महासागरों में भारत के 60 प्रतिशत भूभाग के बराबर खनिज, ऊर्जा और जैव विविधता मौजूद है: डॉ. जितेंद्र सिंह

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केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने भारत के महासागरों को एक बड़े पैमाने पर अप्रयुक्त राष्ट्रीय संपत्ति कहा। उन्होंने कहा कि नीली अर्थव्यवस्था में देश के भविष्य के विकास का एक प्रमुख चालक बनने की क्षमता है, जो ऊर्जा सुरक्षा, खाद्य आवश्यकताओं और रणनीतिक शक्ति में योगदान दे सकती है।

केंद्रीय मंत्री भारत अंतर्राष्ट्रीय विज्ञान महोत्सव के दौरान “नीली अर्थव्यवस्था, महासागर, ध्रुव, पृथ्वी और पारिस्थितिकी – सागरिका, पृथ्वी विज्ञान की कहानी” विषय पर आयोजित सत्र में मुख्य भाषण दे रहे थे।

सभा को संबोधित करते हुए, डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि महासागर भारत की सभ्यतागत समझ का केंद्र रहा है, उसका आर्थिक एवं वैज्ञानिक संभावनाओं का उपयोग करने के लिए व्यवस्थित प्रयास हाल के वर्षों में ही तेज हुआ है। उन्होंने कहा कि कि नीली अर्थव्यवस्था पर सरकार का ध्यान 2023 और 2024 में प्रधानमंत्री के स्वतंत्रता दिवस के संबोधनों में स्पष्ट रूप से परिलक्षित होता है जहां इसकी पहचान राष्ट्रीय प्राथमिकता के रूप में की गई।

भारत के भौगोलिक लाभ पर प्रकाश डालते हुए, मंत्री ने कहा कि देश की तटरेखा 11,000 किलोमीटर से ज़्यादा लंबी है और इसका विशिष्ट आर्थिक क्षेत्र 23.7 लाख वर्ग किलोमीटर से ज़्यादा है। उन्होंने कहा कि हमारे भू-भाग का लगभग 60 प्रतिशत हिस्सा समुद्र में है, फिर भी मूल्य सृजन में इसका योगदान अब तक सीमित रहा है। उन्होंने आगे कहा कि 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य की प्राप्ति के लिए भूमि-आधारित संसाधनों से आगे देखना होगा।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि डीप ओशन मिशन भारत के महासागर-संबंधित अनुसंधान एवं आर्थिक गतिविधियों को संस्थागत रूप देने में केंद्रीय भूमिका निभाएगा। उन्होंने कहा कि महासागरों में खनिजों, धातुओं, जैव विविधता और मत्स्य संसाधनों के भंडार मौजूद हैं और यह देश के स्वच्छ ऊर्जा परिवर्तन में महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं। नवीकरणीय विकल्पों का उल्लेख करते हुए, उन्होंने ऑफशोर पवन ऊर्जा, महासागर आधारित सौर ऊर्जा, ज्वारीय और लहर ऊर्जा, समुद्र के पानी में तापमान के अंतर से उत्पन्न तापीय ऊर्जा, और यहां तक कि लवणीय प्रवणता से  प्राप्त ऊर्जा पर चर्चा की।

साथ ही, उन्होंने उभरती चुनौतियों के बारे में चेतावनी दी, जिनमें जलवायु-संबंधी खतरों जैसे तटीय कटाव, समुद्री उष्ण तरंग और चक्रवात, साथ ही समुद्री कचरा और प्रदूषण जैसी गैर-जलवायु संबंधी समस्याएं शामिल हैं। उन्होंने कहा कि इन चिंताओं से निपटने के लिए प्रभावी संसाधन मानचित्रण, उपयुक्त तकनीक का उपयोग और निजी क्षेत्र की ज्यादा भागीदारी आवश्यक है।

मंत्री ने नीली अर्थव्यवस्था के रणनीतिक पहलू को भी उजागर किया और कहा कि समुद्री संसाधनों का सतत उपयोग बदलते वैश्विक क्रम में भारत की भू-राजनीतिक स्थिति को मजबूत करेगा। उन्होंने यह भी कहा कि समुद्री परिवहन, गहरे समुद्र में खनन, जैव प्रौद्योगिकी और समुद्री जैव विविधता से नई औषधीय यौगिकों की खोज से नई आर्थिक अवसर प्रदान कर सकती हैं।

पैनल चर्चा में वरिष्ठ अधिकारियों ने हिस्सा लिया जिसमें जैव प्रौद्योगिकी विभाग के सचिव और हरियाणा सरकार के मुख्य सचिव शामिल थे। वैज्ञानिकों एवं प्रशासकों ने सरकार, अनुसंधान संस्थानों और उद्योग के बीच समन्वित कार्रवाई की आवश्यकता पर बल दिया।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने अपना वक्तव्य समाप्त करते हुए समुद्री संसाधनों का जिम्मेदारीपूर्वक अन्वेषण करने के लिए सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता पर बल दिया और कहा कि आज लिए गए निर्णय भारत के आर्थिक एवं पारिस्थितिक भविष्य को आकार देंगे।

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने टीबी मुक्त भारत की दिशा में आगे बढ़ने के लिए राजस्थान के सांसदों के साथ बैठक की

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“टीबी मुक्त भारत” के लिए राजनीतिक भागीदारी को और मज़बूत करने के निरंतर प्रयास में, केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री श्री जगत प्रकाश नड्डा ने आज संसद के चल रहे शीतकालीन सत्र के दौरान राजस्थान के सांसदों से मुलाकात की। यह सत्र विभिन्न राज्यों के सांसदों के साथ निरंतर चल रही ब्रीफिंग श्रृंखला का हिस्सा है जिसका उद्देश्य भारत में टीबी के विरुद्ध लड़ाई में सामूहिक नेतृत्व को मज़बूत करना है।

