सीनियर नेशनल वॉलीबॉल चैंपियनशिप:महिला वर्ग में केरल चैंपियन बनी

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पुरुष वर्ग में रेलवे बना चैंपियन

—महिला वर्ग में रेलवे व पुरुष वर्ग में केरल बना उपविजेता

-हार्ड लाइन मैच में पंजाब और राजस्थान की टीमों का रहा दबदबा, कांस्य पदक पर जमाया कब्जा

वाराणसी, 11 जनवरी (हि.स.)। उत्तर प्रदेश के वाराणसी सिगरा स्थित डॉ. संपूर्णानंद स्पोर्ट्स स्टेडियम के इंडोर कोर्ट पर रविवार को आयोजित 72वीं सीनियर नेशनल वॉलीबॉल चैंपियनशिप का फाइनल मैच ऐतिहासिक बन गया। पुरुष वर्ग में जहां रेलवे के स्मैशर्स ने केरला की चुनौती को एकतरफा अंदाज में ध्वस्त कर खिताब पर कब्जा जमाया और महिला वर्ग के रोमांचक फाइनल में केरला ने रेलवे को हराकर चैंपियनशिप पर कब्जा कर लिय। नगर निगम की ओर से आयोजित पुरस्कार वितरण समारोह में प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य एवं उत्तर प्रदेश वॉलीबॉल एसोसिएशन के अध्यक्ष व उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक और महापौर अशोक कुमार तिवारी ने संयुक्त रूप से विजेता टीमों को ट्रॉफी और पदक वितरण किये। —पुरुष वर्ग में रेलवे ने केरला को 3-0 से रौंदा

रेलवे की पुरुष टीम ने अपने शानदार प्रदर्शन को जारी रखते हुए फाइनल मुकाबले में केरला को सीधे सेटों में 3-0 (25-19, 25-17, 25-19) से पराजित कर सीनियर नेशनल वॉलीबॉल चैंपियनशिप की ट्रॉफी अपने नाम कर ली। पूरे मैच के दौरान रेलवे के खिलाड़ियों ने तालमेल और आक्रामक खेल के आगे केरला की टीम एक बार भी मैच में वापसी नहीं कर सकी। रेलवे के कप्तान अंगामुथु ने टीम की कमान संभालते हुए शुरुआती सेट से ही केरला पर मानसिक दबाव बनाया। उनके पावरफुल स्मैश मैच का टर्निंग पॉइंट रहे। ​रोहित कुमार शानदार खेल कौशल दिखाते हुए अंक जुटाए और टीम के आक्रमण को धार दी। ​जॉर्ज एंटनी नेट पर अपनी लंबाई और टाइमिंग का फायदा उठाते हुए केरला के हमलों को नाकाम किया। ​एमिल टी. जोसेफ कोर्ट के बीच से आक्रामक खेल का प्रदर्शन कर विपक्षी रक्षापंक्ति को भेदा। ​समीर सीएच मैच के अंतिम क्षणों में निर्णायक अंक बटोरकर टीम की जीत सुनिश्चित की।​आनंद के. ने लिबरो के रूप में कोर्ट पर बिजली जैसी फुर्ती दिखाई और कई ‘इम्पॉसिबल’ गेंदों को उठाकर खेल में जान फूंकी। ​

उप-विजेता रही केरला की टीम ने वापसी की कोशिश की, लेकिन लय नहीं पकड़ सकी। केरला के ​सेथु टी.आर. कप्तान के तौर पर संघर्ष किया और अपनी टीम के लिए प्रमुख स्कोरर रहे। ​एरीन वर्गीस रेलवे के ब्लॉकर्स को छकाकर कुछ अच्छे अंक हासिल किए। ​मुजीब एम.सी. व राहुल के. ने तालमेल के साथ रेलवे के आक्रमण को रोकने का प्रयास किया। ​

— महिला वर्ग में केरल ने भारतीय रेलवे को 3-2 से दी शिकस्त

सिगरा स्टेडियम के इंडोर कोर्ट पर रविवार को आयोजित 72वीं सीनियर नेशनल वॉलीबॉल चैंपियनशिप का महिला फाइनल मैच ऐतिहासिक बन गया। केरल की बेटियों ने अपने प्रतिद्वंदी भारतीय रेलवे को 3-2 से शिकस्त देकर खिताब अपने नाम कर लिया। शुरू में पिछड़ने के बाद शानदार वापसी करने वाली केरल की टीम ने निर्णायक सेट में रेलवे को कोई मौका नहीं दिया। ​रेलवे ने पहला सेट 25-22 से जीतकर अपनी मंशा साफ कर दी। इसके बाद केरल ने जोरदार पलटवार किया और लगातार दो सेट 25-20 और 25-15 से जीतकर अपनी पकड़ मजबूत कर ली। चौथे सेट में रेलवे ने फिर वापसी की और 25-22 से जीतकर मैच को निर्णायक पांचवें सेट में धकेल दिया। हालांकि, अंतिम सेट में केरल के दमदार स्मैश और डिफेंस के आगे रेलवे बेबस दिखी और केरल ने 15-8 से सेट जीतकर चैंपियनशिप की ट्रॉफी अपने नाम कर ली। केरल की इस खिताबी सफलता के पीछे टीम की एकजुटता और रणनीतिक कौशल का बड़ा हाथ रहा। टीम की जीत की मुख्य सूत्रधार रहीं अनुश्री ने अपनी कलाई के जादू और आक्रामक स्मैश से रेलवे के डिफेंस को पस्त कर दिया। वहीं, डिफेंस की कमान शिवप्रिया जी. ने संभाली थी। लिबरो की भूमिका में शिवप्रिया ने मैदान पर गजब की फुर्ती दिखाते हुए रेलवे के तेज तर्रार हमलों को न सिर्फ रोका, बल्कि उन्हें काउंटर अटैक में तब्दील करने का मौका भी बनाया।

—पंजाब और राजस्थान की टीमों ने जीते कांस्य पदक पुरुष वर्ग में तीसरे स्थान के लिए हुए कड़े मुकाबले में पंजाब की टीम ने अपना दबदबा कायम रखते हुए सर्विसेज को सीधे सेटों में 3-0 से करारी शिकस्त दी। इस जीत के साथ ही पंजाब ने टूर्नामेंट में तीसरा स्थान (हार्ड लाइन मैच) सुरक्षित कर लिया है। पूरे मैच के दौरान पंजाब के खिलाड़ियों ने आक्रामक खेल और बेहतरीन तालमेल का प्रदर्शन किया। ​दूसरी ओर सर्विसेज की ओर से विक्रम और शिखर सिंह ने कई मौकों पर अंक बटोरकर टीम को वापस लाने की कोशिश की। नरेश कुमार और चिराग एस. कुमार का प्रदर्शन भी सराहनीय रहा।

—राजस्थान की हरियाणा पर शानदार जीत

​महिला वर्ग के हार्डलाइन मुकाबले में राजस्थान की टीम ने अपने शानदार खेल का प्रदर्शन करते हुए हरियाणा को 3-1 से पराजित कर टूर्नामेंट में तीसरा स्थान हासिल किया। पूरे मैच के दौरान राजस्थान की खिलाड़ियों ने आक्रामक खेल दिखाया और हरियाणा को वापसी का कोई बड़ा मौका नहीं दिया।

