विश्व एड्स दिवस,सुरक्षा जरूरी

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विश्व एड्स दिवस हर वर्ष 1 दिसंबर को एचआईवी/एड्स के प्रति जागरूकता बढ़ाने, इससे जुड़े मिथकों को मिटाने और एड्स से प्रभावित लोगों के प्रति संवेदना व्यक्त करने के उद्देश्य से मनाया जाता है। यह दिवस हमें न केवल इस वैश्विक स्वास्थ्य चुनौती को समझने का अवसर देता है, बल्कि उन प्रयासों को भी सलाम करता है जो सरकारें, स्वास्थ्य संगठन, स्वयंसेवी समूह और समाज मिलकर इस बीमारी से लड़ने के लिए कर रहे हैं। भारत जैसे विशाल और विविधतापूर्ण देश में यह दिवस और भी महत्वपूर्ण हो जाता है, क्योंकि एचआईवी/एड्स के मामले और उनके समाधान समाज के व्यापक स्वास्थ्य ढांचे से जुड़े हुए हैं

भारत ने पिछले दो दशकों में एचआईवी/एड्स नियंत्रण के क्षेत्र में महत्वपूर्ण प्रगति की है। 2000 के दशक की शुरुआत में देश में संक्रमित व्यक्तियों की संख्या तेजी से बढ़ रही थी, लेकिन राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण संगठन (NACO) और विभिन्न राज्य सरकारों के सतत अभियानों से संक्रमण दर में उल्लेखनीय कमी आई। आज भारत विश्व में एचआईवी संक्रमणों के बोझ वाले शीर्ष देशों में होते हुए भी संक्रमण को नियंत्रित करने के सफल उदाहरणों में शामिल है।
देश के कुछ राज्यों—जैसे महाराष्ट्र, कर्नाटक, तमिलनाडु, मणिपुर और नागालैंड—में संक्रमण दर अपेक्षाकृत अधिक रही है, लेकिन जागरूकता, परीक्षण सुविधाओं और इलाज की उपलब्धता बढ़ने से स्थिति धीरे-धीरे सुधर रही है।

भारत में एचआईवी संक्रमण का सबसे बड़ा कारण असुरक्षित यौन संबंध हैं। इसके अलावा संक्रमित सीरिंजों का उपयोग, रक्त संक्रमण, जन्म के दौरान मां से बच्चे में संक्रमण और असुरक्षित चिकित्सा प्रक्रियाएं भी इसके प्रसार के कारण हैं।
जोखिम समूहों में हाई-रिस्क व्यवहार वाले समूह प्रमुख हैं—जैसे वाणिज्यिक यौनकर्मी, ट्रक चालक, इंजेक्शन द्वारा नशीले पदार्थ लेने वाले लोग, ट्रांसजेंडर समुदाय तथा पुरुष-से-पुरुष यौन संबंध रखने वाले पुरुष (MSM)। सरकार और गैर-सरकारी संगठन इन समूहों के लिए विशेष जागरूकता और उपचार कार्यक्रम चलाते हैं।

भारत में एचआईवी/एड्स नियंत्रण के लिए राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण कार्यक्रम (NACP) सबसे प्रमुख सरकारी योजना है। यह कार्यक्रम जागरूकता अभियान, एचआईवी परीक्षण केंद्र, काउंसलिंग सेवाएं, ART (एंटी-रेट्रो वायरल थेरेपी) उपचार, गर्भवती महिलाओं की जांच और संक्रमण को रोकने के उपायों पर केंद्रित है।
सरकार ने देशभर में हजारों ART केंद्र स्थापित किए हैं, जहां संक्रमित व्यक्ति जीवनभर मुफ्त उपचार प्राप्त कर सकते हैं। इसके अलावा ‘90-90-90’ लक्ष्य (90% संक्रमित व्यक्तियों की पहचान, 90% को उपचार, और 90% में वायरल लोड नियंत्रण) को हासिल करने की दिशा में लगातार प्रगति की जा रही है।

एड्स के प्रति समाज में मौजूद भ्रांतियां और भेदभाव संक्रमित व्यक्तियों के लिए सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक हैं। आज भी कई क्षेत्रों में एचआईवी संक्रमित लोगों को सामाजिक दूरी, रोजगार में भेदभाव, रिश्तों में अस्वीकार और स्वास्थ्य सुविधाओं में उपेक्षा झेलनी पड़ती है।
विश्व एड्स दिवस जैसे अवसर इस भेदभाव को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। स्कूलों, कॉलेजों, पंचायतों और शहरी क्षेत्रों में रैलियां, पोस्टर अभियान, स्वास्थ्य शिविर और संवाद कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं, जिनसे जागरूकता फैलती है और समाज को वैज्ञानिक जानकारी मिलती है।

एचआईवी से बचाव पूरी तरह संभव है, बशर्ते आवश्यक सावधानियों का पालन किया जाए। असुरक्षित यौन संबंध से बचना, कंडोम का नियमित उपयोग, नशीले पदार्थों के लिए साझा सुई का प्रयोग न करना, केवल प्रमाणित रक्त का ही उपयोग करना और गर्भवती महिलाओं की समय पर जांच कराना प्रमुख उपाय हैं।
सरकार और संगठनों द्वारा कंडोम वितरण, टेस्टिंग कैंप और पीपीटीसीटी (Prevention of Parent to Child Transmission) जैसी योजनाओं से संक्रमण रोकथाम के प्रयास लगातार किए जा रहे हैं।

आज एचआईवी संक्रमित व्यक्ति भी पूर्ण जीवन जी सकता है। ART दवाओं की वजह से वायरस की मात्रा शरीर में इतनी कम हो जाती है कि रोगी स्वस्थ जीवन जी सकता है और दूसरों को संक्रमण फैलने का खतरा भी कम हो जाता है।
भारत में चिकित्सा अनुसंधान संस्थान वैक्सीन और दीर्घकालीन उपचार पद्धतियों पर काम कर रहे हैं। दवाओं की किफायती कीमत और सरकारी सहायता ने उपचार को और आसान बनाया है। इससे मृत्यु दर और संक्रमण दर दोनों में कमी आई है।

यह दिन न केवल एचआईवी/एड्स के प्रति जागरूकता बढ़ाने का अवसर है बल्कि समाज में दया, सम्मान और समर्थन का संदेश भी देता है। यह अवसर उन लाखों लोगों को याद करने का भी है जिन्होंने एड्स के कारण अपनी जान गंवाई और उन स्वास्थ्य योद्धाओं को सम्मानित करने का जिनके अथक प्रयासों ने लाखों जीवन बचाए हैं।
भारत में इस दिन सरकारी भवनों, अस्पतालों, स्कूलों और संस्थानों में कार्यक्रम आयोजित होते हैं। लाल रिबन पहनने की परंपरा भी इसी दिन की पहचान है, जो जागरूकता और समर्थन का प्रतीक है।