आज के सत्र में केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री श्री भागीरथ चौधरी, केंद्रीय रेल एवं खाद्य प्रसंस्करण उद्योग राज्य मंत्री श्री रवनीत सिंह बिट्टू और राजस्थान का प्रतिनिधित्व करने वाले दोनों सदनों के सांसद नई दिल्ली स्थित संसद भवन एनेक्सी एक्सटेंशन में उपस्थित थे। विचार-विमर्श में टीबी, एक ऐसी बीमारी जो दुनिया भर में लाखों लोगों को प्रभावित करती है, उन्मूलन की दिशा में भारत की तेज़ प्रगति में निर्वाचित प्रतिनिधियों की केंद्रीय भूमिका पर प्रकाश डाला गया।

 भारत में मोटापा एक सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती बनकर उभरा है और यह केवल एक सौंदर्य संबंधी समस्या नहीं है

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केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने भारत अंतर्राष्ट्रीय विज्ञान महोत्सव (आईआईएसएफ) में “मोटापे पर चिकित्सक-वैज्ञानिक संवाद” विषय पर पैनल चर्चा में कहा, “मोटापा भारत में एक जन स्वास्थ्य चुनौती बनकर उभरा है और यह केवल सौंदर्य संबंधी समस्या नहीं है। इस चुनौती का समाधान वैज्ञानिक सटीकता एवं नीतिगत अनुशासन के साथ करने की आवश्यकता है।”

इस सत्र का आयोजन नैदानिक ​​चिकित्सा, जैव चिकित्सा अनुसंधान और लोक नीति के प्रमुख विशेषज्ञों की उपस्थिति में किया गया। इस सत्र में भारत में बढ़ते चयापचय चुनौतियों पर एक बहु-विषयक दृष्टिकोण प्रस्तुत किया गया। मंत्री ने आईआईएसएफ में खचाखच भरे दर्शकों को संबोधित करते हुए इस बात पर बल दिया कि कैसे सामाजिक व्यवहार, बाज़ार और गलत सूचनाओं ने भारत में मोटापे के परिदृश्य को जटिल बना दिया है। 

मंच पर भारत के वैज्ञानिक एवं चिकित्सा समुदाय के प्रमुख विशेषज्ञ उपस्थित थे, जिनमें एनएबीआई के कार्यकारी निदेशक डॉ. अश्वनी पारीक; डॉ. विनोद कुमार पॉल और डॉ. वी.के. सारस्वत, सदस्य नीति आयोग; प्रो. उल्लास कोल्थुर, सीडीएफडी के निदेशक; टीएचएसटीआई के कार्यकारी निदेशक डॉ. गणेशन कार्तिकेयन; और वरिष्ठ एंडोक्रिनोलॉजिस्ट डॉ. संजय भदादा और डॉ. सचिन मित्तल शामिल थे।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि भारतीय समाज में मोटापे को एक बीमारी के बजाय एक सौंदर्य संबंधी समस्या के रूप में देखा जाता है जिसके कारण इस पर वैज्ञानिक चर्चा में देरी हुई है। उन्होंने कहा, “दशकों से, हमारे चिकित्सा सम्मेलनों में मधुमेह एवं चयापचय संबंधी विकारों पर चर्चा होती रही है लेकिन मोटापे पर कभी नहीं हुई। पिछले 15 वर्षों में हमने इसे एक गंभीर चिकित्सा प्रासंगिकता वाला विषय के रूप में देखना शुरू किया है।”

मंत्री ने भारत की अनोखी शारीरिक विशेषताओं को उजागर किया। उन्होंने विशेष रूप से पूर्वी आबादी में केंद्रीय या आंतरिक मोटापे की उच्च व्यापकता पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि भारतीयों के लिए, कमर की माप वजन से ज्यादा महत्वपूर्ण कहानी बताती है और इस बात पर बल दिया कि यद्यपि समग्र शरीर का वजन सामान्य प्रतीत होता है, फिर भी आंतरिक वसा एक स्वतंत्र जोखिम कारक है।

जीएलपी-आधारित दवाओं का व्यापक और फैशनेबल उपयोग पर बात करते हुए, मंत्री ने विवेकपूर्ण उपयोग के साथ सावधानी बरतने का आग्रह किया और इस बात पर बल दिया कि कभी-कभी दीर्घकालिक प्रभाव कई वर्षों बाद स्पष्ट होते हैं। उन्होंने पिछले सार्वजनिक-स्वास्थ्य गलत निर्णयों को याद किया जैसे कि 1970 और 80 के दशक में रिफाइंड तेलों में अनियमित बदलाव, जिसने बाद में प्रतिकूल परिणाम सामने आए। उन्होंने कहा कि सही नैदानिक निष्कर्ष दशकों से परिणामों का अवलोकन करने से प्राप्त हो सकता है।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने तेजी से या दवा के माध्यम से वजन घटने से जुड़ी सार्कोपेनिया और ओज़ेम्पिक फेस जैसी उभरती चिंताओं का भी उल्लेख किया तथा कहा कि शारीरिक प्रभाव का पूरा स्पेक्ट्रम अभी भी पूरी तरह से समझा नहीं गया है।

मंत्री के संबोधन का एक बड़ा हिस्सा गलत सूचनाओं से उत्पन्न खतरे पर केंद्रित रहा। उन्होंने चेतावनी दी कि अयोग्य चिकित्सक एवं स्वयंभू आहार विशेषज्ञ भारत के चयापचय संकट को और बदतर बना रहे हैं। उन्होंने कहा, “भारत में चुनौती जागरूकता की कमी नहीं बल्कि भ्रामक सूचनाओं का तेज़ी से बढ़ना है। प्रत्येक कॉलोनी में एक आहार विशेषज्ञ तो है लेकिन उनकी योग्यता की जांच करने की कोई व्यवस्था नहीं है। अनियंत्रित सलाह और बिना जांचे-परखे नुस्खे मोटापे से भी ज़्यादा नुकसान पहुंचा सकते हैं।” उन्होंने नीति निर्माताओं से ऐसे उपाय तैयार करने का आग्रह किया जो मरिजों भ्रामक हस्तक्षेपों से सुरक्षित रखें।

