ग्रामीण विकास और संचार राज्य मंत्री डॉ. पेम्मासानी चंद्र शेखर ने लैंगिक समानता को बढ़ावा देने के लिए सामूहिक कार्रवाई का आह्वान किया और सभी हितधारकों से “एक आवाज, एक संकल्प, समानता के लिए एक नई शुरुआत” के संकल्प के साथ आगे बढ़ने का आग्रह किया।
राज्य स्तरीय ‘नयी चेतना 4.0’ के शुभारंभ के अवसर पर जनसभा को संबोधित करते हुए . डॉ पेम्मासानी ने इस पहल को लिंग आधारित हिंसा के विरुद्ध एक शक्तिशाली जन आंदोलन कहा और हिंसा के सभी रूपों को समाप्त करने के लिए सामूहिक जिम्मेदारी का आह्वान किया।
इस कार्यक्रम के अंतर्गत, डॉ पेम्मासानी ने गुंटूर में लैंगिक संसाधन केंद्र (जीआरसी) का उद्घाटन किया। जीआरसी महिलाओं के लिए एक सर्व-समावेशी सहायता प्रणाली के रूप में कार्य करेगा जो जमीनी स्तर पर समय पर सहायता, सुरक्षा और न्याय तक पहुंच सुनिश्चित करने के लिए परामर्श, कानूनी सहायता, विशेषज्ञ सलाह और आजीविका संपर्क प्रदान करेगा।
गुंटूर में आंध्र प्रदेश की नारी शक्ति को संबोधित करते हुए, उन्होंने एक ऐसे बदलते ग्रामीण भारत के निर्माण के लक्ष्य का उल्लेख किया जहां प्रत्येक महिला सुरक्षित हो, गरिमापूर्ण जीवन जी सके और आर्थिक रूप से स्वतंत्र हो। उन्होंने महिला सशक्तिकरण को समावेशी और टिकाऊ विकास की आधारशिला बताया।
डॉ पेम्मासानी ने इस बात पर बल दिया कि महिलाओं को सशक्त बनाना सामाजिक प्रगति को गति देता है और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करना राष्ट्र को मजबूत बनाता है। उन्होंने दोहराया कि महिलाओं की सुरक्षा और सम्मान भारत के विकास और लचीलेपन के लिए मूलभूत हैं।
2021 में शुरू हुआ ‘नई चेतना’ अभियान अब एक राष्ट्रव्यापी आंदोलन बन चुका है जिसे लगभग 1 करोड़ स्वयं सहायता समूह (एसएचजी) की महिलाएं चला रही हैं। देशभर में 13 लाख से अधिक बैठकों और कार्यक्रमों के माध्यम से 4 करोड़ से अधिक ग्रामीण नागरिकों ने जागरूकता कार्यक्रमों में भाग लिया है। यह पहल 12 केंद्रीय मंत्रालयों के समन्वय से कार्यान्वित की जा रही है, जिसमें महिलाओं की सुरक्षा, सम्मान और आर्थिक सशक्तिकरण पर नए सिरे से ध्यान केंद्रित किया गया है, जिसमें भूमि, बैंकिंग और प्रौद्योगिकी तक बेहतर पहुंच शामिल है।
इस कार्यक्रम में राज्य की गृह मंत्री वंगलपुडी अनीता और राज्य के एमएसएमई, एसईआरपी और एनआरआई सशक्तिकरण एवं संबंध मंत्री कोंडापल्ली श्रीनिवास भी उपस्थित थे। इसमें 3000 से अधिक महिलाएं शामिल थीं।
केंद्रीय वस्त्र मंत्री गिरीराज सिंह ने आज नई दिल्ली के राष्ट्रीय शिल्प संग्रहालय में “क्राफ्टेड फॉर द फ्यूचर” प्रदर्शनी का उद्घाटन किया।वस्त्र मंत्रालय के हस्तकला विभाग के विकास आयुक्त कार्यालय द्वारा आयोजित इस प्रदर्शनी में भारत की समृद्ध शिल्प परंपराओं और उनके सतत, समकालीन जीवन से प्रासंगिकता को
रेखांकित किया गया है। उद्घाटन करते हुए श्री गिरीराज सिंह ने कहा कि आज का युवा पारंपरिक शिल्प को समझ रहा है और वैश्विक दर्शकों के लिए प्रासंगिक समकालीन उत्पाद प्रस्तुत कर रहा है।श्री गिरीराज सिंह ने कहा कि कारीगरों को सुगमता प्रदान करने और भारत के विभिन्न शिल्पों को विश्व तक पहुंचाने के लिए सभी उपाय किए जा रहे हैं।
‘क्राफ्टेड फॉर द फ्यूचर’, की यह 10 दिवसीय प्रदर्शनी राष्ट्रीय हस्तशिल्प सप्ताह का हिस्सा है। 21 दिसंबर 2025 तक यह जनता के लिए खुली रहेगी, जिसमें सभी आगंतुकों के लिए निःशुल्क प्रवेश होगा। ‘क्राफ्टेड फॉर द फ्यूचर’, व्यापक ‘वीव द फ्यूचर’ श्रृंखला का तीसरा संस्करण है, जो दैनिक भौतिक संस्कृति पर जोर देता है—खासकर समुदायों और उनके पर्यावरण और दैनिक जीवन को आकार देने वाली सामग्रियों के बीच अंतर्निहित संबंध पर। पूरे भारत से कारीगरों और सामग्री नवप्रवर्तकों पर प्रकाश डालकर, यह पहल पारिस्थितिक संतुलन, क्षेत्रीय पहचान और गहन सामग्री बुद्धिमत्ता पर आधारित प्रथाओं को भी प्रदर्शित करती है।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए वस्त्र मंत्रालय की हस्तकला विभाग की विकास आयुक्त सुश्री अमृत राज ने कहा कि भारत की शिल्प बुद्धिमत्ता को जीवित रखना स्मृति को संरक्षित करने के बारे में नहीं है, बल्कि शिल्प को एक जीवंत, सांस लेने वाली शक्ति के रूप में पहचानना है जो हमारे कल को आकार दे रही है।
‘क्राफ्टेड फॉर द फ्यूचर’ प्रदर्शनी के दर्शक भारत की भौतिक संस्कृतियों की उत्पत्ति, प्रक्रियाओं और समकालीन संभावनाओं में डुबोने के लिए डिज़ाइन किए गए विभिन्न कार्यक्रमों का अनुभव कर सकते हैं।
इस प्रदर्शनी में शामिल हैं—
