इमरान खान जिंदा, जेल में उनकी बहन उजमा ने मुलाकात की

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 पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान से मंगलवार को उनकी बहन उजमा ने अदियाला जेल में मुलाकात की है। मुलाकात के बाद मीडिया से बात करते हुए उजमा खान ने कहा कि, इमरान खान का स्वास्थ्य ठीक है, लेकिन उन्हें जेल में परेशान किया जा रहा है। उन्हें पूरे दिन जेल में बंद रखा जाता है। इमरान खान इस जेल में 2023 से कई मामले के आरोप में बंद है। हाल ही उनके मौत की अफवाहें सामने आई थीं। पाकिस्तान सरकार ने मंगलवार को इमरान खान की बहन को जेल में उनसे मिलने की इजाजत दे दी। । 

पिछले एक महीने से उनसे किसी को मिलने की इजाजत नहीं दी गई थी। लंबे समय से इमरान खान से उनके परिजनों को पाकिस्तान सरकार मिलने नहीं दे रही थी। पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) के प्रमुख से उनके परिवारवालों के लगातार मिलने से मना करने के कारण सोशल मीडिया पर यह अटकलें लगाई जा रही थीं कि वह जिंदा हैं या मर गए। हालांकि अदियाला जेल अधिकारियों ने दावा किया कि उनकी सेहत अच्छी है।


वहीं दूसरी ओर पीटीआई ने एक बयान में कहा कि इमरान खान की एक बहन डॉ. उजमा खान को उनसे मिलने की इजाजत दी गई, लेकिन देखते हैं कि सरकार अपना वादा पूरा करती है या नहीं। इस बीच, पंजाब सरकार ने पीटीआई के विरोध को रोकने के लिए अदियाला रोड पर पूरी रावलपिंडी पुलिस फोर्स तैनात कर दी। सरकार ने पहले ही रावलपिंडी और इस्लामाबाद में धारा 144 लगा दी है। रावलपिंडी के आठ पुलिस स्टेशनों के स्टेशन हाउस ऑफिसर और सीनियर अधिकारी अदियाला जेल के बाहर मौजूद हैं।

दूसरे दिन भी हंगामेदार रही संसद की कार्रवाई

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आज दूसरे दिन भी लोकसभा और राज्यसभा में हंगामेदार होता रहा। क्य विपक्ष ने चल रहे मतदाता सूची के गहन पुनरीक्षण(SIR) — पर तुरंत चर्चा कराने की मांग की। यह संसद के शीतकालीन सत्र के दूसरे दिन की शुरुआत थी, लेकिन SIR को लेकर विरोध-प्रदर्शन व नारेबाजी के कारण दोनों ही सदनों में व्यवधान आया।

लोकसभा में सुबह जैसे ही बैठक शुरू हुई, विपक्ष ने SIR के मुद्दे को प्राथमिकता देने की मांग रखते हुए वेल में आकर नारे लगाने शुरू कर दिए। इस बीच, कुछ सांसदों ने सदन के बीच में जाकर हंगामा किया, जिसके कारण कार्यवाही को दो बार स्थगित करना पड़ा — पहले 12 बजे तक, फिर दोपहर 2 बजे तक।

विपक्ष का कहना रहा कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण की प्रक्रिया लोकतंत्र की नींव से जुड़ा अहम मसला है, जिसे पीछे नहीं छोड़ा जा सकता। उन्होंने कहा कि जब तक इस पर बात नहीं होगी, संसद का बाकी काम नहीं चलेगा। दूसरी ओर सरकार और उसके समर्थक दलों ने कहा कि संसद सिर्फ एक ही विषय पर नहीं टिक सकती — देश के विकास और अन्य अहम विधेयकों पर भी काम होना चाहिए।

इस विरोध-प्रदर्शन के बीच, प्रशासनिक पहल भी हुई — बैठक के बाद लोकसभाध्यक्ष ओम बिरला की अध्यक्षता में सभी दलों के फ्लोर लीडर्स की मीटिंग बुलाई गई। ताकि सदन की कार्रवाई व लंबित एजेंडा को आगे कैसे बढ़ाया जाए, इस पर समझौता हो सके। इस चर्चा के अनुसार तय हुआ कि SIR व अन्य चुनाव सुधारों पर बहस पहले होनी चाहिए, लेकिन इसे तुरंत नहीं बल्कि 9–10 दिसंबर को आयोजित किया जाएगा। इसके पहले, 8 दिसंबर को 150 साल पूरे होने पर राष्ट्रीय गान और राष्ट्रगीत Vande Mataram पर चर्चा होगी।

वहीं, राज्‍यसभा में भी प्रदर्शन जारी रहा। सुबह बैठक शुरू होते ही विपक्ष ने SIR के खिलाफ जोरदार नारेबाज़ी की, और मांग की कि चुनाव सुधारों पर तुरंत चर्चा हो। कारण यही था कि SIR पर चर्चा न होने से लोकतंत्र की मूल प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। सभा की कार्यवाही दोपहर 2 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई, और बाद में सभापति ने इसे अगले दिन तक के लिए स्थगित कर दिया।

हालाँकि, सरकार की ओर से कहा गया कि चुनाव सुधारों पर चर्चा की तैयारी है, लेकिन इसे बिना समयसीमा तय किए नहीं किया जा सकता। मंत्रियों ने नारेबाज़ी की बजाय संसद की कार्यवाही सुचारु बनाने व अन्य कानून-विधेयकों पर काम करने की अपील की।

इस तरह, आज संसद का दूसरा दिन अधिकांश समय गतिरोध में गुज़रा। SIR और चुनाव सुधारों को लेकर सरकार और विपक्ष के बीच टकराव बरकरार रहा। हालांकि आगे के लिए बहस की रूपरेखा तय हो चुकी है — Vande Mataram पर पहले दिन बहस, उसके बाद 9–10 दिसंबर को चुनाव सुधारों पर विस्तृत चर्चा — पर फिलहाल सदन ने किसी अहम बिल को अंतिम रूप नहीं दिया। संसद की कार्यवाही अगले दिन फिर शुरू होगी।

संसद में ऐसा माहौल देख कर यह स्पष्ट है कि शीतकालीन सत्र — जो अन्य अहम विधेयकों पास कराने के लिए बुलाया गया है — सफल हो सकेगा या नहीं, यह काफी हद तक विपक्ष और सरकार के बीच आज हुए मत-भेद और आगे की रणनीति पर निर्भर करता है।