—समापन समारोह में विशिष्ट उपस्थिति

सीनियर नेशनल वॉलीबॉल चैंपियनशिप के समापन समारोह में प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव मौर्य, ब्रजेश पाठक, राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) रविन्द्र जायसवाल, विधायक सौरभ श्रीवास्तव, एमएलसी हंसराज विश्वकर्मा, एमएलसी धर्मेन्द्र राय, वरिष्ठ पत्रकार हेमंत शर्मा, गुजरात के पूर्व विधायक जगदीश पटेल, बीएचयू के पूर्व कुलपति प्रो. पंजाब सिंह, पूर्व महापौर कोशलेंद्र सिंह, नगर आयुक्त हिमांशु नागपाल आदि भी मौजूद रहे। अतिथियों का स्वागत आयोजन समिति के अध्यक्ष व महापौर अशोक कुमार तिवारी व धन्यवाद ज्ञापन सचिव सर्वेश पांडेय ने किया।

—काशी ने पहली बार मेजबानी कर रचा इतिहास

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के ‘खेलो इंडिया’ अभियान से प्रेरित वाराणसी नगर निगम ने 72वीं सीनियर नेशनल वॉलीबॉल चैंपियनशिप आयोजित कर एक नया इतिहास रच दिया है। 4 जनवरी को प्रधानमंत्री मोदी ने इसका वर्चुअली शुभारंभ किया था । वहीं, प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भौतिक रूप से स्टेडिएम में आकर खिलाड़ियों का मनोबल बढ़ाया था। आयोजन समिति के अध्यक्ष व महापौर अशोक कुमार तिवारी ने बताया कि उत्तर प्रदेश को 42 साल के लंबे इंतजार के बाद इस राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता की मेजबानी का अवसर मिला है। ​इससे पहले साल 1984 में कानपुर ने सीनियर नेशनल वॉलीबॉल चैंपियनशिप की सफल मेजबानी की थी।

नियमित पढ़ने वाला अधिवक्ता ही पीड़ित को न्याय दिला सकता है :दीपक गुप्ता

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मुरादाबाद, 11 जनवरी (हि.स.)। पीड़ितों को न्याय दिलाने के लिए जरूरी है कि अधिवक्ता नियमित रूप से पढें और कानूनी मुद्दों पर गहन विचार विमर्श करें।

यह बातें आज दीपक गुप्ता ने स्व-अध्याय मंडल के मुख्य विषय आयकर अधिनियम, 2025 पर न्याय परामर्श केंद्र बुद्धि विहार में टैक्स इकाई द्वारा आयोजित गोष्ठी में मुख्य वक्ता के रूप में व्यक्त की। दीपक गुप्ता ने आयकर अधिनियम 2025 के महत्वपूर्ण प्रावधानों, नए संशोधनों, व्यवहारिक प्रभावों तथा करदाताओं एवं अधिवक्ताओं के समक्ष आने वाली चुनौतियों पर सरल, स्पष्ट एवं व्यावहारिक रूप से प्रकाश डाला। वरिष्ठ अधिवक्ता शेर सिंह बौद्ध ने बताया कि इस स्व-अध्याय मंडल का मुख्य उद्देश्य अधिवक्ताओं के बीच नवीन कर कानूनों पर गहन अध्ययन , शुचितापूर्ण अधिवक्ताओं का निर्माण एवं आपसी विचार-विमर्श को बढ़ावा देकर अंतिम पक्ति में खड़े व्यक्ति को न्याय प्रदान करना है। गाेष्ठी में अधिवक्ता परिषद ब्रज के प्रांतीय मंत्री विचित्र शर्मा ने बताया कि श्री स्वामी विवेकानंद जी की जयंती जिला सभागार में 12 जनवरी को मनाई जायेगी। अंत में टैक्स इकाई के अध्यक्ष राजीव विश्नोई ने राष्ट्र गान कराकर सभी का धन्यवाद व्यक्त किया। इस मौके पर अधिवक्ता संजीव बिहारी भटनागर, महासचिव कपिल गुप्ता, शेर सिंह बौद्ध, अनुराग सिंह, सुरेंद्र पाल सिंह, शिशिर गुप्ता, एडीजीसी मुनीश भटनागर, एडीजीसी नरेंद्र कुमार सिंह , राजदीप गोयल, अतुल माथुर, रवि प्रकाश रॉय समेत बड़ी संख्या में अधिवक्ता उपस्थित रहे।

सर्राफा बाजार में चमका सोना, चांदी की भी बढ़ी चमक

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-एक सप्ताह में 4,640 रुपये तक महंगा हुआ सोना

नई दिल्ली, 11 जनवरी (हि.स.)। घरेलू सर्राफा बाजार में आज तेजी का रुख नजर आ रहा है। सोना आज 1,040 रुपये प्रति 10 ग्राम से लेकर 1,140 रुपये प्रति 10 ग्राम तक महंगा हो गया। इसी तरह चांदी आज दिल्ली में 11,000 रुपये प्रति किलोग्राम से भी अधिक महंगी हो गई।

सोने के भाव में आज आई तेजी के कारण देश के ज्यादातर सर्राफा बाजार में 24 कैरेट सोना 1,40,460 रुपये से लेकर 1,40,610 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर कारोबार कर रहा है। इसी तरह 22 कैरेट सोना आज 1,28,750 रुपये से लेकर 1,28,900 रुपये प्रति 10 ग्राम के बीच बिक रहा है। सोना की तरह चांदी की कीमत में भी उछाल आने के कारण दिल्ली सर्राफा बाजार में आज ये चमकीली धातु 2,60,000 रुपये प्रति किलोग्राम के स्तर बिक रही है।

साप्ताहिक आधार पर देखें तो पिछले सप्ताह के कारोबार में 24 कैरेट सोने की कीमत में 4,640 रुपये प्रति 10 ग्राम तक की तेजी आई है। इसी तरह 22 कैरेट सोना साप्ताहिक आधार पर 4,250 रुपये प्रति 10 ग्राम तक महंगा हो गया है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना 4,479.38 डॉलर प्रति औंस के स्तर पर पहुंचा हुआ है। चांदी के भाव में भी पिछले सप्ताह की कारोबार में 19 हजार रुपये प्रति किलोग्राम की तेजी आई है। लंदन सिल्वर मार्केट में चांदी का हाजिर भाव 76.92 डॉलर प्रति औंस के स्तर तक पहुंच गया है।

दिल्ली में आज 24 कैरेट सोना 1,40,610 प्रति 10 ग्राम के स्तर पर कारोबार कर रहा है, जबकि 22 कैरेट सोने की कीमत 1,28,900 रुपये प्रति 10 ग्राम दर्ज की गई है। वहीं, देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में 24 कैरेट सोना 1,40,460 रुपये प्रति 10 ग्राम और 22 कैरेट सोना 1,28,750 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर बिक रहा है। इसी तरह अहमदाबाद में 24 कैरेट सोने की रिटेल कीमत 1,40,510 रुपये प्रति 10 ग्राम और 22 कैरेट सोने की कीमत 1,28,800 रुपये प्रति 10 ग्राम दर्ज की गई है।

