नागर विमानन मंत्रालय ने हाल ही में इंडिगो के परिचालन संकट से उत्पन्न व्यवधान को दूर करने के लिए तुरंत और निर्णायक कदम उठाए हैं। देश भर में हवाई यात्रा संचालन तेज़ी से स्थिर हो रहा है। अन्य सभी घरेलू एयरलाइंस सुचारू रूप से और पूरी क्षमता से परिचालन कर रही हैं, जबकि इंडिगो के प्रदर्शन में आज लगातार सुधार हुआ है और उड़ान कार्यक्रम सामान्य स्तर पर वापस आ रहे हैं। इंडिगो की उड़ान संचालन संख्या 5.12.25 को 706 से बढ़कर 6.12.25 को 1,565 हो गई है और आज इसके 1,650 तक पहुंचने की संभावना है।
अधिक किराया वसूलने से रोकने के लिए हवाई किराया विनियमन
हाल ही में रद्द की गई उड़ानों के कारण मांग में बदलाव और हवाई किरायों में अस्थायी वृद्धि को देखते हुए, मंत्रालय ने हस्तक्षेप किया और तत्काल प्रभाव से हवाई किरायों पर एक सीमा लागू कर दी। यह उपाय यात्रियों के लिए निष्पक्षता और सामर्थ्य सुनिश्चित करता है। इस आदेश के लागू होने के बाद से, प्रभावित मार्गों पर किराया स्तर स्वीकार्य सीमा तक कम हो गया। सभी एयरलाइनों को संशोधित किराया संरचना का कड़ाई से पालन करने का निर्देश दिया गया है।
यात्री धन वापसी और पुनर्निर्धारण सहायता
यात्रियों की वित्तीय सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए मंत्रालय ने इंडिगो को कड़े निर्देश जारी किए हैं कि रद्द या अत्यधिक विलंबित उड़ानों के सभी रिफंड आज रात 8:00 बजे तक पूरे कर लिए जाएं। इंडिगो ने अब तक कुल 610 करोड़ रुपए का रिफंड संसाधित किया है। रद्दीकरण से प्रभावित यात्रा पुनर्निर्धारित करने पर कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं लिया जाएगा। यात्रियों की सक्रिय सहायता के लिए समर्पित सहायता प्रकोष्ठ बनाए गए हैं ताकि रिफंड और पुनः बुकिंग संबंधी समस्याओं का बिना किसी देरी या असुविधा के समाधान किया जा सके।
सामान मिलान और वितरण
मंत्रालय ने इंडिगो को निर्देश दिया है कि वह व्यवधानों के कारण यात्रियों से अलग हुए सभी सामान का पता लगाकर उन्हें 48 घंटों के भीतर पहुंचा दे। पूरी प्रक्रिया के दौरान निरंतर संचार अनिवार्य है। इस पहल के साथ, इंडिगो ने कल तक पूरे भारत में यात्रियों को 3,000 सामान सफलतापूर्वक पहुंचा दिए हैं।
हवाई अड्डा संचालन और जमीनी सुविधा
दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु, चेन्नई, हैदराबाद, अहमदाबाद और गोवा के हवाईअड्डा निदेशकों ने आज सभी टर्मिनलों पर सामान्य स्थिति की पुष्टि की है। यात्रियों की आवाजाही सुचारू बनी हुई है और चेक-इन, सुरक्षा या बोर्डिंग पॉइंट पर कोई भीड़भाड़ नहीं है। हवाईअड्डा संचालकों और सीआईएसएफ द्वारा बेहतर निगरानी और समय पर सहायता प्रदान करके जमीनी स्तर पर सहायता को मज़बूत किया गया है।
वास्तविक समय निगरानी और नियंत्रण उपाय
नागरिक उड्डयन मंत्रालय का 24×7 नियंत्रण कक्ष एक एकीकृत समन्वय केंद्र के रूप में कार्य करता रहेगा, जो उड़ान संचालन, हवाई अड्डे की स्थिति और यात्री सहायता आवश्यकताओं की निगरानी करता रहेगा। यात्रियों की कॉल का तुरंत जवाब दिया जाएगा और आवश्यकतानुसार आवश्यक सहायता प्रदान की जाएगी। हमारी टीमें परिचालन योजना, चालक दल की सूची और यात्री प्रबंधन मानकों की निगरानी के लिए ज़मीनी स्तर पर तैनात रहेंगी, ताकि इनका पूर्ण अनुपालन सुनिश्चित हो सके।
यात्रियों को आश्वासन
नागरिक उड्डयन मंत्रालय यात्रा करने वाले लोगों को आश्वस्त करना चाहता है कि यात्रियों की सुरक्षा, सुविधा और सम्मान भारत सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। विमानन नेटवर्क तेज़ी से पूर्ण सामान्य स्थिति की ओर बढ़ रहा है, और परिचालन पूरी तरह से स्थिर होने तक सभी सुधारात्मक उपाय लागू रहेंगे।
यात्रियों के अधिकारों और हितों की पूर्ण सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए मंत्रालय सतर्क निगरानी जारी रखेगा तथा आवश्यकतानुसार आगे की जानकारी साझा की जाएगी।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 7 दिसंबर को सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) की 125 रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचा परियोजनाओं को राष्ट्र को समर्पित किया – जो लद्दाख से एक साथ उद्घाटन की गई अब तक की सबसे बड़ी संख्या है। 2 केंद्र शासित प्रदेशों – लद्दाख और जम्मू-कश्मीर तथा 7 राज्यों – अरुणाचल प्रदेश, सिक्किम, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, राजस्थान, पश्चिम बंगाल और मिजोरम – में फैली ये परियोजनाएं – 28 सड़कें, 93 पुल और 4 विविध – लगभग 5,000 करोड़ रुपये की लागत से पूरी हुई हैं, जो बीआरओ के इतिहास में सबसे अधिक लागत वाली उद्घाटन परियोजनाएं हैं।
यह कार्यक्रम दारबुक-श्योक-दौलत बेग ओल्डी रोड पर श्योक सुरंग पर आयोजित किया गया, जो राजनाथ सिंह द्वारा उद्घाटन की गई प्रमुख परियोजनाओं में से एक है। रक्षामंत्री ने कहा कि दुनिया के सबसे दुर्गम और चुनौतीपूर्ण भूभागों में से एक में निर्मित यह इंजीनियरिंग का अद्भुत नमूना, इस रणनीतिक क्षेत्र में हर मौसम में विश्वसनीय संपर्क सुनिश्चित करेगा। उन्होंने यह भी कहा कि 920 मीटर लंबी यह कट एंड कवर सुरंग, विशेष रूप से कठोर सर्दियों के दौरान, सुरक्षा, गतिशीलता और त्वरित तैनाती क्षमताओं को महत्वपूर्ण रूप से बढ़ाएगी, क्योंकि यह क्षेत्र भारी बर्फबारी, हिमस्खलन और अत्यधिक तापमान के लिए अनुकूल है।
क्षा मंत्री ने सशस्त्र बलों के जवानों की अद्वितीय बहादुरी, प्रतिबद्धता और बलिदान को सम्मानित करने के लिए अरुणाचल प्रदेश में गलवान युद्ध स्मारक का भी वर्चुअल माध्यम से उद्घाटन किया।