अयोध्या जी में 52 एकड़ में विश्व स्तरीय मंदिर संग्रहालय बनेगा

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उत्तर प्रदेश मंत्री मंडल ने अयोध्या जी में 52 एकड़ में विश्व स्तरीय मंदिर संग्रहालय बनाने का निर्णय लिया है । मंदिर संग्रहालय का निर्माण टाटा ग्रुप करेगा। बागपत में अंतरराष्ट्रीय योग केंद्र बनाने के लिए निशुल्क भूमि दी जाएगी। यह योग व आरोग्य केंद्र पीपीपी मॉडल पर बनेगा।चंदौली में 4.91 अरब से 29.67 किमी सड़क को फोरलेन बनाया जाएगा।


राजधानी लखनऊ में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में मंगलवार को कैबिनेट की बैठक हुई। बैठक में 21 प्रस्ताव पेश किए गए। इनमें 20 पर मंत्रिपरिषद की मुहर लगी। एक 14 नंबर के प्रस्ताव को पुनर्परीक्षण के लिए भेजा गया है। यह निजी अस्पतालों को प्रोत्साहन नीति के लिए था। बैठक के बाद कैबिनेट मंत्री सुरेश खन्ना ने जानकारी दी।

उन्होंने बताया कि उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए उद्योग करने वाले लोगों को एसजीएसटी और स्टांप ड्यूटी पर छूट दी जाएगी। इसके तहत मेरठ की मेसर्स पसवारा पेपर्स लिमिटेड को 65.67 हजार का लाभ आज दिया गया। 1.5 करोड़ का लाभ पहले दिया जा चुका है।

इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट के तहत एक और प्रस्ताव भी पास हुआ। इसके तहत शाहजहांपुर और मथुरा की एक-एक कपंनी को लाभ मिला। बागपत में अंतरराष्ट्रीय योग केंद्र बनाने के लिए निशुल्क भूमि दी जाएगी। यह योग व आरोग्य केंद्र पीपीपी मॉडल पर बनेगा। कैबिनेट ने इसे भी मंजूर किया। 

अयोध्या में मंदिर संग्रहालय बनाया जाएगा। साथ ही उत्तर प्रदेश अंतरराष्ट्रीय पदक विजेता सीधी भर्ती नियमावली 2022 में संशोधन किया जाएगा। इसमें राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय खेल प्रतियोगिताओं में शामिल होने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों के प्रशिक्षण अवधि, खेल की अवधि और इसके लिए आने-जाने में लगने वाले समय को भी ड्यूटी माना जाएगा।

चंदौली में 4.91 अरब से 29.67 किमी सड़क को फोरलेन बनाया जाएगा। यह सकलडीहा, चहनियां और सैदपुर होते हुए जनपद को गाजीपुर से जोड़ेगा। काफी समय से इसकी मांग चल रही थी। अब इसे मंजूरी मिली। 

उत्तर प्रदेश जेल मैनुअल 2022 की नियमावली पर भी संशोधन किया जाएगा। इसके जाति के आधार पर किसी भी बंदी से भेदभाव नहीं हो सकेगा। 

इंटीग्रेटेड टाउनशिप नीति-2005 एवं 2014 के तहत स्वीकृत एवं निष्क्रिय परियोजनाओं को निरस्तीकरण एवं क्रियाशील परियोजनाओं को पूर्ण कराने के लिए नीति को लागू किए जाने से रुकी हुई आवासीय परियोजनाएं पूर्ण हो सकेंगी। आर्थिक विकास को बढ़ावा भी मिलेगा।

उप्र के सभी 18 मंडलों में नए जिला दिव्यांग पुनर्वास केंद्र (डीडीआरसी) खुलेंगे

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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई कैबिनेट बैठक में सरकार ने राज्य के सभी 18 मंडलों में नए जिला दिव्यांग पुनर्वास केंद्र (डीडीआरसी) खोलने को मंजूरी दे दी है।

वर्तमान में प्रदेश के 38 जिलों में ऐसे केंद्र चल रहे हैं, लेकिन कुछ समस्याओं के कारण कई जगह संचालन प्रभावित हो रहा था। अब सरकार पूरे ढांचे को नए सिरे से संसाधनों से लैस करते हुए संचालित करने जा रही है, ताकि दिव्यांगजनों को मिलने वाली सेवाओं में कोई बाधा न आए।

कैबिनेट के फैसले के बारे में जानकारी देते हुए वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने बताया कि नए डीडीआरसी खुलने से प्रदेश में दिव्यांगजनों को एक ही जगह पर सर्वे, पहचान, शिविर, सहायक उपकरण, कृत्रिम अंग फिटमेंट और प्रशिक्षण जैसी सुविधाएं आसानी से उपलब्ध होंगी। इसके साथ ही फिजियोथेरेपी, स्पीच थेरेपी जैसी सेवाएं भी इन केंद्रों पर दी जाएंगी। यूडीआईडी कार्ड और दिव्यांग प्रमाणपत्र जैसे जरूरी दस्तावेज बनवाने में भी अब लोगों को ज्यादा चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। सरकार का मानना है कि इस फैसले से दिव्यांगजनों को योजनाओं का लाभ समय पर और सुगमता से मिल सकेगा तथा उनके पुनर्वास की पूरी प्रक्रिया मजबूत होगी।

