असम में शनिवार तड़के हुई दुर्घटना में नई दिल्ली जाने वाली ट्रेन की चपेट में आने से सात हाथियों की मौत हो गई।एक अन्य घायल हुआ। इंजिन और ट्रेन के पांच डिब्बे भी पटरी से उतर गए। किसी यात्री के चोटिल होने की सूचना नहीं है। ऊपरी असम और पूर्वोत्तर की रेल सेवाएं बाधित हैं, और रेलवे बचाव कार्य में जुटा है।रेलवे ने बचाव कार्य शुरू कर दिया ।यात्रियों को वैकल्पिक व्यवस्था कर आगे की यात्रा सुनिश्चित करने की प्रक्रिया चल रही है।
नई दिल्ली जाने वाली सैरांग-नई दिल्ली राजधानी एक्सप्रेस के साथ यह हादसा तड़के करीब 2.17 बजे हुआ। डिविजनल वन अधिकारी सुहास कदम ने बताया कि यह घटना होजाई जिले के चांगजुराई इलाके में हुई। वन अधिकारी मौके पर पहुंच गए हैं। प्रभावित जमुनामुख-कांपुर सेक्शन से गुजरने वाली ट्रेनों को दूसरी लाइन से डायवर्ट किया गया है। फिलहाल लाइन पर मरम्मत का काम चल रहा है। सैरांग-नई दिल्ली राजधानी एक्सप्रेस मिजोरम के सैरांग (आइजोल के पास) को आनंद विहार टर्मिनल (दिल्ली) से जोड़ती है।
रेलवे प्रवक्ता ने बताया कि नई दिल्ली जाने वाली ट्रेन के साथ यह हादसा तड़के करीब 2.17 बजे हुआ। ऊपरी असम और पूर्वोत्तर की रेल सेवाएं बाधित हैं, और रेलवे बचाव कार्य में जुटा है।रेलवे ने बचाव कार्य शुरू कर दिया ।यात्रियों को वैकल्पिक व्यवस्था कर आगे की यात्रा सुनिश्चित करने की प्रक्रिया चल रही है।
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने मध्य प्रदेश के सतना जिला अस्पताल में ब्लड ट्रैन्स्फ्यूश़न के बाद कम से कम छह बच्चों के एचआईवी पॉजिटिव पाए जाने की मीडिया रिपोर्ट का स्वतः संज्ञान लिया है। बताया जाता है कि उनका थैलेसीमिया का इलाज चल रहा था। इसके लिए समय-समय पर ब्लड ट्रैन्स्फ्यूश़न की आवश्यकता होती है। जनवरी से मई 2025 के बीच बच्चों में एचआईवी संक्रमण की पुष्टि हुई और यह मामला अब सामने आया है।
आयोग ने पाया है कि यदि समाचार रिपोर्ट में दी गई जानकारी सही है, तो इससे पीड़ितों के मानवाधिकारों के उल्लंघन का गंभीर मुद्दा उठता है। देश के विभिन्न हिस्सों में घटी ऐसी ही घटनाओं की जानकारी भी आयोग को मिली है। इसलिए आयोग ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों को नोटिस जारी कर चार सप्ताह के भीतर इस मामले पर विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। उनसे अपेक्षा की जाती है कि वे इस मुद्दे से निपटने के लिए उठाए गए या प्रस्तावित कदमों का विवरण दें।
16 दिसंबर 2025 को प्रकाशित मीडिया रिपोर्ट के अनुसार राज्य अधिकारी यह पता लगाने के प्रयास कर रहे हैं कि क्या अन्य अस्पतालों में भी ब्लड ट्रैन्स्फ्यूश़न की घटना घटी थी। अस्पताल ने इस मामले में आंतरिक जांच शुरू कर दी है।
कोसी नदी के तट पर बन रहा 13.3 किलोमीटर लंबा भेजा-बकौर कोसी पुल अब निर्माण के अंतिम चरण में है। कोसी नदी पर बना यह पुल एक बार चालू होने के बाद यात्रा की दूरी को 44 किलोमीटर कम कर देगा। यह बाढ़ प्रभावित, सुविधाओं से वंचित मधुबनी और सुपौल क्षेत्रों को सीधे एनएच-27 और पटना से जोड़ देगा। इससे नेपाल और पूर्वोत्तर के लिए भी सुगम मार्ग खुलेंगे। इससे सीमा पार व्यापार, क्षेत्रीय वाणिज्य और बहुप्रतीक्षित निवेश को बढ़ावा मिलेगा। यह विकास बिहार में भारतमाला परियोजना के प्रथम चरण की बस रैपिड ट्रांजिट (बीआरटी) योजना के अंतर्गत ईपीसी मोड पर हो रहा है। 1101.99 करोड़ रूपये के निवेश से निर्मित यह पुल क्षेत्र में कनेक्टिविटी को बदलने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। परियोजना के वित्त वर्ष 2026-2027 में पूरा होने का लक्ष्य है।
तीर्थयात्रियों को भगवती उच्चैत, बिदेश्वर धाम, उग्रतारा मंदिर और सिंहेश्वर स्थान जैसे पवित्र स्थलों तक आसानी से पहुंच मिलेगी। किसानों को बाढ़ के दौरान फंसे रहने का डर नहीं रहेगा। छात्र बिना किसी डर के स्कूल पहुंच सकेंगे। व्यापारी समय पर सामान पहुंचा सकेंगे। छोटी दुकानें बढ़ेंगी; परिवहन सेवाएं बेहतर होंगी; स्थानीय युवाओं को नए रोजगार मिलेंगे।
