अमित शाह ने गुजरात के वाव-थराद जिले में बनास डेयरी द्वारा नवनिर्मित बायो सीएनजी और फर्टिलाइजर प्लांट का उद्घाटन एवं पावडर प्लांट का शिलान्यास किया

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केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने आज गुजरात के वाव-थराद जिले में बनास डेयरी द्वारा नवनिर्मित बायो सीएनजी और फर्टिलाइजर प्लांट का उद्घाटन एवं 150 टन के पावडर प्लांट का शिलान्यास किया। इस अवसर पर गुजरात के विधानसभा अध्यक्ष श्री शंकर चौधरी, केन्द्रीय सहकारिता राज्य मंत्री श्री कृष्ण पाल गुर्जर और श्री मुरलीधर मोहोल, केन्द्रीय सहकारिता सचिव डॉ. आशीष भूटानी सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने कहा कि बनासकांठा में बनास डेयरी की शुरुआत करने वाले गलबाभाई नानजीभाई पटेल ने जो यात्रा शुरू की थी, वह धीरे-धीरे बढ़ते-बढ़ते इस मुकाम पर पहुँच गई है कि आज यहाँ 24 हजार करोड़ रुपए तक का कारोबार हो रहा है।  उन्होंने कहा कि वह देश भर में जहाँ भी जाते हैं, वहाँ गर्व से कहते हैं कि गुजरात के गाँवों को समृद्ध बनाने का काम गुजरात की माताओं-बहनों ने किया है। यहाँ के किसान भाइयों, विशेष रूप से सहकारी आंदोलन के अगुआ लोगों, गाँव की दूध मंडलियों के चेयरमैन और बनास डेयरी के डायरेक्टर्स को शायद पता भी न हो कि उन्होंने कितना बड़ा चमत्कार कर दिखाया है। उन्होंने कहा कि 24 हजार करोड़ रुपए की कंपनी खड़ी करना बड़े-बड़े कॉर्पोरेट्स के लिए भी पसीना छुड़ाने वाला काम होता है, लेकिन बनासकांठा की बहनों और किसानों ने देखते-ही-देखते 24 हजार करोड़ रुपए की कंपनी खड़ी कर दी।

श्री अमित शाह ने कहा कि आज वह अपने साथ देश की संसद के दोनों सदनों—लोकसभा और राज्यसभा—के सांसदों को लेकर आए हैं। उन्होंने कहा कि आगामी जनवरी में पूरे देश की सभी डेयरियों के लगभग 250 चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर बनासकांठा के सहकारी डेयरी क्षेत्र में हुए चमत्कार को अपनी आँखों से देखने आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि 1985-87 के अकाल के बाद जब वह इस इलाके में आते थे और किसानों से पूछते थे तो बताया जाता था कि वह पूरे साल में सिर्फ एक फसल उगा पाते हैं, लेकिन अब बनासकांठा का किसान एक साल में तीन-तीन फसल उगाता है। मूंगफली भी उगाता है, आलू भी उगाता है, गर्मियों में बाजरा भी बोता है और खरीफ की फसल भी लेता है, जबकि पच्चीस साल पहले बनासकांठा में तीन फसल की खेती करना एक स्वप्न मात्र था।

केन्द्रीय सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने गुजरात के उन इलाकों से यहाँ पानी की उपलब्धता कराने का काम किया, जहां पानी प्रचुर मात्र में उपलब्ध था। उन्होंने कहा कि सुजलाम-सुफलाम योजना के तहत नर्मदा और माही नदी का अतिरिक्त पानी बनासकांठा पहुँचा। पहले यहाँ का किसान दूसरों के खेतों में मजदूरी करता था। आज उसी किसान ने अपनी जमीन को स्वर्ग बना दिया और पूरे बनासकांठा को समृद्ध बना दिया।

श्री अमित शाह ने कहा कि हमारी यह परंपरा या आदत नहीं रही कि कोई बड़ा काम करने पर उसका पूरा दस्तावेजीकरण किया जाए या उसका इतिहास लिखा जाए। लेकिन उन्होंने दो विश्वविद्यविद्यालयों को जिम्मेदारी सौंपी है कि वे बनासकांठा और मेहसाणा में जल-संचय तथा पानी के माध्यम से आई समृद्धि और लोगों के जीवन में आए परिवर्तन पर विस्तृत रिसर्च करें। उन्होंने कहा कि बनासकांठा का यह परिश्रम स्वर्ण अक्षरों में लिखा जाएगा और पूरे देश के ग्रामीण विकास के इतिहास में एक प्रेरणास्त्रोत बनकर उभरेगा। उन्होंने कहा कि खुशी की बात यह है कि इस परिश्रम में महिलाओं का बड़ा योगदान है। श्री शाह ने कहा कि 24 हजार करोड़ रुपए के इस विशाल कारोबार में दूध इकट्ठा करने की सारी मेहनत बनासकांठा की बहनों, बेटियों और माताओं के हाथों से हुई है। उन्होंने कहा कि इन महिलाओं ने महिला सशक्तिकरण की बातें करने वाली विश्व की तमाम एनजीओ के सामने सबसे जीवंत और सबसे बड़ा उदाहरण प्रस्तुत कर दिया है। ऐसी पारदर्शी व्यवस्था खड़ी हो चुकी है कि बिना किसी आंदोलन या बिना किसी नारे के, सीधे माताओं-बहनों के बैंक खाते में हर हफ्ते उनके दूध का पूरा पैसा पहुँच रहा है।

केन्द्रीय सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने कहा कि बनास डेयरी आज एशिया की सबसे बड़ी दुग्ध उत्पादक डेयरी बन चुकी है। इसमें गलवा काका का बड़ा योगदान है। गलबा काका ऐसे व्यक्तित्व थे जिनके हृदय में केवल किसान हित की भावना बसती थी। वर्ष 1960 में वडगाम और पालनपुर – सिर्फ दो तहसीलों के मात्र आठ गाँवों की दूध मंडलियों से शुरू हुई यह यात्रा आज 24 हजार करोड़ रुपए के टर्नओवर तक पहुँच गई है। उन्होंने कहा कि गलबाभाई द्वारा शुरू की गई परंपरा का मूल मंत्र बहुत सरल था कि “हमारे पास रुपये तो कम हैं, लेकिन हम खूब सारे लोग हैं।” श्री शाह ने कहा कि बहुत सारे लोगों द्वारा थोड़े-थोड़े रुपए इकट्ठा करके बड़ा काम करने का उनका विचार एक विशाल वटवृक्ष बन गया है, जो देश ही नहीं, विश्व के सभी सहकारी आंदोलनों को प्रेरणा दे रहा है।