केन्द्र पर आने वाले प्रत्येक किसान का धान खरीदा जाए−योेगी आदित्यनाथ

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उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री केन्द्र पर आने वाले प्रत्येक किसान का
धान खरीदा जाए जी ने अपने सरकारी
आवास पर आहूत एक उच्चस्तरीय बैठक में निर्देशित किया कि केन्द्र पर आने वाले प्रत्येक किसान का
धान खरीदा जाए और भुगतान समय पर उनके खाते में पहुँच जाए। धान खरीद की
गति तेज की जाए, जिससे किसानो को किसी भी प्रकार की परेशानी का सामना न
करना पड़े।
बैठक में मुख्यमंत्री जी को अवगत कराया गया कि इस वर्ष कॉमन धान का
एम0एस0पी0 2,369 रुपये और ग्रेड-। का 2,389 रुपये प्रति क्विंटल तय हुआ है। यह
पिछले वर्ष की तुलना में 69 रुपये अधिक है। वर्तमान में 4,227 खरीद केन्द्र संचालित
हैं। मुख्यमंत्री जी ने निर्देश दिया कि क्रय केन्द्रों की संख्या बढ़ाकर 5,000 की जाए,
ताकि किसानों को अपने गांव-कस्बे के निकट ही सुविधा उपलब्ध हो सके।
अधिकारियों ने जानकारी दी कि 30 नवम्बर तक 1,51,030 किसानों से 9.02
लाख मीट्रिक टन धान खरीदा जा चुका है और 1,984 करोड़ रुपये से अधिक की
राशि सीधे किसानों के खातों में प्रेषित की गई है। मुख्यमंत्री जी ने स्पष्ट कहा कि
भुगतान में देरी किसी भी स्तर पर स्वीकार्य नहीं होगी।
मुख्यमंत्री जी ने खरीद केन्द्रों पर आवश्यकता के अनुसार मैनपावर बढ़ाने के
निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि यह प्रशासन की जिम्मेदारी है कि केन्द्र पर भीड़ न लगे
और किसानों को वापस न जाना पड़े। उन्होंने धान उठान, मिल-मैपिंग और अन्य
प्रक्रियाओं का सरलीकरण करने और खरीद को सुचारु और अनवरत बनाए रखने पर
भी जोर दिया।
मुख्यमंत्री जी ने यह भी निर्देश दिया कि मिड-डे मील और आंगनबाड़ी केन्द्राें
में फोर्टिफाइड चावल की सप्लाई निर्बाध रूप से की जाए। इसके लिए पर्याप्त
उपलब्धता सुनिश्चित की जाए। उन्होंने कहा कि एफ0आर0के सप्लाई सुचारु रखने
हेतु वेंडरों की संख्या बढ़ाई जाए और तकनीकी अड़चनों का तत्काल समाधान किया
जाए। बैठक में बताया गया कि अब तक लगभग 2,130 मीट्रिक टन एफ0आर0के
गुणवत्ता परीक्षण में उत्तीर्ण हुआ है।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि किसी भी जिले में खाद या बीज की कमी न होने
पाए और किसानों को दोनों वस्तु आसानी से उपलब्ध हों। उन्होंने कहा कि सम्बन्धित
विभाग स्टॉक और आपूर्ति की नियमित समीक्षा सुनिश्चित करें।

दिल्ली के स्कूलों में नर्सरी, KG, 1st क्लास में एडमिशन का शेड्यूल जारी

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दिल्ली सरकार की तरफ से एकेडमिक ईयर 2026-27 के लिए नर्सरी, केजी और फर्स्ट क्लास में एडमिशन का शेड्यूल जारी कर दिया गया है। दिल्ली के करीब 1,700 से ज्यादा प्राइवेट स्कूलों में एंट्री लेवल का एडमिशन pkj दिसंबर से शुरू हो जाएंगे। शिक्षा निदेशालय की ओर से यह साफ किया गया है कि ड्रॉ चाहे कंप्यूटर से हो या फिर पर्चियों से, यह काम माता-पिता की मौजूदगी में बेहद ट्रांसपेरेंट तरीके से किया जाएगा। पूरा एडमिशन प्रोसेस 04 दिसंबर 2025 से 19 मार्च 2026 तक चलेगा।

कब तक भरे जाएंगे दिल्ली नर्सरी एडमिशन के फॉर्म

साल 2026-27 एकेडमिक ईयर के लिए जारी हुए शेड्यूल के मुताबिक शिक्षा निदेशालय, दिल्ली की ऑफिशियल वेबसाइट edudel.nic.in पर जाकर पेरेंट्स एप्लीकेशन फॉर्म भर सकते हैं। 04 दिसंबर 2025 से लेकर 27 दिसंबर 2025 तक एप्लिकेशन फॉर्म जमा किए जाएंगे।

एडमिशन का शेड्यूल

दिल्ली एंट्री लेवल स्कूल एडमिशन के रजिस्ट्रेशन डेट – 04 दिसंबर 2025

आवेदन जमा करने की लास्ट डेट – 27 दिसंबर 2025

चुने गए स्टूडेंट्स की फर्स्ट लिस्ट (वेटिंग लिस्ट के साथ) – 23 जनवरी 2026

पॉइंट्स बांटने के बारे में सवाल पूछने का मौका – 24 जनवरी से 3 फरवरी 2026

सेकेंड सेलेक्शन लिस्ट – 09 फरवरी 2026

लिस्ट को लेकर पेरेंट्स की समस्या का समाधान – 10 से 16 फरवरी 2026

खाली सीटों के आधार पर कोई अन्य लिस्ट – 5 मार्च

प्रवेश प्रक्रिया का समापन – 19 मार्च 2026

ऐसे करें आवेदन

सबसे पहले ऑफिशियल वेबसाइट edudel.nic.in पर विजिट करें। फिर नर्सरी एडमिशन लिंक पर क्लिक करें और निर्धारित जगह पर जरूरी जानकारी को भरें और आवेदन फॉर्म सबमिट कर दें। अब जरूरी डॉक्यूमेंट्स जैसे बर्थ सर्टिफिकेट और पते का प्रमाण अपलोड करके 25 रुपए आवेदन फीस जमा करें। फॉर्म जमा करने और संदर्भ के लिए एक प्रति डाउनलोड करें।

ड्रॉ की वीडियो रिकॉर्ड

फेयर एडमिशन के लिए DoE ने स्कूलों को पहले के क्राइटेरिया से बचने का निर्देश दिया है। डिपार्टमेंट ने इसको खत्म कर दिया था, वहीं दिल्ली हाईकोर्ट ने इसको बरकरार रखा था। लेकिन इसने इंस्टीट्यूशन्स को एडमिशन क्राइटेरिया बनाने के दौरान राइट्स ऑफ पर्सन्स विद डिसेबिलिटीज एक्ट का पालन किए जाने की याद दिलाई है।

सभी क्राइटेरिया के पॉइंट्स का ब्रेकडाउन स्कूलों को अपनी वेबसाइट पर पब्लिकली दिखाना होगा। साथ ही स्कूलों को ओपन सीट्स के तहत एडमिशन पाने वाले बच्चों की डिटेल्स अपलोड करनी होंगी। इसमें अलॉट किए जाने वाले पॉइंट्स भी शामिल हैं। सर्कुलर में कहा गया है कि ट्रांसपेरेंसी पक्की करने के लिए कोई भी ड्रॉ ऑफ लॉट पेरेंट्स की मौजूदगी में किया जाना चाहिए और साथ ही इसका वीडियो भी रिकॉर्ड्स करना होगा।

सर्कुलर में इस बात को दोहराया गया है कि कैपिटेशन फीस लेना या फिर पेरेंट्स को स्कूल का प्रॉस्पेक्टस खरीदने के लिए मजबूर करना पूरी तरह से मना है। रजिस्ट्रेशन फीस के रूप में स्कूल सिर्फ 25 रूपए ले सकते हैं, जोकि वापस नहीं होंगे। एक डिस्ट्रिक्ट लेवल मॉनिटरिंग सेल सभी स्कूलों में नियमों के पालन पर नजर रखेगा। साथ ही पेरेंट्स को एडमिशन साइकिल के दौरान किसी भी शिकायत को दूर करेगा।

अयोध्याजी जीवंत स्वप्न और आध्यात्मिक लोक!