उन्होंने भारत में चयापचय संबंधी जटिलताओं के बढ़ते दायरे की भी बात की। उन्होंने कहा, “पहले ओपीडी में आने वाले हर तीसरे मरीज़ को मधुमेह का पता ही नहीं चलता था; आज हर तीसरे मरीज़ को फैटी लिवर है। यह दायरा बढ़ रहा है, और हमें इससे निपटने के लिए कहीं ज़्यादा वैज्ञानिक एवं विनियमित तंत्र की आवश्यकता है।”

अपने भाषण का समापन मार्क ट्वेन के अर्थशास्त्र पर प्रसिद्ध उद्धरण से तुलना करते हुए, डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा, “मोटापा जैसा गंभीर विषय केवल एंडोक्राइनोलॉजिस्टों के लिए छोड़ने लायक नहीं है। यह एक सामाजिक समस्या है जो संस्कृति, आदतों, बाजार और गलत जानकारी से उत्पन्न होती है और इसके दायरे को नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता है।”

सत्र का समापन भारत में तेजी से विकसित हो रही चयापचय स्वास्थ्य चुनौती से निपटने के लिए चिकित्सकों, शोधकर्ताओं, नीति निर्माताओं और जनता से गहन सहयोग की अपील के साथ हुआ।

केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने भारत अंतर्राष्ट्रीय विज्ञान महोत्सव (आईआईएसएफ) में “मोटापे पर चिकित्सक-वैज्ञानिक संवाद” विषय पर पैनल चर्चा में कहा, “मोटापा भारत में एक जन स्वास्थ्य चुनौती बनकर उभरा है और यह केवल सौंदर्य संबंधी समस्या नहीं है। इस चुनौती का समाधान वैज्ञानिक सटीकता एवं नीतिगत अनुशासन के साथ करने की आवश्यकता है।”

इस सत्र का आयोजन नैदानिक ​​चिकित्सा, जैव चिकित्सा अनुसंधान और लोक नीति के प्रमुख विशेषज्ञों की उपस्थिति में किया गया। इस सत्र में भारत में बढ़ते चयापचय चुनौतियों पर एक बहु-विषयक दृष्टिकोण प्रस्तुत किया गया। मंत्री ने आईआईएसएफ में खचाखच भरे दर्शकों को संबोधित करते हुए इस बात पर बल दिया कि कैसे सामाजिक व्यवहार, बाज़ार और गलत सूचनाओं ने भारत में मोटापे के परिदृश्य को जटिल बना दिया है। 

मंच पर भारत के वैज्ञानिक एवं चिकित्सा समुदाय के प्रमुख विशेषज्ञ उपस्थित थे, जिनमें एनएबीआई के कार्यकारी निदेशक डॉ. अश्वनी पारीक; डॉ. विनोद कुमार पॉल और डॉ. वी.के. सारस्वत, सदस्य नीति आयोग; प्रो. उल्लास कोल्थुर, सीडीएफडी के निदेशक; टीएचएसटीआई के कार्यकारी निदेशक डॉ. गणेशन कार्तिकेयन; और वरिष्ठ एंडोक्रिनोलॉजिस्ट डॉ. संजय भदादा और डॉ. सचिन मित्तल शामिल थे।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि भारतीय समाज में मोटापे को एक बीमारी के बजाय एक सौंदर्य संबंधी समस्या के रूप में देखा जाता है जिसके कारण इस पर वैज्ञानिक चर्चा में देरी हुई है। उन्होंने कहा, “दशकों से, हमारे चिकित्सा सम्मेलनों में मधुमेह एवं चयापचय संबंधी विकारों पर चर्चा होती रही है लेकिन मोटापे पर कभी नहीं हुई। पिछले 15 वर्षों में हमने इसे एक गंभीर चिकित्सा प्रासंगिकता वाला विषय के रूप में देखना शुरू किया है।”

मंत्री ने भारत की अनोखी शारीरिक विशेषताओं को उजागर किया। उन्होंने विशेष रूप से पूर्वी आबादी में केंद्रीय या आंतरिक मोटापे की उच्च व्यापकता पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि भारतीयों के लिए, कमर की माप वजन से ज्यादा महत्वपूर्ण कहानी बताती है और इस बात पर बल दिया कि यद्यपि समग्र शरीर का वजन सामान्य प्रतीत होता है, फिर भी आंतरिक वसा एक स्वतंत्र जोखिम कारक है।

जीएलपी-आधारित दवाओं का व्यापक और फैशनेबल उपयोग पर बात करते हुए, मंत्री ने विवेकपूर्ण उपयोग के साथ सावधानी बरतने का आग्रह किया और इस बात पर बल दिया कि कभी-कभी दीर्घकालिक प्रभाव कई वर्षों बाद स्पष्ट होते हैं। उन्होंने पिछले सार्वजनिक-स्वास्थ्य गलत निर्णयों को याद किया जैसे कि 1970 और 80 के दशक में रिफाइंड तेलों में अनियमित बदलाव, जिसने बाद में प्रतिकूल परिणाम सामने आए। उन्होंने कहा कि सही नैदानिक निष्कर्ष दशकों से परिणामों का अवलोकन करने से प्राप्त हो सकता है।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने तेजी से या दवा के माध्यम से वजन घटने से जुड़ी सार्कोपेनिया और ओज़ेम्पिक फेस जैसी उभरती चिंताओं का भी उल्लेख किया तथा कहा कि शारीरिक प्रभाव का पूरा स्पेक्ट्रम अभी भी पूरी तरह से समझा नहीं गया है।