अमित शाह ने कहा कि हर गाँव की दूध मंडली को माइक्रो-एटीएम भी दे दिया गया है, जिससे फाइनेंस का काम बहुत आसान हो गया है। आने वाले दिनों में इसी माइक्रो-एटीएम से फाइनेंस की सुविधा भी शुरू होने वाली है। उन्होंने कहा कि मोदी जी ने श्वेत क्रांति 2.0 के लिए कई बड़े लक्ष्य रखे हैं और पूरा विश्वास है कि राष्ट्रीय गोकुल मिशन, एनिमल हसबैंड्री इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट फंड,  पुनर्गठित राष्ट्रीय डेयरी योजना तथा राष्ट्रीय पशु रोग नियंत्रण कार्यक्रम, इन चारों स्तंभों के साथ श्वेत क्रांति 2.0 जरूर सफल होगी। उन्होंने कहा कि बनास डेयरी ने जो परंपरा खड़ी की है, वह केवल बनासकांठा तक सीमित नहीं रहेगी। यह पूरे देश के करोड़ों पशुपालकों के लिए समृद्धि का माध्यम बनेगी।

उपराष्ट्रपति गुजरात में सरदार @150 यूनिटी मार्च – पदयात्रा के समापन समारोह में शामिल हुए

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भारत के उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन आज गुजरात के एकता नगर स्थित स्टैच्यू ऑफ यूनिटी में सरदार @150 यूनिटी मार्च-राष्ट्रीय पदयात्रा के समापन समारोह में शामिल हुए।

सभा को संबोधित करते हुए, उपराष्ट्रपति ने कहा कि इस ऐतिहासिक राष्ट्रीय पदयात्रा के समापन में भाग लेना उनके लिए अत्यंत सम्मान की बात है। उन्होंने कहा कि पदभार ग्रहण करने के बाद महात्मा गांधी और सरदार वल्लभभाई पटेल की पावन धरती की यह उनकी पहली आधिकारिक यात्रा है।

उन्होंने 26 नवंबर – संविधान दिवस – से शुरू होने वाली पदयात्रा के महत्व पर प्रकाश डाला और कहा कि 1,300 से अधिक पदयात्राओं में 14 लाख से अधिक युवाओं की भागीदारी सरदार वल्लभभाई पटेल द्वारा जलाई गई एकता की अमिट ज्योति को दर्शाती है।

अपनी पदयात्रा जिसमें 19,000 किलोमीटर की रथ यात्रा और तमिलनाडु, केरल और आंध्र प्रदेश में नदियों को जोड़ने, आतंकवाद के उन्मूलन, समान नागरिक संहिता को लागू करने, अस्पृश्यता को समाप्त करने और मादक पदार्थों की रोकथाम जैसे मुद्दों पर की गई कई पदयात्राएं शामिल हैं – के अनुभवों को याद करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि ऐसी यात्राएं लोगों से जुड़ने और एकता एवं राष्ट्रीय उद्देश्य का संदेश फैलाने का सशक्त माध्यम हैं।

उन्होंने 560 से अधिक रियासतों के एकीकरण में सरदार पटेल की ऐतिहासिक भूमिका को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा:

“हमारा राष्ट्र अखंड भारत की मजबूत नींव रखने और उसके एकीकरण के लिए लौह पुरुष का सदैव ऋणी रहेगा।”

उपराष्ट्रपति ने इस बात पर ज़ोर दिया कि सरदार पटेल की एक मजबूत और आत्मनिर्भर भारत की परिकल्‍पना प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में साकार हो रही है।

उन्होंने पिछले दशक में आर्थिक, सामाजिक, सैन्य और रणनीतिक रूप से भारत की तीव्र प्रगति के साथ-साथ विश्व की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की दिशा में इसकी निरंतर यात्रा का उल्लेख किया।

युवाओं को संबोधित करते हुए, उपराष्ट्रपति ने कहा कि वे भारत के भविष्य की शक्ति हैं और एकता, अनुशासन और राष्ट्रीय उद्देश्य से निर्देशित होकर, वे राष्ट्र को नवाचार और विकास में एक वैश्विक नेता बना सकते हैं।

युवाओं से ‘नशे को ना’ कहने का आह्वान करते हुए, उन्होंने उन्हें सोशल मीडिया का जिम्मेदारी से उपयोग करने और डिजिटल साक्षरता और साइबर सुरक्षा में योगदान देने की सलाह दी।

इस कार्यक्रम में महिलाओं की सशक्त उपस्थिति को स्वीकार करते हुए, उपराष्ट्रपति ने नारी शक्ति वंदन अधिनियम के परिवर्तनकारी प्रभाव का उल्‍लेख किया जिसने राष्ट्र का ध्यान महिला सशक्तिकरण से हटकर महिला-नेतृत्व वाले विकास पर केंद्रित कर दिया है।

राष्ट्रीय सुरक्षा पर बोलते हुए, उन्होंने कहा कि भारत की रक्षा क्षमताएँ कई गुना बढ़ी हैं। उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर को एक निर्णायक क्षण बताया जिसने अपनी संप्रभुता की रक्षा और सीमा पार आतंकवाद का मुकाबला करने के राष्ट्र के संकल्प को प्रदर्शित किया।

उन्होंने चार नई श्रम संहिताओं का एक बड़े सुधार के रूप में उल्‍लेख किया, जो सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास, सबका प्रयास के आदर्शों को दर्शाते हैं और भारत के श्रम ढांचे को एक आधुनिक, पारदर्शी और श्रमिक-केंद्रित प्रणाली में बदल रहे हैं।

अपने संबोधन का समापन करते हुए, उपराष्ट्रपति ने कहा कि जैसे-जैसे राष्ट्र इस राष्ट्रव्यापी पदयात्रा का समापन विश्‍व की सबसे ऊँची प्रतिमा पर कर रहा है, यह न केवल सरदार पटेल की विरासत को बल्कि नए भारत की भावना को भी श्रद्धांजलि देता है। उन्होंने आगे कहा कि इस अमृत काल में, जब राष्ट्र विकसित भारत @2047 की ओर दृढ़ता से आगे बढ़ रहा है, सरदार पटेल के आदर्श इसके मार्गदर्शक के रूप में काम करते रहेंगे।