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‘मेरी अयोध्या धाम यात्रा मेरा देशाटन और मेरा आध्यात्मिक दर्शन’

श्रीराम मंदिर सनातनियों का एक अद्भुत और आश्चर्य धर्मस्थल

अशोक मधुप

अशोक मधुप

एक पेशेवर पत्रकार केलिए अनुभव के अनुसार कुछ न कुछ खोजते लिखते सृजन करते रहना उसके जीवन की सच्चाई है, उसके साथ देशाटन भी हो जाए तो मेरा और मेरी अर्धांगिनी निर्मल केलिए यह सबसे पसंदीदा है। देशाटन की बात आई है तो हमारा लंबा अनुभव हैकि देशाटन अगर बहुमुखी हो तो उसका महत्व और आनंद ही कुछ और हो जाता है। एक लंबी प्रतीक्षा केबाद हमारे लिए देशाटन का एक शानदार अवसर आया। हमारे पत्रकार संगठन उत्तर प्रदेश श्रमजीवी पत्रकार यूनियन हम पत्रकारों केलिए ऐसे शानदार अवसर लाया करती है, जिसमें पेशेवर कार्यशालाएं हों और देशाटन भी और वह भी किसी ऐतिहासिक स्थल और देश का देशाटन। उत्तर प्रदेश में भारत के विश्व प्रसिद्ध ऐतिहासिक और आध्यात्मिक नगर अयोध्या में उत्तर प्रदेश श्रमजीवी पत्रकार यूनियन के अधिवेशन का संदेश मिलते ही हम दोनों पति-पत्नी उसमें शामिल होने की उत्सुकता से भर गए। यह सबसे ज्यादा प्रफुल्लित और उत्सुक कर देने वाला पल था और वैसे भी हमें कभी अयोध्या आने का अवसर ही नहीं मिला था। उत्तर प्रदेश श्रमजीवी पत्रकार यूनियन का अधिवेशन और उसकी कार्यशालाएं मर्यादा पुरूषोत्तम भगवान श्रीराम की नगरी अयोध्या में हों और वहां भगवान श्रीराम के नवनिर्मित भव्य मंदिर धाम में रामलला और उनकी सारी कलाओं के बहुत सुलभ और आह्लादित दर्शन होंगे, हम उस दिन यानी 6 और 7 नवंबर 2025 की प्रतीक्षा करने लगे।
ऐसी यात्रा केलिए भावनाएं बहुत प्रबल होती हैं इसलिए एक माह कब गुजर गया तैयारी का पता ही नहीं चला। जिज्ञासा दिनोंदिन बढ़ रही थीकि जो दुनिया के सनातनधर्मियों की प्रबल आस्था का विश्वविख्यात केंद्र है, वहां भगवान श्रीराम की राजधानी और उनका मंदिर कितना भव्य होगा! आखिर ट्रेन से अयोध्याश्री के प्रस्थान का समय आ गया। एकबात तो पहले से ही मेरे अनुभव में हैकि देशाटन पर जाइए तो आने जाने और ठहरने का पहले से ही प्रबंध सुनिश्चित कर लेना जरूरी है, क्योंकि देशाटन ज्ञान आरामदायक यात्रा और खुशियों से जीने केलिए है, तनावपूर्ण यात्रा केलिए नहीं है। एक सच यह भी हैकि नरेंद्र मोदी सरकार ने देश में कहीं भी आवागमन का यातायात सुगम बना दिया है। रेल सेवाएं सबसे आरामदायक हो गई हैं। पर्यटन और कनेक्टिविटी ने सब आसान कर दिया है। हमारा अयोध्या का रेल आरक्षण था और हम दोनों यात्रा शुरू करने अगले दिन सवेरे अयोध्या में थे। अयोध्या रेलवे स्टेशन वाकई में सजाधजा है। पूरी अयोध्या आस्थामय है। श्रीराम मंदिर आने-जाने वाले मार्गों पर मंदिरों में घंटियों और शंखों की आवाज़, श्रीरामायण के रचयिता आचार्य तुलसीदास की चौपाइयां और छन्द कर्णों में गूंज रहे हैं। एक पंडा हमें यहां का सिलसिलेवार यहां का महत्व बता रहा था, लेकिन यह भी सावधानी बरतने की आवश्यकता हैकि किसी भी ट्रेवल एजेंसी या ऑटो या फिर पंडाओं से कुछ तो सावधानी जरूरी है।
अयोध्याश्री में श्रीराम जानकी महल में हमारी पत्रकार यूनियन के प्रबंधन ने पत्रकारों के ठहरने की अच्छी व्यवस्था कराई थी। पत्रकारों केलिए खानपान की व्यवस्था की भी तारीफ करनी होगी। हमारी पत्रकार अधिवेशन और उसकी कार्यशालाओं में तो दिलचस्पी थी। उसमें विशिष्ट अतिथि आमंत्रित किए गए थे, जिनमें राज्य के दो मंत्रीगण और श्रीराम मंदिर ट्रस्ट के सचिव और विहिप के नेता चंपत राय भी शामिल हैं। पत्नी निर्मल अयोध्या में श्री हनुमानगढ़ी में संकटमोचक हनुमान और श्रीराम जन्मभूमि पर भगवान श्रीरामलला के मंदिर और उनके दिव्य दर्शनों केलिए बहुत अधीर थी। हम कह रहे थेकि कभी हम अयोध्याजी नहीं आए, मगर हमारे पत्रकार संगठन ने हमें अयोध्या दिखा दी। अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि ट्रस्ट के सचिव चम्पत रायजी का हमें आतिथ्य मिला। सादगीपूर्ण व्यक्तित्व के धनी और श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के सम्पूर्ण निर्माण के दृष्टा हैं चम्पत रायजी। उनसे मंदिर निर्माण व्यवस्था जैसे विषयों पर काफी चर्चा हुई। उन्होंने अयोध्या में श्रीराम मंदिर और श्रीरामलला के दर्शन आदि को बहुत सुलभ बनाया।