ऐसे मोहक संस्थापन जिसमे रोज रोज की भौतिक सामग्रियों की झलक दिखाई पड़ती है।
विशेष रूप से निर्मित हस्तशिल्प की वस्तुओं का बाजार जहाँ स्थानीय, शिल्पी कारीगर अपनी स्थानीय पुनर्चक्रीय सामग्रियों के साथ अपनी कलाकृति निर्मित की हुई हो ।
सामग्री की उत्पत्ति और शिल्प प्रक्रियाओं पर दैनिक फिल्म स्क्रीनिंग, प्रदर्शन तथा संवाद।
मिट्टी के बर्तन, कढ़ाई, ऊन, बांस, प्राकृतिक रंग, खाद्य परंपराओं आदि में कारीगरों, डिजाइनरों तथा अभ्यासकर्ताओं द्वारा संचालित हैंड्स-ऑन वर्कशॉप (वर्कशॉप के लिए पंजीकरण आवश्यक)।
यह आयोजन कला निर्माण सामग्री की उत्पत्ति और शिल्प-नेतृत्व वाले पारिस्थितिक ज्ञान तंत्रों के साथ जनता की भागीदारी बढे इस बात को प्रोत्साहित करता है। साथ ही कलाकृति की पारिस्थितिकी तंत्र जनित ज्ञान प्रणाली को पूरी गहराई से यह लोगो को अवगत कराता है की कैसे निर्माण सामग्री और कारीगरों से एक चेतनशील और सतत संबंधों के माध्यम से सतत भविष्य को आकार देने की गहरी समझ विकसित हो उद्घाटन समारोह में वस्त्र मंत्रालय की डीसी हैंडीक्राफ्ट्स सुश्री अमृत राज, संयुक्त राष्ट्र रेसिडेंट कोऑर्डिनेटर कार्यालय, भारत की चीफ ऑफ स्टाफ सुश्री राधिका कौल बत्रा, पर्यावरणीय पुनर्स्थापक सुश्री पद्मावती द्विवेदी तथा गिव मी ट्रीज ट्रस्ट के संस्थापक स्वामी प्रेम परिवर्तन (पीपल बाबा) उपस्थित थे
मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने आज होटल एमरॉल्ड ग्रैण्ड, सहस्त्रधारा रोड, देहरादून में आयोजित 47वीं ऑल इंडिया पब्लिक रिलेशन कॉन्फ्रेंस–2025 का दीप प्रज्वलन कर शुभारंभ किया । कॉन्फ्रेंस स्थल पर आयोजित फोटो प्रदर्शनी का अवलोकन करने के साथ ही विभिन्न हस्तशिल्प उत्पादों के स्टॉल का निरीक्षण कर स्थानीय कला एवं शिल्प को प्रोत्साहन दिया।
देहरादून 13 से 15 दिसंबर तक 47वीं ऑल इंडिया पब्लिक रिलेशंस कॉन्फ्रेंस की मेज़बानी कर रहा है, जिसमें देशभर के जनसंपर्क एवं कम्युनिकेशन प्रोफेशनल्स भाग ले रहे हैं। पब्लिक रिलेशंस सोसाइटी ऑफ इंडिया (PRSI) द्वारा आयोजित यह सम्मेलन “विकसित भारत @2047: विकास भी, विरासत भी” थीम पर केंद्रित है।
सम्मेलन का उद्घाटन आज 13 दिसंबर को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने किया। तीन दिवसीय आयोजन में उत्तराखण्ड की 25 वर्ष की विकास यात्रा, मीडिया व जनसंपर्क की भूमिका, तकनीक, GST, AI, साइबर क्राइम, मिसइन्फॉर्मेशन और अंतरराष्ट्रीय जनसंपर्क जैसे विषयों पर विशेषज्ञ सत्र आयोजित होंगे। रूस से आए प्रतिनिधियों की सहभागिता सम्मेलन को अंतरराष्ट्रीय स्वरूप देगी। 15 दिसंबर को सम्मेलन का समापन होगा।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने देशभर से आए जनसंपर्क विशेषज्ञों, प्रतिनिधियों एवं युवा प्रतिभाओं का स्वागत करते हुए कहा कि इस वर्ष की थीम “पीआर विजन फॉर–2047” विकसित भारत के संकल्प को साकार करने की दिशा में अत्यंत प्रासंगिक है। उन्होंने कहा कि आज के समय में पब्लिक रिलेशन केवल सूचना संप्रेषण का माध्यम नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण की प्रक्रिया का एक महत्वपूर्ण और प्रभावी अंग बन चुका है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्तमान डिजिटल युग में, जहाँ एक ओर सूचना की प्रचुरता है, वहीं दूसरी ओर गलत सूचना की चुनौती भी गंभीर है। ऐसे में सरकार और जनता के बीच सही, समयबद्ध और भरोसेमंद संवाद स्थापित करना जनसंपर्क की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड जैसे प्राकृतिक आपदाओं एवं सामरिक दृष्टि से संवेदनशील राज्य में संवाद केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि विश्वास की बुनियाद है।
उन्होंने कहा कि आपदा प्रबंधन, सुशासन, धार्मिक एवं पर्यटन प्रबंधन जैसे क्षेत्रों में भविष्य की पीआर प्रणाली को तेज, तकनीकी रूप से सक्षम और जनभावनाओं के प्रति संवेदनशील बनाना होगा, ताकि सरकार और जनता के बीच आदेश का नहीं बल्कि साझेदारी और विश्वास का संबंध स्थापित हो सके।
श्री धामी ने विश्वास व्यक्त किया कि पब्लिक रिलेशन संकट के समय एक सक्षम कमांड सेंटर की भूमिका निभाने के साथ-साथ, देश के लिए सकारात्मक नैरेटिव गढ़ने में भी महत्वपूर्ण योगदान दे सकता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि देवभूमि उत्तराखण्ड से निकला यह विजन विकसित भारत–2047 के निर्माण में सहायक सिद्ध होगा।