इससे पहले, पदभार ग्रहण करने के बाद राज्य की अपनी पहली यात्रा पर, उपराष्ट्रपति को एकता नगर में गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया। उन्होंने स्टैच्यू ऑफ यूनिटी पर सरदार वल्लभभाई पटेल को पुष्पांजलि भी अर्पित की।

एनएमडीसी का साइबर सुरक्षा को मजबूत करने के लिए आईआईटी कानपुर के साथ समझौता

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भारत के सबसे बड़े लौह अयस्क उत्पादक एनएमडीसी ने उद्योग-शैक्षणिक सहयोग को मजबूत बनाने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) कानपुर के साथ एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए हैं। इस पहल के तहत एनएमडीसी के प्रचालनों में साइबर सुरक्षा के क्षेत्रों में नई पहल की सुविधा प्रदान करने और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और मशीन लर्निंग (एमएल) सहित आधुनिक डिजिटल प्रौद्योगिकियों को बढ़ावा दिया जाएगा।

इस समझौता ज्ञापन पर एनएमडीसी की ओर से सत्येंद्र राय, अधिशासी निदेशक (डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन) और प्रोफेसर अशोक डे, डीन, आर एंड डी, आईआईटी कानपुर ने प्रो. मनिंद्र अग्रवाल, निदेशक, आईआईटी कानपुर, एनएमडीसी के वरिष्ठ अधिकारियों और आईआईटी कानपुर के प्रतिनिधियों की उपस्थिति में हस्ताक्षर किए।

इस साझेदारी के माध्यम से एनएमडीसी साइबर सुरक्षा जोखिम आकलन; नीति, शासन और अनुपालन समर्थन; आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और मशीन लर्निंग (एमएल) एकीकरण और उन्नयन; सुरक्षा संचालन और घटना प्रतिक्रिया; क्षमता निर्माण और ज्ञान साझा करना; और संयुक्त अनुसंधान और नवाचार जैसे प्रमुख क्षेत्रों में आईआईटी कानपुर के साथ काम करेगा।

इसके अतिरिक्त, एनएमडीसी और आईआईटी कानपुर संयुक्त रूप से प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करेंगे, अनुसंधान गतिविधियां करेंगे, पायलट परियोजनाएं चलाएंगे और प्रूफ-ऑफ-कॉन्सेप्ट समाधान का सामूहिक रूप से विकास करेंगे।

श्री अमिताभ मुखर्जी, अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक, एनएमडीसी ने इस साझेदारी पर कहा, “यह समझौता ज्ञापन एनएमडीसी के व्यापक परिचालन पारिस्थितिकी तंत्र में आईआईटी कानपुर की उन्नत अनुसंधान क्षमताओं को समाहित करेगा। यह सहयोग हमें अपनी डिजिटल सुरक्षा को मजबूत करने, परिचालन इंटेलिजेंस में सुधार करने और एनएमडीसी के लिए एक सुरक्षित और भविष्य के अनुरूप तकनीकी आधार बनाने में मदद करेगा।”

यह समझौता ज्ञापन डिजिटल रूप से मजबूत और भविष्य के लिए तैयार खनन संगठन बनने की एनएमडीसी की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

एससी ने कहा −राष्ट्रीय शर्म की बात है..16 साल से पेंडिंग एसिड अटैक केस

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चीफ जस्टिस ने सभी हाई कोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल को उनके क्षेत्राधिकार में पेंडिंग एसिड अटैक मामलों का डेटा चाह हफ्ते में मुहैया कराने का निर्देश दिया। इस मामले में याचिकाकर्ता खुद पीड़ित हैं और व्यक्तिगत तौर पर अदालत में पेश हुई।

एसिड अटैक मामले में सुप्रीम कोर्ट ने 16 साल से अधिक की इस देरी पर आश्चर्य जतायाचीफ जस्टिस सूर्यकांत की अगुआई वाली बेंच ने कहा कि अपराध 2009 का है और ट्रायल अभी तक पूरा नहीं हुआ। अगर राष्ट्रीय राजधानी ऐसी चुनौतियों से नहीं निपट सकती, तो कौन निपटेगा? यह सिस्टम के लिए शर्म की बात है! चीफ जस्टिस ने सभी हाई कोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल को उनके क्षेत्राधिकार में पेंडिंग एसिड अटैक मामलों का डेटा चाह हफ्ते में मुहैया कराने का निर्देश दिया। इस मामले में याचिकाकर्ता खुद पीड़ित हैं और व्यक्तिगत तौर पर अदालत में पेश हुई। उन्होंने कहा कि 2013 तक मामले में कोई कार्रवाई नहीं हुई थी। ट्रायल रोहिणी कोर्ट में चल रहा है और अब आखिरी स्टेज पर है।

यह भी मामला अदालत में उठा कि एसिड फेंका ही नहीं जाता बल्कि पीड़ित को जबरन पिलाया भी जाता है। ऐसे पीड़ितों को लंबी अवधि की गंभीर अक्षमता का सामना करना पड़ता है। कई चल भी नहीं सकते, और आर्टिफिशल फीडिंग ट्यूब पर निर्भर रहते हैं। वर्तमान याचिका ऐसे ही पीड़ितों से संबंधित एक जनहित याचिका है। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि ऐसे मामलों को दिव्यांग अधिकार अधिनियम, 2016 के तहत ‘दिव्यांगता’ माना जाना चाहिए।

देशभर में 844 एसिड अटैक केस लंबित हैं

राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो के मुताबिक विभिन्न अदालतों में एसिड अटैक से जुड़े 844 केस लंबित हैं। 2025 में जारी रिपोर्ट में ये आंकड़े वर्ष 2023 तक के हैं। एनसीआरबी के मुताबिक देश में 2021 के बाद से एसिड अटैक के मामले लगातार बढ़े हैं। फ्लोरिडा इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी की 2024 की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में एसिड अटैक के सालाना 250 से 300 केस दर्ज होते हैं। असल संख्या 1,000 से अधिक हो सकती है। कई मामले डर, सामाजिक दबाव और कानूनी झंझटों के कारण रिपोर्ट नहीं किए जाते।