यद्यपि अयोध्या में सभी केलिए दर्शन, भ्रमण भजन और कीर्तन सहज सुलभ है। दर्शन भ्रमण में कोई भी परेशानी नहीं हुई। श्रीराम मंदिर और रामलला के दर्शन केलिए यदि अयोध्याजी जा रहे हैं तो निश्चिंत होकर जाएं। ये मानकर जाएंकि रामलला के घर जा रहे हैं। बस फिर दर्शन कार्यक्रम केलिए कोई सिफारिश या चिंता नहीं। सुरक्षा प्रबंध कड़े हैं और पुलिस आपके साथ है। श्रीराम मंदिर में दर्शन करिए और 20 से 30 मिनट में दर्शनकर मंदिर से बाहर आ जाइए। हमने देश विदेश के अनेक धार्मिक और ऐतिहासिक स्थल देखे हैं, किसीभी धर्मस्थल, तीर्थस्थल के इससे ज्यादा सुलभ दर्शन कहीं संभव नही हैं। श्रीराम मंदिर आज दुनिया के हिंदुओं की आस्था का प्रमुख दिव्य तीर्थ है। यहां प्रतिदिन करीब 80 हजार से एक लाख भक्त रामलला के दर्शनकर उन्हें प्रणाम करते हैं। कई अवसर पर तो ये संख्या डेढ़ लाख से ज्यादा हो जाती है। दुनियाभर के लगभग हर सनातनी के मन में यह प्रबल इच्छा हैकि किसी तरह वह अयोध्या जाकर श्रीराम मंदिर और रामलला के दर्शन कर सके। रामलला के दर्शन को बड़ी संख्या में आ रहे श्रद्धालुओं को देख मेरे साथी लखनऊ के वरिष्ठ पत्रकार दिनेश शर्मा ने कहा थाकि दुनिया के सभी प्रमुख धर्मों के अपने-अपने श्रद्धा मान्यता पूजनीय धर्म स्थान हैं, लेकिन दुनिया के हिंदू धर्मावलंबी सनातनियों केलिए अयोध्या हिंदुओं का विश्व का प्रमुख श्रद्धा आस्था केंद्र होगा जहां आकर प्रत्येक हिंदू सनातनी अपने जीवन को एक लक्ष्य और धन्य बनाएगा।
अयोध्या में श्रीराम मंदिर बनने से पहले कभी श्रद्धालुओं को संकरी गलियों, टेढ़े मेढ़े उबड़ खाबड़ रास्तों से गुजरकर श्रीराम मंदिर तक पहुंचना होता था। उस समय की सरकारों में अयोध्या की भारी उपेक्षा होती आई है। आम श्रद्धालुओं केलिए अयोध्या यात्रा और कितनी दुरूह रहती होगी, यह समझते बनता है, इस सबके बावजूद यहां आने वाले श्रद्धालुओं का उत्साह और जोश कम नहीं था। श्रीराम का भव्य परिसर और भव्य मंदिर बन गया है, जिसकी छटा देखते ही बनती है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 25 नंवबर को श्रीराम मंदिर पर भव्य समागम में ध्वजारोहण किया। इसके प्रत्यक्षदर्शी बनने केलिए दुनियाभर से प्रमुख व्यक्ति पहुंचे। अयोध्या आने वाला प्रत्येक श्रद्धालु इस बात को लेकर आंशकित होता हैकि इतनी भीड़ में दर्शन कैसे होंगे? पूजा कैसे होगी? प्रसाद कैसे चढ़ेगा? सब चाहते हैंकि श्रीराम मंदिर में आगमन की स्मृति फोटो अपने पास सुरक्षित रखें। यहां न पूजा की व्यवस्था है, न प्रसाद चढ़ाने का प्रबंध। यहां पूजन कराने वाले पुजारी भी नहीं हैं। मंदिर आइए, श्रीराम मंदिर और रामलला के दर्शन करिए। प्रभु को शीश नवाकर बाहर आ जाइए। यहां प्रसाद लेजाना मना है, मंदिर की ओर से ही श्रद्धालु को प्रसाद मिलता है। मंदिर परिसर में मोबाइल वर्जित है। परेशानी उन्हें होती है, जो सुरक्षा नियमों और प्रबंधों की उपेक्षा करते हैं। उन्हें मंदिर के गेट पर लॉकर में मोबाइल रखकर ही दर्शन को जाना पड़ता है। इस तरह इन्हें अन्य श्रद्धालुओं से एक डेढ़ किलोमीटर ज्यादा चलना होता है।
श्रीराम मंदिर में अपने सामान रखने केलिए लॉकर की व्यापक व्यवस्था है, किंतु इस काम में लगभग आधा घंटा लग जाता है। अच्छा यह हैकि अपना पर्स, लैदर की बैल्ट, मोबाइल और कैमरा अपने कमरे पर छोड़ कर मंदिर दर्शन को जाएं। आईडी और जरूरत केलिए रुपये जेब में रखलें। हमने ऐसा ही किया। इससे श्रीराम मंदिर जाने का हमारा आधे से एक घंटा बच गया। श्रीराम मंदिर ट्रस्ट ने व्हील चेयर की सुविधा दी है, मगर दिव्यांगों का मंदिर जाने का रास्ता अलग से है। श्रीराम मंदिर निर्माण केबाद अयोध्या के चारों ओर बड़ा विकास हो रहा है। ये विकास सिर्फ धार्मिक दृष्टिकोण से नहीं, बल्कि सामाजिक, आर्थिक एवं पर्यावरणीय दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण है। करीब 15 से 16 करोड़ यात्री प्रतिवर्ष यहां आने लगे हैं। उम्मीद की जाती हैकि भविष्य में यह संख्या और बढ़ेगी। अयोध्या नगर सीमा में प्रवेश से पहले ही होटल, गेस्टहाउस, परिवहन सेवाएं, स्थानीय व्यापार व स्मृतिचिंतन उद्योग की रफ्तार गति पर है। इस प्रकार अयोध्या का महत्व उजागर हो रहा है और अयोध्या की पहचान बदल रही है। अयोध्या में विकास की कई बुनियादी संरचना परियोजनाएं लाई गई हैं।
अयोध्या की एयर कनेक्टिविटी केलिए यहां महर्षि वाल्मीकि अंतर्राष्ट्रीय हवाईअड्डे का निर्माण हुआ है। इसमें विभिन्न चरणों में टर्मिनल और रनवे विस्तार भी है। चक्रवर्ती सम्राट राजर्षि दशरथ के नामपर स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय एवं मेडिकल कॉलेज का निर्माण किया गया है। अयोध्या को आधुनिक और विश्व प्रसिद्ध नगर बनाने केलिए क्या नहीं किया जा रहा है। अयोध्या धाम में अब श्रेष्ठतम रेलवे स्टेशन है। यात्रियों केलिए तीन सौ के आसपास डार्मेट्री और रिटायरिंग रूम बनाए गए हैं। श्रीराम मंदिर के आसपास के दर्शनीय स्थलों केलिए पैदल जाने का मार्ग विकसित किया जा रहा है। इसे भक्तिपथ नाम दिया गया है। यह मार्ग रामपथ से निकलता है। पैदल यात्रियों केलिए खास व्यवस्था है। यहां दुकानों, घरों को अलग रंगरूप दिया गया है। भक्तिपथ वाले हिस्सों में ‘सफ़ेद एवं भोरका’ रंग के बजाय एक विशिष्ट सजावट का उपयोग हुआ है। भक्तिपथ मंदिर मार्ग के उन हिस्सों को सूचीबद्ध करता है, जहां पैदल यात्रा अधिक होती है। उन्हें आरामदायक एवं सुरक्षित मार्ग दिया गया है। श्रीराम मंदिर तक पहुंच वाले मार्ग का नाम रामपथ है। यह एक प्रकार से रिंगरोड जैसा है। यह मार्ग लगभग 13 किलोमीटर लंबा है और प्रमुख रूपसे सहादतगंज से लेकर नयाघाट तक जाता है।