भारत ने एचआईवी/एड्स से लड़ाई में महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल की हैं, लेकिन चुनौतियां अभी भी मौजूद हैं—खासकर सामाजिक भेदभाव और जागरूकता की कमी के क्षेत्र में। आवश्यकता है कि समाज, सरकार और स्वास्थ्य सेवा प्रदाता मिलकर एक ऐसी वातावरण का निर्माण करें जहाँ एचआईवी संक्रमित व्यक्तियों को सम्मान, सहायता और उचित उपचार मिले।
विश्व एड्स दिवस हमें यही संदेश देता है कि शिक्षा, जागरूकता, सहानुभूति और वैज्ञानिक उपायों के माध्यम से हम एचआईवी-मुक्त भारत की दिशा में तेज़ी से आगे बढ़ सकते हैं।

रोडवेज बस की टक्कर में आटो सवार छह मरे

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मुरादाबाद के पास दिल्ली-लखनऊ नेशनल हाईवे पर एक भीषण सड़क दुर्घटना में शादी समारोह में जा रहे एक ही परिवार के छह लोगों की मौत हो गई। मेरठ डिपो की अनियंत्रित रोडवेज बस कह ऑटो से हुई जोरदार टक्कर में पांच लोगों की मौके पर ही मौत हो गई। एक ने अस्पताल में दम तोड़ दिया। इस हादसे में छह अन्य लोग गंभीर रूप से घायल हुए । घायलों को तत्काल अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

गांव कुंदरकी क्षेत्र के अब्दुल्लापुर गांव निवासी संजू, सीमा पत्नी करन सिंह, आरती पुत्री मुरारी, अभय पुत्र ओमवीर, सुमन पत्नी हरदीप और करन सिंह की एक अन्य पुत्री, संजू के ऑटो में सवार होकर कटघर क्षेत्र के रफतापुर गांव में भात (शादी की रस्म) लेकर जा रहे थे। जैसे ही उनका ऑटो जीरो पॉइंट के पास पहुंचा कि पीछे से आ रही मेरठ डिपो की एक रोडवेज बस अनियंत्रित हो गई और ऑटो को अपनी चपेट में ले लिया।

टक्कर इतनी भीषण थी कि ऑटो पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गया। हादसे में संजू, आरती,सीमा, अभय, और सुमन की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई।। अस्पताल में उपचार के दौरान अनन्या नामक परिवार की एक और सदस्य ने दम तोड़ दिया। इससे मृतकों की संख्या बढ़कर छह हो गई है। घायलों का इलाज जारी है और उनकी स्थिति गंभीर बताई जा रही है।

सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस और बचाव दल मौके पर पहुंच गए। घायलों को तुरंत अस्पताल पहुंचाया गया और शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया। पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है और बस चालक की तलाश शुरू कर दी है। यह घटना सड़क सुरक्षा पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े करती है।

ई-खिलौना लैब का उद्घाटन

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लेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय, सी-डैक, भारतीय खिलौना उद्योग और लेगो समूह ने परियोजना ‘डेवलपमेंट ऑफ इलेक्‍ट्रॉनिक्‍स एंड आईटी बेस्‍ड कंट्रोल और ऑटोमेशन सॉल्‍यूशन फॉर कंज्‍यूमर इलेक्‍ट्रॉनिक गुड्स (टॉय इंडस्‍ट्री)’ के अंतर्गत एक वर्ष का प्रशिक्षण पूरा करने वाले इंजीनियरिंग स्नातकों के दूसरे बैच का दीक्षांत समारोह आयोजित किया। यह परियोजना मंत्रालय के अनुसंधान एवं विकास समूह की एक विशेष पहल है जिसका उद्देश्य प्रोटोटाइप विकसित करके और कम प्रतिनिधित्व वाले समुदायों सहित युवा इंजीनियरों को ऐसे खिलौने डिज़ाइन करने हेतु आवश्यक कौशल से सुसज्जित करके भारतीय इलेक्ट्रॉनिक खिलौना उद्योग के विकास को बढ़ावा देना है।

इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय की इस पहल के अंतर्गत, पूरे भारत से अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति और पूर्वोत्तर क्षेत्र की पृष्ठभूमि से युवा इंजीनियरों का चयन किया गया और उन्हें एक वर्ष तक अनुसंधान एवं विकास कार्यों में लगाया गया। पहले छह महीने तक उन्हें सी-डैक-नोएडा स्थित ई-खिलौना प्रयोगशाला में काम करने और सीखने का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त हुआ। इसके बाद, उद्योग जगत की ज़रूरतों के अनुसार खिलौनों के प्रोटोटाइप बनाने के लिए उन्हें छह महीने का प्रशिक्षण दिया गया। प्रतिभागियों को एक वर्ष के लिए 25,000 रुपये का मासिक वृति दी गई।

इस कार्यक्रम के दौरान, इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अपर सचिव, श अमितेश कुमार सिन्हा ने सी-डैक, नोएडा में स्थापित इलेक्ट्रॉनिक खिलौना प्रयोगशाला का उद्घाटन किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा, “भारत इलेक्ट्रॉनिक खिलौनों का एक बढ़ता हुआ बाजार है और भारतीय खिलौना उद्योग के तंत्र के निर्माण में इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। मुझे बहुत खुशी है कि इसके लिए आधारशिला तैयार हो रही है और इंजीनियरों की अगली पीढ़ी इस दिशा में काम कर रही है। इस कार्यक्रम को और बड़े पैमाने पर औपचारिक रूप दिया जा सकता है ताकि अधिक विद्यार्थियों को लाभ मिल सके और खिलौना उद्योगों को समग्र रूप से बढ़ावा देने में अधिक प्रभावी हो। ई-खिलौनों के लिए सी-डैक-नोएडा में स्थापित उत्कृष्टता केंद्र में राष्ट्रीय इलेक्ट्रॉनिकी एवं सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान, एमएसएच और इलेक्ट्रॉनिक खिलौनों पर केंद्रित अन्य संस्थान शामिल होंगे। इससे उद्यमिता/स्टार्टअप शुरू करने में मदद मिलेगी। मैं स्नातक करने वाले विद्यार्थियों को उनके भविष्य के लिए शुभकामनाएं देता हूँ।”

29 नवंबर को इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय में आयोजित इस दीक्षांत समारोह में श्री अमितेश कुमार सिन्हा,  इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अपर सचिव, इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय में जीसी आर एंड डी श्रीमती सुनीता वर्मा, सी-डैक, नोएडा के ईडी श्री विवेक खनेजा, टॉयज़ एसोसिएशन ऑफ इंडिया के निदेशक  श्री अनिर्बान गुप्ता, , जीपीए, भारत में लेगो समूह, इलेक्ट्रॉनिक्स खिलौना उद्योग के सदस्य शामिल हुए।

वरिष्ठ नागरिकों में जागरूकता और अंतर-पीढ़ीगत संबंधों को बढ़ावा देने के लिए “आराधना” सांस्कृतिक कार्यक्रम

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भारत सरकार के सामाजिक न्याय और अधिकारिता विभाग ने वरिष्ठ नागरिकों के लिए वृद्धजन दिवस (आईडीओपी)-2025 के समारोहों की श्रृंखला के क्रम में वृद्धावस्था के प्रति जागरूकता बढ़ाने और अंतर-पीढ़ीगत संबंधों को बढ़ावा देने के लिए 28 नवंबर  को जनपथ, नई दिल्ली स्थित डीआईएसी के भीम हॉल में एक सांस्कृतिक कार्यक्रम “आराधना” का आयोजन किया। इस कार्यक्रम का विषय “अनुभव से ऊर्जा तक” था।