एक समय उग्र नदी से संघर्षों के लिए मशहूर इस क्षेत्र में, यह पुल संभावनाओं को नए सिरे से परिभाषित कर रहा है। और जैसे ही कोसी पुल निर्माण के अंतिम चरण के नजदीक आ रहा है, उत्तरी बिहार के लोग एक ही भावना से एकजुट हो जाते हैं – उनकी दुनिया हमेशा के लिए बदलने वाली है।
संक्षिप्त तथ्य:
परियोजना की लंबाई (किलोमीटर में): 13.300 किलोमीटर
अनुमानित सिविल परियोजना लागत: 1101.99 करोड़ रुपये
पूर्ण होने की तिथि: वित्तीय वर्ष 2026-2027
यह पुल मधुबनी, सुपौल, सहरसा और आसपास के जिलों के लोगों के लिए मात्र इस्पात और कंक्रीट से कहीं अधिक है। यह एक जीवन रेखा है, आशा की एक अटूट कड़ी है, जो कोसी नदी के बाढ़ के मैदानों की चुनौतियों से प्रभावित समुदायों के लिए जीवन को सुगम बनाती है।
सहरसा के रहने वाले शिक्षक रोशन कुमार, जो मधुबनी के एक प्लस-टू स्कूल में रोज़ाना पढ़ाने जाते हैं, उनके लिए यह पुल वर्षों की थका देने वाली यात्राओं से मुक्ति का प्रतीक है। वे बताते हैं, “अभी भेजा पहुंचने के लिए मुझे बलवाहा पुल और कोसी तटबंध से होते हुए लगभग 70 किलोमीटर अतिरिक्त यात्रा करनी पड़ती है। पहले हमें दरभंगा या फुलपरास होकर जाना पड़ता था जो 150 से 200 किलोमीटर का सफर होता था। पुल चालू होने बाद सहरसा से मधुबनी की दूरी लगभग 70 किलोमीटर कम हो जाएगी। यह बदलाव जीवन बदल देने वाला है।” उनकी आवाज़ में नरमी आ जाती है जब वे आगे कहते हैं, “यह सिर्फ एक पुल नहीं है। इससे शिक्षकों, छात्रों, व्यापारियों… सभी के लिए समय, पैसा और ऊर्जा की बचत होगी।”
क्षेत्र में एक मेडिकल शॉप के मालिक पंकज के लिए, इस परियोजना का भावनात्मक महत्व और भी गहरा है। वे कहते हैं, “हमने बहुत कष्ट झेला है। मरीजों को अस्पतालों तक ले जाना एक बुरे सपने जैसा था। बाढ़ के कारण हमारा संपर्क टूट जाता था, नौकाएं बंद हो जाती थीं, और कई बार मदद देर से पहुंचने के कारण लोगों की जान चली जाती थी।” बन रही संरचना को देखकर उनकी आंखों में गर्व की चमक आ जाती है। “अब एम्बुलेंस आधे घंटे में पुल पार कर जाएगी। मरीज समय पर पहुंचेंगे। यह सम्मान की बात है। यह सुरक्षा की बात है। हमें गर्व है कि हमारे जिले में ऐसा पुल बन रहा है।”
क्षेत्र के युवाओं में भी यही उत्साह है। ग्यारहवीं कक्षा की छात्रा नेहा बताती हैं कि मानसून के दौरान इलाके को कितनी परेशानी झेलनी पड़ी थी। “लोग पार करने से डरते थे। सड़कें बह जाती थीं। लेकिन अब सब कुछ बदल जाएगा। हम सुरक्षित स्कूल पहुंचेंगे। हमारा इलाका आखिरकार राज्य के बाकी हिस्सों से जुड़ पाएगा।” इस पुल का परिवर्तनकारी प्रभाव इन व्यक्तिगत अनुभवों से कहीं अधिक व्यापक है।
केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श् अमित शाह ने आज नई दिल्ली में CREDAI के राष्ट्रीय सम्मेलन “विकसित भारत @ 2047” को संबोधित किया। कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने हमारे सामने 2047 तक हर क्षेत्र में विश्व में सर्वप्रथम भारत के निर्माण और 5 ट्रिलियन की अर्थव्यवस्था वाली एक बेंचमार्क पर पहुंचकर एक लंबी छलांग लगाने का लक्ष्य रखा है। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार ने पिछले 11 साल में Next Gen इन्फ्रास्ट्रक्चर के लिए बहुत सारा काम किया है औऱ इसके बहुत अच्छे परिणाम भी मिले हैं। उन्होंने कहा कि हम नेशनल इन्फ्रास्ट्रक्चर पाइपलाइन का कॉन्सेप्ट भी लेकर आए और कई प्रकार की नई पहल ने हमारे अर्बन डेवलपमेंट और इन्फ्रास्ट्रक्चर को न सिर्फ स्ट्रक्चर्ड किया बल्कि दुनिया के सबसे अच्छे इन्फ्रास्ट्रक्चर वाले देशों के करीब पहुंचने के लिए एक रोडमैप भी बनाने का काम किया। श्री शाह ने कहा कि मोदी सरकार के 11 साल में इन्फ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट और अर्बन डेवलपमेंट में कई पहल की गईं हैं और हर क्षेत्र की बाधाएं दूर करने का भी प्रयास किया गया है। इस अवसर पर केन्द्रीय मंत्री श्री भूपेन्द्र यादव सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।
