के दिन बालकों का विद्यारम्भ संस्कार करना अति उत्तम है।  बसंत पंचमी एक ऐसा ही पर्व है जिसमे  माँ सरस्वती की  पूजा की जाती है और साथ ही यह वसंत ऋतु के आगमन का भी सूचक है। वसंत पंचमी से ही वसंत ऋतु का आरंभ माना जाता है। चारों ओर हरियाली और खुशहाली का वातावरण छाया रहता है। इस दिन विद्या की देवी सरस्वती की पूजा की जाती है। इस दिन सृष्टि के रचयिता ब्रह्मा जी ने सरस्वती जी की रचना की थी, इसलिए इस दिन सरस्वती जी की पूजा की जाती है। आज ही के दिन से भारत में वसंत ऋतु का आरम्भ होता है। बसंत पंचमी को ऋतुओं का राजा कहा जाता है।  वसंत ऋतु के शुरू होते ही मौसम ने भी करवट लेना शुरू कर दिया है। कड़कड़ाती  ठंड व धुंध  का मौसम अब बदलने लगा है और एक बार फिर मौसम सुहावना होने लग जाता है। इस मौसम में हल्की धूप में सर्दी की ऋतु का सुखद आनंद मिलता है। इसके साथ ही गर्मी के मौसम के आने की आहट भी सुनाई पड़ने लगती है। सूर्य और मंगल गृह प्रभावी होने से इस ऋतु में सूर्य की तपिश बढ़ती जाती है, क्योंकि सूर्य पृथ्वी के निकट आ जाता है।

हर तरफ हरियाली, पेड़-पौधों पर फूल, नई पत्तियां और कलियां खिलने लग जाती हैं. इस नजारे को गुलाबी ठंड और भी खास बना देती है। मान्यताओं के अनुसार बसंत पंचमी के दिन को मां सरस्वती का जन्मदिन माना जाता है।  इस दिन उनकी विशेष पूजा होती है और पवित्र नदियों में स्नान किया जाता है।

पौराणिक कथा के अनुसार सरस्वती समस्त ज्ञान-विज्ञान, कला और संगीत की अधिष्ठात्री शक्ति हैं। कुछ धर्मग्रंथों में वसंत पंचमी को इनका आविर्भाव दिवस माना गया है।  सरस्वती के प्राकट्य की तिथि होने के कारण वसंत पंचमी का त्योहार बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है। इससे संबंधित कथा यह है कि सृष्टिकर्ता ब्रह्मा ने जब अपनी सृष्टि को मूक और नीरस देखा, तब उन्होंने मंत्र पढ़कर अपने कमंडल का जल पृथ्वी पर छिड़क दिया। इसके फलस्वरूप धरती पर सर्वत्र हरियाली छा गई। हरे-भरे पेड़-पौधों से सुशोभित उस धरा पर एक परम तेजोमयी देवी प्रकट हो गई, जिनके हाथों में वीणा एवं पुस्तक थी। ब्रह्माजी ने उन्हें अपनी वीणा के माध्यम से सृष्टि की मूकता तथा पुस्तक द्वारा अज्ञान के अंधकार को दूर करने का कार्यभार सौंपा। तदनुसार देवी सरस्वती वाणी और विद्या की स्वामिनी बनकर सृष्टि के विकास में तत्पर हो गई।

बाल मुकुन्द ओझा

वरिष्ठ लेखक एवं पत्रकार

डी .32, मॉडल टाउन, मालवीय नगर, जयपुर

#ज्ञान #बसंतपंचमी

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