इस सत्र में केंद्रीय सामाजिक न्याय और अधिकारिता राज्य मंत्री श्री बी.एल.वर्मा, सामाजिक न्याय और अधिकारिता विभाग के सचिव, सामाजिक न्याय और अधिकारिता विभाग के वरिष्ठ अधिकारी, विद्यार्थी, वरिष्ठ नागरिक और विभिन्न गैर-सरकारी संगठनों (एनजीओ) के प्रतिनिधि उपस्थित थे।

भारतीय संविधान के अनुच्छेद 41 के अंतर्गत, राज्य को वरिष्ठ नागरिकों के कल्याण के लिए प्रभावी प्रावधान करने का अधिकार दिया गया है। इसी भावना से माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों का भरण-पोषण एवं कल्याण अधिनियम, 2007 लागू किया गया था। यह ऐतिहासिक कानून हमारे सांस्कृतिक मूल्यों का प्रतीक है—देखभाल, कर्तव्य और प्रेम को प्रवर्तनीय अधिकारों में परिवर्तित करता है। सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय वरिष्ठ नागरिकों से संबंधित मामलों के लिए नोडल विभाग है।

2011 की जनगणना के अनुसार, देश में लगभग 10 करोड़ वरिष्ठ नागरिक हैं। 2036 तक यह संख्या बढ़कर 22 करोड़ होने का अनुमान है। यह बढ़ती जनसंख्या एक चुनौती के साथ-साथ वरिष्ठ नागरिक केंद्रित नीतियों पर अपना ध्यान केंद्रित करने का अवसर भी प्रस्तुत करती है। हमारे देश ने नीतिगत और कानूनी ढाँचे, दोनों स्तरों पर इस दिशा में पहले ही कई पहल की हैं।

सांस्कृतिक कार्यक्रम के दौरान वायुसेना बैंड ने स्पेस फ़्लाइट, सुजलाम सुफलाम, रिजॉइस इन रइसाना, इवनिंग स्टार, वंदे मातरम और सारे जहाँ से अच्छा जैसे गीतों की धुनें बजाईं। वायुसेना बैंड द्वारा बजाई गई धुनों ने उपस्थित लोगों में भारत माता के प्रति गौरव, राष्ट्रवाद और देशभक्ति की भावना जगाई। इसने एक बार पुन: मातृभूमि के प्रति प्रेम को जागृत कर दिया।

पद्मश्री गीता चंद्रन ने अपनी टीम के साथ भरतनाट्यम का प्रदर्शन किया। लवंगी राग में त्रिधारा, नमः शिवाय, ओंकार कारिणी और संकीर्तन का प्रदर्शन किया। भारतीय नृत्य शैलियों की इन भावपूर्ण प्रस्तुतियों ने सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया।

अपने संबोधन में केंद्रीय सामाजिक न्याय और अधिकारिता राज्य मंत्री, श्री बी.एल. वर्मा ने कहा कि हमारे वरिष्ठ नागरिकों को सदैव ज्ञान, धैर्य और मूल्य-आधारित जीवन का प्रतीक माना गया है। उनके जीवन का प्रत्येक अध्याय—कड़ी मेहनत, संघर्ष, त्याग और उपलब्धियों से भरा—युवा पीढ़ी के लिए एक मार्गदर्शक का काम करता है। यह सांस्कृतिक कार्यक्रम इसलिए विशेष है क्योंकि संगीत, नृत्य और कला मिलकर अनुभवों को अभिव्यक्त करते हैं और ऊर्जा को एक सुंदर रूप प्रदान करते हैं, जैसा कि भारतीय वायु सेना के संगीत बैंड द्वारा प्रस्तुत किया गया—सेवा और एकता की मधुर अभिव्यक्ति—और भारत की सुप्रसिद्ध नृत्यांगना पद्मश्री सुश्री गीता चंद्रन का सम्मानित नृत्य और संगीत प्रदर्शन।

यह आयोजन इसलिए यादगार है क्योंकि आज तीन पीढ़ियाँ इस मंच पर एक साथ हैं—हमारे बुजुर्गों की संगीतमय प्रस्तुतियाँ, हमारे युवाओं की कलात्मक अभिव्यक्तियाँ और बच्चों की आनंदमय उपस्थिति। सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय इसी दिशा में कार्यरत है, क्योंकि इसका प्रत्येक कार्यक्रम हमारे वरिष्ठ नागरिकों के सम्मान, सुरक्षा, सक्रिय जीवन और भागीदारी को सुनिश्चित करने की प्रतिबद्धता से प्रेरित है।

सांस्कृतिक कार्यक्रम “आराधना” ने वृद्धावस्था के प्रति जागरूकता और अंतर-पीढ़ीगत संबंधों को बढ़ावा देने के लिए वरिष्ठ नागरिकों, विद्यार्थी, नीति निर्माताओं, गैर-सरकारी संगठनों (एनजीओ) को एक मंच पर एकत्रित किया।

भारत निर्वाचन आयोग ने मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की तिथि एक सप्ताह बढ़ाई 

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भारत निर्वाचन आयोग ने 12 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में मतदाता सूचियों के चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के लिए प्रासंगिक तिथियों को एक सप्ताह बढ़ाकर संशोधित कार्यक्रम की घोषणा की है, जिसमें 01.01.2026 को अर्हक तिथि माना गया है।

विशेष गहन पुनरीक्षण का संशोधित कार्यक्रम इस प्रकार है:

क्रमांकगतिविधियांअनुसूची
1गणना अवधि11.12.2025(गुरुवार) तक 
2मतदान केंद्रों का युक्तिकरण/पुनर्व्यवस्थापन11.12.2025 (गुरुवार) तक 
3नियंत्रण तालिका का अद्यतनीकरण और ड्राफ्ट रोल की तैयारी12.12.2025 (शुक्रवार)15.12.2025 (सोमवार) तक 
4मसौदा मतदाता सूची का प्रकाशन16.12.2025 (मंगलवार) को 
5दावे और आपत्तियां दाखिल करने की अवधि16.12.2025 (मंगलवार)15.01.2026 (गुरुवार) तक 
 6नोटिस चरण (जारी करना, सुनवाई और सत्यापन); गणना प्रपत्रों पर निर्णय और दावों तथा आपत्तियों का निपटान ईआरओ द्वारा साथ साथ किया जाएगा 16.12.2025 (मंगलवार) से07.02.2026 (शनिवार) 
 7मतदाता सूची के स्वास्थ्य मापदंडों की जांच करना तथा अंतिम प्रकाशन के लिए आयोग की अनुमति प्राप्त करना। 10.02.2026 (मंगलवार) तक 
8मतदाता सूची का अंतिम प्रकाशन14.02.2026 (शनिवार) को

राष्‍ट्रीय शिक्षा नीति भारत की संस्कृति, परंपरा और लोकाचार में निहित: उपराष्ट्रपति

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भारत के उपराष्ट्रपति श्री सी.पी. राधाकृष्णन ने आज राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईटी), कुरुक्षेत्र, हरियाणा के 20वें दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में भाग लिया।उन्होंने विद्यार्थियों से ज़िम्मेदारी से नवाचार करने का आग्रह किया और कहा कि “प्रौद्योगिकी का असली उद्देश्य केवल प्रगति नहीं, बल्कि उद्देश्यपूर्ण प्रगति है।”

