जल प्रलय के सन्देश ?

0

तनवीर जाफ़री

वरिष्ठ पत्रकार

−−−−−−−−−−−−

भारतीय पंजाब के जो ज़िले इस भीषण जल प्रलय में प्रभावित हुये उनमें गुरदासपुर, पठानकोट, होशियारपुर, कपूरथला, अमृतसर, तरन तारन, फिरोज़पुर व फ़ज़िल्का के नाम ख़ासतौर पर उल्लेखनीय हैं जबकि लुधियाना और जालंधर में भी बढ़ का प्रभाव देखने को मिला। दर्जनों पुल टूट गये,सैकड़ों पशु बह गये अनेक वाहन तेज़ बहाव में समा गये। लाखों एकड़ फ़सल तबाह हो गयी ,तमाम मकान बह गये या क्षतिग्रस्त हो गये। दर्जनों जगह से हाईवे व मुख्य मार्ग बंद हो गये। और इस प्रलयकारी हालात से जूझने में कई जगह पंजाब का वह किसान स्वयं को असहाय महसूस करता दिखाई दिया जो हमेशा पूरी हिम्मत व हौसले के साथ दूसरों की सेवा सत्कार के लिये तत्पर दिखाई देता है। एक अनुमान के अनुसार राज्य के 500 से अधिक गांव डूबे गये इन गांवों में लगभग 6,600 से अधिक लोग फंसे थे। अमृतसर के रामदास क्षेत्र में रावी नदी का धुसी बांध टूट गया, जिससे 40 गांव डूब गए। इसी तरह गुरदासपुर में लगभग 150, कपूरथला में क़रीब 115, और अमृतसर में लगभग 100 गांव इस प्रलयकारी बाढ़ से बुरी तरह प्रभावित हुये। गोया इस बार की बाढ़ ने कृषि-प्रधान पंजाब की अर्थव्यवस्था को बुरी तरह प्रभावित कर दिया। इस बाढ़ के चलते सैकड़ों घर, 300 से अधिक स्कूल अनेक सड़कें, पुल और बिजली लाइनें आदि क्षतिग्रस्त हो गयीं । अमृतसर में गुरुद्वारा बाबा बुढ़ा साहिब डूब गया। कई जगह रेल यातायात बाधित हुआ अनेक ट्रेन्स कैंसिल कर दी गयीं। हाईवे टूटने व क्षतिग्रस्त होने के चलते 1,000 से अधिक सड़कें बंद कर दी गयीं । अकेले वैष्णो देवी में बारिश के चलते हुये भूस्खलन से 30 से अधिक मौतें होने की ख़बर है।