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में राज्य की विकास यात्रा पर प्रकाश डालते हुए कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में उत्तराखण्ड निरंतर प्रगति के पथ पर अग्रसर है। उन्होंने बताया कि राज्य की अर्थव्यवस्था का आकार लगभग 3.78 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचने जा रहा है तथा प्रति व्यक्ति आय में भी उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। इसके साथ ही राज्य में बजट में अभूतपूर्व बढ़ोतरी और बेरोजगारी दर में ऐतिहासिक कमी आई है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, खेल, पेयजल, हवाई एवं रेल कनेक्टिविटी जैसे क्षेत्रों में आधुनिक अवसंरचना का विकास तेज़ी से किया जा रहा है। धार्मिक पर्यटन, वेलनेस, एडवेंचर टूरिज्म, फिल्म शूटिंग एवं वेडिंग डेस्टिनेशन के रूप में उत्तराखण्ड को वैश्विक पहचान दिलाने की दिशा में भी सरकार निरंतर प्रयासरत है।
उन्होंने बताया कि ऋषिकेश–कर्णप्रयाग रेल परियोजना, दिल्ली–देहरादून एक्सप्रेस-वे, रोपवे परियोजनाएं तथा हवाई अड्डों के विस्तार जैसे कार्य राज्य के विकास को नई गति दे रहे हैं। साथ ही शीतकालीन यात्रा की पहल के माध्यम से वर्ष भर पर्यटन को बढ़ावा दिया जा रहा है।
उन्होंने निवेश, उद्योग और स्थानीय अर्थव्यवस्था को सशक्त करने के लिए किए जा रहे प्रयासों का उल्लेख करते हुए कहा कि ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट के माध्यम से प्राप्त निवेश प्रस्तावों को धरातल पर उतारने में राज्य को उल्लेखनीय सफलता मिली है। सिंगल विंडो सिस्टम, नई औद्योगिक एवं स्टार्टअप नीतियों से उत्तराखण्ड निवेश के लिए एक उभरता हुआ केंद्र बनकर सामने आया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि “एक जनपद–दो उत्पाद”, हाउस ऑफ हिमालयाज, मिलेट मिशन, नई पर्यटन एवं फिल्म नीति जैसी योजनाएं स्थानीय आजीविका को मजबूती प्रदान कर रही हैं। राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय रैंकिंग्स में उत्तराखण्ड की उपलब्धियां राज्य के पारदर्शी, प्रभावी और जनभागीदारी आधारित शासन का प्रमाण हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार विकास के साथ-साथ सांस्कृतिक मूल्यों, जनसंख्या संतुलन और सामाजिक संरचना के संरक्षण के लिए भी पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड की नीतियां और नवाचार आज देश के अन्य राज्यों के लिए आदर्श बन रहे हैं और विकसित भारत–2047 की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं ।
इस अवसर पर अपर सचिव और सूचना महानिदेशक बंशीधर तिवारी को पीआरएसआई द्वारा सुशासन में उत्कृष्टता हेतु राष्ट्रीय सम्मान प्रदान किया गया |
कार्यक्रम में राज्यसभा सांसद नरेश बंसल, कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी, परमार्थ निकेतन से स्वामी चिदानंद मुनि, अपर सचिव बंशीधर तिवारी, पीआरएसआई के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री अजीत पाठक, देहरादून चैप्टर के अध्यक्ष श्री रवि बिजारनिया, रूसी प्रतिनिधि श्री माइकल मस्लोव, सुश्री दाव्यदेंको यूलिया, सुश्री अन्ना तलानीना सहित देशभर से आए जनसंपर्क कार्मिक एवं कम्युनिकेशन प्रोफेशनल्स उपस्थित रहे।
बस्तर सहित पूरे भारत से नक्सलवाद 31 मार्च 2026 तक खत्म हो जायेगा
केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने आज छत्तीसगढ़ के जगदलपुर में बस्तर ओलिंपिक के समापन समारोह को संबोधित किया। इस अवसर पर छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री
विष्णुदेव साय और उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।
इस अवसर पर अमित शाह ने कहा कि हमने तय किया था कि 31 मार्च, 2026 से पहले पूरे देश से लाल आतंक को खत्म कर देंगे और आज बस्तर ओलंपिक- 2025 में हम इस कगार पर खड़े हैं। उन्होंने कहा कि अगले वर्ष नवंबर-दिसंबर तक बस्तर ओलंपिक-2026 के समय तक पूरे भारत और छत्तीसगढ़ से लाल आतंक समाप्त हो चुका होगा औऱ नक्सलमुक्त बस्तर आगे बढ़ रहा होगा।
श्री अमित शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में हमने यह संकल्प लिया है कि पूरे बस्तर और भारत को नक्सलमुक्त कराना है। उन्होंने कहा कि हमें यहीं नहीं रुकना बल्कि कांकेर, कोंडागांव, बस्तर, सुकमा, बीजापुर, नारायणपुर और दंतेवाड़ा के 7 ज़िलों का संभाग बस्तर, दिसंबर 2030 दिसंबर तक देश के सबसे अधिक विकसित आदिवासी संभाग बनेगा। उन्होंने कहा कि बस्तर के हर व्यक्ति को रहने के लिए घर, बिजली, शौचालय, नल से पीने का पानी, गैस सिलिंडर, 5 किलो अनाज और 5 लाख तक का मुफ्त इलाज, बस्तर के घर घर में पहुचाने का संकल्प हमारी सरकार का संकल्प है। श्री शाह ने कहा कि हमने अगले पांच साल में बस्तर को देश का सबसे विकसित आदिवासी संभाग बनाने का संकल्प लिया है। उन्होंने कहा कि इसमें प्रधानमंत्री मोदी जी के नेतृत्व में भारत सरकार और श्री विष्णुदेव साय जी के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार कंधे से कंधा मिलाकर बस्तर को विकसित बस्तर बनाने के लिए मिलकर आगे बढ़ेंगे।
केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि बस्तर का हर गांव सड़क से जुड़ेगा, वहां बिजली होगी, 5 किलोमीटर के क्षेत्र में बैंकिंग सुविधाएं होंगी और सबसे घने PHC / CHC का नेटवर्क बनाने का काम भी हमारी सरकार करेगी। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में वन उपज की प्रोसेसिंग के लिए कोऑपरेटिव आधार पर यूनिट्स लगाए जाएंगे। उन्होंने कहा कि बस्तर के सातों ज़िले सभी आदिवासी ज़िलों में सबसे अधिक दूध उत्पादन कर डेयरी के माध्यम से अपनी आय बढ़ाने वाले ज़िले बनेंगे। उन्होंने कहा कि बस्तर में नए उद्योग, उच्च शिक्षा की व्यवस्था, भारत में सबसे अच्छा स्पोर्ट्स संकुल और अत्याधुनिक अस्पताल की व्यवस्था भी हम करेंगे। श्री शाह ने कहा कि कुपोषण के लिए भी यहां विशेष स्कीम चलाई जाएगी। उन्होंने कहा कि जिन्होंने आत्मसमर्पण किया है और जो नक्सलवाद के कारण घायल हुए हैं, उनके लिए एक बहुत आकर्षक पुनर्वसन योजना भी हम लाएंगे। गृह मंत्री ने कहा कि हमारा लक्ष्य है कि नक्सलवाद समाप्त हो क्योंकि नक्सलवादी इस क्षेत्र के विकास पर नाग बनकर फन फैलाए बैठे हैं। उन्होंने कहा कि नक्सलवाद समाप्त होने के साथ ही इस क्षेत्र में विकास की एक नई शुरूआत होगी और प्रधानमंत्री मोदी जी और श्री विष्णुदेव जी के नेतृत्व में यह सबसे विकसित क्षेत्र बनेगा।
श्री अमित शाह ने कहा कि बस्तर ओलंपिक-2025 में सात ज़िलों की सात टीमें और एक टीम आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों की थी। उन्होंने कहा कि जब 700 से अधिक सरेंडर्ड नक्सलियों ने इन खेलों में भाग लिया तो यह देखकर बहुत अच्छा लगा। उन्होंने कहा कि नक्सलवाद के झांसे में आकर उनका पूरा जीवन तबाह हो जाता और हथियार डालकर मुख्यधारा में आने वाले ऐसे 700 से अधिक युवा आज खेल के रास्ते पर आए हैं। श्री शाह ने दोहराया कि 31 मार्च, 2026 को यह देश नक्सलवाद से मुक्त हो जाएगा। उन्होंने हिंसा में लिप्त नक्सलियों से अपील करते हुए कहा कि अब भी गुमराह होकर हमारे ही जो लोग हाथ में हथियार लेकर बैठे हैं, वो हथियार डाल दें, पुनर्वसन नीति का फायदा उठाएं, अपने और अपने परिवार के कल्याण के बारे में सोचें और विकसित बस्तर के संकल्प के साथ जुड़ जाएं। उन्होंने कहा कि नक्सलवाद से किसी का भला नहीं होता, न हथियार उठाने वाले लोगों का, न आदिवासियों और न सुरक्षाबलों का भला होता है। उन्होंने कहा कि सिर्फ शांति ही विकास का रास्ता प्रशस्त कर सकती है।
केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री ने कहा कि आत्मसमर्पण कर चुके 700 नक्सलियों ने इन खेलों में खिलाड़ी के रूप में सामने आकर पूरे देश के लिए बहुत बड़ा उदाहरण प्रस्तुत किया है। उन्होंने कहा कि इन खिलाड़ियों ने भय की जगह आशा चुनी, विभाजन की जगह एकता का रास्ता चुना और विनाश की जगह विकास का रास्ता चुना है और यही प्रधानमंत्री मोदी जी की नए भारत और विकसित बस्तर की संकल्पना है। उन्होंने कहा कि हमारे बस्तर की संस्कृति दुनियाभर में सबसे अधिक समृद्ध संस्कृति है। उन्होंने कहा कि सभी जनजातियों का खानपान, परिवेश, कला, वाद्य, नृत्य और पारंपरिक खेल सिर्फ छत्तीसगढ़ की नहीं बल्कि पूरे भारत की सबसे समृद्ध विरासत है।
श्री अमित शाह ने कहा कि हाल ही में छत्तीसगढ़ सरकार ने आधुनिक रिकॉर्डिंग स्टूडियो बनाकर यहां के पारंपरिक गीतों को सहेजने का काम किया है। उन्होंने कहा कि ऐसे कई परंपरागत उत्सव और त्योहार जो नक्सलवाद के लाल आतंक के साए में समाप्त होने की कगार पर थे, उन्हें भी आगे बढ़ाया गया है। उन्होंने कहा कि आज जिन खिलाड़ियों ने बस्तर ओलंपिक में भाग लिया है, उनकी प्रतिभा को पहचानने के लिए स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया के अधिकारियों की एक टीम यहां आई है। श्री शाह ने कहा कि इन खिलाड़ियों की प्रतिभा को पहचानकर आने वाले कॉमनवेल्थ गेम्स और ओलंपिक खेलों में बस्तर के खिलाड़ी खेलें, वहां तक ले जाने की व्यवस्था हमारी सरकार ने की है। श्री शाह ने कहा कि पिछले वर्ष बस्तर ओलंपिक में 1 लाख 65 हज़ार खिलाड़ियों ने हिस्सा लिया था, जबकि इस वर्ष 3 लाख 91 हज़ार खिलाड़ियों ने हिस्सा लिया है, जो लगभग ढाई गुना की वृद्धि है और बहनों की प्रतिभागिता में लगभग तीन गुना वृद्धि हुई है। उन्होंने कहा कि यह उत्साह देखकर आने वाले दिनों में प्रधानमंत्री मोदी जी ने खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स के लिए छत्तीसगढ़ को चुना है।
केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि बस्तर अब बदल रहा है और बस्तर अब भय नहीं भविष्य का पर्याय बन चुका है, जहां गोलियों की गूंज सुनाई देती थी, वहां आज स्कूल की घंटियां बज रही हैं। जहां सड़क बनाना एक सपना था, वहां आज रेलवे ट्रैक और राजमार्ग बिछाए जा रहे हैं, जहां लाल सलाम के नारे लगते थे, वहां आज भारत माता की जय के नारे लगते हैं। उन्होंने कहा कि हम सब विकसित बस्तर के लिए कृत संकल्पित हैं। उन्होंने कहा कि भारत सरकार और छत्तीसगढ़ सरकार ने मुठभेड़ों में नक्सलियों को मारने का लक्ष्य नही रखा था, क्योंकि 2000 से अधिक नक्सली युवाओं ने सरेंडर भी किया है। उन्होंने कहा कि हमारे आदिवासी समाज के प्रमुखों ने इसमें बहुत बड़ा योगदान दिया है, उनके मार्गदर्शन ने नक्सली युवाओं को ढांढस भी बंधाया है और हिम्मत भी दी है। गृह मंत्री ने समाज के प्रमुखों और समाजसेवकों से अपील करते हुए कहा कि जो लोग आज भी हथियार लेकर घूम रहे हैं, वे उन्हें समझाकर समाज की मुख्यधारा वापिस में लाने का काम करें।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि प्रदेश में किसानों को सभी प्रकार की सुविधाएं उपलब्ध कराने हेतु डबल इंजन सरकार कृतसंकल्पित है। ‘खेती की बात खेत पर’ के भाव के साथ हम लखनऊ के सचिवालय में बैठकर नहीं, बल्कि किसान के खेत में जाकर योजनाओं का लाभ अन्नदाता किसान को प्रदान करेंगे। हमारा अन्नदाता किसान समृद्ध होगा, तो प्रदेश समृद्ध बनेगा। प्रदेश समृद्ध होगा तो देश भी समृद्ध होगा। किसान प्रगति करेगा, तो प्रदेश प्रगति करेगा और प्रदेश प्रगति करेगा ता देश प्रधानमंत्री जी के विजन के अनुरूप विकसित भारत की संकल्पना काे आगे बढ़ाने में सफल होगा। मुख्यमंत्री आज जनपद बाराबंकी में ‘प्रगतिशील किसान सम्मेलन: खेती की बात खेत पर’ एवं किसान पाठशाला के 08वें संस्करण का शुभारम्भ करने के पश्चात आयोजित कार्यक्रम में अपने विचार व्यक्त कर रहे थे। इस अवसर पर मुख्यमंत्री जी ने प्रदेश के पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित प्रगतिशील किसान श्री राम सरन वर्मा तथा अन्य किसानाें काे सम्मानित किया। मुख्यमंत्री जी ने विभिन्न याेजनों के लाभार्थियाें को प्रशस्ति-पत्र तथा प्रमाण-पत्र प्रदान किये। उन्हाेंने विभिन्न विभागों द्वारा लगायी गयी प्रदर्शनी का अवलाेकन, किसानाें से संवाद तथा खेतों का निरीक्षण किया। मुख्यमंत्री जी ने कहा कि उत्तर प्रदेश देश में सर्वाधिक आबादी वाला राज्य है। विगत 11 वर्षों में प्रदेश के प्रत्येक नागरिक ने प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के मार्गदर्शन में प्रदेश काे अपनी भावनाओं के अनुरूप समग्र विकास की धुरी बनते हुए देखा है। यहां अत्यन्त उर्वरा भूमि, पर्याप्त जल संसाधन तथा बेहतर कनेक्टिविटी मौजूद है। प्रदेश में देश की कुल कृषि याेग्य भूमि का मात्र 11 प्रतिशत है। जबकि यह राज्य देश की 21 प्रतिशत खाद्यान्न आपूर्ति करता है। यह तब सम्भव हों पाया, जब डबल इंजन सरकार ने प्रधानमंत्री जी के विजन के अनुरूप किसानों का े बीज से बाजार तक की सुविधा से आच्छादित किया।
इस अवसर पर प्रदेश में कृषि विकास पर आधारित लघु फिल्म प्रदर्शि त की गयी। कार्यक्रम काे कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने भी सम्बोधित किया। इस अवसर पर कृषि राज्य मंत्री बलदेव सिंह , खाद्य एवं रसद राज्य मंत्री सतीश चन्द्र शर्मा, कारागार राज्य मंत्री श्री सुरेश राही सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थ े।
काशी तमिल संगमम् 4.0 के अंतर्गत तमिलनाडु से आया छठा महिला दल हनुमान घाट पहुंचा, जहां सभी महिलाओं ने गंगा में स्नान कर मां गंगा की पूजा-अर्चना की और सुख-समृद्धि का आशीर्वाद मांगा। गंगा स्नान के बाद समूह ने घाट पर स्थित प्राचीन मंदिरों में दर्शन-पूजन किया। सभी को मंदिरों के इतिहास, दिव्यता और भव्यता के बारे में जानकारी दी गई।
इसके उपरांत तमिल प्रतिनिधिमंडल हनुमान घाट स्थित महाकवि सुब्रह्मण्य भारती के घर पहुंचा। वहां उन्होंने उनके परिवार के सदस्यों से मुलाकात की। समूह के सदस्यों में जानने की काफी जिज्ञासा दिखाई दी। उन्होंने सुब्रह्मण्य भारती के घर के समीप स्थित पुस्तकालय का भी भ्रमण किया और वहां से संबंधित कई महत्वपूर्ण जानकारियां प्राप्त कीं।