 उपराष्ट्रपति ने भारत के प्रमुख तकनीकी संस्थानों में से एक के इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम में शामिल होने को अपना सौभाग्‍य बताया। उन्होंने एनआईटी कुरुक्षेत्र की सराहना करते हुए कहा कि यह एक समृद्ध विरासत, जीवंत वर्तमान और भविष्य वाला संस्थान है जो देश में तकनीकी शिक्षा के मानकों को आकार दे रहा है।

उन्होंने कहा कि कुरुक्षेत्र एक पवित्र भूमि है जो हमें याद दिलाती है कि अधर्म पर धर्म की हमेशा विजय होती है, चाहे अधर्म कितना भी शक्तिशाली क्यों न होउपराष्ट्रपति ने कहा कि दीक्षांत समारोह केवल एक समारोह नहीं, बल्कि एक ऐसा क्षण होता है जब वर्षों का समर्पण गर्व, आशा और अवसर से भरी एक नई शुरुआत में बदलता है।

वैश्विक परिवर्तन की गति पर बोलते हुए उन्होंने कृत्रिम बुद्धिमत्ता, नवीकरणीय ऊर्जा प्रणालियों, अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी, जैव प्रौद्योगिकी, साइबर सुरक्षा और सेमीकंडक्‍टर के क्षेत्र में विकास के बारे में बात की।

उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि प्रौद्योगिकी उद्योगों को नया रूप देने और समाज के कामकाज के तरीके को पुन:परिभाषित करने में एक शक्तिशाली माध्यम बन गई है। उन्होंने विद्यार्थियों से ज़िम्मेदारी से नवाचार करने का आग्रह किया और कहा कि “प्रौद्योगिकी का असली उद्देश्य केवल प्रगति नहीं, बल्कि उद्देश्यपूर्ण प्रगति है।”

विद्यार्थियों को अनुसंधान, नवाचार और भारत-विशिष्ट समस्या-समाधान में गहराई से उतरने के लिए प्रोत्साहित करते हुए, उन्होंने कहा कि ये दोनों इंजन भारत के तकनीकी नेतृत्व को आगे बढ़ाएंगे। उन्होंने युवा नवप्रवर्तकों को राष्ट्रीय महत्व के उभरते क्षेत्रों, जैसे टिकाऊ विनिर्माण, स्मार्ट मोबिलिटी, क्वांटम प्रौद्योगिकी, स्वास्थ्य सेवा प्रौद्योगिकी, कृषि नवाचार और हरित बुनियादी ढाँचागत क्षेत्र में अनुसंधान करने पर बल दिया।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि भारत प्रौद्योगिकी के उपयोगकर्ता से उन्नत समाधानों का वैश्विक निर्माता बनने की ओर अग्रसर हो रहा है। उन्होंने एक जीवंत उद्यमशीलता तंत्र को बढ़ावा देने के लिए डिजिटल इंडिया, स्टार्टअप इंडिया और मेक इन इंडिया जैसी पहलों को श्रेय दिया और स्नातकों से अपने विचारों को ऐसे उद्यमों में बदलने का आग्रह किया जो रोजगार का सृजन करें और राष्ट्रीय विकास में योगदान दें।

समकालीन वैश्विक चुनौतियों – जलवायु परिवर्तन, साइबर सुरक्षा खतरे, प्रौद्योगिकी तक समान पहुँच और एआई का नैतिक उपयोग – को स्वीकार करते हुए, उन्होंने कहा कि ये नवाचार और नेतृत्व के लिए अपार अवसर भी प्रदान करते हैं। उन्होंने राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी)-2020 को लागू करने में प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की दूरदर्शिता की प्रशंसा की। यह नीति बहु-विषयक शिक्षा के अवसर प्रदान करती है और भारत की संस्कृति, विरासत और लोकाचार में गहराई से निहित है। उपराष्ट्रपति ने कहा कि एनईपी 2020 ने मैकाले शिक्षा प्रणाली की औपनिवेशिक छाप को तोड़कर भारत को परिवर्तनकारी पथ पर अग्रसर किया है। उन्होंने कहा कि मैकाले की शिक्षा प्रणाली भारत पर शासन करने के लिए शुरू की गई थी और केवल क्लर्क तैयार करती थी।

समग्र शिक्षा पर संस्थान के फोकस की सराहना करते हुए, उन्होंने समग्र व्यक्तित्व विकास केंद्र (सीएचपीडी) की स्थापना की सराहना की, जो भगवद गीता, सार्वभौमिक मानवीय मूल्यों, संज्ञानात्मक विज्ञान और मानसिक स्वास्थ्य पर पाठ्यक्रमों के माध्यम से बौद्धिक, भावनात्मक और नैतिक विकास को बढ़ावा देता है।

विकसित भारत @ 2047 के राष्ट्रीय दृष्टिकोण का उल्‍लेख करते हुए, उपराष्ट्रपति ने विश्वास व्यक्त किया कि एनआईटी कुरुक्षेत्र के स्नातक इस लक्ष्य को साकार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। उन्होंने सराहना करते हुए कहा कि संस्थान को अब तक 64 पेटेंट प्रदान किए गए हैं, जो अनुसंधान, नवाचार और बौद्धिक संपदा निर्माण की इसकी मजबूत संस्कृति को दर्शाता है।

उन्होंने डीआरडीओ और इसरो के सहयोग से एआई-आधारित युद्ध, रक्षा अनुसंधान और चंद्रयान और मार्स ऑर्बिटर मिशन जैसे अंतरिक्ष मिशनों में उन्नत तकनीकों में संस्थान के महत्वपूर्ण योगदान की सराहना की। उन्‍होंने गांवों और झुग्गियों में जीवन स्‍तर में सुधार के लक्ष्‍य से कम लागत आधारित अनुसंधान, स्‍वदेशी तकनीक के माध्‍यम से आत्‍मनिर्भर भारत के लिए संस्‍था के प्रयासों की प्रशंसा की।  

विद्यार्थियों से भारत की विकास यात्रा से जुड़े रहने का आग्रह करते हुए उन्होंने कहा कि अनुसंधान को शहरी-ग्रामीण खाई को पाटने, एमएसएमई को सशक्त बनाने, कृषि को आधुनिक बनाने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था की सहायता करनी चाहिए ताकि प्रौद्योगिकी अंतिम व्यक्ति तक पहुंच सके। उन्होंने कहा, “हमें प्रतिभा पलायन से प्रतिभा से लाभ की ओर बढ़ना चाहिए।” उन्होंने स्नातकों को प्रोत्साहित किया कि वे जहां भी जाएं भारत को अपने दिल में रखें।

भारत के युवाओं से अपनी आकांक्षाओं को व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा, “मेरा मानना ​​है कि अगला गूगल, अगला टेस्ला, अगला स्पेसएक्स भारत से हो – एनआईटी कुरुक्षेत्र जैसे संस्थानों से हो।”

उपराष्ट्रपति ने विद्यार्थियों से “नशे को ना” कहकर अनुशासित जीवन जीने की भी अपील की।