−−−−−−−−−−−−−−−−−−−−−−−−−−−−−−−−−−−−−−−−−−−−−−−−−−−−−−−
तनवीर जाफ़री
भारत के पंजाब राज्य को सबसे उपजाऊ धरती के राज्यों में सर्वोपरि गिना जाता है। इसका मुख्य कारण यही है कि यह राज्य खेती के लिये सबसे ज़रूरी समझे जाने वाले कारक यानी पानी के लिये सबसे धनी राज्य है। सिंधु नदी की पांच सहायक नदियाँ सतलुज, ब्यास, रावी, चिनाब और झेलम इसी पंजाब राज्य से होकर बहती हैं। इन पांचों नदियों में केवल व्यास ही एक ऐसी नदी है जो केवल भारत में बहती है शेष सतलुज, रावी, चिनाब और झेलम नदियाँ भारत से होते हुये पाकिस्तान में भी प्रवाहित होती हैं। यही नदियां जो पंजाब को उपजाऊ भूमि बनाने और यहाँ की संस्कृति का आधार समझी जाती हैं इन दिनों यही नदियां भारत से लेकर पाकिस्तान तक जल प्रलय का कारण बनी हुई हैं। इन नदियों के उफान पर होने का कारण जम्मू कश्मीर व हिमाचल प्रदेश जैसे पहाड़ी क्षेत्रों में लगातार होने वाली तेज़ बारिश यहाँ तक कि अनेक स्थानों पर बादल फटने जैसी घटनाओं को माना जा रहा है।
दरअसल पिछले कुछ दिनों हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर और पंजाब के जलागम क्षेत्रों में असामान्य रूप से भारी बारिश हुई। कई ज़िले तो ऐसे भी थे जहाँ केवल एक ही दिन में पूरे एक महीने की बारिश दर्ज की गई। जैसे केवल अमृतसर और गुरदासपुर में 150-200 मिमी से अधिक वर्षा दर्ज हुई। इससे शहरी जलनिकासी प्रणाली पूरी तरह फ़ेल हो गयी। दुर्भाग्यवश हमारे देश के अधिकांश राज्यों में बरसाती जल निकासी प्रणाली प्रायः फ़ेल ही रहती है। भ्रष्टाचारयुक्त निर्माण से लेकर सरकारी अम्लों की अकर्मण्यता व ग़ैर ज़िम्मेदार जनता द्वारा नाले नालियों में अवांछित वस्तुओं की डम्पिंग यहाँ तक कि मरे जानवर से लेकर रज़ाई गद्दे बोतलें प्लास्टक पॉलीथिन आदि सब कुछ नालों व नालियों में फ़ेंक देने जैसी ग़ैर ज़िम्मेदाराना प्रवृति, जल निकासी प्रणाली के फ़ेल होने में सबसे अहम भूमिका निभाती है।
एक ओर तो भारी बारिश व जलभराव उसके बाद भारत के सबसे विशाल भाखड़ा नंगल डैम, पोंग डैम ]रणजीत सागर डैम व शाहपुर कंडी जैसे डैम्स से अतिरिक्त पानी का छोड़ा जाना भी पंजाब की बड़े हिस्से की तबाही का कारण बन गया। इन डैम्स से पानी छोड़ना भी इसलिये ज़रूरी हो गया था क्योंकि इनमें इनकी क्षमता से अधिक जलभराव हो गया था। उदाहरण के तौर पर भाखड़ा डैम का जल स्तर 1,671 फीट तक पहुँच गया था तो पोंग डैम का जलस्तर भी अधिकतम से ऊपर चला गया था। इसी के परिणामस्वरूप राज्य की सतलुज, ब्यास और रावी नदियाँ उफान पर आ गईं थीं। भारत से पानी छोड़ने के कारण ही पाकिस्तान के पंजाब प्रान्त में भी बाढ़ आई, जहाँ रावी, सतलुज और चेनाब नदियाँ प्रभावित हुईं। इस स्थिति के मद्देनज़र भारत ने पहले ही मानवीय आधार पर पाकिस्तान को तीन चेतावनियाँ जारी कर दी थीं।
भारतीय पंजाब के जो ज़िले इस भीषण जल प्रलय में प्रभावित हुये उनमें गुरदासपुर, पठानकोट, होशियारपुर, कपूरथला, अमृतसर, तरन तारन, फिरोज़पुर व फ़ज़िल्का के नाम ख़ासतौर पर उल्लेखनीय हैं जबकि लुधियाना और जालंधर में भी बढ़ का प्रभाव देखने को मिला। दर्जनों पुल टूट गये,सैकड़ों पशु बह गये अनेक वाहन तेज़ बहाव में समा गये। लाखों एकड़ फ़सल तबाह हो गयी ,तमाम मकान बह गये या क्षतिग्रस्त हो गये। दर्जनों जगह से हाईवे व मुख्य मार्ग बंद हो गये। और इस प्रलयकारी हालात से जूझने में कई जगह पंजाब का वह किसान स्वयं को असहाय महसूस करता दिखाई दिया जो हमेशा पूरी हिम्मत व हौसले के साथ दूसरों की सेवा सत्कार के लिये तत्पर दिखाई देता है। एक अनुमान के अनुसार राज्य के 500 से अधिक गांव डूबे गये इन गांवों में लगभग 6,600 से अधिक लोग फंसे थे। अमृतसर के रामदास क्षेत्र में रावी नदी का धुसी बांध टूट गया, जिससे 40 गांव डूब गए। इसी तरह गुरदासपुर में लगभग 150, कपूरथला में क़रीब 115, और अमृतसर में लगभग 100 गांव इस प्रलयकारी बाढ़ से बुरी तरह प्रभावित हुये। गोया इस बार की बाढ़ ने कृषि-प्रधान पंजाब की अर्थव्यवस्था को बुरी तरह प्रभावित कर दिया। इस बाढ़ के चलते सैकड़ों घर, 300 से अधिक स्कूल अनेक सड़कें, पुल और बिजली लाइनें आदि क्षतिग्रस्त हो गयीं । अमृतसर में गुरुद्वारा बाबा बुढ़ा साहिब डूब गया। कई जगह रेल यातायात बाधित हुआ अनेक ट्रेन्स कैंसिल कर दी गयीं। हाईवे टूटने व क्षतिग्रस्त होने के चलते 1,000 से अधिक सड़कें बंद कर दी गयीं । अकेले वैष्णो देवी में बारिश के चलते हुये भूस्खलन से 30 से अधिक मौतें होने की ख़बर है।
अभी तक जो अनुमान लगाया जा रहे उसके मुताबिक़ धान, गन्ना व मक्का की लगभग 1.5 लाख एकड़ फ़सल पूरी तरह डूब गई। पंजाब में लगभग 3 लाख एकड़ से अधिक भूमि जलमग्न हो गयी। इन बाढ़ग्रस्त क्षत्रों के किसानों को सितंबर-अक्टूबर में होने वाली रबी की फ़सलों में भी नुकसान की आशंका बनी हुई है। पंजाब में आई बाढ़ से हुआ अरबों रुपये का यह नुक़सान खाद्य मुद्रास्फीति को भी प्रभावित करेगा। बाढ़ और बारिश-संबंधी हादसों से भारत व पाकिस्तान में अनेक मौतें भी हुई हैं जबकि अनेक लोग लापता भी हो गए हैं। इसी तरह हज़ारों पशुओं के बह जाने, मरने,बीमार पड़ने के साथ साथ उनके चारों की भी भारी कमी दर्ज की जा रही है। इन्हीं हालात में बीमारियों का भी ख़तरा बढ़ गया है। इससे पर्यटन उद्योग भी बुरी तरह प्रभावित हुआ है।आपदा के इस समय में सेना एनडीआरएफ़ व एसडीआरएफ़ द्वारा 5,000 से अधिक लोगों की जान बचाई गयी व उन्हें सुरक्षित स्थानों पर पहुँचाया गया। इन ऑपरेशन्स में चिनूक हेलीकॉप्टर, चीता हेलीकॉप्टर,नावें और एम्फीबियन वाहन इस्तेमाल किये गये ।
पंजाब और ख़ासकर पहाड़ी क्षेत्रों में होने वाली असाधारण बारिश व बादल फटने जैसी अनेक घटनाओं ने मौसम वैज्ञानिकों व विशेषज्ञों को हैरत में डाल दिया है। इन हालात के लिये जहाँ दुर्लभ परिस्थितियों में पूर्वी, दक्षिणी और पश्चिमी मौसम प्रणालियों के एक साथ आने को ज़िम्मेदार माना जा रहा है वहीं ग्लेशियर का लगातार पिघलते जाना भी बाढ़ को और अधिक भयावह बना रहा है। माना जा रहा है कि यह बाढ़ 1988 की उस भीषण बाढ़ से भी प्रलयकारी है जिसे हज़ार वर्षों में एक बार आने वाली बाढ़ की संज्ञा दी गयी थी। गोया हमें जल प्रलय के इस सन्देश को समझना होगा कि इन हालात के लिये ग्लोबल वार्मिंग के परिणामस्वरूप होने वाला जलवायु परिवर्तन ही सबसे अधिक ज़िम्मेदार है। और निश्चित रूप से विकास और इसके नाम पर पैदा किये गये ग्लोबल वार्मिंग के यह हालात पूरी तरह मानवजनित हैं।

(तनवीर जाफ़री )