रक्षा मंत्री ने सीमावर्ती क्षेत्रों के विकास के प्रति सरकार के संकल्प को दोहराते हुए कहा कि ये संपर्क साधन सुरक्षा, अर्थव्यवस्था और आपदा प्रबंधन के लिए जीवन रेखाएं हैं। उन्होंने कहा, “सीमावर्ती क्षेत्रों में मज़बूत बुनियादी ढांचे के अनेक लाभ हैं। यह सैन्य गतिशीलता, रसद का सुचारू परिवहन, पर्यटन और रोज़गार के अवसरों में वृद्धि और सबसे महत्वपूर्ण, विकास, लोकतंत्र और सरकार में मज़बूत विश्वास सुनिश्चित करता है।”
श्री राजनाथ सिंह ने इस बात पर ज़ोर दिया कि जिस तेज़ी से भारत सड़कों, सुरंगों, स्मार्ट बाड़, एकीकृत कमांड सेंटर और निगरानी प्रणालियों के साथ अपनी सीमाओं को मज़बूत कर रहा है, वह इस बात का प्रमाण है कि कनेक्टिविटी सुरक्षा की रीढ़ है, न कि कोई अलग इकाई। उन्होंने जटिल परियोजनाओं को गति और दक्षता के साथ और स्वदेशी समाधानों के माध्यम से पूरा करके राष्ट्रीय विकास में उल्लेखनीय तेज़ी लाने के लिए बीआरओ की सराहना की। उन्होंने कहा कि बीआरओ ‘संचार’ और ‘कनेक्टिविटी’ का पर्याय बन गया है, और सीमावर्ती क्षेत्रों में विकास के इन दो महत्वपूर्ण पहलुओं को मज़बूत करने के सरकार के प्रयासों को रेखांकित किया। उन्होंने कहा, “हमारी सरकार, सशस्त्र बल और बीआरओ जैसे संगठन हमारे सीमावर्ती क्षेत्रों के समग्र विकास के लिए लगन से काम कर रहे हैं। हमें सीमावर्ती क्षेत्रों और राष्ट्रीय मुख्यधारा के बीच के बंधन को मज़बूत करते रहना चाहिए ताकि ये रिश्ते किसी भी बाहरी कारक से प्रभावित न हों।”
ऑपरेशन सिंदूर पर रक्षा मंत्री ने कहा, “पहलगाम में हुए भीषण आतंकवादी हमले के जवाब में हमारे सशस्त्र बलों ने यह अभियान चलाया। सभी जानते हैं कि उन आतंकवादियों के साथ क्या हुआ। हम और भी बहुत कुछ कर सकते थे, लेकिन हमारे बलों ने साहस और धैर्य का परिचय देते हुए केवल वही किया जो आवश्यक था। इतना बड़ा अभियान हमारी मज़बूत कनेक्टिविटी के कारण ही संभव हो पाया। सशस्त्र बलों तक रसद समय पर पहुँचाई गई। सीमावर्ती क्षेत्रों के साथ हमारा संपर्क बना रहा, जिससे यह अभियान ऐतिहासिक रूप से सफल रहा।” श्री सिंह ने ऑपरेशन के दौरान सशस्त्र बलों और नागरिक प्रशासन के साथ-साथ सीमावर्ती क्षेत्रों के लोगों के बीच समन्वय को अविश्वसनीय बताया। उन्होंने सीमावर्ती क्षेत्रों के निवासियों के प्रति हमारे सशस्त्र बलों के प्रति उनके समर्थन के लिए आभार व्यक्त करते हुए कहा, “यह समन्वय, यह पारस्परिकता ही हमारी पहचान है। यही हमें दुनिया में विशिष्ट बनाती है।”
2025-26 की दूसरी तिमाही में भारत की जीडीपी वृद्धि दर 8.2 प्रतिशत तक पहुंचने का उल्लेख करते हुए, रक्षा मंत्री ने कहा कि कनेक्टिविटी और संचार न केवल सुरक्षा, बल्कि आर्थिक समृद्धि में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने कहा, “यह वृद्धि सरकार की विकासोन्मुखी नीतियों और सुधारों के साथ-साथ प्रत्येक भारतीय की कड़ी मेहनत का परिणाम है। आज हम कई युद्ध और संघर्ष देख रहे हैं। ऑपरेशन सिंदूर के बाद, हमने एक बड़ा संघर्ष भी देखा। लेकिन इन चुनौतियों के बावजूद, हमारी अर्थव्यवस्था निरंतर बढ़ रही है, हम आगे बढ़ रहे हैं।”
राजस्थान के राज्यपाल श्री हरिभाऊ किसनराव बागड़े, मिजोरम के राज्यपाल जनरल (डॉ.) विजय कुमार सिंह, लद्दाख के उपराज्यपाल श्री कविन्द्र गुप्ता, जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल श्री मनोज सिन्हा, जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री श्री उमर अब्दुल्ला, मिजोरम के मुख्यमंत्री श्री लालदुहोमा, केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार), प्रधानमंत्री कार्यालय, पीपी/डीओपीटी, परमाणु ऊर्जा, अंतरिक्ष राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह, केंद्रीय संसदीय एवं अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री श्री किरेन रिजिजू, थल सेनाध्यक्ष जनरल उपेन्द्र द्विवेदी, रक्षा सचिव श्री राजेश कुमार सिंह, उत्तरी कमान के जनरल ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ लेफ्टिनेंट जनरल प्रतीक शर्मा, 14 कोर के जनरल ऑफिसर कमांडिंग लेफ्टिनेंट जनरल हितेश भल्ला, अन्य वरिष्ठ अधिकारी और बीआरओ के कार्मिक इस कार्यक्रम में शामिल हुए
पृष्ठभूमि
पिछले दो वर्षों में, कुल 356 बीआरओ अवसंरचना परियोजनाएं राष्ट्र को समर्पित की गई हैं, जो रणनीतिक अवसंरचना विकास के क्षेत्र में एक मानक उपलब्धि है। ऐसे विविध और चुनौतीपूर्ण क्षेत्रों में इन परियोजनाओं का क्रियान्वयन, उच्च-ऊंचाई, बर्फीले, रेगिस्तानी, बाढ़-प्रवण और घने वन क्षेत्रों में संचालन करने की बीआरओ की बेजोड़ क्षमता को दर्शाता है। राष्ट्रीय सुरक्षा और विकास में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका को मान्यता देते हुए, सरकार ने केंद्रीय बजट 2025-26 में बीआरओ का बजट 6,500 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 7,146 करोड़ रुपये कर दिया है।
रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन का ४ से ५ दिसंबर २०२५ तक भारत का राजकीय दौरा अंतरराष्ट्रीय राजनीति में एक महत्वपूर्ण घटना बनकर उभरा है। यह यात्रा यूक्रेन पर रूसी आक्रमण के बाद पुतिन की भारत की पहली यात्रा थी। इस दौरे ने वैश्विक राजनीतिक समीकरणों में कई नए आयाम जोड़े हैं और विश्व शक्तियों के बीच संतुलन को नया मोड़ दिया है। भारत की स्वतंत्र विदेश नीति का संदेश पुतिन की यात्रा ने भारत की सामरिक स्वायत्तता की नीति को पुनः स्थापित किया है। जब पश्चिमी देश, विशेषकर अमेरिका, भारत पर रूस से संबंध कमजोर करने के लिए दबाव डाल रहे थे, तब भारत ने इस यात्रा को आयोजित कर स्पष्ट संकेत दिया कि वह अपनी विदेश नीति में किसी बाहरी दबाव को स्वीकार नहीं करेगा। यह कदम विश्व राजनीति में उन देशों के लिए प्रेरणादायक है जो महाशक्तियों के दबाव में अपनी स्वतंत्र नीतियों को बनाए रखना चाहते हैं। भारत ने यह साबित किया कि वह विश्व मित्र के रूप में सभी ध्रुवों के साथ संबंध बनाए रख सकता है।
पुतिन की यात्रा ने अमेरिका और भारत के बीच बढ़ते तनाव को और उजागर किया है। अमेरिका ने भारत पर रूसी तेल खरीदने के कारण ५० प्रतिशत शुल्क लगाया है। इसके बावजूद भारत ने पुतिन को भव्य स्वागत दिया, जिसमें प्रधानमंत्री मोदी स्वयं हवाई अड्डे पर उन्हें लेने गए। यह घटना विश्व राजनीति में यह दर्शाती है कि भारत अमेरिका की धमकियों के आगे झुकने को तैयार नहीं है। यह स्थिति वैश्विक शक्ति संतुलन में एक नया अध्याय खोलती है, जहां मध्यम शक्तियां महाशक्तियों के दबाव से स्वतंत्र रूप से अपनी नीतियां बना रही हैं। रूस-चीन-भारत त्रिकोण की जटिलता पुतिन की भारत यात्रा ने रूस, चीन और भारत के बीच जटिल संबंधों को भी उजागर किया है। एक ओर जहां रूस और चीन के संबंध मजबूत हो रहे हैं, वहीं भारत और चीन की सीमा पर तनाव बना हुआ है। रूस इन दोनों देशों के साथ अपने संबंधों को संतुलित करने का प्रयास कर रहा है। यह स्थिति एशिया में शक्ति संतुलन को प्रभावित करती है और विश्व राजनीति में एक नया समीकरण बनाती है। भारत के लिए यह चुनौती है कि वह रूस के साथ अपने ऐतिहासिक संबंधों को बनाए रखे और साथ ही चीन के बढ़ते प्रभाव से निपटे। सैन्य सहयोग और रक्षा संबंध भारत की सैन्य शक्ति का एक बड़ा हिस्सा रूसी हथियारों और प्रणालियों पर निर्भर है। भारत की सेना, वायु सेना और नौसेना में लगभग ६० से ७० प्रतिशत उपकरण रूसी मूल के हैं। इस यात्रा में रक्षा सहयोग पर विशेष चर्चा हुई, जिसमें एस-४०० वायु रक्षा प्रणाली और संयुक्त विनिर्माण पर ध्यान केंद्रित किया गया। यह सहयोग विश्व राजनीति में महत्वपूर्ण है क्योंकि यह पश्चिमी सैन्य गठबंधनों के समानांतर एक वैकल्पिक रक्षा संबंध को मजबूती प्रदान करता है। हालांकि, भारत अब अपनी रक्षा आपूर्ति में विविधता लाने का प्रयास कर रहा है। ऊर्जा सुरक्षा और आर्थिक सहयोग यूक्रेन युद्ध के बाद भारत रूसी तेल का सबसे बड़े खरीदारों में से एक बन गया है। दोनों देशों के बीच व्यापार लगभग ७० अरब डॉलर तक पहुंच गया है, जिसे २०३० तक १०० अरब डॉलर तक ले जाने का लक्ष्य है। पुतिन ने भारत को निर्बाध ईंधन आपूर्ति का आश्वासन दिया है। यह आर्थिक सहयोग विश्व राजनीति में महत्वपूर्ण है क्योंकि यह पश्चिमी प्रतिबंधों के बावजूद रूस की अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान करता है। साथ ही, यह भारत को ऊर्जा सुरक्षा प्रदान करता है और उसकी आर्थिक वृद्धि को सहारा देता है।
पुतिन की भारत यात्रा ने यूरोपीय संघ और अन्य पश्चिमी देशों में चिंता उत्पन्न की है। यूरोपीय संघ ने भारतीय संस्थाओं को अपनी प्रतिबंध सूची में शामिल किया है। यह दर्शाता है कि पश्चिमी देश भारत-रूस संबंधों को लेकर असहज हैं। यह स्थिति विश्व राजनीति में पश्चिम के एकध्रुवीय प्रभुत्व को चुनौती देती है। भारत की स्वतंत्र नीति अन्य विकासशील देशों के लिए एक मॉडल बन सकती है जो पश्चिमी दबाव से मुक्त होकर अपने हितों की रक्षा करना चाहते हैं। बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था की ओर पुतिन की भारत यात्रा बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह यात्रा दर्शाती है कि विश्व राजनीति अब केवल पश्चिम या अमेरिका के इर्द-गिर्द नहीं घूमती। भारत जैसे देश अपनी शर्तों पर अंतरराष्ट्रीय संबंध बना रहे हैं। यह प्रवृत्ति विश्व राजनीति को अधिक लोकतांत्रिक और समावेशी बना रही है। ब्रिक्स, शंघाई सहयोग संगठन जैसे मंचों के माध्यम से गैर-पश्चिमी देश अपनी आवाज मजबूती से उठा रहे हैं। रूस के राष्ट्रपति पुतिन का भारत दौरा एक ऐसे समय में हुआ जब वैश्विक राजनीति अनेक ध्रुवों में बंटी हुई है। विश्व शक्तियों के बीच बढ़ती प्रतिस्पर्धा, नई आर्थिक संरचनाओं का निर्माण और बदलते सुरक्षा परिदृश्य के कारण यह यात्रा केवल द्विपक्षीय नहीं बल्कि अंतर्राष्ट्रीय राजनीति की दिशा को भी प्रभावित करने वाली मानी जा रही है। भारत और रूस के ऐतिहासिक संबंधों की गहराई को देखते हुए यह दौरा वैश्विक शक्ति संरचना में एक महत्वपूर्ण संदेश देता है।
इस दौरे का पहला बड़ा प्रभाव यह है कि भारत और रूस दोनों ने मित्रता और बहुपक्षीय संतुलन की नीति को एक नए रूप में दोहराया है। पश्चिमी देशों, विशेषकर अमेरिका और यूरोपीय राष्ट्रों द्वारा रूस पर लगाए गए प्रतिबंधों के बीच भारत का यह स्वागत वैश्विक मंच पर भारत की स्वतंत्र और संतुलित विदेश नीति को पुष्ट करता है। भारत ने यह स्पष्ट किया कि उसका निर्णय किसी दबाव का परिणाम नहीं बल्कि अपने राष्ट्रीय हितों और रणनीतिक सोच के अनुरूप होता है।
पुतिन के दौरे से एशिया में रूस का प्रभाव भी और मजबूत हुआ है। चीन के बढ़ते प्रभाव और एशिया–प्रशांत क्षेत्र में शक्ति संतुलन की बदलती स्थिति को देखते हुए रूस का भारत के साथ निकट आना विश्व राजनीति में एक नई धुरी के उदय की ओर संकेत करता है। यह धुरी न तो पश्चिमी गुट के पक्ष में है और न ही किसी एक शक्तिशाली देश के इर्द–गिर्द घूमती है। यह व्यवस्था बहुध्रुवीयता को मजबूत करती है जिसमें भारत और रूस दोनों एक–दूसरे की रणनीतिक स्वतंत्रता को महत्व देते हैं।
ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग बढ़ने से भी विश्व राजनीति में व्यापक असर देखने को मिल सकता है। रूस ऊर्जा निर्यात की दिशा में दुनिया की एक प्रमुख शक्ति है, वहीं भारत ऊर्जा का एक बड़ा उपभोक्ता। दोनों के बीच दीर्घकालिक ऊर्जा समझौते पश्चिमी ऊर्जा बाजारों को चुनौती दे सकते हैं। यह स्थिति यूरोप और अमेरिका की ऊर्जा रणनीति पर प्रत्यक्ष असर डाल सकती है। वैश्विक ऊर्जा बाज़ार में रूस–भारत साझेदारी नई कीमतों, नए मार्गों और नई साझेदारियों का निर्माण कर सकती है।
रक्षा सहयोग भी इस यात्रा का एक अहम पहलू है। लंबे समय से रूस भारत का विश्वसनीय रक्षा साझेदार रहा है और इस दौरे में रक्षा उत्पादन और तकनीकी साझेदारी पर जोर दिया गया। इससे वैश्विक हथियार बाजार में रूस की पकड़ मजबूत होगी, साथ ही भारत की सामरिक क्षमताओं में वृद्धि होने से दक्षिण एशिया में शक्ति संतुलन प्रभावित होगा। यह स्थिति उन देशों के लिए चुनौती बन सकती है जो क्षेत्र में अस्थिरता बढ़ाकर अपने हित साधने की कोशिश करते हैं।
विश्व राजनीति में यह यात्रा इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है कि भारत और रूस दोनों विश्व के बड़े संकटों पर लगभग समान दृष्टिकोण रखते हैं। चाहे वह पश्चिम एशिया का संकट हो, यूक्रेन की स्थिति हो या एशिया के समुद्री क्षेत्र का विवाद—दोनों देश बातचीत और शांतिपूर्ण समाधान को प्राथमिकता देते हैं। यह दृष्टिकोण वैश्विक कूटनीति में संवाद आधारित व्यवस्था को मजबूत करेगा और बड़ी शक्तियों के बीच विरोध का दबाव कम करने में मदद करेगा।
पुतिन के इस दौरे ने पश्चिमी देशों को भी यह संकेत दिया है कि भारत किसी एक ध्रुव में बंधने वाला देश नहीं है। भारत की विदेश नीति में स्वायत्तता ने पश्चिमी देशों को अपने रवैये की समीक्षा करने पर मजबूर किया है। कई विश्लेषकों का मानना है कि इससे अमेरिका और यूरोप को भारत के साथ नई रणनीतिक समझ विकसित करनी होगी ताकि भारत को अपनी ओर आकर्षित रखा जा सके। यह स्थिति वैश्विक राजनीति में भारत की भूमिका को और अधिक मजबूत करती है।
वैश्विक दक्षिण के देशों पर भी इस यात्रा का सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। भारत और रूस दोनों उन देशों के समर्थक रहे हैं जो विकसित देशों की नीतियों से संतुलन और न्याय की मांग करते हैं। पुतिन का भारत दौरा इन देशों के लिए यह संदेश देता है कि बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था की राह भारत और रूस मिलकर प्रशस्त कर रहे हैं। इससे विकासशील देशों की आवाज़ वैश्विक मंचों पर और मजबूत हो सकती है।
अंततः यह स्पष्ट है कि पुतिन का भारत दौरा केवल कूटनीतिक औपचारिकता नहीं बल्कि विश्व राजनीति में एक बड़े परिवर्तन का संकेत है। इस यात्रा ने यह दिखाया कि वैश्विक शक्ति संतुलन बदल रहा है और भारत उस नई व्यवस्था में एक निर्णायक भूमिका निभा रहा है। बहुध्रुवीय विश्व, स्वतंत्र विदेश नीति, ऊर्जा सुरक्षा, रक्षा सहयोग और वैश्विक दक्षिण के सशक्तिकरण जैसे कई पहलुओं पर इस यात्रा का दूरगामी प्रभाव पड़ेगा। आने वाले वर्षों में इसकी गूंज अंतरराष्ट्रीय संबंधों के हर मंच पर सुनाई देगी। पुतिन की भारत यात्रा विश्व राजनीति में एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हो सकती है। यह यात्रा भारत की सामरिक स्वायत्तता, रूस की वैश्विक स्थिति की मजबूती और अमेरिका के एकतरफा प्रभुत्व को चुनौती देने का प्रतीक है। इस दौरे ने यह स्पष्ट कर दिया है कि आने वाले समय में विश्व राजनीति अधिक जटिल और बहुध्रुवीय होगी। भारत जैसे देशों की भूमिका इस नई व्यवस्था में केंद्रीय होगी, जो विभिन्न शक्ति केंद्रों के बीच संतुलन बनाए रखते हुए अपने राष्ट्रीय हितों की रक्षा करेंगे। यह यात्रा इस बात का भी संकेत है कि पुराने गठबंधन और शीत युद्ध के समीकरण अब लागू नहीं होते, और देश नए संबंधों और साझेदारियों के माध्यम से अपना भविष्य तय कर रहे हैं।
रूस का अलगाव विफल: पुतिन की यह यात्रा पश्चिमी देशों को यह संदेश देने में सफल रही कि रूस अलग-थलग नहीं पड़ा है।
चीन के लिए संदेश: रूस और चीन की बढ़ती रणनीतिक निकटता भारत के लिए चिंता का विषय रही है। पुतिन की भारत यात्रा ने एक तरह से चीन को यह संकेत दिया कि रूस केवल बीजिंग का ‘जूनियर पार्टनर’ नहीं है और उसके पास नई दिल्ली के रूप में एक मजबूत, दीर्घकालिक भागीदार मौजूद है। यह भारत को एशिया में चीन के बढ़ते प्रभाव को संतुलित करने के लिए रणनीतिक विकल्प प्रदान करता है।
पश्चिमी देशों की प्रतिक्रिया और चुनौती: पुतिन के दौरे पर यूरोपीय और अमेरिकी देशों की कड़ी नज़र थी। उनके लिए यह एक चुनौती है, क्योंकि वे भारत को रूस से दूर करने की कोशिश कर रहे हैं, जबकि भारत अपने हितों के लिए दोनों पक्षों से संबंध बनाए रखने की नीति पर अडिग है। यह स्थिति भारत को अपनी विदेश नीति में अधिक मोलभाव की शक्ति देती है, लेकिन साथ ही पश्चिमी पूंजी और टेक्नोलॉजी के साथ अपने व्यापार को भी संतुलित रखने की जटिल चुनौती पेश करती है।
अफगानिस्तान और क्षेत्रीय सुरक्षा: दोनों नेताओं ने आतंकवाद, उग्रवाद और अफगानिस्तान की स्थिति पर भी समन्वय बनाए रखने पर सहमति व्यक्त की। यह क्षेत्रीय स्थिरता और सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है, खासकर मध्य एशिया और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में बढ़ती अनिश्चितताओं के बीच।