अपने संबोधन के समापन पर उन्होंने स्नातकों को याद दिलाया कि उनकी डिग्री एक समापन बिंदु नहीं है बल्कि एक नई जिम्‍मेदारी की शुरूआत है। उन्‍होंने विद्यार्थियों से सृजनात्‍मकता, मानवीयता और करूणा से समाज की सेवा करने का आग्रह किया।  

इस अवसर पर हरियाणा के राज्यपाल प्रो. आशिम कुमार घोष, हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी, एनआईटी कुरुक्षेत्र के निदेशक प्रो. बी.वी. रमना रेड्डी, एनआईटी कुरुक्षेत्र के बोर्ड ऑफ गवर्नर्स की अध्यक्ष डॉ. तेजस्विनी अनंत कुमार और अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।

राजनीतिक दलों के नेताओं संग सरकार की बैठक हुई

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संसद के आगामी शीतकालीन सत्र, 2025 से संबंधित मुद्दों पर चर्चा के लिए आज (30 नवंबर, 2025) रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में राजनीतिक दलों के नेताओं के साथ संसद भवन परिसर, नई दिल्ली में एक बैठक आयोजित की गई। यह बैठक संसदीय कार्य और अल्पसंख्यक कार्य मंत्री श्री किरेन रिजिजू ने बुलाई थी। इस बैठक में केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण और रसायन एवं उर्वरक मंत्री श्री जगत प्रकाश नड्डा, विधि एवं न्याय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) और संसदीय कार्य राज्य मंत्री श्री अर्जुन राम मेघवाल और संसदीय कार्य और सूचना एवं प्रसारण राज्य मंत्री डॉ. एल. मुरुगन भी शामिल हुए। कुल मिलाकर, बैठक में मंत्रियों सहित 36 राजनीतिक दलों के 50 नेताओं ने भाग लिया।

रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह की परिचयात्मक टिप्पणी से बैठक की शुरूआत हुई। उन्होंने बैठक में उपस्थित सभी नेताओं का स्वागत किया। तत्पश्चात, संसदीय कार्य मंत्री ने बैठक का संचालन किया। उन्होंने नेताओं को सूचित किया कि संसद का शीतकालीन सत्र, 2025 सोमवार, 1 दिसंबर, 2025 को आरंभ होगा और सरकारी कार्य की अनिवार्यताओं के अधीन, सत्र शुक्रवार, 19 दिसंबर, 2025 को समाप्त हो सकता है। इस सत्र में 19 दिनों की अवधि में कुल 15 बैठकें होंगी।

संसदीय कार्य मंत्री श्री रिजिजू ने आगे बताया कि इस सत्र के दौरान उठाए जाने वाले विधायी और अन्य कार्यों के लिए अस्थायी रूप से 14 विषयों की पहचान की गई है।

उन्होंने यह भी कहा कि सरकार दोनों सदनों के नियमों के अनुसार, सदनों में किसी भी अन्य महत्वपूर्ण मुद्दे पर चर्चा के लिए तैयार है। विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं ने संसद के आगामी शीतकालीन सत्र के दौरान उनके की ओर से उठाए जाने वाले विभिन्न संभावित मुद्दों पर अपने विचार व्यक्त किए और सरकार को पूर्ण सहयोग प्रदान करने का आश्वासन दिया।

अंत में, श्री राजनाथ सिंह और श्री किरेन रिजिजू ने बैठक में भाग लेने, अपने विचार व्यक्त करने तथा सक्रिय एवं प्रभावी भागीदारी के लिए सभी नेताओं को धन्यवाद दिया।

भारत के पूर्व प्रधानमंत्री इंद्र कुमार गुजराल : जीवन, दर्शन और विरासत

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भारत के पूर्व प्रधानमंत्री इंद्र कुमार गुजराल भारतीय राजनीति के उन सधे, शांत, चिंतनशील और दूरदर्शी नेताओं में से एक थे जिन्होंने न सिर्फ भारत की विदेश नीति को नई दिशा दी, बल्कि लोकतांत्रिक मूल्यों की मर्यादा को भी सर्वोच्च स्थान दिया। उनका जीवन संघर्ष, आदर्शवाद, विद्वत्ता और कूटनीतिक कौशल का ऐसा संगम था जिसने उन्हें विश्व समुदाय में सम्मान दिलाया। गुजराल की सबसे महत्वपूर्ण पहचान उनकी ‘गुजराल सिद्धांत’ के रूप में है, जिसने दक्षिण एशिया में भारत की पड़ोसी नीति को नई ऊँचाइयाँ प्रदान कीं। 1919 में अविभाजित पंजाब के झेलम (अब पाकिस्तान) में जन्मे इंद्र कुमार गुजराल आज़ादी के आंदोलन से प्रभावित रहे और युवावस्था में ही राजनीतिक चेतना से ओत-प्रोत हो गए थे।

गुजराल का आरंभिक राजनीतिक जीवन कम्युनिस्ट आंदोलन से जुड़ाव और स्वतंत्रता संघर्ष के दौरान जेल यात्राओं से होकर गुजरा। विभाजन के बाद वे परिवार सहित भारत आ गए और भारतीय राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाने लगे। उनकी शिक्षा, विद्वत्ता, शालीन व्यवहार और गहरी वैचारिक समझ उन्हें अन्य नेताओं से अलग पहचान दिलाती थी। वे उन विरले नेताओं में शामिल थे जिन्हें पढ़ने-लिखने का गहरा शौक था और जिनकी राजनीति विचारों पर आधारित थी, न कि शोर-शराबे पर। यही कारण था कि वे राजनीति में एक ‘जेंटलमैन स्टेट्समैन’ के रूप में जाने जाते थे।

स्वतंत्र भारत में इंद्र कुमार गुजराल ने अनेक महत्वपूर्ण पदों पर कार्य किया। वे सांसद, सूचना एवं प्रसारण मंत्री, विदेश मंत्री और अंततः 1997 में भारत के 12वें प्रधानमंत्री बने। सूचना एवं प्रसारण मंत्री के रूप में उन्होंने सेंसरशिप की जगह रचनात्मक अभिव्यक्ति को प्रोत्साहन दिया और दूरदर्शन-आकाशवाणी के आधुनिकीकरण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए। परंतु उनकी सबसे बड़ी पहचान कूटनीति में उनके महत्वपूर्ण योगदान से बनी। वे स्वाभाविक रूप से एक विचारवान और सधे हुए राजनयिक थे।

1997 में गठबंधन सरकार के दौर में गुजराल को प्रधानमंत्री पद की जिम्मेदारी मिली। यह वह समय था जब देश में गठबंधन राजनीति अपने शुरुआती दौर में थी और स्थिरता एक चुनौती थी। बावजूद इसके, गुजराल ने अपने कार्यकाल में किसी भी तरह की राजनीतिक तकरार से दूर, संयमित और सकारात्मक नेतृत्व दिया। उनका कार्यकाल बहुत लंबा नहीं रहा, परंतु प्रभाव अत्यंत गहरा रहा। एक ओर उन्होंने आंतरिक राजनीति में संतुलन बनाए रखने की कोशिश की, वहीं दूसरी ओर विदेश नीति के मोर्चे पर भारत की प्रतिष्ठा को नई ऊँचाइयों पर पहुँचाया।