संपर्क: 989621922

रामचरितमानस में प्रेम और करुणा

0

−डॉ. ऋषिका वर्मा

गोस्वामी तुलसीदास कृत रामचरितमानस भारतीय संस्कृति की अमूल्य धरोहर है। यह केवल एक धार्मिक ग्रंथ नहीं बल्कि मानवीय मूल्यों, आदर्शों और जीवन के मार्गदर्शन का सागर है। इसमें प्रेम और करुणा को सर्वोच्च स्थान दिया गया है। प्रेम और करुणा ही वह भाव हैं जो जीवन को मधुरता, सद्भाव और दिव्यता से भर देते हैं। रामचरितमानस में भगवान राम, माता सीता, लक्ष्मण, हनुमान और अन्य पात्रों के माध्यम से इन दोनों गुणों का अद्भुत चित्रण किया गया है।
प्रेम को संसार का सबसे बड़ा सूत्रधार बताया गया है। भगवान राम का प्रेम केवल अपने परिवार या भक्तों तक सीमित नहीं है बल्कि यह सर्वजन हिताय और सर्वजन सुखाय है। वे निषादराज, भीलनी शबरी, गिलहरी, वानर और भालू सभी के प्रति समान स्नेह रखते हैं। तुलसीदास ने दिखाया कि जब प्रेम निस्वार्थ और निर्मल होता है तब वह ईश्वर से भी जोड़ देता है। इसी भाव को व्यक्त करते हुए तुलसीदास लिखते हैं –
“प्रेम भक्ति जल बिनु रघुराई।
अस धरम नहिं आन उपाई॥”
अर्थात भगवान राम कहते हैं कि उनके दर्शन और कृपा का सबसे बड़ा साधन केवल प्रेममय भक्ति ही है। यह प्रेम किसी नियम या शर्त से बंधा नहीं बल्कि हृदय की सरलता और निष्कपटता पर आधारित है।
इसी प्रकार करुणा रामचरितमानस का दूसरा महत्वपूर्ण पक्ष है। भगवान राम करुणा के सागर कहलाते हैं। वे शरणागत की रक्षा करते हैं और सबके प्रति दयालु रहते हैं। वे रावण जैसे अहंकारी शत्रु को भी अंत समय में ज्ञान देकर मोक्ष प्रदान करते हैं। यही करुणा उन्हें ‘मर्यादा पुरुषोत्तम’ बनाती है। उनकी करुणा का भाव प्रत्येक जीव मात्र के लिए है, चाहे वह मित्र हो, शत्रु हो या फिर वनवासी। इसी को तुलसीदास ने दोहे में इस प्रकार कहा है –
“सुनहु सखा मम बानी भरोसा।
सकल भूत हित मोरि तैसा॥”
यहां भगवान राम कहते हैं कि उनका भाव सभी जीवों के हित में है। यही करुणा है जो उनके चरित्र को सार्वभौमिक बना देती है।
रामचरितमानस हमें यह शिक्षा देता है कि प्रेम और करुणा केवल धार्मिक मूल्य नहीं बल्कि सामाजिक जीवन की भी आधारशिला हैं। प्रेम से समाज में भाईचारा और सद्भावना उत्पन्न होती है और करुणा से दीन-दुखियों की पीड़ा दूर की जा सकती है। तुलसीदास ने प्रेम और करुणा को साधारण मानव से लेकर भगवान तक की सर्वोच्च विशेषता बताया है।
अतः यह कहा जा सकता है कि रामचरितमानस प्रेम और करुणा का दिव्य ग्रंथ है। यह हमें सिखाता है कि प्रेम ही भक्ति का मार्ग है और करुणा ही मानवता का आभूषण है। जो व्यक्ति अपने जीवन में इन दोनों गुणों को धारण कर लेता है, उसका जीवन सफल और समाज के लिए प्रेरणादायी बन जाता है

−डॉ. ऋषिका वर्मा

गढ़वाल (उत्तराखंडद्व

हिंदुस्तानी गजल से मशहूर हुए  दुष्यंत कुमार

0

अशोक मधुप

−−−−−

आज एक सिंतबर  है प्रसिद्ध  हिंदी गजलकार दुष्यंत कुमार की जन्मदिन  है।  बिजनौर के राजपुर नवादा गांव में एक सिंतबर 1933 में जन्मे दुष्यंत कुमार का मात्र 43 वर्ष की आयु में 30 दिसंबर 1975 को भोपाल में  उनका निधन हुआ।

−−−−−

हिंदी साहित्यकार −गजलकार दुष्यंत कुमार   हिंदी गजल के लिए जाने जाते हैं। वे हिंदी गजल के लिए विख्यात है किंतु  उन्हें यह ख्याति हिंदी गजलों के लिए नहीं , हिंदुस्तानी गजलों के लिए मिली। संसद से  सड़क तब मशहूर हुए उनके शेर हिंदुस्तानी हिंदी में हैं।  हिंदुस्तानी हिंदी में  उन्होंने सभी प्रचलित शब्दों को इस्तमाल किया। शब्दों को प्रचलित रूप में इस्तमाल किया।

वे अपनी पुस्तक साए में धूप की भूमिका में खुद कहते हैं “ ग़ज़लों को भूमिका की ज़रूरत नहीं होनी चाहिए; लेकिन,एक कैफ़ियत इनकी भाषा के बारे में ज़रूरी है। कुछ उर्दू—दाँ दोस्तों ने कुछ उर्दू शब्दों के प्रयोग पर एतराज़ किया है।उनका कहना है कि शब्द ‘शहर’ नहीं ‘शह्र’ होता है, ’वज़न’ नहीं ‘वज़्न’ होता है।
—कि मैं उर्दू नहीं जानता, लेकिन इन शब्दों का प्रयोग यहाँ अज्ञानतावश नहीं, जानबूझकर किया गया है। यह कोई मुश्किल काम नहीं था कि ’शहर’ की जगह ‘नगर’ लिखकर इस दोष से मुक्ति पा लूँ,किंतु मैंने उर्दू शब्दों को उस रूप में इस्तेमाल किया है,जिस रूप में वे हिन्दी में घुल−मिल गये हैं। उर्दू का ‘शह्र’ हिन्दी में ‘शहर’ लिखा और बोला जाता है ।ठीक उसी तरह जैसे हिन्दी का ‘ब्राह्मण’ उर्दू में ‘बिरहमन’ हो गया है और ‘ॠतु’ ‘रुत’ हो गई है।
—कि उर्दू और हिन्दी अपने—अपने सिंहासन से उतरकर जब आम आदमी के बीच आती हैं तो उनमें फ़र्क़ कर पाना बड़ा मुश्किल होता है। मेरी नीयत और कोशिश यही रही है कि इन दोनों भाषाओं को ज़्यादा से ज़्यादा क़रीब ला सकूँ। इसलिए ये ग़ज़लें उस भाषा में लिखी गई हैं जिसे मैं बोलता हूँ।
—कि ग़ज़ल की विधा बहुत पुरानी,किंतु विधा है,जिसमें बड़े—बड़े उर्दू महारथियों ने काव्य—रचना की है। हिन्दी में भी महाकवि निराला से लेकर आज के गीतकारों और नये कवियों तक अनेक कवियों ने इस विधा को आज़माया है।”
ग़ज़ल पर्शियन और अरबी  से उर्दू में आयी। ग़ज़ल का मतलब हैं औरतों से अथवा औरतों के बारे में बातचीत करना। यह भी कहा जा सकता हैं कि ग़ज़ल का सर्वसाधारण अर्थ हैं माशूक से बातचीत का माध्यम। उर्दू के  साहित्यकार  स्वर्गीय रघुपति सहाय ‘फिराक’ गोरखपुरी  ने ग़ज़ल की  भावपूर्ण परिभाषा लिखी हैं।  कहते हैं कि, ‘जब कोई शिकारी जंगल में कुत्तों के साथ हिरन का पीछा करता हैं और हिरन भागते −भागते किसी ऐसी झाड़ी में फंस जाता हैं जहां से वह निकल नहीं सकता, उस समय उसके कंठ से एक दर्द भरी आवाज़ निकलती हैं। उसी करूण स्वर को ग़ज़ल कहते हैं। इसीलिये विवशता का दिव्यतम रूप में प्रगट होना, स्वर का करूणतम हो जाना ही ग़ज़ल का आदर्श हैं’।