श्री अमित शाह ने कहा कि CREDAI ने 20 लाख पौधे लगाकर 25 गांवों की 9 हज़ार एकड़ बंजर भूमि को फिर से हराभरा करने का काम किया है। उन्होंने कहा कि हर डेवलपर को प्रोजेक्ट डिज़ाइन करते हुए थोड़ा ग्रीन एरिया को ध्यान में रखकर डिजाइन करना चाहिए। उन्होंने कहा कि अगर देश का हर डेवलपर अपने हर क्रिएशन में बिल्डिंग बनते समय 10 अच्छे वृक्ष लगाने का प्रयास करता है तो यह बहुत अच्छा काम होगा।
केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि 1999 से लेकर आज तक CREDAI ने हाउसिंग और हेबिटेट को आगे बढ़ाने के अपने लक्ष्य को सतत रूप से हासिल किया है। उन्होंने कहा कि CREDAI ने हमेशा कोड ऑफ कंडक्ट और नैतिक प्रथाओं को सर्वोपरि रखा और CREDAI के करण ही आज डेवलपर्स के काम को क्रेडिट मिल रहा है। उन्होंने कहा कि सिर्फ हमारी बैलेंसशीट अच्छी होनी ज़रूरी नहीं है बल्कि हमारे काम के बारे में समाज में अच्छी साख होना भी बहुत ज़रूरी है। श्री शाह ने कहा कि CREDAI ने भारत की निजी रियल एस्टेट डेवलपर्स की एक शीर्ष संस्था के रूप में इस क्षेत्र को स्ट्रक्चर्ड और स्वीकृत क्षेत्र बनाने का बहुत बड़ा काम किया है।
श्री अमित शाह ने कहा कि CREDAI आज 21 राज्यों के 230 शहरों में मौजूद है और लगभग 13 हज़ार डेवलपर्स का एक विशाल वट वृक्ष आज खड़ा है। उन्होंने कहा कि CREDAI ने अपने 25 साल पूरे कर इस क्षेत्र में अपनी ज़रूरत को भी साबित किया है। उन्होंने कहा कि कई क्षेत्रों में CREDAI ने अपने मानवीय चेहरे को भी उजागर किया है और लगभग 3 लाख से अधिक मज़दूरों का भी प्रशिक्षण किया है। श्री शाह ने कहा कि हमें इस बात पर ज़्यादा फोकस करना चाहिए कि मज़दूर को किस क्षेत्र में स्किलिंग की ज़रूरत है।
केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री ने कहा कि भारत में शहरीकरण बढ़कर 2035 तक 40 प्रतिशत तक हो जाएगा और 2047 तक देश की 50 प्रतिशत आबादी शहरों में रहती होगी। उन्होंने कहा कि लगभग 50 प्रतिशत जिस शहरी क्षेत्र में रहती हो, तो उसके हाउसिंग की व्यवस्था का ज़िम्मा डेवलपर्स पर ही है। उन्होंने कहा कि हमारी ज़िम्मेदारी के लिए खुद को तैयार करना बहुत महत्वपूर्ण होता है। श्री शाह ने कहा कि बढ़ते शहरीकरण के अनुसार अर्बन इन्फ्रास्ट्रक्चर और अर्बन हाउसिंग दोनों बढ़ेंगे। उन्होंने कहा कि अर्बन हाउसिंग का सैचुरेशन रेश्यो लाने के लिए अफोर्डेबल, इको-फ्रेंडली और बेहतर जीवन स्तर वाले हाउसिंग की दिशा में CREDAI को एक टीम बनाकर विचार करना चाहिए। उन्होंने कहा कि सिंगल विंडो क्लीयरेंस, समय आधारित अप्रूवल, ऑनलाइन ट्रैकिंग और डिजिटलाइज़्ड रेकॉर्ड्स ने इस क्षेत्र में आर्किटेक्चर का एक विश्वास अर्जित किया है जिसे हम और तेज़ गति से आगे ले जाने वाले हैं।
केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि RERA इस क्षेत्र के सुधार में एक structural breakthrough था जिसे आज पूरी दुनिया मानती है। उन्होंने कहा कि home buyers के हितों की रक्षा, निष्पक्ष लेनदेन औऱ गुणवत्तायुक्त निर्माण को सुनिश्चित करने की दिशा में RERA ने हमारे देश में बहुत अच्छा काम किया है और 35 राज्यों और केन्द्रशासित प्रदेशों ने इसे स्वीकार किया है। उन्होंने कहा कि 29 राज्यों में अपील का प्राधिकरण भी गठित हो चुका है और 29 RERA प्राधिकरणों ने अपनी वेबसाइट्स भी शुरू कर दी हैं। उन्होंने कहा कि 1 लाख 55 हज़ार रियल एस्टेट परियोजनाएं RERA के अंतर्गत रजिस्टर्ड हैं और लगभग 1 लाख 10 हज़ार डेवलपर्स भी इसके अंतर्गत रजिस्टर्ड हुए हैं।