मंत्री के संबोधन का एक बड़ा हिस्सा गलत सूचनाओं से उत्पन्न खतरे पर केंद्रित रहा। उन्होंने चेतावनी दी कि अयोग्य चिकित्सक एवं स्वयंभू आहार विशेषज्ञ भारत के चयापचय संकट को और बदतर बना रहे हैं। उन्होंने कहा, “भारत में चुनौती जागरूकता की कमी नहीं बल्कि भ्रामक सूचनाओं का तेज़ी से बढ़ना है। प्रत्येक कॉलोनी में एक आहार विशेषज्ञ तो है लेकिन उनकी योग्यता की जांच करने की कोई व्यवस्था नहीं है। अनियंत्रित सलाह और बिना जांचे-परखे नुस्खे मोटापे से भी ज़्यादा नुकसान पहुंचा सकते हैं।” उन्होंने नीति निर्माताओं से ऐसे उपाय तैयार करने का आग्रह किया जो मरिजों भ्रामक हस्तक्षेपों से सुरक्षित रखें।

उन्होंने भारत में चयापचय संबंधी जटिलताओं के बढ़ते दायरे की भी बात की। उन्होंने कहा, “पहले ओपीडी में आने वाले हर तीसरे मरीज़ को मधुमेह का पता ही नहीं चलता था; आज हर तीसरे मरीज़ को फैटी लिवर है। यह दायरा बढ़ रहा है, और हमें इससे निपटने के लिए कहीं ज़्यादा वैज्ञानिक एवं विनियमित तंत्र की आवश्यकता है।”

अपने भाषण का समापन मार्क ट्वेन के अर्थशास्त्र पर प्रसिद्ध उद्धरण से तुलना करते हुए, डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा, “मोटापा जैसा गंभीर विषय केवल एंडोक्राइनोलॉजिस्टों के लिए छोड़ने लायक नहीं है। यह एक सामाजिक समस्या है जो संस्कृति, आदतों, बाजार और गलत जानकारी से उत्पन्न होती है और इसके दायरे को नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता है।”

सत्र का समापन भारत में तेजी से विकसित हो रही चयापचय स्वास्थ्य चुनौती से निपटने के लिए चिकित्सकों, शोधकर्ताओं, नीति निर्माताओं और जनता से गहन सहयोग की अपील के साथ हुआ।

सरकार का युवाओं के कौशल, नेतृत्व और मानसिक स्वास्थ्य पर ध्यान फोकस

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युवा मामले विभाग, मेरा युवा भारत (माई भारत) और राष्ट्रीय सेवा योजना (एनएसएस) के ज़रिए युवा विकास कार्यक्रमों का क्रियान्वयन करता है, जो विभिन्न क्षेत्रों में नेतृत्व विकास, कौशल विकास, नागरिक सहभागिता और अनुभवात्मक शिक्षा के अवसर प्रदान करते हैं।

माई भारत के अंतर्गत, वित्त वर्ष 2023-24 और 2024-25 के दौरान आयोजित प्रमुख कार्यक्रमों में राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय महत्व के दिवसों का पालन, विकसित भारत एम्बेसडर – युवा कनेक्ट, माई भारत-विकसित भारत@2047 भाषण प्रतियोगिता, राष्ट्रीय युवा संसद नेतृत्व कार्यक्रम महोत्सव (जिसे विकसित भारत युवा नेता संवाद के रूप में दोबारा डिज़ाइन किया गया है), विकसित भारत युवा संसद शामिल हैं।

इसके अलावा, माई भारत पोर्टल 18-29 वर्ष की उम्र के युवाओं में उद्यमिता और कौशल विकास को बढ़ावा देने के लिए पुलिस, डाक सेवाओं, जन औषधि केंद्रों और साइबर सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में अनुभवात्मक शिक्षण कार्यक्रम (ईएलपी) भी प्रदान करता है। वार्षिक कार्य योजना 2025-26 के तहत व्यावसायिक प्रशिक्षण- सफलता के लिए कौशल का मकसद युवाओं का आत्म-सम्मान बढ़ाना और उन्हें सार्थक रोज़गार या स्व-रोज़गार के लिए उच्च-स्तरीय सॉफ्ट स्किल्स, संचार कौशल और जीवन कौशल प्राप्त करने हेतु मार्गदर्शन प्रदान करना है। राजीव गांधी राष्ट्रीय युवा विकास संस्थान (आरजीएनआईवाईडी) जीवन कौशल, नेतृत्व, क्षमता निर्माण, शैक्षणिक कार्यक्रमों और प्लेसमेंट ड्राइव में वार्षिक प्रशिक्षण आयोजित करता है।

सरकार एनएसएस और माई भारत जैसे मंचों के ज़रिए युवाओं और स्वयंसेवकों को जोड़ती है, जो देश भर के युवाओं को विभिन्न विकासात्मक, सामाजिक और सामुदायिक गतिविधियों के लिए प्रेरित करते हैं। ये मंच विकासात्मक पहलों में व्यापक भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए युवा क्लबों, स्थानीय हितधारकों और स्वयंसेवकों के साथ सहयोग करते हैं।

सरकार ने रोज़गार के अवसर बढ़ाने और रोज़गार क्षमता में सुधार लाने के लिए कई राष्ट्रीय स्तर के कार्यक्रम लागू किए हैं। इनमें प्रधानमंत्री रोज़गार सृजन कार्यक्रम (पीएमईजीपी), महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोज़गार गारंटी योजना (एमजीएनआरईजीएस), दीन दयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल योजना (डीडीयू-जीकेवाई), ग्रामीण स्वरोज़गार एवं प्रशिक्षण संस्थान (आरएसईटीआई), दीनदयाल अंन्त्योदय योजना- राष्ट्रीय शहरी आजीविका मिशन(डीएवाई-एनयूएलएम) और प्रधानमंत्री मुद्रा योजना (पीएमएमवाई) शामिल हैं। स्किल इंडिया मिशन (एसआईएम) के तहत, युवाओं को प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना (पीएमकेवीवाई), जन शिक्षण संस्थान (जेएसएस), राष्ट्रीय शिक्षुता संवर्धन योजना (एनएपीएस) और औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान के ज़रिए शिल्पकार प्रशिक्षण योजना (सीटीएस) के ज़रिए कौशल प्रशिक्षण प्राप्त होता है। बजट 2024-25 में घोषित सरकार के प्रधानमंत्री पैकेज में पाँच योजनाएँ और पहल शामिल हैं, जो पाँच वर्षों में 4.1 करोड़ युवाओं के लिए रोज़गार और कौशल के अवसर प्रदान करने के लिए डिज़ाइन की गई हैं। राष्ट्रीय करियर सेवा (एनसीएस) पोर्टल नौकरी मिलान, करियर परामर्श, व्यावसायिक मार्गदर्शन और कौशल विकास पाठ्यक्रमों की जानकारी प्रदान करता है। इसके अलावा, एस्पायर योजना आजीविका व्यवसाय इन्क्यूबेटरों के ज़रिए कृषि क्षेत्र में रोजगार को बढ़ावा देती है और ग्रामीण युवाओं, महिलाओं और बेरोजगार व्यक्तियों को कौशल विकास प्रशिक्षण प्रदान करती है।