इंद्र कुमार गुजराल को सबसे अधिक याद किया जाता है ‘गुजराल डॉक्ट्रिन’ के लिए। यह सिद्धांत पड़ोसी देशों के साथ भारत के संबंधों को विश्वास, सद्भावना और बिना शर्त सहयोग पर आधारित करने की परिकल्पना था। इस सिद्धांत के अनुसार भारत को अपने छोटे पड़ोसी देशों—नेपाल, भूटान, बांग्लादेश, श्रीलंका और मालदीव—के साथ संबंधों में बड़े-भाई वाली भूमिका निभाने के बजाय एक सहयोगी की तरह आगे आना चाहिए। गुजराल का मानना था कि दक्षिण एशिया में स्थिरता और विकास तभी संभव है जब भारत अपने पड़ोसियों के साथ संवाद, विश्वास और सहयोग को बढ़ावा दे। उनके इस दृष्टिकोण ने क्षेत्रीय राजनीति में सकारात्मक संदेश भेजा और भारत की छवि को मजबूत बनाया।

गुजराल की विदेश नीति में पाकिस्तान के साथ संवाद भी महत्वपूर्ण पहलू था। विभाजन की पीड़ा को व्यक्तिगत रूप से महसूस करने वाले गुजराल दोनों देशों के बीच बेहतर संबंधों के प्रबल समर्थक थे। वे मानते थे कि स्थायी शांति के लिए संवाद ही विकल्प है। उनके प्रयासों से कुछ समय के लिए विश्वास का माहौल बना, हालांकि राजनीतिक परिस्थितियों ने इसे अधिक समय तक टिकने नहीं दिया। फिर भी, उनका दृष्टिकोण आज भी भारत-पाकिस्तान संबंधों के लिए एक महत्वपूर्ण संदर्भ बिंदु माना जाता है।

इंद्र कुमार गुजराल न सिर्फ राजनेता थे, बल्कि साहित्य, कला और संस्कृति में भी उनकी गहरी रुचि थी। वे उर्दू साहित्य के प्रेमी थे और कई कवियों के साथ उनकी घनिष्ठता थी। उनकी वाणी में शालीनता, तर्क और विनम्रता का अद्भुत मेल था। वे उन नेताओं में शामिल थे जो राजनीति को जनसेवा और बौद्धिक दायित्व के रूप में देखते थे। सार्वजनिक जीवन में उनका व्यवहार सौम्य, विवादहीन और आदर्शवादी रहा।

प्रधानमंत्री पद छोड़ने के बाद भी गुजराल सक्रिय रहे और उन्होंने अपनी आत्मकथा ‘मैटर्स ऑफ डिस्क्रेशन’ लिखी, जिसमें उन्होंने राजनीति, कूटनीति और अपने अनुभवों का विस्तृत विश्लेषण किया। 30 नवंबर 2012 को उनका निधन हुआ, लेकिन उनकी नीतियाँ और विचार आज भी प्रासंगिक हैं।

इंद्र कुमार गुजराल की विरासत उनके बड़े-बड़े राजनीतिक भाषणों में नहीं, बल्कि उनकी सरलता, विचारधारा और शांत कूटनीति में निहित है। वे ऐसे नेता थे जिन्होंने सत्ता को कभी लक्ष्य नहीं बनाया, बल्कि साधन के रूप में देखा। उनकी विदेश नीति का दृष्टिकोण भारत की कूटनीति में आज भी महत्वपूर्ण स्थान रखता है। गुजराल ने दिखाया कि कभी-कभी नरम शब्द, संयम और सद्भावना भी वही काम कर सकते हैं जो कठोर कूटनीति नहीं कर पाती। उनका जीवन आधुनिक भारतीय राजनीति में एक ऐसी मिसाल है जो आदर्शवाद, शालीनता और विवेकशील नेतृत्व का प्रतीक बनकर हमेशा याद किया जाएगा।

“मन की बात” में मोदी का उम्मीद, उत्साह और सामूहिक जिम्मेदारी का संदेश

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आज के “मन की बात” कार्यक्रम में प्रधानमंत्री मोदी ने एक बार फिर स्पष्ट संदेश दिया कि भारत की प्रगति में केवल सरकार का योगदान नहीं, बल्कि हर नागरिक की भागीदारी, हर युवा की मेहनत, हर किसान की प्रतिबद्धता और हर समाज के समूह की सक्रियता आवश्यक है। उन्होंने खेती हो, खेल हो, संस्कृति हो या सामाजिक सुधार — हर क्षेत्र में सामूहिक प्रयास की अहमियत रेखांकित की।

उनका कहना था कि भारत अब नयी दिशा में अग्रसर है, और इस दिशा में हम सबको मिलकर काम करना है। उन्होंने देश को गर्व से आगे देखना और आगे बढ़ने का आह्वान किया।

आज का “मन की बात” सिर्फ एक भाषण नहीं — यह उम्मीद, उत्साह और सामूहिक जिम्मेदारी का संदेश है। भारत की तरक्की, सांस्कृतिक एकता और सामाजिक समरसता के लिए यह संवाद एक नए अध्याय की शुरुआत है।

आज — रविवार — प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने “मन की बात” के 128वें एपिसोड में देशवासियों से संवाद किया। इस कार्यक्रम में उन्होंने देश के विकास, सामाजिक-सांस्कृतिक उन्नति, कृषि, खेल, धर्म व अर्थव्यवस्था सहित कई महत्वपूर्ण विषयों पर विचार साझा किए।


प्रधानमंत्री ने किसानों का उल्लेख करते हुए कहा कि आज देश के कृषि-विभाग में सकारात्मक बदलाव देखने को मिल रहे हैं। उन्होंने कहा कि न केवल उत्पादन बढ़ा है, बल्कि नई तकनीकों और आधुनिक तरीकों का उपयोग कर खेती और ग्रामीण अर्थव्यवस्था अधिक सशक्त हो रही है।कृषि क्षेत्र में भी देश ने बड़ी उपलब्धि हासिल की। भारत ने 357 मिलियन टन के खा‌द्यान्न उत्पादन के साथ एक ऐतिहासिक record बनाया है। Three hundred and fifty seven million ton! 10 साल पहले की तुलना में भारत का खा‌द्यान्न उत्पादन 100 मिलियन टन और बढ़ गया है।

उन्होंने यह भी कहा कि आर्थिक गतिविधियाँ, जैसे रोजगार, उद्योग व स्थानीय व्यापार, तेजी से विकसित हो रहे हैं, जिससे गांवों व कस्बों में जीवन स्तर में सुधार हो रहा है। इस बात पर जोर दिया गया कि समृद्धि सिर्फ शहरों तक सीमित न रहे, बल्कि ग्रामीण भारत भी इसका हिस्सा बने।

कुछ दिन पहले ही मैंने हैदराबाद में दुनिया की सबसे बड़ी लीप इंजन MRO facility का उ‌द्घाटन किया है। Aircrafts की Maintenance, repair and overhaul के sector में भारत ने ये बहुत बड़ा कदम उठाया है। पिछले हफ्ते मुंबई में एक कार्यक्रम के दौरान INS ‘माहे’ को भारतीय नौसेना में शामिल किया गया। पिछले ही हफ्ते भारत के space ecosystem को Skyroot के Infinity campus ने नई उड़ान दी है। ये भारत की नई सोच, innovation और Youth Power का प्रतिबिंब बना है।