श्री अमित शाह ने कहा कि सरकार ने GST का सबसे अधिक फायदा अगर किसी सेक्टर को पहुंचाया है तो वो रियल एस्टेट सेक्टर है। उन्होने कहा कि अफोर्डेबल हाउसिंग पर जीएसटी को 8 से घटाकर 1 प्रतिशत कर दिया, आवास योजनाओं पर 12 प्रतिशत से घटाकर 5 प्रतिशत कर दिया, सीमेंट पर 28 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत कर दिया, संगमरमर, ग्रेनाइट, रेत, चूना और ईंट पर 12 प्रतिशत से घटाकर 5 प्रतिशत, बांस फ्लोरिंग पर 12 प्रतिशत से घटाकर 5 प्रतिशत कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि कुल मिलाकर एक बिल्डिंग बनने पर खर्च में नए सुधारों से 5 से 7 प्रतिशत की कमी की संभावना बन गई है। उन्होंने कहा कि हमने इस क्षेत्र के विकास के लिए निर्माण परियोजनाओं में 100 प्रतिशत FDI को ऑटोमेटिक रूट से अनुमति दी है औऱ 60 हज़ार करोड़ रुपए का नेशनल अर्बन हाउसिंग फंड भी जारी किया है। श्री शाह ने कहा कि सरकार इस सेक्टर के महत्व को समझती है और इसके माध्यम से हर व्यक्ति को अपना एक घर हो, प्रधानमंत्री मोदी जी का वादा हम CREDAI के माध्यम से पूर्ण कर सकते हैं। उन्होंने बड़े डेवपृलपर्स से कहा कि क्या वे बड़ी योजना बनातेहुए साथ में ही एक कम लागत वाली हाउसिंग बनाना शुरू कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि अगर इसे हम अपने सेक्टर की ज़रूरत के रूप में लेते हैं तो आने वाले दिनों में एक चमत्कारिक परिवर्तन आएगा।
श्री अमित शाह ने कहा कि आने वाले दिनों में हमें लैंड मार्केट को अधिक पारदर्शी बनाना होगा और शहरों को अब लैंड बैंकिंग और सट्टात्मक होल्डिंग से बाहर आना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि हमें आने वाले दिनों में अपनी विश्वसनीयता को और बढ़ाने के लिए काम करना चाहिए। श्री शाह ने कहा कि सरकार ने भी अर्बन डेवलपमेंट के लिए मेट्रो से लेकर फ्लाईओवर का जाल बिछाने और सडकें बनाने से लेकर इको फ्रेंडली बिजली उत्पादन तक कई काम किए हैं जो शहर को रहने योग्य बनाने के लिए बेहद ज़रूरी हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी जी के नेतृत्व में भारत सरकार अर्बन डेवलपमेंट के क्षेत्र में बहुत बड़े विज़न के साथ आगे बढ़ रही है और इस विज़न का बहुत बड़ा हिस्सा एक ज़िम्मेदार डेवलपर है।
केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने एशियन यूथ पैरा गेम्स 2025 में 36 स्वर्ण, 28 रजत और 38 कांस्य पदक जीतने के लिए भारतीय युवा पैरा-एथलीट्स को बधाई दी है।
X पर एक पोस्ट में केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने कहा, एशियन यूथ पैरा गेम्स 2025 में 36 स्वर्ण, 28 रजत और 38 कांस्य पदक जीतने के लिए भारतीय युवा पैरा-एथलीट्स को हार्दिक बधाई। उन्होंने कहा कि यह शानदार उपलब्धि खिलाड़ियों की समर्पण, हार न मानने की भावना और अटूट उत्साह को दर्शाती है। श्री शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के दूरदर्शी नेतृत्व में भारत तेजी से खेल प्रतिभाओं और विश्वस्तरीय आधारभूत संरचना का वैश्विक केंद्र बनकर उभर रहा है। पैरा-खिलाड़ियों को भविष्य के सभी प्रयासों में निरंतर सफलता की शुभकामनाएं।
केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि ऊर्जा स्वतंत्रता अब विकल्प का विषय नहीं बल्कि एक आर्थिक, रणनीतिक और भूराजनीतिक आवश्यकता है। उन्होंने आगे कहा कि स्वच्छ और विविध ऊर्जा स्रोतों की ओर भारत का संक्रमण आत्मनिर्भरता और भूराजनीतिक अनुकूलता, आत्मनिर्भर भारत की परिकल्पना और भारत की बढ़ती वैश्विक भूमिका के साथ अटूट रूप से जुड़ा हुआ है।
दिल्ली में एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मंत्री ने कहा कि हरित और स्वच्छ ऊर्जा को अपनाने पर होने वाली बहसें अब निरर्थक हो गई हैं, क्योंकि आज वैश्विक स्तर पर यह सर्वमान्य है कि सतत विकास, आर्थिक मजबूती और भू-राजनीतिक अनुकूलता के लिए ऊर्जा परिवर्तन आवश्यक है। उन्होंने कहा, “यदि भारत को आगे बढ़ना है, तो इसके अलावा कोई विकल्प नहीं है।”
डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि जीवाश्म ईंधन के आयात पर निर्भरता कम करने से न केवल आत्मनिर्भरता मजबूत होती है, बल्कि भारत अपरिहार्य वैश्विक बदलाव के लिए भी तैयार होता है, क्योंकि पारंपरिक ऊर्जा निर्यातक देश स्वयं तेजी से अपने ऊर्जा पोर्टफोलियो में विविधता ला रहे हैं। उन्होंने कहा, “पुराने ऊर्जा मॉडलों पर टिके रहना पुरानी तकनीक से भावनात्मक रूप से चिपके रहने जैसा है, कल तो उसके पुर्जे भी नहीं मिलेंगे।”
वैश्विक मंच पर भारत की बढ़ती प्रतिष्ठा पर प्रकाश डालते हुए मंत्री ने कहा कि देश अब निष्क्रिय भागीदार नहीं है, बल्कि जलवायु परिवर्तन, स्वच्छ ऊर्जा और उन्नत प्रौद्योगिकी जैसे क्षेत्रों में अग्रणी भूमिका निभा रहा है। उन्होंने कहा, “भारत अब वैश्विक रुझानों का अनुसरण नहीं कर रहा है; आज अन्य राष्ट्र मार्गदर्शन के लिए भारत की ओर देख रहे हैं।” उन्होंने अंतरिक्ष अन्वेषण और जैव प्रौद्योगिकी के उदाहरण देते हुए बताया कि कैसे भारतीय नवाचार वैश्विक समुदाय को लाभ पहुंचा रहा है।
भारत की स्वच्छ ऊर्जा प्रतिबद्धताओं का जिक्र करते हुए, डॉ. जितेंद्र सिंह ने याद दिलाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2070 तक भारत के नेट ज़ीरो लक्ष्य की घोषणा की थी और 2047 तक 100 गीगावाट परमाणु ऊर्जा क्षमता हासिल करने के सरकार के संकल्प को दोहराया था। उन्होंने स्पष्ट किया कि विभिन्न ऊर्जा स्रोतों को भेदभाव के नजरिए से नहीं, बल्कि उपयुक्तता, विश्वसनीयता और विशिष्ट अनुप्रयोग में उनकी उपयोगिता के आधार पर देखा जाना चाहिए।
मंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि यद्यपि नवीकरणीय ऊर्जा भारत के ऊर्जा मिश्रण का एक महत्वपूर्ण हिस्सा होगी, फिर भी कुछ क्षेत्रों—जैसे डेटा सेंटर, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और उन्नत कंप्यूटिंग—को निर्बाध, स्थिर, चौबीसों घंटे सातों दिन बिजली की आवश्यकता होती है, जहाँ परमाणु ऊर्जा महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। उन्होंने कहा, “भविष्य एक हाइब्रिड ऊर्जा मॉडल में निहित है, जहाँ प्रत्येक स्रोत को वहाँ तैनात किया जाता है जहाँ वह सबसे अधिक लागत प्रभावी और कुशल हो।”
तकनीकी विकास से समानताएं बताते हुए, डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि जिस प्रकार कृत्रिम बुद्धिमत्ता अब एक संतुलित ‘एआई प्लस मानव बुद्धिमत्ता’ मॉडल में विकसित हो रही है, उसी प्रकार भारत की ऊर्जा रणनीति भी नवीकरणीय ऊर्जा, परमाणु ऊर्जा, हाइड्रोजन और अन्य उभरते समाधानों को मिलाकर एक एकीकृत ढांचे में परिपक्व होगी।
उन्होंने सरकार के साहसिक और अपरंपरागत सुधारों पर भी प्रकाश डाला, जिनमें परमाणु ऊर्जा और अंतरिक्ष जैसे रणनीतिक क्षेत्रों को निजी भागीदारी के लिए खोलना शामिल है। उन्होंने कहा, “इस सरकार ने यथास्थिति से आगे बढ़ने का साहस दिखाया है, जिससे सार्वजनिक-निजी समन्वय संभव हो पाया है जो व्यापकता, गति और स्थिरता प्राप्त करने के लिए आवश्यक है।”
मंत्री ने सार्वजनिक और निजी क्षेत्रों के बीच अधिक सहयोग और विश्वास का आह्वान करते हुए कहा कि भारत को नवाचार और क्रियान्वयन के एक स्वस्थ पारिस्थितिकी तंत्र के निर्माण के लिए अलगाव और आपसी संदेह से ऊपर उठना होगा। उन्होंने जोर देकर कहा, “राष्ट्रीय प्रगति के लिए सामूहिक जिम्मेदारी, साझा उद्देश्य और एकीकृत कार्रवाई आवश्यक है।”
डॉ. जितेंद्र सिंह ने अपने संबोधन का समापन करते हुए कहा कि ऊर्जा परिवर्तन के प्रारंभिक चरण में चुनौतियाँ अवश्य हैं, लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत सही राह पर मजबूती से अग्रसर है। उन्होंने कहा, “स्वच्छ ऊर्जा अब केवल सेमिनारों का विषय नहीं रह गया है; यह जीवनशैली का हिस्सा बन रही है। हितधारक होने के नाते, हम अनुकूलन करेंगे, नवाचार करेंगे और नेतृत्व करेंगे।”