माई भारत और एनवाईकेएस जिलों, ब्लॉकों और गांवों के विविध और वंचित पृष्ठभूमि के युवाओं को जोड़ते हैं। एनएसएस राष्ट्रीय एकता शिविरों, गणतंत्र दिवस परेड शिविरों, राष्ट्रीय युवा संसद, राष्ट्रीय युवा महोत्सव और गावों को गोद लेने के कार्यक्रमों के ज़रिए ग्रामीण और वंचित युवाओं की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करता है, ताकि युवा स्थानीय विकास में योगदान दे सकें।

युवा मामले विभाग, एनएसएस, माई भारत और अन्य कार्यक्रमों के ज़रिए युवाओं में जागरूकता और कल्याण को बढ़ावा देता है। ये मंच अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस, ब्लॉक और जिला स्तर पर खेल आयोजन, ध्यान सत्र और स्वास्थ्य जागरूकता कार्यक्रम जैसी गतिविधियों का आयोजन करते हैं। एनएसएस युवाओं और समुदायों में जागरूकता पैदा करने और मानसिक कल्याण को बढ़ावा देने के लिए आयुष्मान भारत और टेली-मानस हेल्पलाइन जैसी पहलों को भी एकीकृत करता है। माई भारत के ज़रिए युवा मामले विभाग ने व्यक्तियों और परिवारों पर नशीली दवाओं की लत और मादक द्रव्यों के सेवन के हानिकारक प्रभाव को पहचाना और वित्त वर्ष 2024-25 के दौरान पूरे देश में नशीली दवाओं की लत और मादक द्रव्यों के सेवन पर जागरूकता और शिक्षा कार्यक्रम आयोजित किए।

इसके अलावा, मानसिक स्वास्थ्य देखभाल अधिनियम, 2017 मानसिक रूप से बीमार व्यक्तियों के लिए मानसिक स्वास्थ्य देखभाल तथा सेवाएँ प्रदान करने के दौरान ऐसे व्यक्तियों के अधिकारों की रक्षा, प्रोत्साहन, पूर्ति तथा उससे जुड़े मामलों के लिए एक अधिनियम है। हालाँकि, मानसिक विकारों की समस्या से निपटने के लिए, भारत सरकार देश में राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम (एनएमएचपी) लागू कर रही है।

इसके अलावा, सरकार ने देश में गुणवत्तापूर्ण मानसिक स्वास्थ्य परामर्श और देखभाल सेवाओं तक पहुँच को और बेहतर बनाने के लिए 10 अक्टूबर 2022 को एक “राष्ट्रीय टेली मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम” शुरू किया है। सरकार ने एक व्यापक मोबाइल प्लेटफ़ॉर्म, टेली मानस, भी लॉन्च किया है, जिसे मानसिक स्वास्थ्य से लेकर मानसिक विकारों तक, सभी प्रकार के मानसिक स्वास्थ्य मुद्दों पर सहायता प्रदान करने के लिए विकसित किया गया है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने देश की पहली राष्ट्रीय आत्महत्या रोकथाम रणनीति भी तैयार की है।

यह जानकारी युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया ने आज लोकसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में दी।

यूपीआई को अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष ने दुनिया का सबसे बड़ा रियल-टाइम पेमेंट सिस्टम माना; ग्लोबल ट्रांजैक्शन में 49% हिस्सेदारी

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पीआईडीएफ-समर्थित इंफ्रास्ट्रक्चर, भीम-यूपीआई इंसेंटिव और रूपे-यूपीआई विस्तार जैसे लक्षित उपायों से पूरे भारत में डिजिटल पेमेंट अपनाने में तेज़ी आ रही है

अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) की जून 2025 की रिपोर्ट ‘ग्रोइंग रिटेल डिजिटल पेमेंट्स (द वैल्यू ऑफ इंटरऑपरेबिलिटी)’ में यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (यूपीआई) को ट्रांजैक्शन वॉल्यूम के हिसाब से दुनिया का सबसे बड़ा रिटेल फास्ट-पेमेंट सिस्टम (एफपीएस) माना गया है। इसके अलावा, एसीआई वर्ल्डवाइड की 2024 की रिपोर्ट ‘प्राइम टाइम फॉर रियल-टाइम’ के अनुसार, यूपीआई की ग्लोबल रियल-टाइम पेमेंट सिस्टम ट्रांजैक्शन वॉल्यूम में लगभग 49% हिस्सेदारी है।

यूपीआई की वर्तमान स्थिति और अन्य प्रमुख अंतरराष्ट्रीय रियल-टाइम पेमेंट प्लेटफॉर्म की तुलना में मार्केट शेयर का विस्तृत तुलनात्मक विवरण नीचे दी गई तालिका में दिया गया है।