सुब्रह्मण्य भारती के घर का भ्रमण करने के बाद यह समूह कांची मठ पहुंचा, जहां उन्हें मठ के इतिहास के बारे में जानकारी दी गई। काशी में स्थित दक्षिण भारतीय शैली के मंदिरों को देखकर महिलाओं का दल उत्साहित नजर आया।
तमिलनाडु से आई मुथुलक्ष्मी ने कहा, “सुबह हम लोग वाराणसी के गंगा घाट पर गए थे। गंगा स्नान करके मन पवित्र हो गया। वहां हमने मंदिरों का भ्रमण किया और यह देखकर आश्चर्य हुआ कि काशी में भी हमारे दक्षिण भारत जैसे मंदिर मौजूद हैं। हम लोग विश्वनाथ मंदिर भी गए। कभी सोचा नहीं था कि बाबा के दर्शन इतनी आसानी से हो जाएंगे। इसके लिए प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी को धन्यवाद, जिन्होंने दक्षिण भारत की महिलाओं के लिए इतना सोचा। आज हम महिलाएं अयोध्या, प्रयागराज और काशी का भ्रमण कर रही हैं।
संयुक्त दीक्षांत परेड (सीजीपी) 13 दिसंबर को हैदराबाद के डुंडीगल स्थित वायु सेना अकादमी (एएफए) में आयोजित की गई। यह भारतीय वायु सेना (आईएएफ) की फ्लाइंग और ग्राउंड ड्यूटी शाखाओं के फ्लाइट कैडेटों के पूर्व-कमीशनिंग प्रशिक्षण के सफल समापन का प्रतीक थी। चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) जनरल अनिल चौहान परेड के समीक्षा अधिकारी (आरओ) थे और उन्होंने 216वें कोर्स के स्नातक फ्लाइट कैडेटों को राष्ट्रपति कमीशन प्रदान किया। इस दिन कुल 244 फ्लाइट कैडेटों ने दीक्षांत समारोह में भाग लिया जिनमें 215 पुरुष और 29 महिला कैडेट शामिल थे।
सीडीएस का स्वागत एयर मार्शल तेजिंदर सिंह, एयर ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ, ट्रेनिंग कमांड और एयर मार्शल पी.के. वोहरा, कमांडेंट, एएफए ने किया। परेड द्वारा आरओ को जनरल सैल्यूट दिया गया जिसके बाद एक शानदार मार्च पास्ट हुआ।
इस अवसर पर भारतीय नौसेना के छह अधिकारियों, भारतीय तटरक्षक बल के आठ अधिकारियों और वियतनाम समाजवादी गणराज्य के दो प्रशिक्षुओं को उड़ान प्रशिक्षण सफलतापूर्वक पूरा करने पर ‘विंग्स’ से सम्मानित किया गया। पांच अधिकारियों को नेविगेशन प्रशिक्षण पूरा करने पर ‘ब्रेवेट’ प्रदान किए गए। स्नातक होने वाले अधिकारियों के परिवार के सदस्य समारोह में उपस्थित थे!
परेड का मुख्य आकर्षण ‘कमीशनिंग समारोह’ था जिसमें स्नातक कैडेटों को आरओ द्वारा फ्लाइंग ऑफिसर के रूप में कमीशन दिया गया। स्नातक अधिकारियों को शपथ दिलाई गई जिसमें उन्होंने देश की संप्रभुता और सम्मान की रक्षा करने का संकल्प लिया। स्नातक परेड के दौरान पिलाटस पीसी-7, हॉक, किरण और चेतक विमानों द्वारा सुव्यवस्थित और समन्वित फ्लाई पास्ट किया गया। आकाश गंगा टीम और एयर वॉरियर ड्रिल टीम (एडब्ल्यूडीटी) के रोमांचक प्रदर्शन ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
विभिन्न प्रशिक्षण विषयों में उनके असाधारण प्रदर्शन को सम्मान देते हुए, आरओ ने फ्लाइंग शाखा के फ्लाइंग ऑफिसर तनिष्क अग्रवाल को पायलट कोर्स में समग्र योग्यता क्रम में प्रथम स्थान प्राप्त करने के लिए प्रतिष्ठित ‘राष्ट्रपति पट्टिका’ और ‘नवानगर सोर्ड ऑफ ऑनर’ से सम्मानित किया। फ्लाइंग ऑफिसर सक्षम डोबरियाल को नेविगेशन स्ट्रीम में समग्र योग्यता क्रम में प्रथम स्थान प्राप्त करने के लिए ‘राष्ट्रपति पट्टिका’ से सम्मानित किया गया। फ्लाइंग ऑफिसर नितेश कुमार को ग्राउंड ड्यूटी शाखाओं में समग्र योग्यता क्रम में प्रथम स्थान प्राप्त करने के लिए ‘राष्ट्रपति पट्टिका’ से सम्मानित किया गया।
परेड को संबोधित करते हुए, आरओ ने नवनियुक्त अधिकारियों की बेदाग वर्दी, सटीक ड्रिल और परेड के उच्चतम मानकों के पालन की सराहना की। आरओ ने स्नातक होने वाले अधिकारियों को सेना में शामिल होने और मातृभूमि की सेवा करने के लिए बधाई दी। उन्होंने अधिकारियों से अहंकार और अज्ञानता से दूर रहने और सिद्धांतों के मामले में दृढ़ रहने का आग्रह किया।
उन्होंने युद्ध जीतने के लिए विषमता पैदा करने और उसे बनाए रखने पर भी जोर दिया। ऐसा उभरते क्षेत्रों में करना कहीं अधिक आसान है। उन्होंने प्रौद्योगिकी को एक निर्णायक कारक बताया और कहा कि इसलिए हमें एआई संचालित डेटा फ्यूजन, मानव-मानवरहित टीमिंग, स्वायत्त और मानवरहित प्रणालियों और संज्ञानात्मक डोमेन संचालन पर ध्यान केंद्रित करने की आवश्यकता है।