शिखर सम्मेलन ने भविष्य के लिए सहयोग के नए रास्ते खोले।
कनेक्टिविटी और लॉजिस्टिक्स: उत्तरी समुद्री मार्ग (Northern Sea Route) और चेन्नई-व्लादिवोस्तोक समुद्री गलियारे जैसे कनेक्टिविटी प्रोजेक्टों पर जोर दिया गया, जो दोनों देशों के बीच व्यापार और परिवहन को गति प्रदान करेंगे।
जन-जन के बीच संबंध: रूसी नागरिकों के लिए 30 दिन के मुफ्त ई-वीजा और समूह पर्यटक वीजा की सुविधा के साथ-साथ कुशल श्रमिकों की गतिशीलता पर हुए समझौतों ने दोनों देशों के लोगों के बीच संपर्क को बढ़ावा दिया है।
परमाणु ऊर्जा और आर्कटिक: कुडनकुलम परमाणु परियोजना की शेष इकाइयों के निर्माण में तेजी लाने पर सहमति हुई। इसके अतिरिक्त, भारत की आर्कटिक परिषद में एक पर्यवेक्षक के रूप में सक्रिय भूमिका निभाने की इच्छा ने सहयोग के एक नए भू-सामरिक क्षेत्र का द्वार खोला है।
निष्कर्ष
रूस के राष्ट्रपति पुतिन की भारत यात्रा ने द्विपक्षीय संबंधों में ‘विश्वास और पारस्परिक सम्मान’ की मजबूत नींव को फिर से स्थापित किया। वैश्विक राजनीति के संदर्भ में, इस शिखर सम्मेलन ने पश्चिमी एकाधिकार और दबाव को खारिज करते हुए बहुध्रुवीयता और स्वतंत्र राष्ट्रीय हितों की सर्वोच्चता का संदेश दिया है। यह यात्रा भारत को एक ऐसी वैश्विक शक्ति के रूप में स्थापित करती है जो अपनी शर्तों पर दुनिया की प्रमुख शक्तियों के साथ संबंध बनाए रख सकती है, भले ही भू-राजनीतिक हवाएँ किसी भी दिशा में बह रही हों। यह घटनाक्रम आने वाले समय में विश्व व्यापार, रक्षा गतिशीलता और भू-राजनीतिक गठबंधनों को एक नई दिशा देगा। क्या आप इस लेख के किसी विशिष्ट पहलू, जैसे डी-डॉलरकरण के प्रभाव या भारत की रक्षा स्वायत्तता, पर अधिक गहराई से चर्चा करना चाहेंगे?
भारतीय नौसेना अकादमी (आईएनए), एझिमाला—नौसेना अधिकारी प्रशिक्षण के लिए भारत का प्रमुख संस्थान—एडमिरल्स कप 2025 की मेजबानी करने पर गर्व है। इसका आयोजन 8 से 13 दिसंबर 2025 तक किया जाएगा।दुनिया की सबसे प्रतिष्ठित नौसेना नौकायन चैंपियनशिप में से एक के रूप में मान्यता प्राप्त, इस वर्ष के 14वें संस्करण में 35 अंतर्राष्ट्रीय देश भाग लेंगे, जो विश्वस्तरीय प्रतिनिधित्व में विकास को दर्शाता है और अंतरराष्ट्रीय समुद्री समुदाय में इस आयोजन की बढ़ती प्रमुखता की पुष्टि करता है।
2010 में स्थापित, एडमिरल कप का उद्देश्य मित्र विदेशी नौसेनाओं के प्रशिक्षु अधिकारियों के बीच सौहार्द, समुद्री सहयोग और आपसी समझ को बढ़ावा देना है। पिछले कुछ वर्षों में, यह चैंपियनशिप एक प्रतिष्ठित वैश्विक आयोजन के रूप में विकसित हुई है, जो दुनिया भर की नौसेना अकादमियों से शीर्ष नौकायन प्रतिभाओं को आकर्षित करती है। यह प्रतियोगिता अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रशंसित आईएलसीए-6 श्रेणी की सेलबोट्स का उपयोग करके मैच रेसिंग प्रारूप में आयोजित की जाती है, जो अपनी सामरिक कुशाग्रता, शारीरिक मजबूती और सटीक नाविक कौशल के लिए जानी जाती हैं।
इस वर्ष के आयोजन में एशिया, यूरोप, अफ्रीका, ओशिनिया और अमेरिका सहित एक विस्तृत भौगोलिक क्षेत्र की टीमें भाग लेंगी, जो विविध समुद्री संस्कृतियों को एक ही प्रतिस्पर्धी मंच पर लाएंगी। यह आयोजन न केवल स्वस्थ खेल प्रतिद्वंद्विता को बढ़ावा देता है, बल्कि विश्व की नौसेनाओं के भावी नेतृत्व के बीच पेशेवर संबंधों को भी मज़बूत करता है।
आईएनए का असाधारण प्रशिक्षण इको-सिस्टम, आधुनिक आउटडोर नौकायन परिसर और एझिमाला के तटीय जल की अनुकूल नौकायन परिस्थितियां इस स्तर की प्रतियोगिता के लिए एक आदर्श वातावरण प्रदान करती हैं। दौड़ के अलावा, मेहमान टीमें सांस्कृतिक आदान-प्रदान, संवाद और आउटरीच गतिविधियों की एक श्रृंखला के माध्यम से अकादमी की परंपराओं, बुनियादी ढांचे और भारतीय नौसेना के लोकाचार का भी अनुभव करेंगी।
9 दिसंबर 2025 को उद्घाटन समारोह के साथ चैंपियनशिप का औपचारिक उद्घाटन होगा, जिसके बाद चुनौतीपूर्ण समुद्री और तेज़ हवाओं के बीच चार दिनों तक कड़ी प्रतिस्पर्धा होगी। यह आयोजन 13 दिसंबर 2025 को समापन समारोह के साथ समाप्त होगा, जहां सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाली टीमों और उत्कृष्ट व्यक्तिगत नाविकों को पुरस्कार प्रदान किए जाएंगे।
समुद्री साझेदारी की भावना को उजागर करते हुए, एडमिरल कप 2025 वैश्विक नौसैनिक सहयोग, अधिकारी प्रशिक्षुओं के व्यावसायिक विकास औरटीम वर्क, अनुशासन और खेल कौशल के साझा मूल्यों के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को मजबूत बनाता है।
सोमवार से शुरू होने वाले संसद सत्र म में सत्ताधारी बीजेपी और कांग्रेस के नेतृत्व वाले विपक्ष के बीच बड़ा टकराव देखने को मिलने के ज्यादा आसार हैं। सोमवार से, संसद में राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम’ और चुनावी सुधारों जैसे दो महत्वपूर्ण विषयों पर विशेष चर्चा होगी। इस चर्चा में सभी पार्टियों के सांसद हिस्सा लेंगे।
इस चर्चा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह बीजेपी की ओर से बहस में शामिल होंगे। वहीं, विपक्ष की ओर से नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा, अखिलेश यादव, और कनिमोझी जैसे प्रमुख नेता अपनी बात रखेंगे। लोकसभा में चुनावी सुधारों पर बहस मंगलवार को शुरू होगी, जिसके बुधवार को खत्म होने की संभावना है। दोनों सदनों में कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल बहस का जवाब देंगे।