रामपथ के दोनों किनारों पर दुकानों घरों की एकरूप मरम्मत एवं पेंटिंग की गई है। सभी की एक समान रंगरूप में सजावट। सड़क को चौड़ा किया गया है, मुख्य रूपसे सड़क की 40 फीट या उससे अधिक चौड़ाई। लाइटिंग सिस्टम, फावड़े प्लांटर्स, पेड़ पौधे, फुटपाथ, मिडियन में धार्मिक प्रतीक स्तंभ सुशोभित होते हैं। स्थानीय प्रशासन ने श्रद्धालुओं केलिए यहां गोल्फ कार्ट (इलेक्ट्रिक बग्गी) चलाई है। इसका किराया 20 रुपया यात्री रखा गया है। सरकारी गोल्फ कार्ट के कारण ई रिक्शा चालक भी मनमाने दाम नहीं वसूल कर पाते हैं। पुरानी परंपरा के हिस्से के रूपमें 84 कोसी परिक्रमा मार्ग का अब श्रद्धा परिक्रमा मार्ग नाम है। इसे राष्ट्रीय राजमार्ग का दर्जा (एनएच-227B) मिला है। इससे अयोध्या और आसपास के तीर्थस्थलों का जुड़ाव बढ़ गया है। पुलों और फ्लाई ओवर के दोनों ओर भगवान श्रीराम के जीवन से संबंधित झांकियां बनाई गई हैं। नगर केबीच से एक पंचकोसी प्रतिक्रमा के विकास पर भी काम चल रहा है। यहां की परिवहन व्यवस्था में सुधारों से न केवल तीर्थयात्रियों की सहजता बढ़ी है, बल्कि स्थानीय व्यापार संवाद और रोज़गार अवसरों में भी इजाफा हुआ है। आखिर आधुनिक विकास सिर्फ बड़ी इमारतें या सड़कें नहीं, बल्कि बेहतर जीवन मान और पर्यावरण संगत भी है। अयोध्या को ‘मॉडल सोलर सिटी’ घोषित किया गया है। चालीस मेगावाट का सौर संयंत्र सरयू नदी के किनारे स्थापित किया गया है, इससे शहर की मांग की लगभग 25-30 प्रतिशत ऊर्जा पूरा हो रही है। यहां 550 एकड़ के नव्या अयोध्या टाउनशिप का विकास हुआ है, जिसमें स्मार्ट बिजली डक्स, भूमिगत नाली-प्रणाली है। सरयू के घाटों का सौंदर्यीकरण व लॉन्ग वॉक-वे बनाए गए हैं। सरयू घाट की आरती देखने को श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है। आरती की और ज्यादा भव्यता और उसके प्रबंधन पर काम चल रहा है।
सुझाव के तौरपर इसे देखने केलिए बड़े टीवी स्क्रीन भी लगाए जा सकते हैं, ताकि श्रद्धालु कहीं भी बैठकर आराम से सरयू आरती देख सकेंगे। अयोध्या अब सिर्फ दर्शन तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि सांस्कृतिक और अनुभव आधारित पर्यटन पर भी यहां बहुत ध्यान दिया गया है। यहां नए संग्रहालय व सांस्कृतिक केंद्र बनाए जा रहे हैं। मंदिर परिसर के आसपास संग्रहालय, रामायण अध्ययन संस्थान जैसी योजनाएं चल रही हैं। उत्सव व कार्यक्रम को रोचक बनाया जा रहा है। दीपोत्सव में लाखों दीये, ड्रोन शो आदि का आयोजन होने लगा है, जो सिर्फ स्थानीय नहीं, बल्कि राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय आकर्षण का केंद्र बना है। पारंपरिक हस्तशिल्प व पर्यटन वस्तुओं को भी यहां बढ़ावा मिल रहा है, इससे स्थानीय कारीगरों को नए नए अवसर मिल रहे हैं। अयोध्या सिर्फ पूजापथ ही नहीं, बल्कि समृद्धि पथ भी है। यह उद्यम नगर बनता जा रहा है, लेकिन यह महत्वपूर्ण हैकि यह विकास वैश्विक दर्जे का होने केसाथ-साथ स्थानीय अनुभव सक्षम और पर्यावरण अनुकूल भी बने। अयोध्या का प्राचीन नाम साकेत है। भगवान श्रीराम के समय साकेत ही भव्य नगर था।
भगवान श्रीराम के साकेत पर महाकवि मैथिलीशरण गुप्त की साकेत पर ये पंक्तियां इस नगर का भव्य चित्रण करती हैं-
देख लो, साकेत नगरी है यही, स्वर्ग से मिलने गगन में जा रही।
केतु-पट अंचल-सदृश हैं उड़ रहे,कनक-कलशों पर अमर-दृग जुड़ रहे।
सोहती हैं विविध-शालाएं बड़ी, छत उठाए भित्तियां चित्रित खड़ीं।
गेहियों के चारु-चरितों की लड़ी, छोड़ती हैं छाप, जो उन पर पड़ी!
स्वच्छ, सुंदर और विस्तृत घर बने, इंद्रधनुषाकार तोरण हैं तने।
देव-दंपती अट्ट देख सराहते, उतरकर विश्राम करना चाहते।
फूल-फलकर, फैलकर जो हैं बढ़ी, दीर्घ छज्जों पर विविध बेलें चढ़ी
पौरकन्याएं प्रसून-स्तूप कर, वृष्टि करती हैं यहीं से भूप पर।
फूल-पत्ते हैं गवाक्षों में कढ़े, प्रकृति से ही वे गए मानो गढ़े।
दामनी भीतर दमकती है कभी, चंद्र की माला चमकती है कभी।
सर्वदा स्वच्छंद छज्जों के तले,प्रेम के आदर्श पारावत पले।
केश-रचना के सहायक हैं शिखी, चित्र में मानो अयोध्या है लिखी!