बांग्लादेश के दिनाजपुर जिले के कुचिंदा क्षेत्र में मानवता को शर्मसार कर देने वाली एक घटना सामने आई है। इसने पूरे दक्षिण एशिया के नागरिकों को झकझोर कर रख दिया। एक हिंदू युवक, दीपू चंद्र दास, को भीड़ द्वारा बर्बरतापूर्वक जला दिया गया। यह घटना केवल एक व्यक्ति की हत्या नहीं थी, बल्कि यह सामाजिक असहिष्णुता, कट्टरवाद और कानून-व्यवस्था की विफलता का एक नग्न प्रदर्शन था। दीपू चंद्र दास को जिस क्रूर तरीके से निशाना बनाया गया, उसने अल्पसंख्यकों की सुरक्षा और समाज में पनप रहे हिंसक उन्माद पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े कर दिए हैं।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, सैकड़ों की संख्या में लोग कुचिंदा क्षेत्र में एकत्र हुए। दीपू को पकड़ा गया और उस पर प्रहार किए गए। पीट− पट कर उसे मार डाला। फिर पेड़ पर लटकाकार उसे आग के हवाले कर दिया गया। जिस समय यह जघन्य अपराध हो रहा था, वहां मौजूद सुरक्षा बल या तो कम संख्या में थे या भीड़ को रोकने में असमर्थ रहे। यह स्थिति दर्शाती है कि जब भीड़ उन्मादी हो जाती है, तो न्याय प्रणाली और मानवीय संवेदनाएं दम तोड़ देती हैं। बांग्लादेश में पिछले कुछ समय में अल्पसंख्यकों के विरुद्ध हिंसा की घटनाओं में वृद्धि हुई है। अक्सर किसी मंदिर या पवित्र ग्रंथ के अपमान की झूठी खबर फैलाकर भीड़ को उकसाया जाता है, जिसके बाद बेगुनाह लोग दीपू चंद्र दास की तरह शिकार बन जाते हैं।
बांग्लादेश में हिंदू समुदाय के लोग लंबे समय से अपनी सुरक्षा को लेकर चिंतित रहे हैं। दीपू चंद्र दास की हत्या ने इस डर को आतंक में बदल दिया है। जब किसी को केवल उसकी पहचान के आधार पर सार्वजनिक रूप से जला दिया जाता है, तो वह पूरे समुदाय को संदेश देता है कि वे सुरक्षित नहीं हैं। तकनीक के इस युग में, फेसबुक और व्हाट्सएप जैसे मंच नफरत फैलाने के हथियार बन गए हैं। बिना किसी जांच-परख के साझा की गई एक पोस्ट किसी की जान ले सकती है। कुचिंदा की घटना इसी डिजिटल कट्टरवाद का परिणाम है।ऐसी घटनाओं में अक्सर देखा गया है कि प्रारंभिक जांच के बाद मामले ठंडे बस्ते में चले जाते हैं। यदि दोषियों को तुरंत और सार्वजनिक रूप से दंडित नहीं किया जाता, तो यह भीड़ के मनोबल को और बढ़ाता है।
बांग्लादेश के मयमनसिंह जिले में गुरुवार रात ईशनिंदा के आरोपों के बाद एक हिंदू युवक को भीड़ ने पीट-पीटकर मार डाला और उसके शव को आग लगा दी। यह घटना देश में जारी अशांति और अल्पसंख्यकों और मीडिया संस्थानों पर हमलों को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच घटी है। यह घटना भालुका उपज़िला के स्क्वायर मास्टर बारी के दुबालिया पारा इलाके में घटी। पुलिस ने पीड़ित की पहचान दीपू चंद्र दास के रूप में की है, जो एक स्थानीय कपड़ा कारखाने में काम करता था और उस इलाके में किराएदार के रूप में रहता था। (जैमिनी)
क्रिसमस प्रेम, आशा और दान का कालातीत संदेश देता है: उपराष्ट्रपति
भारत के उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने आज क्रिसमस से पहले उपराष्ट्रपति निवास पर क्रिसमस लंच का आयोजन किया और सभी को मेरी क्रिसमस तथा नया साल मुबारक की हार्दिक शुभकामनाएं दीं। उपराष्ट्रपति ने कहा कि क्रिसमस प्रेम, आशा और दान का कालातीत संदेश देता है। उन्होंने आग्रह किया कि क्रिसमस की भावना को मौसम से आगे ले जाकर दैनिक जीवन में प्रतिबिंबित किया जाए।
उपराष्ट्रपति ने राष्ट्र-निर्माण में ईसाई समुदाय के अमूल्य योगदान की सराहना और प्रशंसा की, विशेष रूप से शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा तथा आदिवासी समुदायों और वंचित वर्गों के उत्थान के क्षेत्रों में।
उपराष्ट्रपति ने ईसाई समुदाय से राष्ट्र-निर्माण में उनके मूल्यवान योगदान को जारी रखने का आग्रह किया। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के दृष्टिकोण का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए समाज के सभी वर्गों का सामूहिक प्रयास आवश्यक होगा। उन्होंने पर्यावरण संरक्षण के महत्व को रेखांकित किया और जलवायु परिवर्तन से निपटने तथा सतत विकास लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए मिशन लाइफ (लाइफस्टाइल फॉर एनवायरनमेंट) को अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया।