सोमवार दोपहर को यह चर्चा लोकसभा में शुरू होगी, जिसकी शुरुआत प्रधानमंत्री मोदी करेंगे। कांग्रेस की ओर से उपनेता गौरव गोगोई और वरिष्ठ सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा भी शामिल होंगी। राज्यसभा में यह बहस मंगलवार को होगी, जिसकी शुरुआत गृह मंत्री अमित शाह करेंगे।माना जा रहा है कि ‘वंदे मातरम’ और चुनावी सुधारों पर विपरीत विचारों के चलते सदन में तीखी बहस होगी।
भारत सरकार 8 से 13 दिसंबर 2025 तक नई दिल्ली में अमूर्त सांस्कृतिक विरासत की सुरक्षा के लिए यूनेस्को अंतर-सरकारी समिति के 20वें सत्र की मेज़बानी करेगी। ऐतिहासिक लाल किला परिसर, जो यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल है, को इस आयोजन स्थल के रूप में चुना गया है, जो भारत की मूर्त और अमूर्त विरासत के एक ही छत के नीचे समागम का प्रतीक है।
यह पहली बार होगा, जब भारत आईसीएच समिति के सत्र की मेज़बानी करेगा और इस बैठक की अध्यक्षता यूनेस्को में भारत के स्थायी प्रतिनिधि महामहिम विशाल वी. शर्मा करेंगे। यह आयोजन 2005 में अमूर्त सांस्कृतिक विरासत की सुरक्षा के लिए 2003 कन्वेंशन के भारत द्वारा अनुसमर्थन की बीसवीं वर्षगांठ के मौके पर हो रहा है, जो जीवंत सांस्कृतिक परंपराओं के संरक्षण के लिए भारत की निरंतर प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
यूनेस्को की परिभाषा के अनुसार, अमूर्त सांस्कृतिक विरासत में वे प्रथाएँ, ज्ञान, अभिव्यक्तियाँ, वस्तुएँ और स्थान शामिल हैं, जिन्हें समुदाय अपनी सांस्कृतिक पहचान के हिस्से के रूप में देखते हैं। पीढ़ियों से चली आ रही यह विरासत वक्त के साथ विकसित होती है, सांस्कृतिक पहचान को मज़बूत करती है और विविधता की सराहना करती है।
अमूर्त सांस्कृतिक विरासत की सुरक्षा के लिए, यूनेस्को ने 17 अक्टूबर 2003 को पेरिस में अपने 32वें आम सम्मेलन के दौरान 2003 कन्वेंशन को अपनाया था। इस कन्वेंशन ने वैश्वीकरण, सामाजिक परिवर्तन और सीमित संसाधनों के कारण तेज़ी से ख़तरे में आ रही मौजूदा सांस्कृतिक परंपराएँ, मौखिक प्रथाएँ, प्रदर्शन कलाएँ, सामाजिक रीति-रिवाज, अनुष्ठान, ज्ञान प्रणालियाँ और शिल्प कौशल जैसी वैश्विक चिंताओं पर चर्चा की।
इस सम्मेलन में समुदायों, खास तौर पर स्वदेशी समुदायों, समूहों और व्यक्तिगत अनुयायियों को, सांस्कृतिक विरासत के निर्माण, रखरखाव और हस्तांतरण में उनकी अहम भूमिका को देखते हुए, सुरक्षा प्रयासों के केंद्र में रखा गया। इसमें मूर्त और अमूर्त विरासत के बीच परस्पर निर्भरता, वैश्विक सहयोग की ज़रुरत और युवा पीढ़ी के बीच जागरूकता बढ़ाने के महत्व पर ज़ोर दिया गया। मानवता की जीवंत विरासत की रक्षा के लिए एक साझा वैश्विक प्रतिबद्धता के साथ, इस सम्मेलन ने औपचारिक रूप से अंतर्राष्ट्रीय सहयोग, समर्थन और मान्यता के लिए तंत्र स्थापित किए, जिसने यूनेस्को की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत सूचियों और उसके बाद अंतर-सरकारी समिति के कार्यों की भी नींव रखी।
भारत के उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने आज गुरुग्राम में ब्रह्म कुमारी के ओम शांति रिट्रीट सेंटर (ओएसआरसी) के रजत जयंती वर्ष समारोह का शुभारंभ किया।उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए, उपराष्ट्रपति ने इस केंद्र के समारोह में शामिल होने पर प्रसन्नता व्यक्त की। इसकी स्थापना 24 वर्ष पहले ब्रह्म कुमारी के आध्यात्मिक दृष्टिकोण से हुई थी और अब यह अपनी सेवा के 25वें वर्ष में प्रवेश कर चुका है। उन्होंने केंद्र के शांति और ध्यान के संदेश की ओर आकर्षित होने वाले वैज्ञानिकों, डॉक्टरों, प्रशासकों, राजनेताओं जैसे पेशेवरों की विविधता की सराहना की। उन्होंने ब्रह्म कुमारी को दुनिया के सबसे बड़े महिला-नेतृत्व वाले आध्यात्मिक संगठन के रूप में उभरने के लिए बधाई दी।
उपराष्ट्रपति ने आध्यात्म, ध्यान और अंत: जागरण में निहित भारत की समृद्ध सभ्यतागत विरासत पर जोर दिया। उन्होंने संतों, ऋषियों और मुनियों के गहन योगदान को याद किया जिनकी तपस्या और ध्यान साधना ने भारत के शाश्वत ज्ञान को आकार दिया है। उन्होंने कहा कि राजयोग और विपश्यना जैसी परंपराएं इस बात के महत्व को इंगित करती है कि सच्ची शक्ति और स्पष्टता भीतर से ही उभरती है।
श्री सी.पी. राधाकृष्णन ने इस आध्यात्मिक विरासत को आगे बढ़ाने और भारत तथा विदेशों में लाखों लोगों को मन की शांति और पवित्रता की ओर मार्गदर्शन करने के लिए ब्रह्म कुमारी की सराहना की। उन्होंने कहा कि अमृत काल में, प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने एक विकसित भारत @2047 की कल्पना की है, जहां आर्थिक विकास, आंतरिक स्थिरता, प्रसन्नता और शांति पूरक हो। उन्होंने कहा कि आज के तीव्र संसार में ध्यान को एक आवश्यक जीवन कौशल के रूप में अपनाया जाना चाहिए।
उपराष्ट्रपति ने पर्यावरणीय स्थिरता के प्रति ओम शांति रिट्रीट सेंटर की दृढ़ प्रतिबद्धता और प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की पहल मिशन लाइफ के साथ तालमेल की भी सराहना की। यह मिशन लोगों को सचेतन जीवनशैली अपनाने के लिए प्रोत्साहित करता है। उन्होंने केंद्र की हरित पहलों की भी सराहना की जिनमें 1 मेगावाट का हाइब्रिड सौर ऊर्जा संयंत्र, वर्षा जल संचयन प्रणालियां, बायोगैस और सीवेज शोधन संयंत्र, हरित रसोई, निःशुल्क पौध नर्सरी और कल्प तरु परियोजना के तहत बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण शामिल हैं।