इन प्रमुख शहरों के अलावा चेन्नई में 24 कैरेट सोना आज 1,40,460 रुपये प्रति 10 ग्राम की कीमत पर और 22 कैरेट सोना 1,28,750 रुपये प्रति 10 ग्राम की कीमत पर बिक रहा है। इसी तरह कोलकाता में 24 कैरेट सोना 1,40,460 रुपये प्रति 10 ग्राम और 22 कैरेट सोना 1,28,750 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर कारोबार कर रहा है। भोपाल में 24 कैरेट सोने की कीमत 1,40,510 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर है, जबकि 22 कैरेट सोना 1,28,800 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर बिक रहा है।

लखनऊ के सर्राफा बाजार में 24 कैरेट सोना आज 1,40,610 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर और 22 कैरेट सोना 1,28,900 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर बिक रहा है। पटना में 24 कैरेट सोने की कीमत 1,40,510 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर है, जबकि 22 कैरेट सोना 1,28,800 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर बिक रहा है। जयपुर में 24 कैरेट सोना 1,40,610 रुपये प्रति 10 ग्राम और 22 कैरेट सोना 1,28,900 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर बिक रहा है।

देश के अन्य राज्यों की तरह कर्नाटक, तेलंगाना और ओडिशा के सर्राफा बाजार में भी आज सोने के भाव में तेजी आई है। इन तीनों राज्यों की राजधानियों बेंगलुरु, हैदराबाद और भुवनेश्वर में 24 कैरेट सोना 1,40,460 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर कारोबार कर रहा है। इसी तरह इन तीनों शहरों के सर्राफा बाजारों में 22 कैरेट सोना 1,28,750 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर बिक रहा है।

22 साल बाद महासंयोग में मकर संक्रांति:एकादशी सहित मिलेगा दोगुना पुण्य

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जयपुर, 11 जनवरी (हि.स.)। इस वर्ष मकर संक्रांति का पर्व श्रद्धालुओं के लिए विशेष धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व लेकर आया है। करीब 22 वर्षों बाद मकर संक्रांति एकादशी तिथि के साथ पड़ रही है, जिससे यह पर्व महासंयोग बन गया है। ऐसा दुर्लभ संयोग वर्ष 2003 के बाद पहली बार बना है। शास्त्रों के अनुसार इस योग में किया गया दान-पुण्य, व्रत, जप-तप और पूजा-अर्चना कई गुना फलदायी मानी जाती है। खास बात यह है कि इस बार श्रद्धालुओं को दो दिन दान-पुण्य का अवसर मिलेगा, हालांकि दान की वस्तुएं तिथि के अनुसार अलग-अलग होंगी।

ज्योतिषाचार्य बनवारी लाल शर्मा ने बताया कि 14 जनवरी को मकर संक्रांति के साथ एकादशी का पर्व भी रहेगा। इस दिन सूर्य दोपहर 3 बजकर 22 मिनट पर धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश करेंगे, जिसे संक्रांति काल माना जाएगा। एकादशी तिथि होने के कारण इस दिन चावल या खिचड़ी का दान वर्जित माना गया है। ऐसे में शास्त्र सम्मत रूप से तिल, गुड़, तिल का तेल, जौ तथा ऊनी वस्त्र का दान विशेष पुण्यदायी रहेगा। उन्होंने बताया कि इस दिन सर्वार्थ सिद्धि योग और अमृत सिद्धि योग भी बन रहे हैं, जिससे दान-पुण्य और जप-तप का महत्व और अधिक बढ़ जाएगा। तिल-गुड़ का दान करने से शनि दोष का शमन, स्वास्थ्य लाभ और आर्थिक सुख की प्राप्ति मानी जाती है।

ज्योतिषाचार्य शर्मा ने बताया कि 15 जनवरी को उदया तिथि मानी जाएगी। सूर्योदय के साथ संक्रांति पर्व का विधिवत पालन किया जा सकेगा। इस दिन श्रद्धालु चावल और खिचड़ी का दान कर सकते हैं। 15 जनवरी को दान-पुण्य का पुण्य काल दोपहर 1 बजकर 32 मिनट तक रहेगा। जो श्रद्धालु एकादशी के कारण 14 जनवरी को चावल दान को लेकर संशय में रहते हैं, उनके लिए 15 जनवरी सर्वोत्तम दिन है। इस प्रकार इस वर्ष मकर संक्रांति पर तिल-गुड़ और चावल—दोनों प्रकार के दान का पुण्य अलग-अलग तिथियों में प्राप्त होगा। शर्मा के अनुसार मकर संक्रांति सूर्य के उत्तरायण होने का पर्व है। सूर्य के उत्तरायण होते ही दिन बड़े होने लगते हैं और प्रकृति में सकारात्मक परिवर्तन दिखाई देता है। उत्तरायण का समय जीवन में ऊर्जा, सक्रियता और शुभता का प्रतीक माना गया है, जिसका प्रभाव मानव जीवन के साथ-साथ पशु-पक्षियों और प्रकृति पर भी पड़ता है।

ज्योतिषाचार्यों के अनुसार सूर्य की गति में प्रतिवर्ष लगभग चार मिनट का अंतर आता है। इसी खगोलीय परिवर्तन के कारण लगभग 72 वर्षों में एक दिन का अंतर बन जाता है। इसी वजह से भविष्य में मकर संक्रांति स्थायी रूप से 15 जनवरी को मनाई जाएगी। मकर संक्रांति के साथ ही खरमास का समापन हो जाता है और विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन, कुआं पूजन जैसे मांगलिक कार्यों की शुरुआत मानी जाती है। सर्दी के मौसम में खिचड़ी का सेवन स्वास्थ्य की दृष्टि से भी अत्यंत लाभकारी बताया गया है।

शास्त्रों में उल्लेख है कि मकर संक्रांति के दिन गंगा, यमुना, सरस्वती या किसी भी पवित्र जल में स्नान करने से समस्त पापों का नाश होता है। मंदिर, तालाब, कुआं या बावड़ी में स्नान कर ब्राह्मणों, साधुओं, दीन-दुखियों को दान करना सूर्य कृपा प्राप्त करने का श्रेष्ठ माध्यम माना गया है। पौराणिक मान्यता के अनुसार इसी दिन सूर्य देव अपने पुत्र शनि देव की राशि मकर में प्रवेश करते हैं, जो पिता-पुत्र के संबंधों में मधुरता का प्रतीक है। महाभारत काल में भीष्म पितामह ने भी इसी दिन देह त्याग कर मोक्ष प्राप्त किया था। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मकर संक्रांति पर नमक और लोहे का दान वर्जित माना गया है,जबकि तिल,गुड़,अन्न,वस्त्र और गौदान शुभ फलदायी होते हैं। मकर संक्रांति पर दिया गया दान निष्फल नहीं जाता और अक्षय पुण्य प्रदान करता है। मकर संक्रांति को लेकर शहर और ग्रामीण क्षेत्रों में विशेष उत्साह देखा जा रहा है।

सोमनाथ स्वाभिमान पर्व विध्वंस नहीं 1000 साल की यात्रा का पर्वः मोदी

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सोमनाथ, 11 जनवरी (हि.स.)। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने रविवार को कहा कि सोमनाथ पर आक्रमण आर्थिक लूट के लिए नहीं बल्कि तुष्टिकरण के लिए किया गया। दुर्भाग्य से आज भी हमारे देश में वे ताकतें मौजूद हैं, जिन्होंने सोमनाथ के पुनर्निर्माण का विरोध किया था।