इस समारोह में पश्चिम बंगाल के राज्यपाल डॉ. सी. वी. आनंद बोस; राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश; केंद्रीय राज्य मंत्री जॉर्ज कुरियन और सुरेेश गोपी; कार्डिनल्स, आर्कबिशप्स, बिशप्स, पुजारी, पास्टर, रेवरेंड फादर्स एवं सिस्टर्स तथा भारत भर के विभिन्न चर्च प्रशासनों के वरिष्ठ प्रतिनिधि सहित अन्य विशिष्ट अतिथि उपस्थित थे।
केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने आज दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण की गंभीर स्थिति से निपटने के लिए दिल्ली, हरियाणा और उत्तर प्रदेश की राज्य सरकारों और संबंधित नगर निकायों की कार्य योजनाओं की विस्तृत समीक्षा के लिए उच्चस्तरीय बैठक की।श्री यादव ने दिल्ली-एनसीआर में खराब वायु गुणवत्ता की लगातार बनी हुई समस्या पर चिंता व्यक्त की।एक सप्ताह में इसमें सुधार के निर्देश दिए।
यह समीक्षा बैठकों की श्रृंखला में चौथी बैठक थी, जो 3 दिसंबर, 2025 को आयोजित पिछली बैठक में श्री यादव के दिए गए निर्देशों के अनुसार निर्धारित प्रारूप में और निर्धारित मापदंडों के आधार पर आयोजित की गई। इस बैठक में केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन राज्य मंत्री कीर्तिवर्धन सिंह भी उपस्थित थे।
श्री यादव ने कहा कि अभी तैयार की जा रही कार्य योजनाओं की समीक्षा जनवरी 2026 से हर महीने मंत्री स्तर पर की जाएगी। राज्य सरकारों से कहा गया कि वे सभी एनसीआर शहरों की भविष्य में प्रस्तुत की जाने वाली कार्य योजनाओं को अपने अधिकार क्षेत्र में एकीकृत करें। श्री यादव ने आश्वासन दिया कि कार्यान्वयन संबंधी बाधाओं को उच्च स्तरीय अंतर-राज्यीय समन्वय बैठकों के माध्यम से दूर किया जाएगा।
श्री यादव ने दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए राज्य सरकारों और नगर निकायों के किए गए उपायों पर अलग-अलग प्रस्तुतियों की समीक्षा की। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि इन कार्रवाइयों की गति को तब तक बनाए रखना आवश्यक है जब तक कि पूरे एनसीआर में वायु गुणवत्ता में स्पष्ट सुधार न हो जाए। उन्होंने यह भी साफ किया कि नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए, लेकिन आम जनता को अनावश्यक असुविधा नहीं होनी चाहिए। चिन्हित मुद्दों को सुधारात्मक कार्रवाई के माध्यम से हल किया जाएगा, जिसकी समीक्षा 15 दिनों में की जाएगी।
दिल्ली-एनसीआर में भीड़भाड़ वाले चिन्हित 62 इलाकों में सुचारू यातायात प्रबंधन सुनिश्चित करने और कॉरपोरेट एवं औद्योगिक इकाइयों द्वारा कर्मचारियों के लिए इलेक्ट्रिक वाहन/सीएनजी बसों को बढ़ावा देने के निर्देश जारी किए गए। व्यस्त समय में भीड़ कम करने के लिए कार्यालयों, शॉपिंग मॉल और वाणिज्यिक परिसरों के लिए अलग-अलग समय निर्धारित करने पर भी जोर दिया गया। अधिक यातायात वाले मार्गों पर संपूर्ण सार्वजनिक परिवहन उपलब्ध कराने के लिए विशेष उपाय किए गए, साथ ही क्षेत्र में संचालित अवैध और प्रदूषण फैलाने वाली औद्योगिक इकाइयों के खिलाफ कार्रवाई तेज करने के सख्त निर्देश दिए गए। गुरुग्राम, फरीदाबाद, गाजियाबाद और नोएडा को एकीकृत स्मार्ट यातायात प्रबंधन प्रणाली (आईटीएमएस) के कार्यान्वयन में तेजी लाने का निर्देश दिया गया, जबकि यातायात पुलिस को यह सुनिश्चित करने के लिए कहा गया कि प्रवर्तन जांच स्वयं ही भीड़भाड़ का कारण न बने।
केंद्रीय मंत्री ने एनसीआर शहरों में मेट्रो की अंतिम-मील कनेक्टिविटी में सुधार के लिए डीएमआरसी और राज्य अधिकारियों के साथ समन्वित योजना पर जोर दिया। यातायात जाम का कारण बनने वाले अतिक्रमणों को 10 दिनों के भीतर हटाने, गड्ढों से मुक्त सड़कों के लिए वार्षिक रखरखाव अनुबंध सुनिश्चित करने और मानसून से सड़कों को होने वाले नुकसान को रोकने के लिए उचित जल निकासी व्यवस्था करने के निर्देश जारी किए गए। प्रदूषण से संबंधित जन शिकायतों का समन्वित निवारण सीएक्यूएम की देखरेख में सुनिश्चित किया जाना था। इसके साथ ही हितधारकों की भागीदारी के लिए लक्षित सूचना, शिक्षा और संचार (आईईसी) गतिविधियों का आयोजन किया जाना था।