यूपीआई सहित डिजिटल पेमेंट सिस्टम को अपनाने में छोटे व्यापारियों की मदद करने के लिए, सरकार, भारतीय रिज़र्व बैंक (आरबीआई) और नेशनल पेमेंट्स कॉर्पोरेशन ऑफ़ इंडिया (एनपीसीआई) ने समय-समय पर कई पहल की हैं। इनमें कम वैल्यू वाले भीम-यूपीआई ट्रांजैक्शन को बढ़ावा देने के लिए इंसेंटिव स्कीम, और पेमेंट्स इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट फंड (पीआईडीएफ) शामिल हैं, जो टियर-3 से 6 केंद्रों में डिजिटल पेमेंट इंफ्रास्ट्रक्चर (जैसे पीओएस  टर्मिनल और क्यूआर कोड) लगाने के लिए बैंकों और फिनटेक कंपनियों को अनुदान सहायता प्रदान करता है। 31 अक्टूबर, 2025 तक, पीआईडीएफ के माध्यम से टियर-3 से 6 केंद्रों में लगभग 5.45 करोड़ डिजिटल टच पॉइंट लगाए गए हैं। इसके अलावा, वित्त वर्ष 2024-25 तक, लगभग 6.5 करोड़ व्यापारियों को कुल 56.86 करोड़ क्यूआर कोड दिए गए।

सरकार,  भारतीय रिज़र्व बैंक और एनपीसीआई ने पूरे देश में सार्वजनिक सेवाओं, परिवहन और ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म सहित सभी बिज़नेस में रूपे और यूपीआई के ज़रिए डिजिटल ट्रांजैक्शन को बढ़ावा देना शुरू कर दिया है।

अन्य प्रमुख अंतरराष्ट्रीय रीयल-टाइम भुगतान प्लेटफार्मों के मुकाबले यूपीआई की स्थिति

देशलेन-देन की मात्रा(अरबों में)वैश्विक रीयल-टाइम भुगतान प्लेटफ़ॉर्म का % हिस्सा
भारत129.349%
ब्राज़ील37.414%
थाईलैंड20.48%
चीन17.26%
दक्षिण कोरिया9.13%
अन्य52.820%
कुल266.2100%

नवजोत कौर सिद्धू को कांग्रेस ने किया निलंबित, लगाए थे भ्रष्टाचार के आरोप

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नवजोत कौर सिद्धू को उनके विवादास्पद बयान के बाद कांग्रेस पार्टी से तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है।ऐसा उनके  उस विवादित बयान के कुछ ही घंटों बाद हुआ है जिसमें उन्होंने कहा था कि जो 500 करोड़ रुपये का सूटकेस देता है, वह पंजाब का मुख्यमंत्री बन जाता है। उन्होंने कांग्रेस नेतृत्व पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप भी लगाए। पंजाब कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू की पत्नी कौर ने शनिवार को राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया से मुलाकात के बाद पत्रकारों से कहा हम हमेशा पंजाब और पंजाबियत की बात करते हैं…लेकिन हमारे पास 500 करोड़ रुपये नहीं हैं जो हम मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बैठने के लिए दे सकें।

सिद्धू पर बात करते हुए नवजोत कौर ने दावा किया कि सिद्धू का कांग्रेस के प्रति लगाव तो बहुत है लेकिन उन्हें कभी मुख्यमंत्री पद नहीं मिलेगा। मीडिया ने सवाल किया क्यों नहीं मिलेगा? जवाब में नवजोत बोली मुख्यमंत्री बनने के लिए ₹500 करोड़ लगते हैं और हमारे पास देने के लिए इतने पैसे नहीं हैं। इसी के साथ सिद्धू के वापस बीजेपी जाने के सवाल पर नवजोत ने कहा कि मैं खुल के बोलती हूं वो कांग्रेस के साथ अटैच्ड है। बहुत ज्यादा उनको उनके साथ प्रियंका जी के साथ अटैचमेंट है। पर मुझे इतनी इनफैक्टिंग में लग नहीं रहा कि कहीं भी नवजोत सिद्धू को ये प्रमोट होने देंगे। भाजपा प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने आरोप लगाया कि उनकी टिप्पणी से पता चलता है कि कांग्रेस में नेताओं से लेकर कार्यकर्ताओं तक भ्रष्टाचार व्याप्त है। उन्होंने कहा है कि कोई भी व्यक्ति मुख्यमंत्री बनने के बारे में तभी सोच सकता है जब उसके सूटकेस में 500 करोड़ रुपये हों। कांग्रेस पूरी तरह से भ्रष्ट आचरण में डूबी हुई है। पंजाब भाजपा प्रमुख सुनील जाखड़ ने भी प्रतिक्रिया व्यक्त की और उनके दावे को कांग्रेस के लेन-देन की राजनीति के इतिहास से जोड़ा। 

लाल किले में अमूर्त सांस्कृतिक विरासत की सुरक्षा के लिए अंतर-सरकारी समिति के 20वें सत्र की मेजबानी करना भारत की मूर्त और अमूर्त सांस्कृतिक विरासत के अनोखे मेल को दर्शाता है

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यूनेस्को की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत की सुरक्षा के लिए अंतर-सरकारी समिति के 20वें सत्र की शुरुआत आज नई दिल्ली के लाल किले में विभिन्न सत्रों के साथ हुई। सुबह वाले सत्र के बाद संस्कृति मंत्रालय के सचिव श्री विवेक अग्रवाल ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की अध्यक्षता की। 20वीं समिति (20 COM) के चेयरपर्सन और यूनेस्को में भारत के स्थायी प्रतिनिधि, श्री विशाल वी. शर्मा, तथा यूनेस्को के संस्कृति विभाग के सहायक महानिदेशक, श्री एर्नेस्टो ओट्टोने भी इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में उपस्थित थे।

प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए श्री विवेक अग्रवाल ने कहा कि यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल लाल किले में इस सत्र की मेजबानी करना भारत की मूर्त और अमूर्त सांस्कृतिक विरासत के अनोखे मेल को दर्शाता है। उन्होंने भारत के समुदाय-केन्द्रित दृष्टिकोण पर जोर दिया, जिसमें परंपराओं की सुरक्षा के लिए राष्ट्रीय सूची का लगातार विस्तार, परंपरा-वहाकों  के लिए क्षमता-निर्माण कार्यक्रम, और जीवित विरासत को राष्ट्रीय विकास योजनाओं में शामिल करने के प्रयासों को रेखांकित किया।