सोमनाथ स्वाभिमान पर्व के अवसर पर रविवार को सद्भावना ग्राउंड में रैली को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि `यह पर्व विध्वंस नहीं बल्कि 1000 साल की यात्रा का पर्व है। सोमनाथ को नष्ट करने के अनेकों प्रयास हुए। उसी तरह विदेश आक्रांताओं द्वारा कई सदियों तक भारत को खत्म करने की कोशिशें होती रहीं लेकिन न तो सोमनाथ नष्ट हुआ और न ही भारत नष्ट हुआ। क्योंकि भारत और भारत की आस्था के केंद्र एक-दूसरे में समाए हुए हैं।’

प्रधानमंत्री ने कहा कि `आज तलवारों के जगह दूसरे तरीकों से भारत के खिलाफ षड्यंत्र हो रहे हैं इसलिए हमें ज्यादा सावधान रहना है। हमें खुद को शक्तिशाली बनाना है। ऐसी हर ताकत को हराना है जो हमें बांटने की साजिश रच रही हो। जब हम अपनी विरासत और आस्था से जुड़े रहते हैं तो हमारी सभ्यता की जड़ें मजबूत होती है। मैंने भारत के लिए एक हजार साल का विजन रखा था। आज देश की संस्कृति का पुनर्जागरण करोड़ों देशवासियों के मन में विश्वास भर रहा है। विकसित भारत के लिए लोगों को भी भरोसा है। भारत अपने गौरव को नई बुलंदी देगा। हम विकास की नई ऊंचाई को छुएंगे। देश अब तैयार हो चुका है। सोमनाथ मंदिर की ऊर्जा हमारे संकल्पों को आशीर्वाद दे रही है। विरासत की प्रेरणा दे रही है।’

उन्होंने कहा कि `जब महमूद गजनी से लेकर औरंगजेब हमले कर रहे थे तब वे भूल गए थे कि सोमनाथ के नाम में सोम यानी अमृत है। ऐसे में जब-जब इसे नष्ट करने की कोशिश हुई, सोमनाथ मंदिर उठ खड़ हुआ। मजहबी कट्टरपंथी इतिहास के पन्नों में सिमट गए तो वहीं सोमनाथ मंदिर आज भी स्वाभिमान से खड़ा है।’ प्रधानमंत्री ने कहा कि `गजनी को लगा था कि उसने सोमनाथ मंदिर के वजूद को मिटा दिया लेकिन 12 शाताब्दी में पुनर्निर्माण हुआ। फिर अलाउद्दीन खिलजी ने आक्रमण किया। 14वीं शब्तादी में जूनागढ़ के राजा ने पुनर्निर्माण किया। 14वीं शताब्दी में आक्रामण किया। फिर सुल्तान अहमद शाह ने दुस्साहस किया। फिर सुल्तान महमूद वेगड़ा ने मंदिर को मस्जिद बनाने की कोशिश की। 17वीं और 18वीं शताब्दी में औरंगजेब का दौर आया। उसने मंदिर को अपवित्र करने की कोशिश तो अहित्याबाई होलकर ने मंदिर बनवा दिया। सोमनाथ का इतिहास, विजय और पुनर्निर्माण का है।’

उन्होंने कहा कि दुर्भाग्य से आज़ादी के बाद गुलामी की मानसिकता वाले लोगों ने इनसे पल्ला झाड़ने का कोशिश की। उस इतिहास को भुलाने के कुत्सित प्रयास किए गए।जब भारत गुलामी की बेड़ियों से मुक्त हुआ, जब सरदार वल्लभभाई पटेल ने सोमनाथ के पुनर्निर्माण की शपथ ली तो उन्हें भी रोकने की कोशिश की गई। साल 1951 में भारत के तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. राजेन्द्र प्रसाद के यहाँ आने पर भी आपत्ति जताई गई।

इससे पहले उन्होंने अपने संबोधन की शुरूआत करते हुए कहा कि `पवित्र श्री सोमनाथ मंदिर में इस महापर्व का सहभागी बनना मेरे जीवन का अविस्मरणीय और अमूल्य क्षण है। आज सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण के 75 साल पूरे हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि एक हजार साल पहले, इसी जगह पर क्या माहौल रहा होगा। आप जो यहां उपस्थित हैं, उनके पुरखों ने, हमारे पुरखों ने जान की बाज़ी लगा दी थी। अपनी आस्था के लिए, अपने विश्वास के लिए, अपने महादेव के लिए उन्होंने अपना सबकुछ न्योछावर कर दिया। हजार साल पहले वे आक्रमणकारी सोच रहे थे कि उन्होंने हमें जीत लिया लेकिन आज एक हजार साल बाद भी सोमनाथ महादेव के मंदिर पर फहरा रही ध्वजा पूरी सृष्टि का आह्वान कर रही है कि हिंदुस्तान की शक्ति क्या है, उसका सामर्थ्य क्या है। सोमनाथ स्वाभिमान पर्व करोड़ों-करोड़ भारतीयों की शाश्वत आस्था, साधना और अटूट संकल्प का जीवंत प्रतिबिंब है।’

उन्होंने कहा कि `भारत ने दुनिया को ये नहीं सिखाया कि कैसे दूसरों को हरा कर जीता जाए। बल्कि ये सिखाया कि कैसे दिलों को जीता जाए। ये विचार दुनिया की जरूरत है।’ उन्होंने आह्वान किया कि 1000 साल की यात्रा के साथ मंदिर के 75 साल पूरे होने की गौरवशाली यात्रा पर मनाए जा रहे सोमनाथ स्वाभिमान पर्व को 2027 मई तक मानते रहना है।

इससे पहले प्रधानमंत्री मोदी ने सोमनाथ मंदिर में करीब 40 मिनट तक पूजा-अर्चना की। शिवलिंग पर जल चढ़ाया, फिर फूल अर्पित किए और पंचामृत से अभिषेक किया। मंदिर से बाहर आकर प्रधानमंत्री ने पुजारियों और स्थानीय कलाकारों से मुलाकात की। मोदी ने ढोल (चेंदा वाद्ययंत्र) बजाया और शोभायात्रा में भी शामिल हुए। उल्लेखनीय है कि सोमनाथ मंदिर पर साल 1026 में हुए पहले आक्रमण के हजार साल पूरे होने पर ‘सोमनाथ स्वाभिमान पर्व’ मनाया जा रहा है।

फिल्म अभिनेता आशीष विद्यार्थी ने किए भगवान महाकालेश्वर के दर्शन

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फिल्म अभिनेत्री शिल्पा शेट्टी एवं शमिता शेट्टी ने भी किए भगवान महाकालेश्वर के दर्शन

उज्जैन, 11 जनवरी (हि.स.)। प्रसिद्ध फिल्म अभिनेता आशीष विद्यार्थी ने रविवार को मध्यप्रदेश के उज्जैन स्थित ज्योतिर्लिंग भगवान महाकालेश्वर के दर्शन कर पुण्य लाभ प्राप्त किया। प्रसिद्ध फिल्म अभिनेत्री शिल्पा शेट्टी एवं शमिता शेट्टी ने मध्यप्रदेश के उज्जैन स्थित भगवान महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग के दर्शन किए और शयन आरती में शामिल हुई।