दुष्यंत  की गजलों की खूबी है साधारण बोलचाल के शब्दों का प्रयोग,  हिंदी− उर्दू के घुले मिले शब्दों का प्रयोग । चुटीले व्यंग  उनकी गजल की खूबी है।वे व्यवस्था और समाज पर चोट करते हैं।  ये ही उन्हें सीधे  आम आदमी के दिल तक ले जाती है। उनकी ये शैली उन्हें अन्य कवियों से अलग और लोकप्रिय करती है।
आम आदमी और व्यवस्था पर चोट करने वाले  दुष्यंत कुमार के शेर, व्यवस्था पर चोट करते उनके शेर  सड़कों से  संसद गूंजतें है। शायद दुष्यंत कुमार अकेले ऐसे साहित्यकार होंगे , जिसके शेर सबसे ज्यादा बार संसद में पढ़े गए हों। सभाओं में नेताओं ने उनके शेर सुनाकर व्यवस्था पर चोट की हो।सरकार को जगाने और जनचेतना का कार्य किया हो।उन्होंने हिंदी गजल भी लिखी, पर वह इतनी प्रसिद्धि  नही पा सकी, जितनी हिंदुस्तानी हिंदी में लिखी  गजल लोकप्रिस हुईं।

उनके गुनगुनाए  जाने वाले उनके कुछ  हिंदुस्तानी हिंदी के शेर हैं−

−वो आदमी नहीं है मुकम्मल बयान है, 

माथे पे उस के चोट का गहरा निशान है। 

−रहनुमाओं की अदाओं पे फ़िदा है दुनिया, 

इस  बहकती  हुई    दुनिया   को    सँभालो      यारों।

−कैसे आकाश में सूराख़ नहीं हो सकता ,

एक पत्थर तो तबीअ’त से उछालो यारों।

− यहां तो  सिर्फ गूंगे और बहरे लोग बसतें है,

खुदा  जाने यहां पर किस तरह जलसा हुआ होगा,

−गूँगे निकल पड़े हैं ज़बाँ की तलाश में ,

सरकार के ख़िलाफ़ ये साज़िश तो देखिए।

−पक गई हैं आदतें बातों से सर होंगी नहीं, 

कोई हंगामा करो ऐसे गुज़र होगी नहीं  ।

आज मेरा साथ दो वैसे मुझे मालूम है ,

पत्थरों में चीख़ हरगिज़ कारगर होगी नहीं। 

इन ठिठुरती उँगलियों को इस लपट पर सेंक लो, 

धूप अब घर की किसी दीवार पर होगी नहीं ।

−सिर से सीने में कभी पेट से पाँव में कभी ,

इक जगह हो तो कहें दर्द इधर होता है ।

−मत कहो आकाश में कोहरा घना है,

ये किसी की व्यक्तगत आलोचना है।

−ये   जिस्म झुककर बोझ से दुहरा हुआ होगा,

मैं सज्दे में नही था, आपको धोखा  हुआ होगा।

−तुमने इस तालाब में रोहू पकड़ने के लिए,

छोटी—छोटी मछलियाँ चारा बनाकर फेंक दीं।

−हम ही खा लेते सुबह को भूख लगती है बहुत

तुमने बासी रोटियाँ नाहक उठा कर फेंक दीं।

गजल

हो गई है पीर पर्वत  सी पिंघलनी चाहिए,

अब हिमालय से कोई गंगा निकलनी चाहिए।

आज यह दीवार, परदों की तरह हिलने लगी,

शर्त थी लेकिन कि ये बुनियाद हिलनी चाहिए।

हर सड़क पर, हर गली में, हर नगर, हर गाँव में,

हाथ लहराते हुए हर लाश चलनी चाहिए।

सिर्फ हंगामा खड़ा करना मेरा मकसद नहीं,

मेरी कोशिश है कि ये सूरत बदलनी चाहिए।

मेरे सीने में नहीं तो तेरे सीने में सही,

हो कहीं भी आग, लेकिन आग जलनी चाहिए।

अशोक मधुप

(लेखक  वरिष्ठ  पत्रकार हैं)

आज के दिन घटित घटनाएं

0

1881 – अमेरिका में पहली बार टेनिस चैंपियनशिप खेला गया।
1920 – अमेरिकी शहर डेट्रायट में रेडियो पर पहली बार समाचार प्रसारित किया गया।
1956 – भारत के तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. राजेन्द्र प्रसाद ने राज्य पुनर्गठन विधेयक को मंजूरी दी।
1959 – अमेरिकी बेसबॉल खिलाड़ी सैंडी कुफैक्स ने एक नेशनल लीग रिकॉर्ड बनाया।
1962 – कैरेबियाई देश टोबैगो एवं त्रिनिदाद ब्रिटेन से स्वतंत्र हुए।
1964 – कैलिफोर्निया आधिकारिक रूप से अमेरिका का सबसे अधिक जनसंख्या वाला प्रांत बना।
1968 – भारत में टू-स्टेज राउंडिंग रॉकेट रोहिणी-एमएसवी 1 का सफल प्रक्षेपण किया गया।
1983 – भारत के उपग्रह इनसेट-1 बी को अमेरिका के अंतरिक्ष शटल चैलेंजर से प्रसारित किया गया।
1990 – पूर्वी और पश्चिमी जर्मनी ने राजनीतिक और कानूनी व्यवस्था के तालमेल के लिए एक संधि पर हस्ताक्षर किए।
1991 – उज्बेकिस्तान और किर्गिस्तान ने सोवियत संघ से अपनी स्वतंत्रता की घोषणा की।
1993 – रूस ने लिथुआनिया से अपने आखिरी सैनिकों को वापस बुलाया।
1995 – पहली बार एमनेस्टी इंटरनेशनल ने चीन में मानवाधिकार पर आपत्ति दर्ज किया।
1996 – ब्रिटेन की लेबर पार्टी ने भी भारत की तर्ज पर सी.टी.बी.टी. के उस प्रावधान का विरोध किया, जिसमें निरस्त्रीकरण सम्मेलन के सदस्य देशों को संधि पर हस्ताक्षर करना आवश्यक है।
1997 – ब्रिटेन की राजकुमारी और राजकुमार चार्ल्स की पूर्व पत्नी डायना की पेरिस में कार दुर्घटना में मृत्यु।
1998 -राष्ट्रपति येल्तसिन द्वारा नियुक्त प्रधानमंत्री विक्टर चेर्नोमीर्दिन की नियुक्ति को रूसी संसद निम्न सदन ड्यूमा ने अस्वीकृत किया।
उत्तरी कोरिया ने जापान पर बैलिस्टिक मिसाइल दागा।
1999 – पूर्वी तिमोर की स्वतंत्रता के लिए शांतिपूर्ण ढंग से सम्पन्न जनमत संग्रह पर संयुक्त राष्ट्र और पश्चिमी देशों ने संतोष जताया।
2002 – पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ़ ने अपना नामांकन पत्र वापस लिया।
2004 – इतालवी जनरल गिदो पामेरी को भारत और पाकिस्तान में संयुक्त राष्ट्र पर्यवेक्षक समूह का एक साल के लिए प्रधान सैन्य पर्यवेक्षक नियुक्त किया गया।
2005 – ईराक की राजधानी बगदाद में धार्मिक अवसर पर फिदायीन हमले के भय से मची भगदड़ में 816 लोग मारे गये।
2007 – ब्रिटेन में प्रिंस डायना की 10वीं वर्षगांठ मनायी गयी।
2008- सरकार ने अमरनाथ भूमि विवाद सुलझाया।
2009- जनता दल (यूनाइटेड) की राष्ट्रीय परिषद के नई दिल्ली में आयोजिय सम्मेलन में शरद यादव को पुनः सार्वसम्मति से पार्टी का अध्यक्ष चुन लिया गया। वे इस पद पर 2006 से नियुक्त है।
भारत के सामाजिक कार्यकर्ता दीप जोशी सहित एशिया की छ: हस्तियों को वर्ष 2009 के ‘रेमन मैग्सेसे पुरस्कार’ से 31 अगस्त को मनीला में सम्मानित किया गया।