इस बैठक में पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन सचिव, वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) के अध्यक्ष, पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय, सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय, भारी उद्योग मंत्रालय और दिल्ली, हरियाणा तथा उत्तर प्रदेश की राज्य सरकारों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। इसके अलावा, इस बैठक में डीएमआरसी के निदेशक और एमसीडी, एनडीएमसी, दिल्ली पुलिस, एनएचएआई और डीडीए के वरिष्ठ अधिकारियों सहित नोएडा, गाजियाबाद, गुरुग्राम और फरीदाबाद के नगर आयुक्त और जिलाधीक्षक मौजूद थे। इसमें केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी), संबंधित राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (एसपीसीबी) और दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (डीपीसीसी) के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद थे।
केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने जहाजों और बंदरगाहों की सुरक्षा के लिए देशभर में बंदरगाहों के लिए एक मजबूत सुरक्षा ढांचा स्थापित करने की आवश्यकता पर बल दिया।एक डेडिकेटेड Bureau of Port Security (BoPS) के गठन से सम्बंधित समीक्षा बैठक की। समीक्षा बैठक में केन्द्रीय पत्तन, पोत परिवहन एवं जलमार्ग मंत्री और केन्द्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री भी उपस्थित थे। श्री शाह नेनिर्देश दिया कि सुरक्षा उपायों को व्यापार क्षमता, लोकेशन तथा अन्य संबंधित मापदंडों को ध्यान में रखते हुए क्रमबद्ध और जोखिम के आधार पर लागू किया जाए।
BoPS का गठन हाल ही में अधिनियमित Merchant Shipping Act, 2025 की धारा 13 के प्रावधानों के तहत एक वैधानिक निकाय के रूप में किया जाएगा। इस ब्यूरो का नेतृत्व एक महानिदेशक करेंगे और यह केन्द्रीय पत्तन, पोत परिवहन एवं जलमार्ग मंत्रालय (MoPSW) के अधीन काम करेगा और जहाजों और बंदरगाहों पर सुविधाओं की सुरक्षा से संबंधित नियामक एवं निरीक्षण कार्यों के लिए उत्तरदायी होगा। BoPS का गठन Bureau of Civil Aviation Security (BCAS) की तर्ज पर किया जा रहा है। BoPS का नेतृत्व भारतीय पुलिस सेवा (IPS) के एक वरिष्ठ अधिकारी (वेतन स्तर-15) करेंगे। एक वर्ष की ट्रांजिशन अवधि के दौरान, नौवहन महानिदेशक (DGS/DGMA), BoPS के महानिदेशक के रूप में कार्य करेंगे।
BoPS सुरक्षा संबंधी सूचनाओं का समयबद्ध विश्लेषण, संग्रहण और आदान-प्रदान सुनिश्चित करेगा, जिसमें साइबर सुरक्षा पर विशेष ध्यान होगा; इसमें बंदरगाहों की IT अवसंरचना को डिजिटल खतरों से सुरक्षित रखने के लिए डेडिकेटेड प्रभाग भी शामिल होगा। बंदरगाहों की सुरक्षा अवसंरचना को मजबूत करने के उद्देश्य से केन्द्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) को बंदरगाह सुविधाओं के लिए Recognised Security Organisation (RSO) नामित किया गया है, जिसकी जिम्मेदारी बंदरगाहों का सुरक्षा मूल्यांकन और सुरक्षा योजनाएं तैयार करना है।
CISF को बंदरगाहों की सुरक्षा में लगी निजी सुरक्षा एजेंसियों (PSAs) को प्रशिक्षण देने और उनकी क्षमता निर्माण करने का भी काम दिया गया है। इन एजेंसियों को प्रमाणित किया जाएगा तथा इस क्षेत्र में केवल लाइसेंस प्राप्त निजी सुरक्षा एजेंसी ही कार्य करें, यह सुनिश्चित करने के लिए उचित नियामक उपाय लागू किए जाएंगे। बैठक में यह भी उल्लेख किया गया कि समुद्री सुरक्षा ढांचे से प्राप्त अनुभवों को विमानन सुरक्षा क्षेत्र में भी लागू किया जाएगा