महाकालेश्वर मंदिर समिति की ओर से जनसंपर्क शाखा प्रभारी नवीन शर्मा ने आशीष विद्यार्थी का स्वागत किया। आशीष विद्यार्थी ने श्री कोटि तीर्थ कुंड पर स्थित प्राचीन श्री कोटेश्वर महादेव का विधिवत अभिषेक एवं पूजन भी किया।

फिल्म अभिनेत्री शिल्पा शेट्टी एवं शमिता शेट्टी ने किए महाकालेश्वर के दर्शन

उज्जैन , 11 जनवरी (हि.स.)। प्रसिद्ध फिल्म अभिनेत्री शिल्पा शेट्टी एवं शमिता शेट्टी ने मध्यप्रदेश के उज्जैन स्थित भगवान महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग के दर्शन किए और शयन आरती में शामिल हुई।

मंदिर पहुंचने पर शिल्पा और शमिता का श्री महाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति की ओर से सहायक प्रशासक हिमांशु कारपेंटर ने स्वागत सत्कार किया। दोनों अभिनेत्रियों ने नंदी हॉल में बैठकर बाबा के दर्शन किये और महाकाल की आरती में शामिल हुईं। दोनों ने हाथ जोड़कर ओम नमः शिवाय और जय श्री महाकाल का उद्घोष भी किया।

साप्ताहिक समीक्षा : वैश्विक दबाव से घरेलू शेयर बाजार में आई गिरावट

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नई दिल्ली, 11 जनवरी (हि.स.)। सोमवार से शुक्रवार तक हुए कारोबार के बाद घरेलू शेयर बाजार साप्ताहिक आधार पर बड़ी गिरावट के साथ बंद हुआ। बीएसई के सेंसेक्स और एनएसई के निफ्टी दोनों सूचकांक सप्ताह के पांचो कारोबारी दिन गिरावट के साथ बंद हुए। पूरे सप्ताह गिरावट का शिकार होने की वजह से सेंसेक्स साप्ताहिक आधार पर 2,185.77 अंक टूट कर 83,576.24 अंक के स्तर पर बंद हुआ। इसी तरह निफ्टी ने साप्ताहिक आधार पर 645.25 अंक लुढ़क कर 25,683.30 अंक के स्तर पर पिछले सत्र के कारोबार का अंत किया।

पिछले सप्ताह के कारोबार में बीएसई का लार्जकैप इंडेक्स 2.50% की कमजोरी का शिकार हो गया। इस इंडेक्स में शामिल आईडीबीआई बैंक, स्विगी, ट्रेंट लिमिटेड, अदानी एनर्जी सॉल्यूशंस और वारी एनर्जिज के शेयर टॉप लूजर्स की सूची में शामिल हुए। दूसरी ओर, टाइटन कंपनी, यूनियन बैंक ऑफ इंडिया, भारत इलेक्ट्रॉनिक्स, आईसीआईसीआई बैंक, डिवीज लेबोरेट्रीज, सोलर इंडस्ट्रीज इंडिया और ल्यूपिन के शेयर टॉप गेनर्स की सूची में शामिल हुए।

लार्जकैप की तरह ही बीएसई का मिडकैप इंडेक्स भी सोमवार से शुक्रवार तक के कारोबार के बाद साप्ताहिक आधार पर 2.60% की कमजोरी का शिकार होकर बंद हुआ। इस इंडेक्स में शामिल प्रीमियर एनर्जीज, महिंद्रा एंड महिंद्रा फाइनेंशियल सर्विसेज, सुजलॉन एनर्जी, जिंदल स्टेनलेस, हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉरपोरेशन और रेल विकास निगम के शेयर टॉप लूजर्स की सूची में शामिल हुए। दूसरी ओर, एमक्योर फार्मास्यूटिकल्स, नेशनल अल्युमिनियम कंपनी, आईपीसीए लेबोरेट्रीज और टाटा एलेक्सी के शेयर टॉप गेनर्स की सूची में शामिल हुए।

पिछले सप्ताह के कारोबार में सबसे बड़ी गिरावट स्मॉलकैप इंडेक्स में दर्ज की गई। ये इंडेक्स साप्ताहिक आधार पर 4% की गिरावट का शिकार हो गया। इस इंडेक्स में शामिल ज्यादातर कंपनियां के शेयरों में बिकवाली का दबाव बना रहा। इनमें सिस्टमैटिक्स कॉरपोरेट सर्विसेज, वर्थ इन्वेस्टमेंट एंड ट्रेडिंग, बालू फोर्ज इंडस्ट्रीज, स्टैलियन इंडिया फ्लोरोकेमिकल्स, संदूर मैंगनीज एंड आयरन ओर्स, वीटीएम, किरी इंडस्ट्रीज, इंडियन मेटल एंड फेरो एलॉयज, साई सिल्क्स कलामंदिर, वार्ड विजार्ड इन्नोवेशंस एंड मोबिलिटी, ट्रांसफॉर्मर्स एंड रेक्टिफायर्स इंडिया, बाजार स्टाइल रिटेल, कीटेक्स गारमेंट्स, इलेकॉन इंजीनियरिंग कंपनी और फेस 3 के शेयर साप्ताहिक आधार पर 15 से 23% तक की गिरावट का शिकार हो गए।

सेक्टोलर फ्रंट पर देखें, तो निफ्टी के ऑयल एंड गैस, एनर्जी और इंफ्रास्ट्रक्चर इंडेक्स चार प्रतिशत से अधिक की साप्ताहिक गिरावट का शिकार हुए। इसी तरह निफ्टी के रियल्टी, मेटल, मीडिया और ऑटोमोबाइल इंडेक्स में भी दो प्रतिशत से अधिक की गिरावट दर्ज की गई। इसके अलावा निफ्टी का डिफेंस इंडेक्स 1.3 प्रतिशत की साप्ताहिक कमजोरी का शिकार हुआ, जबकि निफ्टी का कंज्यूमर ड्यूरेबल इंडेक्स पूरे सप्ताह के कारोबार के बाद एक प्रतिशत की कमजोरी के साथ बंद हुआ।

मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की 500 प्रतिशत तक टैरिफ बढ़ाने की धमकी, कमजोर ग्लोबल संकेत और कच्चे तेल की की कीमत में आई तेजी ने बाजार को गिराने में मुख्य भूमिका अदा की। धामी सिक्योरिटीज के वाइस प्रेसिडेंट प्रशांत धामी का कहना है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बाइपार्टिजन सैंक्शन बिल को आगे बढ़ाने की मंजूरी देकर रूस के सहयोगी देशों के खिलाफ कड़े कदम उठाने का प्रत्यक्ष संकेत दे दिया है। इस विधेयक में रूस के साथ कारोबार जारी रखने वाले देशों के खिलाफ 500 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने का प्रस्ताव है। अगर ये विधेयक मंजूर हो जाता है, तो इससे भारत और चीन जैसे देश सबसे अधिक प्रभावित हो सकते हैं।