विधायक हुमायूं कबीर ने मुर्शिदाबाद जिले के रेजिनगर में बाबरी मस्जिद की तर्ज पर मस्जिद की आधारशिला रखी

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निलंबित टीएमसी विधायक हुमायूं कबीर ने शनिवार को कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले के रेजिनगर में अयोध्या की बाबरी मस्जिद की तर्ज पर एक मस्जिद की आधारशिला रखी। कबीर ने मंच पर आए मौलवियों के साथ एक औपचारिक रिबन काटा, इस दौरान कार्यक्रम स्थल पर “नारा-ए-तकबीर, अल्लाहु अकबर” के नारे लगाए गए। यहाँ सुबह से ही हजारों लोग जमा थे। आधारशिला रखने का समारोह कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच हुआ। कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए रेजिनगर और आसपास के बेलडांगा इलाके में पुलिस, आरएएफ और केंद्रीय बलों की बड़ी टुकड़ियाँ तैनात की गईं।

कबीर, जिन्हें इस सप्ताह की शुरुआत में तृणमूल कांग्रेस से निलंबित कर दिया गया था, जिसे पार्टी ने सांप्रदायिक राजनीति में लिप्त बताया था, ने इस महीने की शुरुआत में आधारशिला समारोह की घोषणा की थी। इसकी राजनीतिक आलोचना हुई और राज्य प्रशासन को सुरक्षा बढ़ानी पड़ी। आधारशिला समारोह के लिए कबीर ने छह दिसंबर का दिन चुना, जो अयोध्या की बाबरी मस्जिद के विध्वंस की वर्षगांठ है। 

मुर्शिदाबाद में ‘बाबरी मस्जिद शैली’ की मस्जिद की नींव रखने की विधायक हुमायूँ कबीर की योजना ने शनिवार को पश्चिम बंगाल में राजनीतिक घमासान मचा दिया। भाजपा ने तृणमूल कांग्रेस, जिसने विधायक को निलंबित कर दिया है, पर लोगों का ध्रुवीकरण करने का आरोप लगाया, जबकि राज्य की सत्तारूढ़ पार्टी ने इस आरोप को निराधार बताया। वरिष्ठ भाजपा नेता अमित मालवीय ने एक्स पर एक पोस्ट में आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी राजनीतिक लाभ के लिए मुसलमानों का ध्रुवीकरण करने के लिए विधायक का इस्तेमाल कर रही हैं और बेलडांगा से आई खबरों ने “गंभीर चिंता” पैदा कर दी है।

उन्होंने दावा किया कि कबीर के समर्थकों को बाबरी मस्जिद बनाने के लिए ईंटें ले जाते देखा गया था और विधायक ने दावा किया था कि उन्हें पुलिस का समर्थन प्राप्त है। बेलडांगा को राज्य के सबसे सांप्रदायिक रूप से संवेदनशील क्षेत्रों में से एक बताते हुए, मालवीय ने चेतावनी दी कि कोई भी अशांति राष्ट्रीय राजमार्ग 12 को बाधित कर सकती है – जो उत्तर बंगाल को दक्षिण बंगाल से जोड़ने वाली जीवनरेखा है – जिसके “कानून-व्यवस्था और यहाँ तक कि राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए भी गंभीर परिणाम” होंगे।

उन्होंने कहा कि यह तथाकथित मस्जिद परियोजना कोई धार्मिक प्रयास नहीं, बल्कि एक राजनीतिक प्रयास है, जिसका उद्देश्य भावनाओं को भड़काना और वोट बैंक को मज़बूत करना है। समुदाय की सेवा करने के बजाय, यह पश्चिम बंगाल की स्थिरता के लिए एक गंभीर खतरा है। उन्होंने आगे कहा कि लेकिन ममता बनर्जी किसी भी हद तक नहीं रुकेंगी, चाहे इसका मतलब पश्चिम बंगाल को उथल-पुथल की ओर ही क्यों न धकेलना पड़े।

परीक्षा पे चर्चा (पीपीसी 2026) का 9वां संस्करण जनवरी में आयोजित होगा

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प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी का अनूठा चर्चा कार्यक्रम, परीक्षा पे चर्चा (पीपीसी), अपने 9वें संस्करण के साथ वापस आ गया है। यह जनवरी 2026 में आयोजित किया जाएगा, जहां भारत और विदेश के छात्र, अभिभावक और शिक्षक परीक्षा के तनाव पर चर्चा करने और परीक्षाओं को एक उत्सव और जीवन का एक अभिन्न अंग मानने के लिए उनके साथ जुड़ेंगे।

प्रतिभागियों के चयन के लिए, माइ गॅव पोर्टल (https://innovateindia1.mygov.in/) पर 1 दिसंबर 2025 से 11 जनवरी 2026 तक एक ऑनलाइन एमसीक्‍यू-आधारित प्रतियोगिता आयोजित की जा रही है। कक्षा 6 से 12 तक के छात्र, शिक्षक और अभिभावक इस प्रतियोगिता में भाग ले सकते हैं। इस गतिविधि को पूरा करने वाले सभी पंजीकृत प्रतिभागियों को माइ गॅव की ओर से भागीदारी प्रमाण पत्र प्राप्त होगा।

परीक्षा पे चर्चा का आठवाँ संस्करण 10 फ़रवरी 2025 को प्रसारित किया गया था। यह चर्चा नई दिल्ली के सुंदर नर्सरी में एक नए और अभिनव प्रारूप में आयोजित की गई जिसमें प्रत्येक राज्य और केंद्र शासित प्रदेश के 36 छात्र शामिल हुए जिनमें सरकारी स्कूल, केंद्रीय विद्यालय, सैनिक स्कूल, एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालय, सीबीएसई से संबध स्कूल और नवोदय विद्यालय शामिल थे। इसमें प्रेरणा के पूर्व छात्र और कला उत्सव तथा वीर गाथा के विजेता भी शामिल हुए। इस संस्करण में खेल एवं अनुशासन और मानसिक स्वास्थ्य से लेकर पोषण, प्रौद्योगिकी एवं वित्त तथा रचनात्मकता एवं सकारात्मकता तक, सात अलग-अलग एपिसोड भी शामिल थे जिनमें प्रसिद्ध हस्तियों के प्रेरक विचार प्रस्तुत किए गए।