(लेखक अशोक मधुप वरिष्ठ पत्रकार हैं)

स्वतंत्र आवाज डाट काम से साभार

चुनाव सुधारों और ‘वंदे मातरम’ पर चर्चा के लिए सहमतिः संसद चलने की उम्मीद

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लोकसभा अध्यक्ष की अध्यक्षता में हुई सर्वदलीय बैठक में चुनाव सुधारों और ‘वंदे मातरम’ पर चर्चा के लिए सहमति बन गई।लोकसभा में गतिरोध के बीच, चुनाव सुधारों और ‘वंदे मातरम’ पर चर्चा के लिए सहमति बनने से कामकाज पटरी पर लौटने की उम्मीद है। प्रधानमंत्री मोदी बहस का शुभारंभ करेंगे। आठ दिसंबर को ‘वंदे मातरम’ और 9-10 दिसंबर को चुनाव सुधारों पर 10 घंटे की चर्चा निर्धारित है। यह मतदाता सूची पुनरीक्षण पर विपक्षी हंगामे के बाद एक महत्वपूर्ण कदम है।

विपक्ष के विरोध के बीच केंद्र सरकार ने मंगलवार को मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) पर चर्चा कराने पर सहमति जताई। कार्य मंत्रणा परिषद की बैठक में तय हुआ है कि 9-10 दिसंबर को लोकसभा में चुनाव सुधारों पर चर्चा होगी। 8 दिसंबर को सदन में वंदे मातरम पर चर्चा होगी। चर्चा के लिए 10 घंटे का समय निर्धारित किया । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बहस की शुरुआत करेंगे।

चुनाव सुधारों पर चर्चा मंगलवार नौ दिसंबर को होगी। चर्चा के लिए 10 घंटे का समय निर्धारित किया गया है। केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल बुधवार, 10 दिसंबर को इसका उत्तर देंगे। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने बाद में एक्स पर एक पोस्ट में कार्यक्रम की पुष्टि की। उन्होंने लिखा, “आज माननीय लोकसभा अध्यक्ष की अध्यक्षता में सर्वदलीय बैठक के दौरान, सोमवार 8 दिसंबर को दोपहर 12 बजे से लोकसभा में राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम’ की 150वीं वर्षगांठ पर चर्चा और मंगलवार 9 दिसंबर को दोपहर 12 बजे से चुनाव सुधारों पर चर्चा आयोजित करने का निर्णय लिया गया है।”

बिरला के साथ सत्तापक्ष और विपक्ष के नेताओं की बैठक में यह सहमति बनने के बाद लोकसभा में जारी गतिरोध खत्म होने के आसार हैं। बीएसी की बैठक के बाद लोकसभा में कांग्रेस के मुख्य सचेतक कोडिकुनिल सुरेश ने संवाददाताओं से कहा, ‘‘बीएसी की बैठक के बाद वंदे मातरम और चुनाव सुधारों पर चर्चा के बारे में फैसला किया गया। सोमवार को वंदे मातरम पर चर्चा होगी और इस चर्चा की शुरुआत प्रधानमंत्री करेंगे। इसके बाद मंगलवार और बुधवार को चुनाव सुधारों पर चर्चा होगी तथा जरूरत पड़ने पर समय बढ़ाया जा सकता है।’’ 

मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के मुद्दे पर लोकसभा में सोमवार और मंगलवार को गतिरोध की स्थिति बनी रही। विपक्षी दलों के सदस्यों ने इस मुद्दे पर सदन में हंगामा किया। सोमवार को संसद के शीतकालीन सत्र की शुरुआत हुई।

शांति − सद्भाव की भाषा न समझने वालों को भारत करारा जवाब देता है: रक्षा मंत्री

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रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर इस बात का सबूत है कि भारत उन लोगों को करारा जवाब देता है जो शांति और सद्भाव की भाषा नहीं समझते। उन्होंने आतंकवाद के खिलाफ भारत की कार्रवाई की तुलना सरदार वल्लभभाई पटेल की सुदृढ़ इच्छाशक्ति और नेतृत्‍व से की। उन्होंने कहा कि पटेल ने हमेशा संवाद के ज़रिए समस्याओं को सुलझाने की कोशिश की, लेकिन ज़रूरत पड़ने पर कभी भी साहसी रास्ता चुनने में हिचकिचाए नहीं, जैसा कि हैदराबाद को भारत में विलय के मामले में हुआ था। रक्षा मंत्री 2 दिसंबर, 2025 को गुजरात के वडोदरा में सरदार सभा को संबोधित कर रहे थे। यह सरदार वल्लभभाई पटेल की 150वीं जयंती के उपलक्ष्य में युवा कार्यक्रम और खेल मंत्रालय के तहत मेरा युवा (एमवाई) भारत द्वारा आयोजित ‘एकता मार्च’ का हिस्सा था।

ऑपरेशन सिंदूर को सफलतापूर्वक अंजाम देने के लिए सशस्‍त्र बलों के साहस और समर्पण की सराहना करते हुए रक्षा मंत्री ने कहा कि आज (वर्तमान समय में) विश्‍व भारतीय सैनिकों की वीरता और क्षमता को स्‍वीकार कर रहा है। उन्होंने आगे कहा कि इस अभियान ने स्‍पष्‍ट संकेत दिया है कि ‘‘हम शांतिप्रिय राष्‍ट्र हैं, जो किसी देश को उकसाते नहीं, लेकिन यदि कोई उकसाये तो उसे बख्‍शते भी नहीं।”