इसी वजह से एक्सपोर्ट पर फोकस करने वाली ज्यादातर कंपनियों के शेयर में पिछले सप्ताह के दौरान जमकर बिकवाली होती रही। पिछले सप्ताह के कारोबार में एक बार फिर विदेशी निवेशक बिकवाल (सेलर) की भूमिका में बने रहे। दूसरी ओर, घरेलू संस्थागत निवेशक (डीआईआई) विदेशी निवेशकों की बिकवाली का जवाब देने के लिए लगातार खरीदारी करते रहे। सोमवार से शुक्रवार तक के कारोबार के दौरान विदेशी संस्थागत निवेशकों ने कुल 9,209.90 करोड़ रुपये के शेयर की बिक्री की। इसके जवाब में घरेलू संस्थागत निवेशकों ने पूरे सप्ताह के कारोबार के दौरान 17,594.58 करोड़ रुपये की इक्विटी खरीद कर शेयर बाजार को काफी हद तक सपोर्ट दिया।

ईरान पर संभावित हमले में अमेरिका का साथ देने को इजराइल ने शुरू की तैयारी

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– इस्लामिक गणराज्य ने भी अमेरिका और इजराइल को माकूल जवाब देने का किया ऐलान

वाशिंगटन/तेहरान, 11 जनवरी (हि.स.)। इस्लामिक गणराज्य ईरान में अली खामेनेई शासन के खिलाफ शुरू देशव्यापी प्रदर्शन के बीच अमेरिका के सैन्य हमले के संकेत देते ही इजराइल ने भी आक्रमण की तैयारी शुरू कर दी है। इस हलचल के बीच इस्लामिक गणराज्य संसद के अध्यक्ष ने कहा कि अगर उनके देश पर हमला होता है, तो ईरान पीछे नहीं हटेगा। वह अमेरिका और इजराइल को माकूल जवाब देगा।

ईरान इंटरनेशनल ने एक दूसरे संचार सूचना माध्यम के हवाले से प्रसारित अपनी रिपोर्ट में कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के यह कहने के बाद इजराइल हाई अलर्ट पर है कि अमेरिका ईरान के प्रदर्शनकारियों की मदद के लिए तैयार है। अमेरिकी राष्ट्रपति ने हाल के दिनों में प्रदर्शनकारियों पर बल प्रयोग के खिलाफ बार-बार चेतावनी दी है और शनिवार को कहा कि अमेरिका प्रदर्शनकारियों की मदद के लिए हर तरह से तैयार है। ट्रंप ने कथित रूप से सैन्य अधिकारियों से आक्रमण के विकल्पों पर चर्चा करनी शुरू कर दी है।

इस बीच इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और अमेरिकी विदेशमंत्री मार्को रुबियो ने शनिवार को फोन बातचीत में ईरान में अमेरिकी दखल की संभावना पर चर्चा की। साथ ही दोनों ने ईरान के अलावा गाजा और सीरिया में विरोध प्रदर्शनों पर चर्चा की। वहीं, ईरान के हालत से दुखी हैरी पॉटर की लेखिका जेके रोलिंग ने रविवार को एक्स पर एक पोस्ट में ईरान में प्रदर्शनकारियों के लिए समर्थन जताया। रोलिंग ने कहा कि यह अपनी आजादी के लिए लड़ रहे ईरानियों के साथ एकजुटता दिखाने का है।

दूसरी ओर इस्लामिक गणराज्य ईरान की संसद के स्पीक मोहम्मद बाघर गालिबफ ने चेतावनी दी है कि अगर अमेरिका सैन्य हमला करता है तो इजराइल और अमेरिका की सैन्य और शिपिंग सुविधाएं निशाने पर होंगी। यह चेतावनी अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप की तेहरान को प्रदर्शनकारियों पर कार्रवाई को लेकर दी गई चेतावनियों के बाद आई है।

गालिबफ ने कहा, ” ईरान आत्मरक्षा के दायरे में हर तरह के कदम उठाएगा। इससे अमेरिका का दंभ चूर-चूर हो जाएगा। ट्रंप ईरान की क्षमता को कमतर आंक रहे हैं। उनका वह भ्रम भी दूर हो जाएगा।”

केरल में यौन उत्पीड़न के आरोपी कांग्रेस से निष्कासित विधायक राहुल ममकूटथिल को पुलिस ने हिरासत में लिया

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तिरुवनंतपुरम (केरल), 11 जनवरी (हि.स.)। कांग्रेस (भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस) से निष्कासित विधायक राहुल ममकूटथिल को शनिवार देररात केरल पुलिस ने हिरासत में लिया है। पुलिस ने यह कार्रवाई उनके खिलाफ दर्ज यौन उत्पीड़न के एक मामले में की। ममकूटथिल पलक्कड़ से विधायक हैं। पिछले साल चार दिसंबर को केरल कांग्रेस ने राहुल ममकूटथिल को पार्टी से बाहर दिया था।

पुलिस ने आज सुबह बताया कि राहुल ममकूटथिल को शनिवार आधीरात पलक्कड़ से एक यौन उत्पीड़न मामले में हिरासत में लिया गया है। पुलिस के अनुसार, पथानामथिट्टा जिले के एक व्यक्ति की शिकायत के बाद पलक्कड़ विधायक के खिलाफ हाल ही में तीसरा यौन उत्पीड़न मामला दर्ज किया गया था। विशेष जांच दल उनके खिलाफ इसी तरह के दो अन्य मामलों की जांच कर रही है। विशेष जांच दल को नए मामले की जांच भी सौंपी गई है। ममकूटथिल पलक्कड़ में एक होटल में ठहरे हुए थे। उनको आधीरात होटल से हिरासत में लेकर पथानामथिट्टा लाया गया।

पुलिस ने बताया कि उनकी औपचारिक गिरफ्तारी बाद में दर्ज की जाएगी। उल्लेखनीय है कि केरल उच्च न्यायालय ने पहले मामले में ममकूटथिल को गिरफ्तारी से अंतरिम सुरक्षा प्रदान की थी। यह मामला दुष्कर्म और एक महिला को गर्भपात कराने के लिए मजबूर करने के आरोपों से संबंधित है। दूसरे मामले में तिरुवनंतपुरम की एक सत्र अदालत ने उन्हें अग्रिम जमानत दी थी। इन्हीं आरोपों के बाद केरल प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने ममकूटथिल को पार्टी से निष्कासित कर दिया था।

सोमनाथ: भारत के अमिट स्वाभिमान का गौरवशाली प्रतीक

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-विनय राठौर हिन्दुस्तानी

“सौराष्ट्रदेशे विशदेऽतिरम्ये ज्योतिर्मयं चन्द्रकलावतंसम्।

भक्तिप्रदानाय कृपावतीर्णं तं सोमनाथं शरणं प्रपद्ये।।”

(अर्थः जो भगवान शंकर अपनी भक्ति प्रदान करने के लिए परम रमणीय व स्वच्छ सौराष्ट्र प्रदेश

गुजरात में कृपा करके अवतीर्ण हुए हैं, मैं उन्हीं ज्योतिर्मयलिंगस्वरूप, चन्द्रकला को आभूषण

बनाये हुए भगवान् श्री सोमनाथ की शरण में जाता हूं।)

सोमनाथ, यह केवल एक तीर्थस्थल नहीं है, यह भारत की गौरवशाली धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत का अद्वितीय प्रतीक है। यह वह भूमि है, जहां भारत का स्वाभिमान मंदिर के शिखर पर लहराती पताका में प्रतिबिंबित होता है। यह वह स्थान है, जहां कण-कण में भारतीयों की आस्था और जीवटता की महक महसूस होती है। यह वह देवालय है, जो विध्वंस और पुनर्निर्माण की शृंखलाबद्ध घटनाओं की गवाही देता है। यह वह शहर है, जो बताता है कि कैसे शांत, अहिंसक और धर्मानुरागी जनता की समृद्धि और वैभव मतांध लुटेरों की बर्बर मानसिकता का शिकार बनीं। साथ ही, सोमनाथ यह भी बताता है कि सृजन और निर्माण की प्रकृति के आगे विध्वंस सचमुच बहुत बौना है