2025 में, परीक्षा पे चर्चा ने 245 से ज़्यादा देशों के छात्रों, 153 देशों के शिक्षकों और 149 देशों के अभिभावकों की भागीदारी के साथ एक उल्लेखनीय गिनीज़ वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया। इस कार्यक्रम में भाग लेने वाले प्रतिभागियों की संख्‍या में असाधारण वृद्धि देखी गई है जो 2018 के पहले संस्करण में केवल 22,000 प्रतिभागियों से बढ़कर 2025 के आठवें संस्करण में 3.56 करोड़ पंजीकरणों तक पहुँच गई है – जो स्पष्ट रूप से इसकी प्रासंगिकता और लोकप्रियता को दर्शाता है। इसके साथ ही, परीक्षा पे चर्चा 2025 से संबंधित राष्ट्रव्यापी जन आंदोलन गतिविधियों में 1.55 करोड़ लोगों ने भाग लिया जिससे इसमें कुल भागीदारी लगभग 5 करोड़ हो गई।

काशी तमिल संगमम् 4.0 के अंतर्गत विशेष भाषा प्रशिक्षण सत्र में प्रतिभागियों ने सीखा तमिल

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काशी तमिल संगमम् 4.0 के अंतर्गत आयोजित विशेष भाषा प्रशिक्षण सत्र में सैनिटरी वर्कर्स, छात्रों और एनसीसी कैडेट्स को एफएलएन मॉडल आधारित तमिल शिक्षण प्रदान किया गया। “तमिल करकलाम ” थीम पर केंद्रित इस आयोजन का उद्देश्य प्रतिभागियों को तमिल भाषा की मूल अवधारणाओं से परिचित कराना तथा उन्हें दैनिक जीवन में प्रयुक्त होने वाले शब्दों और संवादों का व्यावहारिक ज्ञान उपलब्ध कराना था।

प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को अभिवादन, संख्याएँ, शरीर के अंग, सरल वाक्य निर्माण, दैनिक संवाद तथा तमिल लिपि की प्रारंभिक पहचान सिखाई गई। एफएलएन मॉडल के अनुरूप दृश्य-आधारित चार्ट, संवाद-अभ्यास और सरल शब्दावली का प्रयोग करते हुए सीखने की प्रक्रिया को और अधिक सहज, रोचक तथा प्रभावी बनाया गया।

इस सत्र में विभिन्न समूहों की आवश्यकताओं के अनुसार विशिष्ट शिक्षण सामग्री भी प्रस्तुत की गई। सैनिटरी वर्कर्स को उनके कार्य से संबंधित तमिल शब्दावली और संवाद शैली का प्रशिक्षण दिया गया, ताकि वे अपने दैनिक कार्यों में प्रभावी संप्रेषण कर सकें। छात्रों को फ्लैशकार्ड और संवाद-आधारित गतिविधियों के माध्यम से भाषा की बुनियादी संरचना समझाई गई। वहीं एनसीसी कैडेट्स को कमांड, परेड और टीमवर्क से जुड़ी तमिल अभिव्यक्तियों का अभ्यास कराया गया, जिससे उनके अनुशासनात्मक प्रशिक्षण में नई भाषाई दक्षता का समावेश हो सका।

प्रतिभागियों ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि काशी तमिल संगमम् का यह प्रयास न केवल भाषा शिक्षण को सरल और सुलभ बनाता है, बल्कि उत्तर और दक्षिण भारत के बीच सांस्कृतिक एवं भाषाई सेतु को भी मजबूत करता है। यह प्रशिक्षण “एक भारत, श्रेष्ठ भारत” की उस भावना को साकार करता है, जो विविध भाषाओं, संस्कृतियों और समुदायों को एक सूत्र में पिरोने का कार्य करती है।
 

इंडिगो को बिना किसी देरी के यात्रियों के लंबित रिफंड को निपटाने का निर्देश

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नागर विमानन मंत्रालय ने इंडिगो को सभी लंबित यात्री रिफंड बिना किसी देरी के जारी करने का निर्देश दिया है। मंत्रालय ने अनिवार्य किया है कि सभी रद्द या बाधित उड़ानों के लिए रिफंड प्रक्रिया रविवार, 7 दिसंबर 2025 रात आठ बजे तक पूरी हो जानी चाहिए। एयरलाइनों को यह भी निर्देश दिया गया है कि वे उन यात्रियों से कोई पुनर्निर्धारण शुल्क न लें जिनकी यात्रा योजनाएं उड़ानों के रद्द होने से प्रभावित हुई हैं। मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि रिफंड प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की देरी या अनुपालन न होने पर तत्काल नियामक कार्रवाई की जाएगी।

विशेष यात्री सहायता और धन वापसी प्रकोष्ठ

निर्बाध शिकायत निवारण सुनिश्चित करने के लिए, इंडिगो को समर्पित यात्री सहायता और धनवापसी सुविधा प्रकोष्ठ स्थापित करने का निर्देश दिया गया है। इन प्रकोष्ठों को प्रभावित यात्रियों से सक्रिय रूप से संपर्क करने और यह सुनिश्चित करने का काम सौंपा गया है कि धनवापसी और वैकल्पिक यात्रा व्यवस्थाएँ बिना किसी बार-बार अनुवर्ती कार्रवाई के पूरी हो जाएँ। स्वचालित धनवापसी की यह प्रणाली परिचालन पूरी तरह से स्थिर होने तक सक्रिय रहेगी।

सामान प्रबंधन पर आश्वासन

मंत्रालय ने इंडिगो को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है कि उड़ानों के रद्द होने या देरी के कारण यात्रियों से अलग हुए सभी सामान का पता लगाया जाए और अगले 48 घंटों के भीतर यात्री के निवास या चुने हुए पते पर पहुंचा दिया जाए। एयरलाइनों को ट्रैकिंग और डिलीवरी की समय-सीमा के बारे में यात्रियों के साथ स्पष्ट संवाद बनाए रखने और मौजूदा यात्री अधिकार नियमों के तहत ज़रूरत पड़ने पर मुआवज़ा देने के लिए कहा गया है।