उपराष्ट्रपति ने ‘नशा मुक्त भारत अभियान’ और वरिष्ठ नागरिकों के सम्मान तथा सभी क्षेत्रों में कर्मयोग को बढ़ावा देने वाली अन्य सामाजिक पहलों में ब्रह्म कुमारी के योगदान की सराहना की।
हाल ही में लखनऊ में राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु द्वारा ब्रह्म कुमारी के वार्षिक अभियान ‘‘विश्व एकता और विश्वास के लिए राजयोग ध्यान’’ के उद्घाटन का उल्लेख करते हुए, श्री सी.पी. राधाकृष्णन ने विश्वास व्यक्त किया कि रजत जयंती वर्ष सेवा के नए मार्ग खोलेगा, सामाजिक साझेदारी को और गहरा करेगा और आध्यात्मिक पहुंच को बढ़ाएगा।
इस अवसर पर हरियाणा सरकार के पर्यावरण एवं वन तथा उद्योग एवं वाणिज्य मंत्री श्री राव नरबीर सिंह तथा ब्रह्म कुमारी के वरिष्ठ गणमान्य व्यक्ति भी उपस्थित थे।
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने गोवा के अरपोरा में अग्नि दुर्घटना में हुई जन हानि पर शोक व्यक्त किया है। श्री मोदी ने दुर्घटना में घायल हुए लोगों के शीघ्र स्वस्थ होने की भी कामना की है।रोमियो लेन स्थित एक नाइट क्लब ‘बिर्च’ में मध्यरात्रि के बाद लगी आग में कम से कम 25 लोगों की मौत हो गई।
प्रधानमंत्री ने बताया कि उन्होंने इस स्थिति के बारे में गोवा के मुख्यमंत्री डॉ. प्रमोद सावंत से बात की है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार इस त्रासदी से प्रभावित लोगों को हर संभव सहायता प्रदान कर रही है।
प्रधानमंत्री ने एक्स पर पोस्ट किया;
‘‘गोवा के अरपोरा में हुई अग्नि दुर्घटना बेहद दुखद है। मेरी संवेदनाएं उन सभी लोगों के साथ हैं जिन्होंने अपने प्रियजनों को खो दिया है। घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना करता हूं। गोवा के मुख्यमंत्री डॉ. प्रमोद सावंत जी से इस स्थिति के बारे में बात की। राज्य सरकार प्रभावित लोगों को हर संभव सहायता प्रदान कर रही है।प्रधानमंत्री ने प्रत्येक मृतक के निकटतम परिजन को पीएमएनआरएफ से 2 लाख रुपये तथा घायलों को 50,000 रुपये की अनुग्रह राशि देने की भी घोषणा की।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने रविवार को कहा कि गोवा के एक नाइट क्लब में आग लगने की घटना में लोगों की मौत ‘बेहद दुखद’ है। गृह मंत्री ने कहा कि स्थानीय प्रशासन बचाव एवं राहत अभियान संचालित कर रहा है और प्रभावितों को आवश्यक देखभाल प्रदान कर रहा है।
शाह ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘गोवा के अरपोरा में आग लगने की घटना में लोगों की मृत्यु बेहद दुखद है। स्थानीय प्रशासन बचाव एवं राहत अभियान संचालित कर रहा है और प्रभावितों को आवश्यक देखभाल प्रदान कर रहा है।’’
उन्होंने कहा, ‘‘मेरी गहरी संवेदनाएं उन परिवारों के प्रति हैं, जिनके प्रियजनों ने इस हादसे में जान गंवाई है। मैं घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की प्रार्थना करता हूं।’’ रोमियो लेन स्थित एक नाइट क्लब ‘बिर्च’ में मध्यरात्रि के बाद लगी आग में कम से कम 25 लोगों की मौत हो गई।
राज्य की राजधानी पणजी से लगभग 25 किलोमीटर दूर उत्तरी गोवा के अरपोरा गांव में स्थित यह पार्टी स्थल पिछले साल ही खुला था। घटनास्थल पर पहुंचे मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत ने बताया कि मृतकों में ज्यादातर लोग क्लब की रसोई में काम करने वाले कर्मचारी थे, जिनमें तीन महिलाएं भी शामिल हैं। उन्होंने बताया कि मरने वालों में तीन से चार पर्यटक भी शामिल हैं।
गोवा के मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत ने जानकारी दी है कि रविवार को एक नाइटक्लब में लगी भीषण आग के सिलसिले में उस क्लब के जनरल मैनेजर को गिरफ्तार कर लिया गया है। मुख्यमंत्री ने बताया कि क्लब, जिसका नाम ‘द बर्च बाय रोमियो लेन’ है, उसके मालिक के खिलाफ भी गिरफ्तारी वारंट जारी किया गया है।
25 लोगों की मौत, दम घुटने से गई जान
मुख्यमंत्री सावंत ने पुष्टि की कि यह दर्दनाक घटना देर रात करीब 12 बजे हुई। उन्होंने बताया, ‘आग लगने की वजह से कई लोग (नाइटक्लब से) बाहर नहीं निकल पाए और दम घुटने से उनकी मौत हो गई।’ इस हादसे में 25 लोगों के मारे जाने और छह अन्य के घायल होने की पुष्टि हुई है। उन्होंने बताया कि घायल लोग फिलहाल खतरे से बाहर हैं और उनका इलाज गोवा मेडिकल कॉलेज में चल रहा है।
घटना की मजिस्ट्रेट जांच के आदेश
सावंत ने बताया कि स्थिति का जायजा लेने के लिए उन्होंने रात करीब 2 बजे घटना वाली जगह का दौरा किया। उन्होंने इस मामले में मजिस्ट्रेट जांच के आदेश दिए हैं। उन्होंने इस घटना को गोवा के इतिहास में पहली बार हुई ऐसी घटना बताया।सुरक्षा नियमों की अनदेखी की होगी जांच
जब मुख्यमंत्री से पूछा गया कि क्या नाइटक्लब में लगी आग ‘लापरवाही’ का नतीजा थी, तो उन्होंने कहा कि इसकी जांच के आदेश दिए गए हैं। जांच में यह पता लगाया जाएगा कि नाइटक्लब ने आग से सुरक्षा के नियमों का ठीक से पालन किया था या नहीं।
प्रधानमंत्री ने आज सशस्त्र सेना झंडा दिवस के अवसर पर सशस्त्र बलों के बहादुर पुरुषों और महिलाओं के प्रति अपनी गहरी कृतज्ञता व्यक्त की।
उन्होंने कहा कि सशस्त्र बलों के जवानों का अनुशासन, दृढ़ संकल्प और अदम्य साहस राष्ट्र की रक्षा करता है और देशवासियों को सशक्त बनाता है। उन्होंने कहा कि उनकी प्रतिबद्धता, राष्ट्र के प्रति कर्तव्य, अनुशासन और समर्पण का उदाहरण है।
प्रधानमंत्री ने सभी से सशस्त्र बलों की वीरता और सेवा के सम्मान में सशस्त्र सेना झंडा दिवस कोष में योगदान देने का भी आग्रह किया।