सोमनाथ के गौरव को पुनर्प्रतिष्ठित करने के लिए देश के प्रथम उप प्रधानमंत्री सरदार पटेल और स्वतंत्रता सेनानी एवं प्रसिद्ध साहित्यकार कन्हैयालाल मुंशी ने उल्लेखनीय योगदान दिया। सरदार पटेल ने गुलामी से मुक्ति के बाद स्वतंत्र भारत के स्वाभिमान और जन आस्था को मजबूत करने के लिए सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण का भगीरथ कार्य किया। बाद में, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने ‘विकास भी, विरासत भी’ मंत्र के साथ सोमनाथ तीर्थस्थल को पूरी भव्यता के साथ विकसित करने का बीड़ा उठाया।

भारत के पश्चिमी छोर पर स्थित गुजरात के तटीय शहर सोमनाथ का वैभवशाली अतीत इतिहास में सुनहरे अक्षरों में अंकित है।

सनातन धर्म में वर्णित 12 ज्योतिर्लिंगों में से प्रथम ज्योतिर्लिंग के रूप में सोमनाथ दुनिया भर में फैले करोड़ों हिन्दुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार स्वयं चंद्रदेव ने सोमनाथ मंदिर की स्थापना की थी। सोमनाथ ज्योतिर्लिंग की महिमा ऋग्वेद, महाभारत, श्रीमद्भावत और स्कन्द पुराण में भी वर्णित है।

वह साल था 1026, जब एक विदेशी आक्रांता महमूद गजनवी ने पहली बार सोमनाथ मंदिर पर आक्रमण किया। आज साल 2026 में उस घटना को एक हजार वर्ष पूरे होने जा रहे हैं। सोमनाथ मंदिर का हजार वर्षों का इतिहास विध्वंस, लूट और रक्तपात की अनेक घटनाओं के साथ-साथ स्वाभिमान और गौरव से भरे सृजन और पुनर्निर्माण की गौरवशाली गाथा कहता है।

यह समझना जरूरी है कि सोमनाथ मंदिर पर महमूद गजनवी के आक्रमण का मकसद केवल बेशुमार धन-दौलत को लूटना नहीं था। गजनवी का उद्देश्य भारत के एक महान धार्मिक और सभ्यागत प्रतीक को नष्ट करना था। यही वजह है कि उसने मंदिर को ध्वस्त करने और पवित्र ज्योतिर्लिंग को खंडित करने के साथ-साथ पूरे नगर को तबाह कर दिया था। यह प्रयास था लोगों को भयभीत करने का, यह इरादा था लोगों की आस्था को डांवाडोल करने का, यह कट्टरता से भरा ऐसा कृत्य था, जो दूसरों की आस्था को नीचा दिखाकर स्वयं के श्रेष्ठ होने का दंभ भरता था। मंदिर को लूटना तो बस बहाना भर था, असल मकसद था काफिरों (हिन्दुओं) और उनके प्रतीकों को नष्ट करना। काफिरों की हत्या करने और सोमनाथ मंदिर एवं मूर्तियों को ध्वस्त करने के लिए गजनवी को ‘गाजी’ और ‘मूर्तिभंजक’ जैसी उपाधियां दी गईं।

लेकिन, गजनवी शायद भारत को जानता ही नहीं था। वह भारतीयों की आस्था, स्वाभिमान, जीवटता, मिजाज और गर्वित प्रकृति से अनजान था। उसने मंदिर को तोड़ कर सनातन को अपमानित करने की कोशिश की, तो हम भारतीयों ने उसी स्थान पर फिर से नया मंदिर खड़ा कर दिया। यह हमें जीवन का एक मूल्यवान सबक सिखाता है कि कैसे गिरकर दोबारा खड़ा हुआ जाए, कैसे सबकुछ गंवाने के बाद बजाय हिम्मत हारने के फिर से सृजन किया जाए।

यह सिलसिला केवल गजनवी तक ही सीमित नहीं रहा। उसके बाद और भी कई आक्रांता आए। उन सभी ने सोमनाथ तीर्थ का विध्वंस कर भारतीयता को चोट पहुंचाने की कोशिश की। भारत की आत्मा पर घाव देने का प्रयास किया। भारत के स्वाभिमान को ठेस पहुंचाने का अधम कृत्य किया। इन सभी के मंसूबे हमारे गौरवशाली प्रतीकों को नष्ट करना था, ताकि हम भारतीय स्वयं को लाचार और अपमानित महसूस कर सकें।

लेकिन, यह भारत भूमि है। यहां समय-समय पर ऐसी विभूतियों ने जन्म लिया है, जिन्होंने भारत माता के गौरव को शिखर पर प्रस्थापित करने का कार्य किया है।

गुजरात के लिए यह गर्व की बात है कि उसके दो-दो सपूतों ने मातृभूमि के गौरव और सनातन के पुनर्जागरण के भगीरथ कार्य में सर्वोच्च योगदान दिया है। लौह पुरुष सरदार पटेल ने जहां सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण का ऐतिहासिक कार्य कर अपने मजबूत मनोबल और दृढ़ संकल्प का परिचय दिया, तो प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने राम मंदिर के निर्माण और सोमनाथ के आधुनिक विकास का मार्ग प्रशस्त किया। भारत के आत्म गौरव और स्वाभिमान के प्रतीकों को नष्ट करने की कट्टवादी सोच के जवाब में सरदार पटेल ने सोमनाथ मंदिर का पुनर्निर्माण कराया। वहीं, प्रधानमंत्री मोदी ने इस मंदिर को और भी भव्यता प्रदान करने के साथ इसके दायरे को पूजा-अर्चना से बढ़ाकर सामाजिक दायित्व, रोजगार, पर्यावरण संरक्षण और टिकाऊ विकास से जोड़ दिया।

सोमनाथ का मंदिर हो या अयोध्या का श्री राम मंदिर, दोनों यह संदेश देते हैं कि सत्य को दबाया नहीं जा सकता, विश्वास का विध्वंस नहीं हो सकता, आस्था कभी मर नहीं सकती और सांस्कृतिक चेतना एवं राष्ट्रीय स्वाभिमान खंडित तो हो सकता है, लेकिन खत्म कभी नहीं हो सकता। यह भारत का अपना विचार है। यह हम भारतीयों की सोच है।

वास्तव में सोमनाथ जैसे प्रतीकों को केवल मंदिर कहना पर्याप्त नहीं होगा। ये भारत की आध्यात्मिक शक्ति के शक्तिशाली केंद्र हैं। ये हमारी आत्मा से जुड़े हुए वे प्रतीक हैं, जिनसे हमारी पहचान है। हम अपने जीवन को बेहतर बनाने, अपने ज्ञान को समृद्ध करने, जीवन की ऊर्जा प्राप्त करने, नैतिकता की शिक्षा ग्रहण करने, धन-धान्य से लेकर उत्तम मानव जीवन का आशीष पाने के लिए इन्हीं प्रतीकों की शरण में जाते हैं, और प्रार्थना करते हैं।