सचिव ने भारत के उन 15 तत्वों का भी ज़िक्र किया, जो यूनेस्को की प्रतिनिधि सूची में शामिल हैं—जैसे वैदिक मंत्रोच्चार, कुटियट्टम, योग, कुंभ मेला, दुर्गा पूजा और गरबा। उन्होंने इन्हें “भारत की सांस्कृतिक पहचान का रंगीन प्रतिबिंब” बताया। उन्होंने यह भी कहा कि अमूर्त सांस्कृतिक विरासत मानवता की “जीवित धड़कन” है, जो प्रदर्शन कलाओं, हस्तकला, त्योहारों, अनुष्ठानों और पीढ़ियों से चली आ रही मौखिक परंपराओं के रूप में समुदायों द्वारा जीवित रखी जाती है।

सचिव ने जोर देकर कहा कि यह सत्र एक बेहद महत्वपूर्ण समय पर हो रहा है, क्योंकि दुनिया भर की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत व्यापारिक दबावों, बदलते सामुदायिक ढांचे और तेजी से विकसित हो रहे डिजिटल वातावरण जैसी चुनौतियों का सामना कर रही है। उन्होंने कहा कि यूनेस्को का मंच सहयोग, संवाद और सामूहिक संरक्षण के लिए बेहद आवश्यक है।

उसी प्रेस कॉन्फ्रेंस में बोलते हुए श्री विशाल वी. शर्मा ने सभी प्रतिभागियों का स्वागत किया और सांस्कृतिक विरासतों की सुरक्षा के प्रति भारत की लंबे समय से चली आ रही प्रतिबद्धता को दोहराया। उन्होंने कहा कि समिति में भारत का वर्तमान कार्यकाल (2022–2026) जीवित विरासत की सुरक्षा पर वैश्विक चर्चाओं में भारत की भूमिका को और मजबूत करता है।

श्री एर्नेस्टो ओट्टोने ने भारत सरकार को नई दिल्ली में 20वें सत्र की मेजबानी के लिए धन्यवाद और खुशी व्यक्त की। साथ ही, उन्होंने सांस्कृतिक विरासतों की सुरक्षा में भारतीय सरकार के प्रयासों की सराहना की।

यह सप्ताहभर चलने वाला सत्र 8 से 13 दिसंबर 2025 तक आयोजित होगा, जिसमें सदस्य देशों, सांस्कृतिक संस्थानों, विशेषज्ञों, एनजीओ और पर्यवेक्षकों सहित लगभग हज़ार प्रतिनिधि शामिल होंगे।

बिहार के पश्चिमी चंपारण जिले के सभी 1237 गांवों का विवरण एमजीएमडी पोर्टल पर मानचित्रण करके अपलोड किया गया

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बिहार के पश्चिमी चंपारण जिले के सभी 1237 गांवों का विवरण एमजीएमडी पोर्टल पर मानचित्रण करके अपलोड किया गया है।

मेरा गांव मेरी धरोहर (एमजीएमडी) कार्यक्रम के तहत देश भर में सांस्कृतिक मानचित्रण के लिए 6,38,365 गांवों की पहचान की गई है। इनमें से अब तक 6,23,449 गांवों का विवरण एमजीएमडी पोर्टल पर अपलोड किया जा चुका है।

अपनी दस्तावेजीकरण गतिविधियों के हिस्से के रूप में, एमजीएमडी, मौखिक परंपराओं, विश्वासों, रीति-रिवाजों, ऐतिहासिक महत्व, कला रूपों, विरासत स्थलों, पारंपरिक भोजन, प्रमुख कलाकारों, मेलों और त्योहारों, पारंपरिक पोशाक, गहने और स्थानीय स्थलों सहित मूर्त और अमूर्त दोनों सांस्कृतिक तत्वों की एक विस्तृत श्रृंखला को शामिल करता है।

एमजीएमडी कार्यक्रम प्रामाणिक, ग्राम-स्तरीय सांस्कृतिक प्रोफाइल बनाकर ग्रामीण पहचान को मजबूत करने पर जोर देता है जो स्थानीय परंपराओं, प्रणालियों और विरासत संपत्तियों को मान्यता देता है। यह एमजीएमडी पोर्टल के माध्यम से समुदाय के नेतृत्व वाले दस्तावेजीकरण और क्राउड-सोर्स्ड सत्यापन को सक्षम करके सामुदायिक भागीदारी को बढ़ावा देता है। एकल राष्ट्रीय पोर्टल पर संरचित सांस्कृतिक डेटा की उपलब्धता सांस्कृतिक क्लस्टर विकास, विरासत पर्यटन और पारंपरिक कौशल को बढ़ावा देने की योजना बनाने में सहायता करती है, जिससे स्थायी आजीविका सृजन और ग्रामीण आर्थिक विकास में योगदान मिलता है।

एमजीएमडी कार्यक्रम के तहत, संस्कृति मंत्रालय ने ओडिशा के गांवों का सांस्कृतिक मानचित्रण किया है, जिसके तहत अब तक 47,209 गांवों का मानचित्रण किया गया है। भद्रक जिले के सभी 998 गांवों का विवरण मैप किया गया है और एमजीएमडी पोर्टल पर अपलोड किया गया है। इसी तरह, बालासोर जिले के सभी 2,798 गांवों का विवरण मानचित्रण के बाद एमजीएमडी पोर्टल पर अपलोड किया गया है।

केंद्रीय संस्कृति और पर्यटन मंत्री श्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने आज लोकसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में यह जानकारी दी।