यात्रियों के लिए शून्य-असुविधा नीति

नागर विमानन मंत्रालय इस व्यवधान के दौरान यात्रियों के अधिकारों की पूर्ण सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए एयरलाइनों, हवाई अड्डों, सुरक्षा एजेंसियों और सभी परिचालन हितधारकों के साथ निरंतर समन्वय बनाए हुए है। वरिष्ठ नागरिकों, दिव्यांग यात्रियों, छात्रों, रोगियों और तत्काल यात्रा करने वाले सभी लोगों के लिए उचित सुविधा सुनिश्चित करने हेतु निगरानी तंत्र को सुदृढ़ किया गया है। मंत्रालय पुनर्प्राप्ति प्रक्रिया पर लगातार नज़र रख रहा है और जल्द से जल्द पूर्ण परिचालन सामान्य स्थिति बहाल करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

नागर विमानन मंत्रालय ने मौजूदा व्यवधान के दौरान कुछ एयरलाइनों द्वारा असामान्य रूप से अधिक हवाई किराए वसूले जाने की चिंताओं को गंभीरता से लिया है। यात्रियों को किसी भी प्रकार के अवसरवादी मूल्य निर्धारण से बचाने के लिए मंत्रालय ने सभी प्रभावित मार्गों पर उचित और तर्कसंगत किराए सुनिश्चित करने के लिए अपनी नियामक शक्तियों का प्रयोग किया है।

सभी एयरलाइनों को एक आधिकारिक निर्देश जारी किया गया है जिसमें अब निर्धारित किराया सीमा का सख्ती से पालन अनिवार्य किया गया है। ये सीमाएँ तब तक लागू रहेंगी जब तक स्थिति पूरी तरह से स्थिर नहीं हो जाती। इस निर्देश का उद्देश्य बाज़ार में मूल्य निर्धारण अनुशासन बनाए रखना, संकटग्रस्त यात्रियों का शोषण रोकना और यह सुनिश्चित करना है कि जिन नागरिकों को तत्काल यात्रा करने की आवश्यकता है – जिनमें वरिष्ठ नागरिक, छात्र और मरीज़ शामिल हैं – उन्हें इस अवधि के दौरान आर्थिक तंगी का सामना न करना पड़े।

मंत्रालय वास्तविक समय के आंकड़ों और एयरलाइनों एवं ऑनलाइन यात्रा प्लेटफार्मों के साथ सक्रिय समन्वय के माध्यम से किराया स्तरों पर कड़ी निगरानी बनाए रखेगा। निर्धारित मानदंडों की किसी भी प्रकार की अवहेलना व्यापक जनहित में तत्काल सुधारात्मक कार्रवाई का कारण बनेगी।

केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल का स्नातकों से राष्ट्र निर्माण में योगदान का आह्वान

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केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने आज नोएडा स्थित एमिटी विश्वविद्यालय के वार्षिक दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि किसी विश्वविद्यालय द्वारा प्रतिभाशाली प्रतिभाओं को वापस लौटने के लिए प्रोत्साहित करने, उनकी क्षमताओं को निखारने और उन्हें एक ऐसा मंच प्रदान करने से बड़ा कोई योगदान नहीं हो सकता जो उनकी क्षमता को पहचाने और उसका सम्मान करे। ऑनलाइन और कैंपस में शिक्षा प्राप्त करने वाले लगभग 29,000 छात्रों के स्नातक बैच को बधाई देते हुए, मंत्री महोदय ने कहा कि छात्रों और पुरस्कार विजेताओं की उपलब्धियाँ ही इस समारोह का मुख्य आकर्षण हैं।

श्री गोयल ने छात्रों को प्रदान किए जाने वाले विविध अवसरों का उल्‍लेख किया और छात्रवृत्तियों के माध्यम से योग्यता के प्रति विश्वविद्यालय की प्रतिबद्धता की सराहना की जो आवश्यकता-रहित प्रवेश को संभव बनाती हैं। उन्होंने इस बात पर संतोष व्यक्त किया कि आधी छात्र संख्या युवा महिलाओं की है और उन्होंने विश्वविद्यालय की मज़बूत नवाचार संस्कृति की प्रशंसा की जहाँ छात्रों के पास 450 से अधिक पेटेंट हैं। उन्होंने इस बात पर भी ध्यान दिलाया कि 50 संकाय सदस्य रामलिंगम स्वामी फेलो हैं जो राष्ट्र की सेवा के लिए वापस लौटे हैं।

मंत्री महोदय ने महापरिनिर्वाण दिवस पर डॉ. बाबासाहेब अंबेडकर की विरासत को याद करते हुए समानता, सामाजिक सद्भाव और सभी के लिए अवसर के संवैधानिक मूल्यों को दोहराया। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि शिक्षा वंचित वर्गों के उत्थान का आधार है और छात्रों को समाज और राष्ट्र के प्रति उनके कर्तव्यों का स्मरण कराया।

मंत्री महोदय ने स्नातक छात्रों को 2047 तक एक विकसित राष्ट्र बनने की दिशा में भारत की यात्रा का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बताया और कहा कि अगले 25 वर्ष विकसित भारत के लिए निर्णायक युग होंगे। उन्होंने छात्रों से अपने चुने हुए क्षेत्रों को अगले स्तर तक ले जाने, सीमाओं को आगे बढ़ाने और राष्ट्रीय प्रगति में सार्थक योगदान देने का आग्रह किया।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने लाल किले की प्राचीर से अपने संबोधन में एक लाख युवक-युवतियों से सार्वजनिक जीवन और राजनीति को एक व्यवसाय के रूप में अपनाने की अपील की थी। उन्होंने कहा कि राजनीति में ऐसे समर्पित व्यक्तियों की आवश्यकता है जो राष्ट्र के लिए काम करने को तत्पर हों, सार्वजनिक जीवन में ईमानदारी बनाए रखें और देश के 140 करोड़ नागरिकों को अपनी ज़िम्मेदारियों और कर्तव्यों को समझने के लिए प्रेरित करें—पहले अपने परिवार के प्रति, फिर समाज के प्रति और अंततः राष्ट्र के प्रति।

उन्होंने आशा व्यक्त की कि अधिक विश्वविद्यालय छात्रों को सार्वजनिक जीवन और राजनीति को और गहराई से समझने के लिए प्रोत्साहित करेंगे, और यह भी बताया कि एमिटी विश्वविद्यालय राजनीति विज्ञान को एक विषय के रूप में पढ़ाता है। उन्होंने सुझाव दिया कि संस्थान छात्रों को निर्वाचित प्रतिनिधियों के साथ इंटर्नशिप के लिए भेजने पर भी विचार कर सकते हैं ताकि वे शासन और लोक सेवा को प्रत्यक्ष रूप से समझ सकें और यह भी कि वे एक दिन इसे और भी बेहतर कैसे कर सकते हैं।