भारत के इसी सांस्कृतिक चेतना और राष्ट्रीय स्वाभिमान को पुनर्स्थापित करने के लिए सरदार पटेल ने सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण की पहल की।

सरदार पटेल के नेतृत्व में पुनर्निर्मित सोमनाथ मंदिर 1951 में अपनी पूरी भव्यता के साथ आम श्रद्धालुओं के लिए खोल दिया गया। आज यह मंदिर भारत के अडिग स्वाभिमान के साथ ही सरदार पटेल के दृढ़ संकल्प का प्रतीक बनकर करोड़ों लोगों को प्रेरणा दे रहा है। मंदिर के उद्घाटन समारोह में देश के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेन्द्र प्रसाद मौजूद रहे।

आज सोमनाथ मंदिर शानदार इंफ्रास्ट्रक्चर और बेहतरीन यात्री सुविधाओं के साथ अपनी अलौकिक छटा बिखेर रहा है। बीते वर्षों में हुए विकास कार्यों ने मंदिर परिसर का कायापलट कर दिया है। इस बदलाव का श्रेय जाता है प्रधानमंत्री मोदी को, जो श्री सोमनाथ ट्रस्ट के अध्यक्ष भी हैं। मोदी ने भारत के ‘अमृत काल’ के लिए जो पंच प्रण दिए, उनमें से एक अपनी ‘विरासत पर गर्व’ करना भी है। उन्होंने सोमनाथ तीर्थस्थल में श्रद्धालुओं के लिए सर्वोत्तम सुविधाएं और मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करने का विजन दिया। आज सोमनाथ भारत के सबसे बेहतरीन सुविधा वाले तीर्थ स्थलों में से एक के रूप में उभरा है। यह विकास और विरासत का अद्वितीय दृष्टांत बन गया है।

जब आस्था के साथ-साथ सुविधाएं और सहूलियतें भी जुड़ जाएं, तो यह भक्तों के लिए सबसे बड़ा उपहार बन जाता है। सोमनाथ के अलौकिक दर्शन और आधुनिक विकास का अनुभव करने के लिए साल 2020 में लगभग 98 लाख श्रद्धालु यहां पहुंचे, बाद में साल 2024 तक हर वर्ष यह संख्या 92 से 97 लाख तक बनी रही। परिवहन और कनेक्टिविटी को बेहतर बनाने के लिए 828 करोड़ रुपए की लागत से जेतपुर-सोमनाथ हाईवे बनाया गया। अहमदाबाद से सोमनाथ के लिए साबरमती-वेरावल वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेन शुरू की गई और पुराने केशोद एयरपोर्ट का नवीनीकरण उसे फिर से शुरू कर दिया गया है।

प्रधानमंत्री के ‘डिजिटल इंडिया’ अभियान से प्रेरणा लेकर ट्रस्ट ने ऑनलाइन बुकिंग और पोस्टल प्रसाद जैसी अभिनव पहल शुरू की हैं, जिससे श्रद्धालुओं को पूजा-अर्चना से लेकर सोमनाथ दादा के प्रसाद का लाभ घर बैठे मिल रहा है।

प्रधानमंत्री के ‘मिशन लाइफ’ के अंतर्गत पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखकर अब सोमनाथ मंदिर के फूलों को वर्मीकम्पोस्ट में बदल दिया जाता है, जो 1700 बिल्व पेड़ों के पालन-पोषण में योगदान देता है। प्लास्टिक कचरे का इस्तेमाल अब पेवर ब्लॉक बनाने में किया जा रहा है। यही नहीं, सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट के जरिए करोड़ों लीटर पानी का फिल्ट्रेशन, समुद्र तट पर मियावाकी जंगल का निर्माण और गिर-सोमनाथ जिले में 5 लाख से अधिक पौधरोपण भी ट्रस्ट की पर्यावरण-उन्मुख गतिविधियों को रेखांकित करता है।

सोमनाथ अब नेट जीरो मंदिर बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

सोमनाथ ट्रस्ट के चेयरमैन के रूप में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भक्ति की धारा में सामाजिक समरसता और विकास को जोड़कर सोमनाथ की त्रिवेणी को मूर्त स्वरूप दिया है। उन्होंने उत्तर और दक्षिण भारत के बीच पैदा की गई दिलों की दूरी को पाटने के लिए ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ पहल के अंतर्गत सोमनाथ में ‘सौराष्ट्र-तमिल संगमम’ कार्यक्रम के आयोजन का मार्गदर्शन दिया। इस कार्यक्रम में शामिल होने के लिए सात स्पेशल ट्रेनों में 2002 तमिल भक्त सोमनाथ के दरबार में पहुंचे।

इतना ही नहीं, ट्रस्ट की ओर से 62 लाख रुपए की लागत से छह वर्षा जल संचयन कुएं और एक जलाशय को बहाल किया है।

2019-20 में 160 लाख रुपए के निवेश के साथ, सोमनाथ के 8 सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट ने 20.53 करोड़ लीटर पानी को फिल्टर किया है। सोमनाथ में हरित और बेहतर पर्यावरण के लिए समुद्र तट पर 72,000 वर्ग फुट क्षेत्र में 7200 पेड़ों के साथ मियावाकी जंगल तैयार किया गया है। यह भक्ति और पर्यावरण विज्ञान का एक बेजोड़ मेल है। ट्रस्ट आपदा की स्थिति में पीड़ितों के साथ खड़े रहने और उनका दुःख बांटने का मानवीय कर्तव्य भी निभाता है। चक्रवात ‘तौकते’ के बाद ट्रस्ट ने किसानों को फलों के पेड़ बांटे। गिर सोमनाथ जिले की सभी तहसीलों में 5 करोड़ रुपए से अधिक के खर्च से 5 लाख से अधिक पौधे लगाए।

दरअसल, अब सोमनाथ केवल तीर्थयात्रियों के लिए सजाया-संवारा गया एक मंदिर ही नहीं है, बल्कि यह इस बात की प्रयोगशाला भी है कि अपनी विरासत को भविष्य के लिए कैसे सुरक्षित रखा जा सकता है, कैसे हमारे रीति-रिवाज रोजगार पैदा कर सकते हैं और कैसे पर्यावरण को धर्मशास्त्र में शामिल किया जा सकता है। अब सोमनाथ सोलर पैनल, संस्कृत सीखने के केंद्रों, तटीय ग्रीन बेल्ट और डिजिटल रसीदों के माध्यम से परंपरा और तकनीक के संमिश्रण की राह दिखा रहा है।

दूरदृष्टा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में सोमनाथ गत दो दशकों में, इस बात का शानदार उदाहरण बन गया है कि कैसे भक्ति और विकास एक ही मार्ग पर साथ-साथ चलते हैं। एक आदर्श तीर्थस्थल के रूप में आज सोमनाथ भारत ही नहीं दुनिया को दिशा दिखा रहा है। एक ऐसा तीर्थस्थल जहां पूजा-पाठ के साथ-साथ पर्यावरण और रोजगार की भी चिंता की जाती है, जहां विकास और विरासत दोनों का मिलन होता है।

(लेखक, स्वतंत्र टिप्पणीकार हैं।)