अपने संबोधन में प्रधानमंत्री मोदी ने देश में हो रही खेल-सफलताओं और युवाओं की मेहनत व प्रतिभा की सराहना की। उन्होंने कहा कि भारत के युवा हर क्षेत्र — खेल, कला, विज्ञान, उद्यमिता — में आगे बढ़ रहे हैं और देश का नाम रोशन कर रहे हैं।

उन्होंने यह संदेश दिया कि युवाओं की ऊर्जा, आत्म-विश्वास और लगन ही भारत के उज्जवल भविष्य की नींव है। उनका आह्वान था कि देश का हर युवा अपने हुनर, प्रतिभा और लगन से देश व समाज के लिए सकारात्मक योगदान दे।

प्रधानमंत्री ने देश की सांस्कृतिक विविधता और धार्मिक समरसता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि देश में अलग-अलग धर्म, रीति-रिवाज, भाषा और परंपराएं हैं, लेकिन यही विविधता भारत की असली ताकत है।

उन्होंने हाल ही में हुए धार्मिक एवं सांस्कृतिक आयोजनों, त्योहारों और सामाजिक समागमों का उल्लेख कर कहा कि इस तरह के उत्सव, कार्यक्रम और मिलन-जुलन भारत की सामाजिक एकता को और मजबूत करते हैं।

इस संदर्भ में उन्होंने कहा कि भारत की सांस्कृतिक विरासत, सभ्यता और सभ्याचार — हमें याद रखने और बनाए रखने चाहिए, और आने वाली पीढ़ियों को भी इसे समझाने व आत्मसात कराने का काम हम सबका है।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि देश ने हाल ही में कई महत्वपूर्ण उपलब्धियाँ हासिल की हैं — चाहे वह कृषि क्षेत्र में हो, खेल के क्षेत्र में हो या सामाजिक-आर्थिक प्रगति में। उन्होंने कहा कि देशभर में विकास की गति तेजी से बढ़ी है और यह विकास सिर्फ कुछ हिस्सों तक सीमित नहीं, बल्कि देश के हर हिस्से में दिखाई दे रहा है।

विशेष रूप से, उन्होंने उल्लेख किया कि नवाचार, इंफ्रास्ट्रक्चर विकास, रोजगार सृजन और युवा-शक्ति के योगदान से भारत एक नई दिशा में आगे बढ़ रहा है।

अपने संदेश में, प्रधानमंत्री मोदी ने देशवासियों से आग्रह किया कि वे हर क्षेत्र में सकारात्मक रूप से भाग लें — चाहे वह कृषि हो, खेल हो, संस्कृति हो या सामाजिक उत्थान। उन्होंने कहा कि देश की प्रगति में हर नागरिक की भागीदारी महत्त्वपूर्ण है।

उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर के पहाड़ी इलाकों में वन तुलसी यानि सुलाई, सुलाई के फूलों से यहाँ की मधुमक्खियाँ बेहद अनोखा शहद बनाती हैं। ये सफेद रंग का शहद होता है जिसे रामबन सुलाई honey कहा जाता है। कुछ वर्षों पहले ही रामबन सुलाई honey को GI Tag मिला है। इसके बाद इस शहद की पहचान पूरे देश में बन रही है।

दक्षिण कन्नड़ा जिले के पुत्तुर में वहाँ की वनस्पतियाँ शहद उत्पादन के लिए उत्कृष्ट मानी जाती हैं। यहाँ ‘ग्रामजन्य’ नाम की किसान संस्था इस प्राकृतिक उपहार को नई दिशा दे रही है। ‘ग्रामजन्य’ ने यहाँ एक आधुनिक processing unit बनाया, lab, bottling, storage और digital tracking जैसी सुविधाएँ जोड़ी गईं। अब यही शहद branded उत्पाद बनकर गाँवों से शहरों तक पहुँच रहा है। इस प्रयास का लाभ ढाई हजार से अधिक किसानों को मिला है।

आज भारत honey production में नए रिकार्ड बना रहा है। 11 साल पहले देश में honey का उत्पादन 76 हजार मीट्रिक टन था। अब ये बढ़कर डेढ़ लाख मीट्रिक टन से भी ज्यादा हो गया है। बीते कुछ वर्षों में शहद का export भी तीन गुना से ज्यादा बढ़ गया है। Honey Mission कार्यक्रम के तहत खादी ग्रामोद्योग ने भी सवा 2 लाख से ज्यादा bee-boxes लोगों में बांटे हैं। इससे हजारों लोगों को रोजगार के नए अवसर मिले हैं। यानि देश के अलग-अलग कोनों में शहद की मिठास भी बढ़ रही है। और ये मिठास किसानों की आय भी बढ़ा रही है।  

उन्होंने युवाओं से विशेष अपील की कि वे अपने हुनर, ऊर्जा और नवाचार के द्वारा देश को आगे बढ़ाएँ; साथ ही समाज में एकता, सहयोग और सद्भाव बनाए रखें।

प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि छोटे-छोटे प्रयास, चाहे वो स्वदेशी खरीद हो, स्थानीय उत्पादन को बढ़ावा देना हो या सामाजिक सेवा — ये सभी देश की मजबूती और विकास की दिशा में अहम योगदान हैं।

स्पेशल रेल गाड़ियों ‘ के संचालन की सच्चाई                                                                     

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  तनवीर जाफ़री 

गत दिनों अपने किसी निजी कार्यवश अचानक बिहार जाने का कार्यक्रम बन गया। प्रायः शहीद या सरयू यमुना एक्सप्रेस से पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार मेरा दरभंगा आना जाना होता है परन्तु इस बार चूँकि मात्र एक सप्ताह पूर्व ही दरभंगा जाने की तिथि निर्धारित हुई इसलिये शहीद या सरयू यमुना एक्सप्रेस में आरक्षण न मिल पाने के चलते आने जाने हेतु अन्य विकल्प तलाश करने पड़े। ऐसे ही वैकल्पिक ट्रेन थी अमृतसर – जयनगर ‘स्पेशल ट्रेन’ यानी 04652 । इस ट्रेन के अमृतसर से अंबाला पहुंचने का निर्धारित समय दोपहर 2 बजकर 50 मिनट था और दरभंगा पहुंचने का निर्धारित समय अगले दिन शाम 5.30 बजे था। अर्थात पूरी यात्रा लगभग 26 घंटे 30 में तय होनी थी। परन्तु यह ट्रेन अगले दिन शाम 5.30 बजे दरभंगा पहुँचने के बजाये तीसरे दिन सुबह लगभग 8.30 बजे पहुंची। यानी यह ‘स्पेशल ट्रेन’ 04652 लगभग 15 घंटे की देरी से  दरभंगा पहुंची। इतना ही नहीं जहाँ दूसरी मेल एक्सप्रेस ट्रेन्स का अंबाला-दरभंगा का ए सी थ्री का किराया लगभग 1500 रुपये है वहीं इस तथाकथित ‘स्पेशल ट्रेन’ के नाम पर यात्रियों से किराया भी क़रीब 2000 / रूपये वसूल किये गये।