उन्होंने बताया की जैसा कि उन्हें शुरुआती कंप्यूटर कक्षाओं में सिखाया गया था, “अंदर कचरा, बाहर कचरा”, और कहा कि भारतीय राजनीति को और अधिक अच्छे लोगों और मज़बूत जननेताओं की ज़रूरत है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि अगर और अधिक नेकनीयत युवा लड़के और लड़कियाँ सार्वजनिक जीवन में शामिल हों तो भारत किसी की कल्पना से भी अधिक तेज़ी से एक महाशक्ति बन सकता है। उन्होंने प्रधानमंत्री का हवाला दिया, जिन्होंने बार-बार कहा है कि भारत का भविष्य “करने-योग्य पीढ़ी” के हाथों में है और कहा कि युवा एक नए भारत का निर्माण करेंगे।

उन्होंने छात्रों को याद दिलाया कि इस अमृत काल में भारत का नेतृत्व करने की जिम्मेदारी उन पर है और इस यात्रा के लिए आवश्यक मार्गदर्शक सिद्धांतों पर विचार किया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री का स्वतंत्रता दिवस का संबोधन प्रत्येक नागरिक के लिए एक पवित्र मार्गदर्शक है और उन्होंने 15 अगस्त 2022 के भाषण को याद किया जब भारत ने अपनी स्वतंत्रता के 75 वर्ष पूरे होने का उत्‍सव मनाया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने देश को 2022 से 2047 तक ले जाने, 4 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था से 35 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने और 2,500 डॉलर प्रति व्यक्ति आय से 20,000 डॉलर प्रति व्यक्ति आय तक ले जाने के लिए पाँच मार्गदर्शक सिद्धांत बताए थे। उन्होंने कहा कि अगर 140 करोड़ भारतीय इन सिद्धांतों को अपने जीवन में अपना लें, तो भारत का भविष्य बहुत सफल होगा और उन्होंने छात्रों से इन सिद्धांतों पर विचार करने और देश के जिम्मेदार नागरिक के रूप में जो भी उनके साथ प्रतिध्वनित होता है उसे आगे बढ़ाने का आग्रह किया।

उन्होंने जिस पहले प्रण पर ज़ोर दिया, वह था विकसित भारत का संकल्प। उन्होंने कहा कि अगले 25 साल एक निर्णायक युग होंगे जिसमें युवा महत्वपूर्ण भूमिका निभाएँगे। उन्होंने छात्रों से आग्रह किया कि वे अपने चुने हुए क्षेत्रों की सीमाओं को आगे बढ़ाएँ और उन्हें अगले स्तर तक ले जाएँ।

उन्होंने जिस दूसरे प्रण पर ज़ोर दिया, वह था भारत को औपनिवेशिक मानसिकता से मुक्त करने की आवश्यकता। उन्होंने छात्रों से मानसिक बाधाओं, पुरानी विचार प्रक्रियाओं और सीमित मान्यताओं को दूर करने का आग्रह किया। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि विश्वविद्यालय पश्चिमी परिधानों के बजाय राष्ट्रीय गौरव को दर्शाने वाले पारंपरिक भारतीय दीक्षांत समारोह परिधान अपनाने पर विचार कर सकते हैं। उन्होंने छात्रों को प्रोत्साहित किया कि वे किसी को यह तय न करने दें कि उन्हें कैसे सोचना, कार्य करना या सपने देखने चाहिए।

उन्होंने जिस तीसरे प्रण का ज़िक्र किया, वह था भारत की विरासत पर गर्व। उन्होंने कहा कि भले ही हमारा देश तेज़ी से आधुनिक हो रहा है, लेकिन इसकी ताकत इसके मूल्यों, विविधता और प्राचीन ज्ञान में निहित है, और उन्होंने छात्रों को इस गौरव को अपने जीवन और करियर के हर पहलू में शामिल करने के लिए प्रोत्साहित किया।

उन्होंने जिस चौथे प्रण पर ज़ोर दिया, वह था भारत की विविधता में एकता, जिसे उन्होंने भारत की धड़कन बताया। उन्होंने छात्रों से आग्रह किया कि वे खुद को अपने दायरे तक सीमित न रखें, बल्कि आगे बढ़ें, व्यापक सहयोग करें और समुदायों के बीच सेतु बनाएँ।

उन्होंने पाँचवें प्रण, कर्तव्य की भावना पर ज़ोर दिया। उन्होंने कहा कि शिक्षा केवल व्यक्ति के लिए नहीं, बल्कि परिवार, समुदाय और राष्ट्र के लिए है। उन्होंने स्नातकों को याद दिलाया कि उनका कर्तव्य है कि वे अपने कौशल और ज्ञान का उपयोग भारत की सेवा के लिए करें और समाज को कुछ देकर विकसित भारत 2047 में योगदान दें।

श्री गोयल ने शिक्षकों और अभिभावकों के योगदान की सराहना की और स्नातक समूह को आकार देने में उनके त्याग और समर्पण को स्वीकार किया। उन्होंने छात्रों को अपने मातृ संस्थान से जुड़े रहने और अपने गुरुओं का आभार व्यक्त करने के लिए प्रोत्साहित किया।

जैसे ही स्नातक वास्तविक दुनिया में कदम रख रहे हैं, मंत्री महोदय ने उन्हें याद दिलाया कि चुनौतियाँ और संघर्ष इस यात्रा का हिस्सा हैं लेकिन उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि एमिटी विश्वविद्यालय द्वारा प्रदान की गई शिक्षा और मूल्यों ने उन्हें इनका सामना शक्ति, आत्मविश्वास और एकाग्रता के साथ करने के लिए तैयार किया है। उन्होंने उनसे राष्ट्र निर्माण में सक्रिय योगदान देने और भारत को एक विकसित राष्ट्र बनाने की दिशा में एक सार्थक भूमिका निभाने का आग्रह किया।