आज के जन्मदिन

1919 – अमृता प्रीतम, प्रसिद्ध कवयित्री, उपन्यासकार और निबंधकार
1962 – पल्लम राजू, एक प्रसिद्ध राजनीतिज्ञ
1963 – ऋतुपर्णो घोष – बंगाली फ़िल्मों के प्रसिद्ध निर्देशक, लेखक और अभिनेता।
1940 – शिवाजी सावंत – मराठी भाषा के प्रसिद्ध साहित्यकार।
1871 – सैयद हसन इमाम – भारतीय राष्ट्रीय काँग्रेस के पूर्व अध्यक्ष

🌼 आज के दिन निधन

2020 – प्रणब मुखर्जी – भारत के 13वें राष्ट्रपति, जो भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के प्रमुख नेता रहे थे।
2016 – कश्मीरी लाल ज़ाकिर- पद्मश्री से सम्मानित प्रख्यात उर्दू कवि।
2003 – विजयशंकर मल्ल – इन्होंने भारतेन्दु काल के गद्य को “हंसमुख गद्य” की संज्ञा दी थी।
1995 – बेअंत सिंह – पंजाब के भूतपूर्व मुख्यमंत्री थे।
1982 – गोपाल स्वरूप पाठक – भारत के भूतपूर्व उपराष्ट्रपति थे।

महिला की मौत

0

बिजनौर जनपद के झालू कस्बे में गुरुवार को 28 वर्षीय ललिता की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। घटना की सूचना मिलते ही हल्दौर पुलिस मौके पर पंहुची। मौके के निरीक्षण करने के बाद शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।थाना मंडावली के ग्राम राज पुर नवादा निवासी ललिता की शादी थाना हल्दौर के कस्बा झालू निवासी फूल सिंह के साथ चार वर्ष पूर्व हुई थी। बुधवार की राह कर सम मृत्य हो गई। गुरुवार की सुबह फूल सिंह के परिजनों ने देखा कि ललिता नहीं उठी और मृतक अवस्था में पड़ी है। उसकी सूचना उन्होंने अहमदाबाद में रह करके फैक्ट्री में साफ-सफाई का कार्य करने वाले अपने पुत्र फूल सिंह को दी। फूल सिंह ने महिला की मौत की सूचना उसके मायके भी दी गई। घटना स्थल पर पहुंची पुलिस ने शव को कब्जे में ले लिया। ललिता के भाई गौतम सिंह ने झालू चौकी में दी तहरीर में कहा कि मौत का कारण जानने के लिए पोस्टमार्टम कराया जाए। वही फूल सिंह ने फोन पर बताया कि ललिता की तबीयत खराब रहती थी।

मृतक ललिता का फाइल फोटो

गन्ने में बीमारी से बचाव

0

बिजनौर , जिला कृषि रक्षा अधिकारी जसवीर सिंह तेवतिया ने जनपद के सभी गन्ना उत्पादक किसानों को बताया कि इस समय जनपद में गन्ने की फसल में लाल सड़न रोग का प्रकोप देखा जा रहा है। इस रोग से ग्रसित पौधों की पत्तियों पर लाल रंग के धब्बे पड़ने लगते हैं एवं पत्तियां पीली होकर सूख जाती हैं और गन्ने को बीच में से चीरने पर लाल रंग दिखाई देने लगता है। इससे एल्कोहल जैसी गंध आती है। इस रोग के नियंत्रण के लिए रोग ग्रसित पौधों को उखाड़कर गहरे गड्ढ़े में दबा दें । उखाड़े गये पौधे के स्थान पर ब्लीचिंग पाउडर का बुरकाव करें एवं एजोक्सीस्ट्रोबिन 11 प्रतिशत + टेबुकोनाजोल 18.3 प्रतिशत एस०सी० का 1 मिली०/ली० पानी की दर के हिसाब से छिड़काव करें या थायोफिनेट मिथाइल 70 प्रतिशत की 500 ग्राम मात्रा प्रति एकड़ की दर से प्रयोग करें। उन्होंने यह भी बताया कि किसान अपनी फसल में कीट/ रोग समस्या के निदान के लिए कृषि विभाग में अपना पंजीकरण नम्बर अथवा अपना नाम, ग्राम का नाम, विकास खण्ड, जनपद का नाम लिखते हुए मोबाईल नम्बर 9452247111 एवं 9452257111 पर एस०एम०एस०/व्हॉटसएप के माध्यम से फोटो भेजते हुए अपनी समस्या का समाधान 48 घंटे के अन्दर पा सकते है।