 कुमाऊं हिमालय में दीखा हिम तेंदुआ

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 कुमाऊं हिमालय में हिम तेंदुआ जनसंख्या एवं एल्पाइन पारिस्थितिकी तंत्र के संरक्षण पर केंद्रित एक महत्त्वपूर्ण परियोजना के दौरान शोधकर्ताओं ने वन्यजीव जगत के लिए अत्यंत दुर्लभ और आश्चर्यजनक रिकॉर्ड दर्ज किया है। उत्तराखंड सरकार के वन विभाग के द्वारा राष्ट्रीय हरित भारत मिशन द्वारा वित्तपोषित यह परियोजना, नंदा देवी बायोस्फियर रिजर्व के विशाल और कम अध्ययन किए गए पर्वतीय परिदृश्य में टॉप मांसाहारी प्रजातियों की जनसंख्या गतिकी और उनके पारिस्थितिक संबंधों को जानकारी देने के उद्देश्य से संचालिक किया गया है।

यह परियोजना आधुनिक वैज्ञानिक तकनीकों जैसे कैमरा ट्रैपिंग, चिन्ह-सर्वेक्षण और आवास-उपयोग मॉडलिंग का उपयोग करके हिम तेंदुए, उसके शिकार प्रजातियों और अन्य मांसाहारियों की उपस्थिति तथा उनकी गतिविधियों के पैटर्न को समझने का प्रयास कर रही है। शोध दल यह भी जांच कर रहा है कि पशुधन चराई, गैर-काष्ठ वन उत्पादों का संग्रहण और जलवायु परिवर्तन से वनस्पतियों में हो रहे बदलाव खाद्य-जाल और एल्पाइन पारिस्थितिकी तंत्र की स्थिरता को किस प्रकार प्रभावित कर रहे हैं।

इतना ही नहीं, व्यापक अध्ययन के दौरान सुंदरधुंगा घाटी में लगभग 3,010 मीटर की ऊंचाई पर बंगाल टाइगर का दुर्लभ और वैज्ञानिक रुप निगरानी में है। कैमरा ट्रैप में रिकॉर्ड हुई यह तस्वीर। बता दें कि, इस क्षेत्र से अब तक की सबसे पुष्ट उच्च-ऊंचाई उपस्थिति का प्रमाण है।

मुख्यमंत्री धामी ने किया 108 करोड़ की योजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास

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उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने आज अपने बागेश्वर दौरे के दूसरे दिन, केदारेश्वर मैदान, कपकोट में आयोजित जन सम्मेलन में 108 करोड़ रुपये की 42 योजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास किया। जिसमें लगभग 62 करोड़ की 24 योजनाओं का लोकार्पण तथा 45.95 करोड़ की 18 योजनाओं का शिलान्यास शामिल है। कार्यक्रम की शुरुआत स्कूली बच्चों की मनमोहक सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से हुई, जिसने वातावरण को उत्साहपूर्ण बना दिया।

अपने संबोधन में मुख्यमंत्री श्री धामी ने कहा कि जनता की विशाल उपस्थिति इस बात का प्रमाण है कि राज्य सरकार विकास के सही मार्ग पर कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि गरीब वर्ग, महिलाओं और युवाओं के लिए अनेक कल्याणकारी योजनाएं संचालित की जा रही हैं। मुख्यमंत्री ने ‘मानस खंड माला’ परियोजना के तहत धार्मिक स्थलों के जीर्णोद्धार और सौंदर्यीकरण की प्रगति की जानकारी साझा की।

मुख्यमंत्री ने कहा कि शीतकालीन पर्यटन की नई पहल से प्रदेश में वर्षभर पर्यटन गतिविधियाँ बढ़ेंगी और स्थानीय लोगों के लिए बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन होगा। उन्होंने कहा कि सरकार जीरो टॉलरेंस की नीति पर कार्यरत है और वन डिस्ट्रिक्टदृटू प्रोडक्ट के तहत बागेश्वर की पारंपरिक ताम्र शिल्प को राष्ट्रीय पहचान मिल रही है। सरयू एवं गोमती नदियों के संरक्षण कार्य निरंतर प्रगति पर हैं, वहीं बागेश्वर रेल लाइन का सर्वेक्षण भी पूर्ण हो चुका है। कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने बताया कि गरुड़ अस्पताल का उच्चीकरण किया जाएगा, जिससे स्थानीय जनता को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मिल सकें।

इसके साथ ही विभिन्न स्वायत सहकारिता एवं स्वयं सहायता समूहों को वित्तीय सहायता के चेक प्रदान किए गए । जिसमे संकल्प स्वायत सहकारिता समूह सीएलएफ (हर्षिला) को ₹3 करोड़ 23 लाख, ऊर्जा स्वायत सहकारिता सीएलएफ को ₹22 लाख 50 हजार,एनआरएलएम की संवाद महिला स्वयं सहायता समूह और जय गोलू देवता स्वयं सहायता समूह को ₹5 -5 लाख के चेक प्रदान किए गए।

कार्यक्रम स्थल पर कृषि, उद्यान, रेशम, सहकारिता, ग्राम्य विकास, महिला सशक्तिकरण, डेयरी, पशुपालन एवं उद्योग विभाग सहित विभिन्न विभागों ने स्टॉल स्थापित किए, जिन पर आमजन को योजनाओं की विस्तृत जानकारी उपलब्ध कराई गई। मुख्यमंत्री ने विभिन्न विभागीय स्टॉलों का निरीक्षण किया, स्थानीय हस्तशिल्पकारों से संवाद कर उनकी समस्याएं सुनीं और उनके कार्य का उत्साहवर्धन किया।

कार्यक्रम में जिलाधिकारी आकांक्षा कोंड़े, जिला पंचायत अध्यक्ष शोभा आर्या, कपकोट विधायक सुरेश गड़िया, बागेश्वर विधायक पार्वती दास, दर्जा राज्यमंत्री भूपेश उपाध्याय, शिव सिंह विष्ट, जिला पंचायत उपाध्यक्ष विशाखा खेतवाल, पूर्व कैबिनेट मंत्री बलवंत सिंह भौंरयाल, भाजपा जिलाध्यक्ष प्रभा गड़िया, नगर पालिका अध्यक्ष सुरेश खेतवाल, एसपी चंद्र सिंह घोड़के, सीडीओ आर.सी. तिवारी सहित बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक उपस्थित रहे।