श्री राजनाथ सिंह ने सरदार पटेल को देश को एक करने में अहम योगदान देने वाला बताया और कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी के नेतृत्व में ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ का उनका सपना और मज़बूत हुआ है। अनुच्‍छेद 370 के निर्सन का उल्‍लेख करते हुए उन्होंने कहा कि इस निर्णय ने जम्मू-कश्मीर को देश की मुख्यधारा में पूरी तरह से जोड़ दिया।

रक्षा मंत्री ने रेखांकित किया कि सरकार सरदार पटेल द्वारा दिखाए गए रास्‍ते पर  चल रही है, जिसके परिणामस्‍वरूप एक समय संदेहों से घिरा भारत आज अपनी शर्तों पर विश्‍व से संवाद कर रहा है। उन्होंने कहा कि आज पूर्व की तुलना में अब अंतरराष्‍ट्रीय मंचों पर भारत की बात ध्‍यानपूर्वक सुनी जाती है। उन्होंने आगे कहा, “भारत एक बड़ी आर्थिक और सामरिक शक्ति बनने की दिशा में अग्रसर है। यह सरदार पटेल अमूल्‍य योगदान का परिणाम है।”

सरकार के राष्‍ट्रीय हितों की रक्षा के संकल्‍प से बताते हुए रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह ने कहा कि 2014 से पहले भारत विश्‍व की 11वीं सबसे बड़ी अर्थव्‍यवस्‍था थी और आज यह चौथी सबसे बड़ी अर्थव्‍यवस्‍था है तथा शीघ्र ही शीर्ष तीन  अर्थव्यवस्थाओं में शामिल हो जाएगी। उन्होंने कहा कि सरकार ‘न्‍यूनतम सरकार, अधिकतम शासन’ के लक्ष्य के साथ काम कर रही है, जबकि राजनीतिक और भौगोलिक एकता के ज़रिए यह एक स्‍वतंत्र राष्‍ट्र की सरदार पटेल की विरासत को आगे बढ़ा रही है। उन्होंने कहा, “हमारी सरकार भारत को सांस्कृतिक, सामाजिक, आध्यात्मिक और आर्थिक एकता के सूत्र में पिरो रही है। हम ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ के विज़न के साथ आगे बढ़ रहे हैं। हमारा लक्ष्य 2047 तक एक विकसित भारत का निर्माण करना है।”

रक्षा मंत्री ने कहा कि सरकार सरदार पटेल के राष्ट्रीय सुरक्षा विज़न को आगे बढ़ा रही है, जिन्होंने रक्षा आधुनिकीकरण और रक्षा हथियारों व गोला-बारूद के स्वदेशी उत्‍पादन पर ज़ोर दिया था। उन्होंने कहा, “आज, ‘मेक-इन-इंडिया’ पहल के कारण हम रक्षा उत्‍पादन में आत्मनिर्भर बन रहे हैं, जबकि मित्र देशों को सैन्‍य उपकरण निर्यात कर रहे हैं। पिछले 11 वर्षों में हमारा रक्षा निर्यात लगभग 34 गुना बढ़ गया है। हमारा लक्ष्य 2029 तक 3 लाख करोड़ रुपये का रक्षा उत्‍पादन और  50,000 करोड़ रुपये का रक्षा निर्यात हासिल करना है।”

श्री राजनाथ सिंह ने आगे कहा कि सरदार पटेल का पूरा जीवन पवित्रता और ईमानदारी का प्रतीक था और इन उच्‍च आदर्शों से प्रेरित होकर सरकार का लक्ष्य संसद में संविधान (130वां संशोधन) विधेयक 2025 को पारित कराना है, जो उच्‍चतम पदों पर आसीन लोगों से भ्रष्टाचार के खिलाफ नैतिक व्‍यवहार करने की मांग करता है। उन्होंने कहा, “इसका मतलब है कि यदि पद पर आसीन किसी व्‍यक्ति को किसी गंभीर आरोप के तहत गिरफ्तार किया जाता है और 30 दिनों के भीतर ज़मानत नहीं मिलती है, तो वे अपने आप अपने पद से मुक्त हो जाएंगे।”

रक्षा मंत्री ने युवाओं से एक विकसित भारत के सपने को साकार करने के लिए प्रयास करने का आग्रह किया। ​​उन्होंने कहा कि राष्‍ट्र की एकता, अखंडता और संप्रभुता बनाए रखना एक ज़िम्मेदारी है, जिसे सरदार पटेल ने देश की भावी  पीढ़ियों के लिए छोड़ा था। उन्होंने कहा, “देश और समाज को एकजुट रखना हमारा  दायित्‍व है। हमें संकल्‍प लेना होगा कि हम न केवल सरदार पटेल के मूल्यों को पूर्व निष्‍ठा से आत्‍मसात करेंगे, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को भी इसके लिए तैयार करेंगे। यही सरदार पटेल की विरासत को एक सच्ची श्रद्धांजलि होगी।”

इस अवसर पर पंजाब के राज्‍यपाल श्री गुलाब चंद कटारिया, उत्तराखंड के मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी, श्रम एवं रोजगार तथा युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया, केंद्रीय सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम तथा श्रम एवं रोजगार राज्य मंत्री श्रीमती शोभा करंदलाजे और राज्य सरकार के अन्‍य अधिकारी उपस्थित थे।

न जासूसी, न कॉल मॉनिटरिंग, रख‍िए नहीं तो डिलीट.संचार साथी ऐप पर सिंध‍िया का उत्तर

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केंद्रीय मंत्री श्री ज्योतिरादित्य सिंधिया जी ने संचार साथी ऐप को लेकर फैल रही गलतफहमियों को साफ किया है। उन्होंने कहा कि ये ऐप किसी तरह की जासूसी नहीं करता और न ही आपकी कॉल्स मॉनिटर करता है।

सिंधिया जी ने कहा कि ऐप पूरी तरह स्वेच्छिक है, ‘अगर आप एक्टिवेट करना चाहते हैं तो कीजिए, नहीं चाहते हैं तो बिल्कुल न करें।फोन में रखना है तो रखिए, नहीं रखना है तो डिलीट कर दीजिए.’ ।उन्होंने साफ कहा कि ऐप को डिलीट करना भी पूरी तरह आपकी मर्जी है। ये कोई मैंडेटरी ऐप नहीं है।

सिंधिया  जी के मुताबिक, इस ऐप का उद्देश्य सिर्फ और सिर्फ लोगों को डिजिटल धोखाधड़ी से बचाना है। सरकार की कोशिश है कि ये ऐप ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचे, ताकि वे सुरक्षित रहें और फ्रॉड का शिकार न हों।