नगर निकायों में बन रहे हैं पुस्तकालय

0

बिजनौर , अपर जिलाधिकारी प्रशासन विनय कुमार सिंह ने बताया कि जिला की समस्त नगर निकायों में छात्र/छात्राओं एवं आम जनमानस में पठन-पाठन की रूचि विकसित किये जाने के उद्देश्य से स्थापित डिजिटल पुस्तकालयों का संचालन किया जा रहा है। जनपद की नगरीय निकाय क्षेत्रांतर्गत नौ स्थायी तथा सात अस्थायी पुस्तकालय संचालित हैं। उक्त के अनुक्रम में नगर पालिका परिषद बिजनौर, धामपुर, स्योहारा, शेरकोट, अफजलगढ, नजीबाबाद, नूरपुर, चान्दपुर व नगर पंचायत सहसपुर, झालू, साहनपुर एवं जलालाबाद द्वारा निकाय क्षेत्रान्तर्गत पुस्तकालय संचालित किये जा रहे है। निकायों द्वारा संचालित इन पुस्तकालयों में जनसामान्य एवं छात्र छात्राओं की मूलभूत सुविधाओं के दृष्टिगत पुस्तकालयों में समुचित फर्नीचर, पेयजल, सीसीटीवी० कैमरा, वाईफाई व दैनिक समाचार पत्र, प्रतियोगात्मक, साहित्यिक, काव्य, धार्मिक ग्रन्थ, स्वतत्रंता संग्राम सेनानियों के बलिदान व देश के ऐतिहासिक क्षणों एवं विभिन्न रोचक व ज्ञानवर्द्धक पुस्तकें पठन के लिए उपलब्ध करायी जा रही हैं। नगर पालिका परिषद बिजनौर में वर्ष 1925 से दुष्यंत कुमार पुस्तकालय व नगर पालिका परिषद नजीबाबाद में वर्ष 1916 से सरस्वती पुस्तकालय निकाय क्षेत्रान्तर्गत संचालित हैं। इनमें निकायों द्वारा समय-समय पर आवश्यक कार्य / सुविधाऐं उपलब्ध करायी जाती हैं। नगर पालिका परिषद स्योहारा व नगर पालिका परिषद हल्दौर में राज्य वित्त आयोग की धनराशि से, नगर पंचायत सहसपुर में 15वें वित्त आयोग की धनराशि एवं नगर पंचायत जलालाबाद में बोर्ड फण्ड की धनराशि से डिजिटल पुस्तकालयों का निर्माण कराया गया है। नगर पालिका परिषद स्योहारा एवं नगर पंचायत सहसपुर द्वारा पुस्तकालय का संचालन विगत 31 मई,2025 से प्रारम्भ कर दिया गया हैं। नगर पालिका परिषद हल्दौर एवं नगर पंचायत जलालाबाद में पुस्तकालय का निर्माण लगभग पूर्ण हो चुका हैं, इन पुस्तकालयों में संचालन भी शीघ्र ही प्रारम्भ कर दिया जाएगा।

उन्होंने बताया कि वित्तीय वर्ष 2024-25 में मुख्यमंत्री वैश्विक नगरोदय योजनान्तर्गत नगर पालिका परिषद शेरकोट, अफजलगढ, नूरपुर व नगर पंचायत झालू, साहनपुर को डिजिटल पुस्तकालयों के निर्माण कराये जाने के लिए स्वीकृति उपरान्त शासन स्तर से धनराशि अवमुक्त की गयी है। उक्त निकायों द्वारा शासन से प्राप्त धनराशि से डिजिटल पुस्तकालयों का निर्माण माह सितंबर तक पूर्ण करा लिया जाएगा तथा निकायों में निवास करने वाले आम जनमानस एवं छात्र छात्राओं को डिजिटल पुस्तकालय की सुविधा उपलब्ध हो जाएगी। मुख्यमंत्री वैश्विक नगरोदय योजना के अन्तर्गत वित्तीय वर्ष 2025-26 की वार्षिक कार्य योजना में डिजिटल पुस्तकालयों के निर्माण के लिए नगर पालिका परिषद बिजनौर, नहटौर, किरतपुर, चान्दपुर व नगर पंचायत बढ़ापुर द्वारा स्वीकृति के लिए शासन को प्रस्ताव प्रेषित किये गये हैं। शासन से धनराशि प्राप्त होने के उपरान्त इन निकायों में भी डिजिटल पुस्तकालयों का निर्माण कार्य प्रारम्भ करा दिया जाएगा। इससे जनपद के सभी नगरीय क्षेत्र संतृप्त हो जाएंगे। उन्होंने बताया कि जिलाधिकारी द्वारा निर्देश दिये गये कि नगर पालिका परिषद बिजनौर व नजीबाबाद में 100 वर्ष से अधिक पुराने पुस्तकालय संचालित हो रहे हैं तथा नजीबाबाद स्थित सरस्वती पुस्तकालय में पाण्डु लिपि भी संरक्षित है, जिनको संरक्षित किया जाना नितान्त आवश्यक है। इस सम्बन्ध में पूर्व में भी रजा लाइब्रेरी रामपुर से सम्पर्क कर उक्त पुस्तकालयों में उपलब्ध पुराने धार्मिक ग्रन्थों / पुस्तकों व पाण्डु लिपियों को संरक्षित कराये जाने के सम्बन्ध में निर्देश दिये गये हैं। साथ ही यह भी निर्देशित किया गया कि जनपद की बड़ी निकायों विशेष तौर पर तहसील मुख्यालय की निकायों में वार्डवार कलस्टर बनाकर लाइब्रेरी की स्थापना करायी जाए, ताकि जनसामान्य एवं छात्र छात्राओं को नजदीक में ही लाइब्रेरी की सुविधा उपलब्ध हो सके।

0

कल का मौसम 31 अगस्त

यूपी के 11 जिलों में भारी बारिश का अलर्ट,दिल्ली-उत्तराखंड वाले रहें सावधान

दिल्ली, यूपी और बिहार समेत देश के कई राज्यों में भारी बारिश का कहर जारी है। इससे कई जगह बाढ़ जैसे हालात बन गए हैं। मौसम विभाग ने दिल्ली के कई हिस्सों और उत्तर प्रदेश के 11 से अधिक जिलों में भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। बिहार में बारिश से राहत मिलने की उम्मीद है, इसके बावजूद वज्रपात का खतरा बना रहेगा।

दिल्ली, यूपी, बिहार समेत देश के अधिकांश राज्यों में बारिश का कहर थमने का नाम नहीं ले रहा है। सामान्य से अधिक बारिश होने से कई इलाकों में बाढ़ से हालात हो गए हैं। निचले इलाके से लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला जा रहा है। इस बीच मौसम विभाग ने एक बार फिर से कई राज्यों के लिए चेतावनी जारी की है। 

दिल्ली में कल मौसम कैसा रहेगा

दिल्ली में 31 अगस्त को भी कई इलाकों में मूसलाधार बारिश की चेतावनी जारी की है। मौसम विभाग ने कल के लिए पूर्वी दिल्ली, मध्य दिल्ली, दक्षिण पूर्वी दिल्ली और शाहदरा जैसे इलाकों के लिए बारिश का येलो अलर्ट जारी किया है। लोग ट्रैफिक अपडेट की जानकारी लेकर ही घर से बाहर निकलें नहीं तो मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है।

यूपी में कल मौसम कैसा रहेगा

उत्तर प्रदेश में कल यानी 31 अगस्त को 11 से अधिक जिलों में भारी बारिश की चेतावनी जारी की गई है। मौसम विभाग लखनऊ के मुताबिक गाजियाबाद, मथुरा, आगरा, रामपुर, बिजनौरअ,सहारनपुर, , बदायूं, बरेली, ज्योतिबाफुले नगर, पीलीभीत,मेरठ, मुजफ्फरनगर, बुलंदशहर में मूसलाधार बारिश से लोगों की मुश्किलें बढ़ने वाली है।

दिलचस्प,शोध है ये?