उन्होंने आगे कहा कि ऑपरेशन सिंदूर भारतीय वायु सेना की अद्वितीय पेशेवराना अंदाज का प्रमाण है, एक निरंतर प्रक्रिया है जिसे जेएआई द्वारा निर्देशित किया जाना चाहिए। संयुक्तता, आत्मनिर्भरता और नवाचार जेएआई के मूल सिद्धांत हैं और ये भारत की युद्ध शक्ति के भविष्य को आकार देंगे। उन्होंने अधिकारियों को साहसपूर्वक सेवा करने और निडरता से नेतृत्व करने के लिए प्रोत्साहित करते हुए अपना संबोधन समाप्त किया।
परेड का समापन नवनियुक्त अधिकारियों के दो कॉलम की धीमी गति से मार्च करने के साथ हुआ जो सैन्य मार्च की धुनों पर आधारित था, और एक विशेष भावनात्मक क्षण आया जब वायुसेना प्रमुख (सीएएस) एयर चीफ मार्शल एपी सिंह नेउनके ऊपर तीन विमानों के किरण फॉर्मेशन का नेतृत्व किया और उनके साथ उड़ान भरी जबकि उनके तत्काल कनिष्ठ अधिकारियों द्वारा उन्हें पहली सलामी दी गई।
सारंग हेलीकॉप्टर की प्रदर्शन टीम और सूर्यकिरण एरोबैटिक टीम (एसकेएटी) द्वारा प्रस्तुत एक मनमोहक सिंक्रोनस फ्लाइंग डिस्प्ले, सीजीपी के भव्य समापन का हिस्सा था।
डाक विभाग ने बॉम्बे जिमखाना की 150वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में एक स्मारक डाक टिकट जारी किया है , जो खेल उत्कृष्टता की इसकी गौरवशाली विरासत और राष्ट्र के लिए इसके स्थायी सांस्कृतिक योगदान का जश्न मना रहा है।
इस स्मारक डाक टिकट को मुंबई के बॉम्बे जिमखाना में केंद्रीय संचार एवं उत्तर पूर्वी क्षेत्र विकास मंत्री ज्योतिरादित्य एम. सिंधिया द्वारा औपचारिक रूप से जारी किया गया । इस अवसर पर राज्यसभा सांसद मिलिंद देवरा , बॉम्बे जिमखाना के अध्यक्ष संजीव सरन मेहरा , नवी मुंबई क्षेत्र की पोस्टमास्टर जनरल सुश्री सुचिता जोशी और अन्य विशिष्ट अतिथियों एवं बॉम्बे जिमखाना के सदस्यों की उपस्थिति रही।
इस अवसर पर श ज्योतिरादित्य एम. सिंधिया ने आशा व्यक्त की कि यह स्मारक डाक टिकट हर व्यक्ति की हथेली में एक संदेशवाहक की तरह काम करेगा, जो एक लिफाफे से दूसरे लिफाफे और एक हाथ से दूसरे हाथ तक यात्रा करेगा। उन्होंने कहा कि खेल की ही तरह, यह डाक टिकट भी कहानियों और मूल्यों को समेटे हुए है, जो युवा लड़के-लड़कियों को खेल अपनाने, सक्रिय रहने और जीवन को सकारात्मक रूप से आकार देने में संस्थानों की शक्ति पर विश्वास करने के लिए प्रेरित करता है।
श्री सिंधिया ने इंडिया पोस्ट और बॉम्बे जिमखाना क्लब के बीच तुलना करते हुए कहा कि दोनों ही संस्थाएं भावनाओं को व्यक्त करने, लोगों को जोड़ने और पीढ़ियों के बीच सेतु बनाने पर आधारित हैं। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के दूरदृष्टि और अटूट समर्थन से डाक विभाग में एक क्रांतिकारी बदलाव हो रहा है—अपनी पुरानी प्रणालियों को नया रूप दे रहा है, अपनी सेवाओं का विस्तार कर रहा है और अगले पांच वर्षों में विश्व का सबसे बड़ा और सबसे समावेशी लॉजिस्टिक्स संगठन बनने की दिशा में अग्रसर है।
सन् 1875 में स्थापित बॉम्बे जिमखाना भारत की खेल और सामाजिक विरासत का एक विशिष्ट स्तंभ रहा है, जिसने पीढ़ियों से खिलाड़ियों का पोषण किया है और साथ ही सांस्कृतिक और खेल गतिविधियों के लिए एक जीवंत केंद्र के रूप में कार्य किया है। 150 वर्ष के दौरान, इस संस्था ने खेल भावना, सौहार्द और सामुदायिक जुड़ाव की प्रबल भावना को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
यह स्मारक डाक टिकट बॉम्बे जिमखाना के प्रतिष्ठित परिसर और मैदानों को खूबसूरती से दर्शाता है , जो इसकी चिरस्थायी विरासत और भारत के खेल परिदृश्य में इसके योगदान का प्रतीक है।
इस विशेष अंक के माध्यम से, डाक विभाग संस्था की 150 साल की यात्रा का सम्मान करता है और डाक टिकट संग्रह के माध्यम से भारत की समृद्ध खेल उपलब्धियों को संरक्षित करने और प्रदर्शित करने की अपनी प्रतिबद्धता को मजबूत करता है।
यह स्मारक डाक टिकट डाक टिकट कार्यालयों के माध्यम से और ऑनलाइन www.epostoffice.gov.in पर उपलब्ध होगा
अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय ने आज अजमेर में 17 दिसंबर, से शुरू होने वाले दरगाह ख्वाजा साहब के 814वें उर्स की तैयारियों का जायजा लिया। एक समीक्षा बैठक भी आयोजित की। समीक्षा उर्स के दौरान दरगाह आने वाले यात्रियों (जियारिनों) की सुरक्षा, संरक्षा और सुविधा के लिए व्यापक व्यवस्था सुनिश्चित करने पर केंद्रित थी। मंत्रालय के अधिकारियों ने आयोजन के सुचारू और शांतिपूर्ण संचालन को सुनिश्चित करने के लिए सभी संबंधित एजेंसियों के बीच घनिष्ठ समन्वय की आवश्यकता पर बल दिया।
एक परंपरा के रूप में, प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी भारत की समृद्ध सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत के प्रति सम्मान की भावना को दर्शाते हुए, दरगाह ख्वाजा साहब में प्रतिवर्ष एक चादर भेजते हैं।
बैठक के दौरान, प्रमुख व्यवस्थाओं की समीक्षा की गई जिनमें महत्वपूर्ण स्थानों पर सीसीटीवी कैमरे लगाना, पर्याप्त पेयजल और शौचालयों की व्यवस्था करना, पार्किंग सुविधाएँ, स्वच्छता और सफाई बनाए रखना, भीड़ का प्रभावी प्रबंधन और डीकेएस क्षेत्र से आवारा पशुओं को हटाना शामिल था। जिला प्रशासन ने बताया कि सभी आवश्यक उपाय किए जा रहे हैं और संबंधित विभागों को पूरी तरह तैयार रहने के निर्देश दिए गए हैं।
फील्ड समीक्षा के रूप में, मंत्रालय के अधिकारियों ने अजमेर के बाहरी क्षेत्र में लगभग 150 बीघा भूमि पर बनाए जा रहे विश्राम शिविर आश्रय स्थल (मुसाफिरखाना) का भी दौरा किया, ताकि उर्स के दौरान जियारिनों के आवास और सुविधा के लिए बनाई जा रही सुविधाओं का आकलन किया जा सके।
मंत्रालय ने जिला प्रशासन द्वारा साझा की गई तैयारियों पर संतोष व्यक्त किया और उर्स के दौरान किसी भी समस्या के त्वरित समाधान के लिए निरंतर निगरानी के महत्व पर जोर दिया। बैठक की अध्यक्षता अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय के निदेशक श्री एसपी सिंह तेवतिया ने की और इसमें जिला प्रशासन के अधिकारियों और दरगाह ख्वाजा साहब (डीकेएस) के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय ने राज्य और जिला अधिकारियों के साथ मिलकर काम करने की अपनी प्रतिबद्धता की पुष्टि की ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि ज़ियारिन 814वें उर्स के दौरान सुरक्षित, संरक्षित और आरामदायक वातावरण में अपनी यात्रा कर सकें।
केंद्रीय केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी उत्तर प्रदेश भाजपा के नए अध्यक्ष हाेंगे। यूपी भाजपा अध्यक्ष पद के लिए उन्हाेंने शनिवार काे अपना नामांकन पत्र दाखिल किया। उनके खिलाफ किसी ने नामांकन नहीं किया ताे पंकज भाजपा उत्तर प्रदेश के नए चौधरी हाे गए। उनके भाजपा उत्तर प्रदेश के नियुक्त हाेने की घाेषणा रविवार काे की जाएगी।
इससे पहले यूपी बीजेपी अध्यक्ष की रेस में सबसे आगे चल रहेपंकज चौधरी ने शनिवार को पार्टी कार्यालय पहुंचकर अपना नामांकन दाखिल किया। दोपहर एक बजे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पार्टी दफ्तर पहुंचे, जहां कार्यकर्ताओं ने ‘प्रभु राम’ और ‘हर-हर महादेव’ के जयकारे लगाकर उनका जोरदार स्वागत किया। सीएम ने भी हाथ हिलाकर अभिवादन स्वीकार किया।
पंकज_चौधरी भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता हैं। OBC (अन्य पिछड़ा वर्ग) के कुर्मी समुदाय से आते हैं। उत्तर प्रदेश के महाराजगंज लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र से सात बार लोकसभा चुनाव जीते हैं। चौधरी बहुत ही जमीन से जुड़े हुए नेता रहे हैं। अपना राजनीतिक सफर 1989 में गोरखपुर नगर निगम से स्वतंत्र पार्षद के रूप में शुरू किया और बाद में डिप्टी मेयर भी बने। 1991 में उन्होंने भारतीय जनता पार्टी के टिकट पर पहली बार महाराजगंज से लोकसभा चुनाव जीता था। 1996 और 1998 में भी उन्होंने लगातार जीत हासिल की लेकिन 1999 में उन्हें हार का सामना करना पड़ा। 2004 में फिर से जीत दर्ज की, लेकिन 2009 में कांग्रेस के उम्मीदवार से हार गए। 2014 के बाद से लगातार 2014, 2019 और 2024 में महाराजगंज सीट पर जीत हासिल करते हुए वे कुल सात-बार सांसद बने। जातीय गणित के हिसाब से भाजपा की वर्तमान राजनीति में वह अध्यक्ष के लिए बहुत फिट बैठ रहे हैं। कुर्मी बिरादरी उत्तर प्रदेश और बिहार में यादव के बाद ओबीसी में दूसरे नंबर पर प्रभावशाली मानी जाती है। खासतौर से उत्तर प्रदेश जैसे सबसे बड़े सूब में इस बिरादरी की बहुत ही महत्वपूर्ण भूमिका रही है भाजपा को प्रभावशाली बनाने में। पार्टी की सोशल इंजीनियरिंग की चुनौती पर यह बिरादरी बहुत फिट बैठती है। मजे की बात यह है कि यह पंकज चौधरी उत्तर प्रदेश में कुर्मी बिरादरी से संबंध रखते हैं, जबकि बिहार के डिप्टी सीएम और गृहमंत्री सम्राट चौधरी कोइरी बिरादरी से आते हैं। सम्राट चौधरी में बिहार से भाजपा का पहला मुख्यमंत्री बनने की पूर्ण संभावना बनती है। ऐसी स्थिति में उत्तर प्रदेश में कुर्मी बिरादरी से किसी नेता को बहुत महत्वपूर्ण पद दिए जाने से ओबीसी पर भाजपा की पकड़ और ज्यादा लंबे समय तक मजबूत बने रहने की प्रबल संभावना बन जाएगी। कुछ लोगों का कहना है कि पंकज चौधरी को उत्तर प्रदेश का प्रदेश अध्यक्ष बनाया जाएगा ,, परंतु मेरे सूत्र कुछ और कह रहे हैं। उन्हें इससे बड़ी जिम्मेदारी मिलने जा रही है … Pramod Shukla