                  इसी तरह वापसी के लिये भी जिस ट्रेन में ए सी थ्री श्रेणी में आरक्षण मिल सका वह भी दरभंगा-नई दिल्ली स्पेशल ट्रेन 02569 थी। इसका भी दरभंगा से छूटने का निर्धारित समय सुबह 6 बजकर 30 मिनट था परन्तु यह वहां से प्रातः 9 बजकर 40 मिनट पर यानी तीन घंटा दस मिंट के विलंब से रवाना हुई। और अपने निर्धारित समय यानी अगले दिन सुबह 4 बजे नई दिल्ली पहुँचने वाली यह स्पेशल ट्रेन लगभग 1. 30 बजे दोपहर अर्थात क़रीब दस घंटे की देरी से नई दिल्ली स्टेशन पहुँच सकी। इसका भी ए सी थ्री श्रेणी का किराया 1900 रूपये था जबकि अन्य सामान्य मेल एक्सप्रेस ट्रेन्स में 1500 के आस पास होता है। इस लेट लतीफ़ी के परिणाम स्वरूप कितने यात्रियों को किन किन परेशानियों का सामना करना पड़ा रेल विभाग को इससे कोई लेना देना नहीं। रास्ते में ट्रेन में खाने पीने व वाशरूम में जल आपूर्ति संबंधी कैसी कैसी परेशानियों का सामना यात्रियों ने किया रेल विभाग से इसका भी कोई वास्ता नहीं। रेल विभाग को तो यात्रियों की जेब से ‘स्पेशल ट्रेन’ के नाम पर ठगे गए फ़ालतू किराये भर से ही मतलब है। 

                इस समय आपको देश के कई भाग से इसी तरह की अनेक ट्रेन स्पेशल ट्रेन या क्लोन ट्रेन के नाम से चलती दिखाई दे जाएँगी। इनमें अधिकांश स्पेशल या क्लोन ट्रेन इसी तरह घंटों नहीं बल्कि दिन के हिसाब से लेट चल रही हैं। जानकारी जुटाने पर पता चला कि यह वही ट्रेन्स हैं जिन्हें पिछले दिनों त्योहारों के दौरान स्पेशल ट्रेन या क्लोन ट्रेन के नाम से चलाया गया था। परंतु चूंकि इसका किराया अन्य ट्रेन्स की तुलना में  काफ़ी अधिक है और यात्रियों की संख्या अधिक होने के चलते यह ट्रेन्स त्यौहार ख़त्म होने के बावजूद अभी भी यात्रियों की भारी भीड़ ढो रही हैं इसलिये रेल विभाग भी इसे अपनी कमाऊ योजना समझकर त्यौहार ख़त्म होने के बावजूद अभी भी चला रहा है।अब चूँकि इस तरह की स्पेशल या क्लोन रुपी ट्रेन्स सप्ताह में 3 या चार दिन ही चलती हैं इसलिये इनके एक या दो दिन लेट हो जाने पर भी रेल विभाग को कोई फ़र्क़ नहीं पड़ता। हाँ यात्रियों को जो परेशानियां उठानी पड़ती है उसका रेल विभाग या सरकार से कोई वास्ता ही नहीं। किसी यात्री की अस्पताल में डॉक्टर से महीनों पहले ली गयी अपॉइंटमेंट निरस्त हो जाती है जिससे उसकी जान व सेहत प्रभावित होती है। किसी की परीक्षा छूट जाती है किसी को नौकरी ज्वाइन करनी होती है किसी को शादी ब्याह में शामिल होना होता है। गोया लोगों की तरह तरह की व्यस्तताओं पर रेल विभसग की लेट लतीफ़ी पानी फेर देती है। जब स्पेशल या क्लोन ट्रेन के नाम पर संचालित रेलगाड़ियों की यह स्थिति है तो सामान्य ट्रेन्स की हालत का अंदाज़ा भी आसानी से लगाया जा सकता है। ख़ासकर बिहार की ओर जाने वाली गाड़ियां तो लगभग हमेशा ही विलंब व अति विलंब से ही चलती हैं। सुबह की ट्रेन शाम व शाम को पहुँचने वाली ट्रेन का अगले दिन सुबह अपने गंतव्य तक पहुंचना तो गोया आम बात हो चुकी है।  

                     सच तो यह है कि सरकार की प्राथमिकताओं में पहले से चल रही सामान्य /एक्सप्रेस व मेल ट्रेन्स को निर्धारित समय सारिणी के अनुसार संचालित करना नहीं बल्कि वंदे भारत ट्रेन्स की संख्या बढ़ाना है। वंदे भारत ट्रेन्स संचालित करने के पीछे भी यही कहानी है कि इसमें अन्य ट्रेन्स की तुलना में किराया काफ़ी अधिक है जिसे साधारण व्यक्ति ख़ासकर 5 किलो मुफ़्त राशन पर जीने को मजबूर व 10 हज़ार रूपये लेकर वोट डालने वाली महिलायें तो कम से कम सहन नहीं कर सकतीं। सरकार की दूसरी प्राथमिकता देश के चुनिंदा रेल स्टेशन को चमकाने व उनका रंग रोग़न करने की है। भले ही इन स्टेशन पर भिखारी कुत्ते गाय सांड आदि क्यों न डेरा जमाये हों। देश के अधिकांश रेलवे स्टेशन दशकों से नशेड़ियों व अपराधियों की शरण स्थली बने हुये हैं। आज भी देश के अनेक स्टेशन पर लूट चोरी ,जेब कतरी,ज़हर खुरानी,अवैध यात्री,रिश्वत ख़ोरी आदि अपराध धड़ल्ले से अंजाम दिए जाते हैं। शर्मनाक तो यह है कि देश के तमाम रेल स्टेशन पर बाक़ायदा रेल विभाग की ओर से लाउडस्पीकर से जेब कतरों से सावधान रहने,ज़हर खुरानी से बचने व अपने सामन की सुरक्षा करने जैसी घोषणायें बार बार की जाती हैं। परन्तु सरकार के पास यात्रियों को सुरक्षित व आरामदायक यात्रा मुहैया कराने की न तो कोई योजना है और शायद न ही यह उसकी भावी योजनाओं का हिस्सा प्रतीत होती है। बल्कि सरकार तो बुलेट ट्रेन चलाने की योजना पर काम कर रही है। शायद बिहार जैसे राज्यों से आने वाले ताज़ातरीन चुनाव परिणामों के बाद सरकार इस निष्कर्ष पर भी पहुँच चुकी है कि यू पी व बिहार जैसे घनी आबादी वाले राज्यों की जनता जब मुफ़्त राशन व नक़द पैसों के बदले वोट दे ही देती है तो उसे निर्धारित समय सारिणी के अनुसार ट्रेन संचालन जैसे विषय से क्या लेना देना ? और जिस जागरूक व शिक्षित वर्ग के रेल यात्री ट्रेन्स की लेटलतीफ़ी या ट्रेन संचालन की अन्य त्रुटियों से प्रभावित होते भी हैं या इसे महसूस करते हैं उनकी संख्या ‘लाभार्थी मतदाताओं ‘ से तो आख़िर कम ही है ? जो भी हो परन्तु कुल मिलाकर यही है देश में चल रही ‘स्पेशल रेल गाड़ियों ‘ के संचालन की सच्चाई

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 तनवीर जाफ़री