0


अज्ञात है कि यह शोध किसने किया है, लेकिन यह काफी दिलचस्प है।
एडल्ट में पांच अक्षर होते हैं,और यूथ में भी।परमानेंट में नौ अक्षर होते हैं,और इसके विलोम शब्द टेंपरेरी में भी।गुड में चार अक्षर होते हैं,और एविल्व में भी।ब्लैक में पांच अक्षर होते हैं,और वाइट में भी।चर्च में छह अक्षर होते हैं,और मोसक्यू, टेंपल और मंदिर में भी।
बाइबिल,गीता में पांच अक्षर होते हैं,और कुरान में भी।लाइफ में चार अक्षर होते हैं,और डेड में भी।हेट में चार अक्षर होते हैं,और लव में भी।
एनिमीज में सात अक्षर हैं,और फ्रेंड्स में भी।लाइंग में पांच अक्षर हैं,और ट्रुथ में भी।हर्ट में चार अक्षर हैं,और हील में भी।नेगेटिव्ह में आठ अक्षर हैं,और पोजिटिव्ह में भी।फ्ल्यूयर में सात अक्षर हैं,और सक्सेस में भी।बिलोव में पांच अक्षर हैं,और अवोह में भी। क्राय में तीन अक्षर हैं,और जॉय में भी।एंग्री में पांच अक्षर हैं,और हैप्पी में भी।राइट में पांच अक्षर हैं,और रॉन्ग में भी।रिच में चार अक्षर हैं,और पुअर में भी।फेल में चार अक्षर होते हैं,और पास में भी।नॉलेज में नौ अक्षर होते हैं,इग्नोरेंसमें भी।क्या ये सब संयोग से हैं?इसका मतलब है कि ज़िंदगी एक दोधारी तलवार की तरह है और हम जो चुनाव करते हैं, वही नतीजे तय करता है।


—-दिनेश गंगराड़े, इंदौर

टैरिफ वार से अमेरिका का ही नुकसान कर रहे हैं ट्रंप

0

अशोक मधुप

वरिष्ठ पत्रकार

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने भारत पर 25 प्रतिशत टैरिफ को सात दिन के लिए टाल दिया है। ये एक अगस्त  से लागू होना था, जो अब सात अगस्त से लागू होगा।

ट्रम्प ने 92 देशों पर नए टैरिफ की लिस्ट जारी की है। इसमें भारत पर 25 प्रतिशत और पाकिस्तान पर 19 प्रतिशत टैरिफ लगाया गया है। हालांकि, कनाडा पर एक अगस्त  से ही 35 प्रतिशत टैरिफ लागू हो गया है।

साउथ एशिया में सबसे कम टैरिफ पाकिस्तान पर लगा है। अमेरिका ने पहले पाकिस्तान पर 29 प्रतिशत टैरिफ लगा रखा था।वहीं दुनियाभर में सबसे ज्यादा 41 प्रतिशत टैरिफ सीरिया पर लगाया गया है। इस लिस्ट में चीन का नाम शामिल नहीं है।

ट्रम्प ने दो  अप्रैल को दुनियाभर के देशों पर टैरिफ लगाने की घोषणा की थी, लेकिन सात  दिन बाद ही इसे 90 दिनों के लिए टाल दिया था। कुछ दिनों बाद ट्रम्प ने 31 जुलाई तक का समय दिया था।इसके बाद ट्रम्प सरकार ने 90 दिनों में 90 सौदे कराने का टारगेट रखा था। हालांकि, अमेरिका का अब तक सिर्फ सात  देशों से समझौता हो पाया।

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत पर 25 प्रतिशत टैरिफ लगाया है। साथ ही रूस से तेल खरीदने के लिए अतिरिक्त जुर्माना लगाने की भी बात कही है। जानकारों का कहना है कि उनके इस कदम से भारत की ग्रोथ पर ज्यादा असर नहीं होगा। एसबीआई रिसर्च ने शुक्रवार को कहा कि भारतीय एक्सपोर्ट्स पर 25 प्रतिशत टैरिफ लगाने का असर अमेरिका के लिए भारत से ज्यादा बुरा होगा। अमेरिका को कम जीडीपी, ज्यादा महंगाई और डॉलर के कमजोर होने का सामना करना पड़ सकता है। एसबीआई  रिसर्च ने इस टैरिफ को ‘बुरा बिजनेस फैसला’ बताया।

एसबीआई रिसर्च ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि भारत के मुकाबले अमेरिका की डीजीपी , महंगाई और करंसी के नीचे जाने का ज्यादा रिस्क है। रिपोर्ट के मुताबिक मौजूदा ट्रेड वार के आर्थिक नतीजों को देखें तो यह अचरज की बात नहीं है कि अमेरिका पर भारत के मुकाबले अधिक बुरा असर पड़ेगा। रिसर्च ने बताया कि अमेरिका में फिर से महंगाई का दबाव दिखना शुरू हो गया है।

अनुमान है कि अमेरिका में महंगाई 2026 तक दो  प्रतिशत के तय टारगेट से ऊपर ही रहेगी। ऐसा टैरिफ के सप्लाई-साइड इफेक्ट्स और एक्सचेंज रेट में बदलाव की वजह से होगा। एसबीआई रिसर्च ने बताया कि शॉर्ट-टर्म में अमेरिकी टैरिफ की वजह से एक औसत अमेरिकी घर पर करीब 2,400 डॉलर का बोझ पड़ने का अनुमान है। वजह, टैरिफ से बढ़ने वाली महंगाई के कारण कीमतें बढ़ना है।