हिन्दी फिल्मों को नई गरिमा देने वाली प्रसिद्ध अभिनेत्री बीना राय

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भारतीय सिनेमा के स्वर्ण युग में कुछ अभिनेत्रियाँ अपने सौम्य व्यक्तित्व, गहरी अभिनय प्रतिभा और दिल को छू लेने वाली छवि के कारण विशेष स्थान बना पाती हैं। बीना राय उन्हीं दुर्लभ कलाकारों में से एक थीं, जिनकी उपस्थिति ने हिन्दी फिल्मों को नई गरिमा और संवेदना प्रदान की। परदे पर उनका शांत, गम्भीर और सौम्य अभिनय दर्शकों के मन में ऐसी छाप छोड़ता था, जो आज भी स्मरणीय है।

बीना राय का जन्म एक साधारण परिवार में हुआ था। बचपन से ही उन्हें अभिनय और कला के प्रति विशेष अनुराग था। शिक्षा के दौरान ही उन्होंने अपनी प्रतिभा से यह संकेत दे दिया था कि आने वाले समय में वह किसी रचनात्मक क्षेत्र में विशेष पहचान बनाएँगी। परिवार में प्रारम्भिक झिझक के बावजूद वे अपने संकल्प पर दृढ़ रहीं और आगे चलकर फिल्मों की दुनिया में प्रवेश किया।

फिल्मी जगत में बीना राय की शुरुआत सहज नहीं थी। उस समय फिल्म उद्योग में काम करना आसान नहीं माना जाता था, विशेषकर किसी परंपरागत परिवार की लड़की के लिए। लेकिन उनकी मेहनत, आत्मविश्वास और सादगी भरे व्यक्तित्व ने धीरे-धीरे उन्हें एक विशिष्ट पहचान दिलाई। निर्माताओं और निर्देशकों ने उनकी गम्भीरता, अनुशासन और अभिनय कौशल को देखते हुए उन्हें उपयुक्त भूमिकाएँ देना शुरू किया।

बीना राय की अभिनय शैली अलग प्रकार की थी। वह अनावश्यक नाटकीयता से दूर रहती थीं और अपने भावों को आँखों तथा चेहरे के सूक्ष्म हावभाव से व्यक्त करती थीं। उनके संवादों में कोमलता और आत्मीयता होती थी, जिससे दर्शक सहज ही कहानी की भावनाओं से जुड़ जाते थे। वह जिस भी पात्र को निभातीं, उसमें एक गरिमा और आदर्शवादी आभा स्वतः उभर आती थी।

उनकी प्रसिद्धि मुख्य रूप से उन फिल्मों से बढ़ी जिनमें उन्होंने ऐतिहासिक और सामाजिक पृष्ठभूमि वाले पात्रों को जीवंत किया। परदे पर उनकी सादगी और मर्यादा ने दर्शकों को अत्यंत प्रभावित किया। चाहे वह किसी दुखांत कहानी की नायिका हों या किसी प्रेम कथा का प्रमुख पात्र, उन्होंने हमेशा अपने अभिनय में स्वाभाविकता बनाए रखी। यही स्वभाव उन्हें अन्य अभिनेत्रियों से अलग खड़ा करता था।

बीना राय ने उस दौर की कई महत्वपूर्ण फिल्मों में काम किया, जिससे उनका स्थान उस समय की प्रमुख अभिनेत्रियों में सुदृढ़ हुआ। उनके अभिनय को समीक्षकों ने भी व्यापक सराहना दी। कई फ़िल्मों में उनके रूप, भाव-भंगिमा, परिधानों और संगीत के साथ उनका संयोजन भारतीय सौंदर्य और सांस्कृतिक गरिमा का प्रतीक बन गया। उनकी आवाज़ में एक अलग कोमलता थी, जो भावनात्मक दृश्यों को विशेष प्रभाव देती थी।

व्यक्तिगत जीवन में बीना राय अत्यंत शांत, परिवारप्रिय और मर्यादित स्वभाव की थीं। उन्होंने अपने घर और फिल्म जगत दोनों को समान महत्व दिया। उनके जीवनसाथी भी फिल्म क्षेत्र से जुड़े थे, जिससे दोनों के बीच गहरी समझ बनी रही। विवाह के उपरांत भी बीना राय ने कुछ महत्वपूर्ण फिल्मों में अभिनय किया, लेकिन अपने परिवार के प्रति जिम्मेदारियों को सर्वोपरि रखते हुए उन्होंने धीरे-धीरे फिल्मों से दूरी बना ली।

उनका योगदान केवल अभिनय तक सीमित नहीं था। बीना राय ने अपने समय की नवोदित अभिनेत्रियों के लिए एक आदर्श प्रस्तुत किया। उन्होंने यह साबित किया कि फिल्म जगत में रहते हुए भी सरलता, मर्यादा और आदर्शों को कायम रखा जा सकता है। उनका जीवन और कार्यशैली दर्शाती है कि सफलता केवल बाहरी चमक-दमक से नहीं, बल्कि आंतरिक अनुशासन और कर्मनिष्ठा से प्राप्त होती है।

बीना राय का नाम आते ही भारतीय सिनेमा के स्वर्णकाल की यादें ताज़ा हो उठती हैं। उनके चित्रपटों में एक विशेष प्रकार की शालीनता दिखाई देती है, जो आज के समय में भी दुर्लभ है। वह केवल एक अभिनेत्री नहीं, बल्कि एक सांस्कृतिक प्रतीक बन चुकी थीं, जिनके अभिनय में भारतीय जीवन-मूल्यों की छाप स्पष्ट दिखाई देती थी।

समय के साथ भले ही नई पीढ़ी उनके नाम से अधिक परिचित न हो, किन्तु भारतीय फिल्मों के इतिहास में उनका योगदान अमिट है। बीना राय ने जिस सरलता और गरिमा से अभिनय किया, वह आने वाले कलाकारों के लिए प्रेरणा का स्रोत है। उनका जीवन हमें यह सिखाता है कि प्रसिद्धि और सफलता तभी सार्थक होती है जब उनमें मानवीय संवेदनाएँ और नैतिकता जुड़ी हों।

अंततः, बीना राय का सम्पूर्ण फिल्मी जीवन भारतीय सिनेमा के स्वर्णिम अध्यायों में एक उज्ज्वल पंक्ति की तरह है। उनकी मुस्कान, भावपूर्ण अभिनय और गरिमामयी उपस्थिति सदैव दर्शकों के मन में जीवित रहेगी। उन्होंने भारतीय सिनेमा को जो सौंदर्य, संवेदना और कला दी, वह कभी भुलाई नहीं जा सकती!