प्रधानमंत्री ने एक्स पर लिखा;
सशस्त्र सेना झंडा दिवस पर, हम उन बहादुर पुरुषों और महिलाओं के प्रति अपनी गहरी कृतज्ञता व्यक्त करते हैं जो अटूट साहस के साथ हमारे राष्ट्र की रक्षा करते हैं। उनका अनुशासन, दृढ़ संकल्प और भावना हमारे लोगों की रक्षा करते हैं और हमारे राष्ट्र को सशक्त बनाते हैं। उनकी प्रतिबद्धता हमारे राष्ट्र के प्रति कर्तव्य, अनुशासन और समर्पण का एक सशक्त उदाहरण है। आइए, हम भी सशस्त्र सेना झंडा दिवस कोष में योगदान दें।
घरेलू तथा वैश्विक बाजार में कारीगरों द्वारा तैयार हस्तशिल्प तथा हथकरघा उत्पादों की बहुत मांग है। इसी को दृष्टिगत रखते हुए अखिल भारतीय हस्तशिल्प सप्ताह 8 दिसंबर से लेकर 14 दिसंबर तक देशभर में मनाया जा रहा है । हस्तशिल्प सप्ताह लोगों के बीच हस्तशिल्प की वर्षों पुरानी परंपरा और संस्कृति के महत्व को रेखांकित करता है। हस्तशिल्प देशभर के ग्रामीण क्षेत्रों में अपनी महत्ता के लिए जानी जाती है। हस्तशिल्प को प्रोत्साहन देने, हस्तशिल्प सामग्रियों को जन जन तक पहुंचाने और उनका प्रचार-प्रसार करने के उद्देश्य से हर साल 8 से 14 दिसंबर के बीच अखिल भारतीय हस्तशिल्प सप्ताह मनाया जाता है। यह एक ऐसा आयोजन है जो हस्तशिल्प कलाओं से जुड़ी परंपराओं और संस्कृतियों को जीवित रखता है। हस्तशिल्प का मतलब होता है ऐसे कलात्मक कार्य जिसे बनाने के लिए हाथ और सरल औजार की सहायता ली जाती है और इसके माध्यम से आप अपने घर को भी सजा सकते हैं I इसके अलावा हस्तशिल्प कला का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्त्व बहुत ज्यादा है। हस्तशिल्प परंपरा में चीजें मशीन के द्वारा नहीं बल्कि बड़े पैमाने पर हाथों के द्वारा बनाई जाती हैं यही वजह है कि इसे हम लोग हस्तकला के नाम से जानते हैं I विशेषरूप से लोक चित्रकला, फाड़ चित्रकला, चिकनकारी, दरी बुनाई, कनी शॉल बुनाई, हाथ से ब्लॉक प्रिंटिंग, बंधेज टाई डाई, लाख की चूड़ियां, कांथादर्पण कार्य, क्रूल कढ़ाई, पिपली और क्रोशिया की बुनाई, फुलकारी और कलमकारी चित्रकारी, जरदोजी आदि ऐसे हस्तशिल्प कार्य हैं, जिनके जरिये स्थानीयता का राष्ट्रीय पहचान मिलती है।
हम देश के उस क्षेत्र की विरासत से आपको रूबरू कराना चाहते है जो सीमावर्ती तो है ही साथ ही अकाल और सूखे की मार से पीड़ित होने के बावजूद अपनी हस्तशिल्प की कला और संस्कृति को विपरीत स्थितियों में भी सहेजे हुए है। रेतीले धोरों से आच्छादित राजस्थान के सीमावर्ती बाड़मेर जिले के निवासियों के पास हुनर तो है मगर हुनर के विकास की सुविधा नहीं थी। बाड़मेर के लाखों परिवार हस्तशिल्प से जुड़े हैं। कतवारिनें और कशीदा करने वाली महिलाएं उत्पाद तैयार करती है और इनको बेचने का कार्य व्यापारी कर रहे हैं। हस्तशिल्प में अजरख प्रिंट और कांथा वर्क फैमस है। बाड़मेर अपनी पारंपरिक हस्तशिल्प कला के लिए जाना जाता है। यहां के शिल्पकर्मी अपनी कड़ी मेहनत, कला और परंपराओं के माध्यम से इन हस्तशिल्पों को जीवित रखते हैं। बाड़मेर को हस्तशिल्प का खजाना कहा जाता रहा है। यहां हुनरबाजों, कलाकारों की कोई कमी नहीं है लेकिन हस्तशिल्प से बने उत्पादों की सही मार्केटिंग नहीं होने के चलते यहां के हुनरबाजों का हुनर अपने तक ही सीमित रह रहा। बाड़मेर के हस्तनिर्मित बेडशीट, कुशन कवर, अजरख दुनियाभर में भी पसंद की जाती रही है। लकड़ी के हैंडीक्राफ्टस की भी विदेशों में बहुत मांग है। मालाणी के गौरव पदमश्री मगराज जैन ने गरीबी झेल रहे दलित, गरीब ,वंचित और महिलाओं के सशक्तिकरण का बीड़ा उठाया तो लता कच्छवाहा के रूप में उन्हें एक सहकर्मी का साथ मिला। मगराज जैन एक ऐसी शख्सियत है जिन्होंने थार के हस्तशिल्प लोककला और मेलों को पुनर्जीवित कर विश्वस्तरीय ख्याति दिलाने में अहम भूमिका निभाई। इसी तरह करीब पांच हजार से अधिक युवक-युवतियों को हस्तशिल्प यथा कांच कशीदा एप्लीक, चर्म कार्य, रेडियो मरम्मत सहित चालीस से अधिक विभिन्न व्यवसायों में प्रशिक्षण की सुविधा उपलब्ध कराई और उन्हें आत्मनिर्भर बना दिया। युवाओं की रोजी-रोटी का जरिया बन गया।
बाड़मेर सीमा क्षेत्र में 1965 व 1971 के भारत पाक युद्ध के बाद सैंकड़ों पाक विस्थापित परिवार आकर बसे। रोजी रोटी से जूझ रहे मेगवाल जाति के परिवारों की महिलाओं के पास पारम्परिक हुनर था। महिलाएं अपनी बेटियों के दहेज हेतु कांचली, अंगरखी, तकिया, रूमाल या दामाद की बुकानी, बटुआ आदि सुंदर वस्त्र, चादर, रालियां, घर सजाने के लिए तोरण, उंटों एवं घोड़ों को सजाने के लिए तन आदि बनाती थी। उनका यह हुनर मन को मोह लेने वाला था। आकर्षक रंगों के धागों व कांच का उपयोग कर बनाये जानेवाला यह हुनर उम्दा कारीगरी का बेहतरीन नमूना था। मगर महिलाओं को उनके हुनर का उचित मूल्य नहीं मिल पता। बिचौलिये उचित मूल्य के मार्ग में बाधा खड़ी कर रहे थे। 1990 में मगराज जैन द्वारा स्थापित सोसायटी टू अपलिफ्ट रूरल इकोनामी ने बाड़मेर जिले की हजारों महिलाओं को लाभान्वित करने के लिए सन् 1994 में दस्तकारों के प्रषिक्षण, डिजाइनिंग व मार्केटिंग के लिए बाड़मेर से 75 किलामीटर दूर बीजराड़ गांव जहां आसपास के गावों में दस्तकारों की अधिकता थी उनके बीच में क्राफ्ट डवलपमेंट सेंटर की स्थापना की जो आज तक उसी रफ्तार से कार्य कर रहा है। इसके साथ ही हस्तशिल्प को बढ़ावा देने हेतु सिंगापुर, थाईलैंड, बांगला देश, श्रीलंका आदि देशों में महिलाओं के हुनर को वैश्विक पहचान मिली और उनके उत्पादों का सही मूल्य भी मिलने लगा।