अमेरिकी अर्थशास्त्रियों ने चेताया है कि गर्मियों के मौसम तक अमेरिका की सभी सहयोगी व्यापार साझेदार देशों से मतभेदों का असर दिखने लगेगा और नियुक्तियों में कमी खतरे की घंटी है। ग्लासडूर के मुख्य अर्थशास्त्री डेनियल झाओ ने कहा कि मंदी आ नहीं रही है बल्कि आ चुकी है।अमेरिका में राष्ट्रपति ट्रंप के व्यापार एजेंडा का असर दिखने लगा है और  रिपोर्ट के अनुसार अमेरिका मंदी की चपेट में आता दिख रहा है। अमेरिकी कंपनियां कर्मचारियों की नियुक्तियां घटा रही हैं। अमेरिकी श्रम विभाग की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी नियोक्ताओं ने बीते महीने 73 हजार नौकरियां दीं। यह अनुमान के 1,15,000 से काफी कम हैं।मई और जून में 2,58,000 कर्मचारियों की छंटनी हुई और बेरोजगारी दर बढ़कर 4.2% हो गई । अमेरिका में बेरोजगारों की संख्या में 2,21,000 की बढ़ोतरी हुई। बीएमओ कैपिटल मार्केट्स के मुख्य अर्थशास्त्री स्कॉट एंडरसन ने कहा, ‘अमेरिकी श्रम बाजार की स्थितियों में उल्लेखनीय गिरावट आ रही है। हम टैरिफ और व्यापार युद्ध शुरू होने और अधिक प्रतिबंधात्मक आव्रजन नीति के बाद से ही अर्थव्यवस्था में मंदी का अनुमान लगा रहे थे। श्रम विभाग की रिपोर्ट श्रम बाजार के लिए एक मुश्किल हालात का सबूत है।’अमेरिकी अर्थशास्त्रियों ने चेताया है कि गर्मियों के मौसम तक अमेरिका की सभी सहयोगी व्यापार साझेदार देशों से मतभेदों का असर दिखने लगेगा और नियुक्तियों में कमी खतरे की घंटी है। ग्लासडूर के मुख्य अर्थशास्त्री डेनियल झाओ ने कहा कि मंदी आ नहीं रही है बल्कि आ चुकी है। शुक्रवार को अमेरिकी शेयर बाजार में भी गिरावट दिखाई दी। राष्ट्रपति ट्रंप ने श्रम विभाग द्वारा जारी आंकड़ों को खारिज कर दिया है। इतना ही नहीं उन्होंने श्रम विभाग की निदेशक एरिका मेकएंटरफेर को भी पद से हटाने के निर्देश दिए हैं। एरिका की नियुक्ति पूर्व राष्ट्रपति जो बाइडन के कार्यकाल में हुई थी। राष्ट्रपति ट्रंप ने कई देशों पर टैरिफ लगा दिए हैं। ट्रंप प्रशासन को उम्मीद है कि टैरिफ से मैन्यफैक्चरिंग सेक्टर अमेरिका में फिर से मजबूत होगा। हालांकि अर्थशास्त्रियों का मानना है कि टैरिफ का असर अमेरिकी जनता पर ही सबसे ज्यादा पड़ेगा। 

भारत और अमेरिका के बीच लगभग 130 अरब डॉलर का व्यापार होता है। अमेरिका भारत से लगभग 87 अरब डॉलर के उत्पादों का आयात करता है वहीं, भारत अमेरिका से मात्र 41.8 अरब डॉलर के उत्पादों का आयात करता है। अब अमेरिका द्वारा टैरिफ लगाने की घोषणा के बाद, यह सवाल उठ रहा है कि इसका क्या असर होगा। भारत से सबसे अधिक इलेक्ट्रॉनिक और आईटी सेक्टर में बनने वाले उत्पादों को अमेरिका भेजा जाता है। पिछले कुछ समय से भारत में बने स्मार्टफोन्स से लेकर लैपटॉप, सर्वर और टैबलेट्स की डिमांड अमेरिका में बढ़ी थी। ऐसे में सात  अगस्त से लागू होने वाले अमेरिकी टैरिफ का सबसे ज्यादा असर इसी सेक्टर पर पड़ने की संभावना है।

भारत के  11 से 13 मई 1998 में सफलतापूर्वक परमाणु परीक्षण किया । इसके बाद अंतर्राष्ट्रीय समुदाय द्वारा भारत पर   अनेक प्रतिबंध लगाए गए। उस समय विशेषज्ञों की ऐसी राय थी कि   भारत अलग-थलग पड़ जाएगा और इसकी अर्थव्यवस्था प्रतिबंधों के बोझ तले दब जाएगी। इन प्रतिबंध का भारत  सफलतापूर्वक सामना कर अपने को अडिग साबित करने में कामयाब रहा।  सात साल बाद अमेरिका ने इसे एक असाधारण मामले के रूप में मानते हुए, भारत को मुख्य धारा में लाने के लिए पहला कदम उठाया, जिसकी परिणति 2005 में भारत-अमेरिका असैन्य परमाणु समझौते के रूप में हुई।

भारत परमाणु परीक्षण के बाद के प्रतिबंधों में नही झुका तो अब तो उसकी हालत बहुत मजबूत है।एक कुशल  नेतृत्व  उसके पास है। अमेरिका चाहता है  कि भारत रूस से तेल न ले।भारत ने स्पष्ट कर दिया कि वह अपने हितों से कोई समझौता नही करेगा। भारत रूस से पहले की तरह तेल लेता रहेगा। इतना ही नही भारत ने अमेरिका की आंख की किरकिरी ईरान से भी  तेल खरीदने की घोषणा कर दी है। उधर अमेरिका को   इस घटनाक्रम के बाद साफ कर दिया कि वह  अमेरिका से एफ−35 लड़ाकू विमान नहीं ख़रीदेगा।

अमेरिका भारत से लगभग 87 अरब डॉलर के उत्पादों का आयात करता है। भारत ने तै किया है कि अब वह दुनिया के अन्य देशों में बाजार खोजेगा। अमेरिका से होने वाले नुकसान की भरपायी अन्य जगहों से की जाएगी।हाल ही में  एक सभा में  प्रधानमंत्री नरेंद्र मादी ने देशवासियों से स्वदेशी अपनाने की अपील ही है।यह घोषणा भी अमेरिकी टैक्स वृद्धि की घोषणा को लेकर की गई लगती है। स्वदेशी अपनाने से हमें देश के बाहर बाजार खोजने की जरूरत नही रहेगा। दूसरे अपने उत्पाद की प्रयोग होंगे तो आयातित सामान पर निर्भरता कम होगी।इतना सब होने के बावजूद हमें अपना  कंप्यूटर आपरेटिंग सिस्टम , अपना नेविगेशन सिस्टम और अपने कम्प्यूटर और मोबाइल के सोफ्टवेयर विकसित करने होंगे ताकि  दूसरे देशों के सोफ्टवेयर और आपरेटिंग सिस्टम पर निर्भरता कम हो। भारत और टैरिफ वार के शिकार देशों को डालर में खरीद −फरोख्त बंद करनी  पर होगी। भारत ने रूस और कुछ अन्य देशों के साथ अपनी मुद्रा में खरीदारी शुरू कर दी है। यदि सभी देशों द्वारा डालर का विकल्प खोजकर व्यापार शुरू किया जाता  है तो अमेरिका के लिए ये बड़ा झटका  होगा।

अशोक मधुप

( लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं)