उपराष्ट्रपति ने श्री रमण महर्षि की 146वीं जयंती पर स्मारक सिक्का जारी किया

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नई दिल्ली, 22 जनवरी (हि.स.)।

उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने गुरुवार को यहां आयोजित भगवान श्री रमण महर्षि की 146वीं जयंती समारोह को संबोधित किया और उनके सम्मान में स्मारक सिक्का जारी किया।

उपराष्ट्रपति ने भगवान श्री रमण महर्षि को आधुनिक भारत के सर्वाधिक पूज्य आध्यात्मिक महापुरुषों में से एक बताते हुए कहा कि उनका स्थान भारत की आध्यात्मिक और सभ्यतागत विरासत में विशिष्ट है। उन्होंने कहा कि अनेक संतों ने त्याग और वैराग्य का जीवन जिया, लेकिन श्री रमण महर्षि की विशेषता यह थी कि वे अपने द्वारा अपनाए गए वैराग्य के आदर्श जीवन से भी अनासक्त रहे।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि श्री रमण महर्षि का जीवन और उपदेश सत्य, आत्मज्ञान और आंतरिक स्वतंत्रता की भारत की शाश्वत साधना का सार प्रस्तुत करते हैं। आत्मविचार को उनका केंद्रीय उपदेश बताते हुए उन्होंने कहा कि आंतरिक अनुभूति पर महर्षि का जोर विश्वभर के साधकों को प्रेरित करता रहा है और इसी कारण वे विश्व स्तर पर सम्मानित आध्यात्मिक गुरु माने जाते हैं।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि आज के जटिल और तेज़ी से बदलते समय में आत्म-जागरूकता और आंतरिक अनुशासन पर आधारित श्री रमण महर्षि की शिक्षाएं नेतृत्व, शासन और उत्तरदायी नागरिकता के लिए विशेष रूप से प्रासंगिक हैं। उन्होंने कहा कि महर्षि ने भक्ति, ज्ञान, ध्यान और निष्काम सेवा—सभी आध्यात्मिक मार्गों की एकता को स्वीकार किया और बताया कि ईश्वर एक है, भले ही उपासना के मार्ग भिन्न हों।

उन्होंने कहा कि भगवान श्री रमण महर्षि की करुणा मनुष्यों के साथ-साथ पशु-पक्षियों और सभी जीवों तक समान रूप से विस्तृत थी, जो भारत की सर्वधर्म समभाव और सार्वभौमिक सौहार्द की परंपरा को प्रतिबिंबित करती है।

उपराष्ट्रपति ने तिरुवन्नामलाई स्थित श्री रमण आश्रम तथा देश-विदेश में स्थापित रमण केंद्रों की भूमिका की सराहना करते हुए कहा कि ये संस्थान महर्षि की कालजयी शिक्षाओं के संरक्षण और प्रसार में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं। उन्होंने आश्रम द्वारा संचालित निःशुल्क चिकित्सालय, साधुओं व जरूरतमंदों के लिए भोजन व्यवस्था तथा पर्यावरण संरक्षण के प्रयासों की भी प्रशंसा की।

इतिहास का स्मरण करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान महात्मा गांधी अक्सर स्वतंत्रता सेनानियों को मानसिक शक्ति और शांति प्राप्त करने के लिए श्री रमण आश्रम जाने के लिए प्रेरित करते थे।

वित्त मंत्रालय द्वारा जारी स्मारक सिक्के को उपराष्ट्रपति ने एक उपयुक्त श्रद्धांजलि बताते हुए कहा कि यह न केवल भगवान श्री रमण महर्षि के स्थायी आध्यात्मिक प्रभाव का सम्मान है, बल्कि श्री रमण आश्रम की ऐतिहासिक भूमिका को भी रेखांकित करता है। उन्होंने कहा कि यह सिक्का भारत की समृद्ध आध्यात्मिक विरासत और आत्म-जागरण के संदेश का स्थायी स्मरण बनेगा।

समारोह में श्री रमण आश्रमम, तिरुवन्नामलाई (तमिलनाडु) के अध्यक्ष डॉ. वेंकट एस. रमणन, रमण केंद्र दिल्ली के अध्यक्ष सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति के. राममूर्ति सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।

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