मन की शांति और सामाजिक सद्भाव के लिए ध्यान अत्यंत महत्वपूर्ण: उपराष्ट्रपति

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 उपराष्ट्रपति,  सी. पी. राधाकृष्णन ने आज तेलंगाना के कान्हा शांति वनम में आयोजित ‘विश्व ध्यान दिवस’ समारोह में भाग लिया। उन्होंने मन की शांति, भावनात्मक कल्याण तथा सामाजिक सद्भाव को बढ़ावा देने में ध्यान की शाश्वत प्रासंगिकता पर विशेष बल दिया।

सभा को संबोधित करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि ध्यान एक सार्वभौमिक पद्धति है जो सांस्कृतिक, भौगोलिक और धार्मिक सीमाओं से परे है। उन्होंने इसे मानसिक स्पष्टता, भावनात्मक स्थिरता और आंतरिक परिवर्तन के मार्ग के रूप में वर्णित किया और इस बात पर जोर दिया कि ‘विश्व ध्यान दिवस’ आधुनिक जीवन में चिंतन के बढ़ते महत्व को पहचानने का एक अवसर देता है।

उपराष्ट्रपति ने संयुक्त राष्ट्र महासभा के उस प्रस्ताव को सह-प्रायोजित करने में भारत की भूमिका का उल्लेख किया, जिसके तहत 21 दिसंबर को ‘विश्व ध्यान दिवस’ घोषित किया गया था। उन्होंने कहा, विश्व ध्यान दिवस से मानसिक स्वास्थ्य और आध्यात्मिक विकास को बढ़ावा देने में ध्यान की शक्ति को वैश्विक मान्यता मिली है। इस अवसर पर उन्होंने ध्यान के अभ्यास को विश्व भर में फैलाने के लिए ‘दाजी’ के योगदान की सराहना की और कहा कि ध्यान, योग और आध्यात्मिक खोज की अपनी सदियों पुरानी परंपराओं के साथ भारत आज भी विश्व को शाश्वत ज्ञान प्रदान कर रहा है।

भारत की सांस्कृतिक विरासत का ज़िक्र करते हुए राधाकृष्णन ने कहा कि हमारे देश में ध्यान को हमेशा से मन और आत्मा का एक प्राचीन विज्ञान माना गया है, जिसे ऋषियों-मुनियों ने आगे बढ़ाया है। भगवदगीता और तमिल के महान ग्रंथ ‘तिरुमंथिरम’ की सीख का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि ध्यान के ज़रिए मन पर काबू पाने से ही इंसान को आंतरिक शांति मिलती है, वह खुद को बेहतर ढंग से समझ पाता है और एक अच्छा जीवन जी पाता है।

उपराष्ट्रपति ने जोर देकर कहा कि ‘विकसित भारत@2047’ के लक्ष्य को पाने में ध्यान की बहुत बड़ी भूमिका है। उन्होंने कहा कि देश के विकास का मतलब सिर्फ आर्थिक तरक्की ही नहीं, बल्कि मानसिक शांति और आध्यात्मिक उत्थान भी होना चाहिए। उन्होंने आगे कहा कि ध्यान के जरिए हम एक ऐसा समाज बना सकते हैं जहाँ शांति हो, लोग मुश्किलों का सामना करने की ताकत रखें और एक-दूसरे के प्रति सद्भाव रखें।

मिशन लाइफ’ के दृष्टिकोण का उल्लेख करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि ध्यान से जागरूकता, जिम्मेदारी और प्रकृति के साथ तालमेल जैसे गुण विकसित होते हैं, जो स्थायी जीवन जीने के लिए बहुत जरूरी हैं। उन्होंने पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी निभाने और समग्र कल्याण को बढ़ावा देने के लिए ‘कान्हा शांति वनम’ की सराहना की।

नागरिकों से ध्यान को अपनी रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बनाने की अपील करते हुए, श्री राधाकृष्णन ने लोगों, परिवारों और समाज से आग्रह किया कि वे खुद इसका उदाहरण बनें। उन्होंने कहा कि हमें आने वाली पीढ़ियों को भी उन पद्धतियों को अपनाने के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए जो मानसिक शांति, संतुलन और सद्भाव को बढ़ावा देते हैं।

समारोह में तेलंगाना के राज्यपाल जिष्णु देव वर्मा, तेलंगाना सरकार के मंत्री डी. श्रीधर बाबू, हार्टफुलनेस मेडिटेशन के आध्यात्मिक मार्गदर्शक दाजी कमलेश डी. पटेल और अन्य गणमान्य व्यक्ति मौजूद थे। साथ ही, कान्हा शांति वनम में आयोजित इस सामूहिक ध्यान सत्र में हजारों की संख्या में लोग भी शामिल हुए।

कहां तब जाएगी नाम बदलने की राजनीति                                                                 

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तनवीर जाफ़री

 महात्मा गाँधी के नाम से नफ़रत करने व इसे मिटाने की कोशिशों का एक और प्रयास पिछले दिनों संसद में उस समय देखने को मिला जबकि केंद्र सरकार ने महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोज़गार गारंटी अधिनियम अर्थात ‘मनरेगा ‘ का नाम बदलकर “विकसित भारत – गारंटी फ़ॉर रोज़गार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण)” अथवा संक्षेप में ‘वी बी जी राम जी’  कर दिया। हालांकि पहले यह ख़बरें थीं कि इसे “पूज्य बापू ग्रामीण रोज़गार योजना” का नाम दिया जायेगा परन्तु आख़िरकार इस योजना से सरकार ने महात्मा गाँधी का नाम हटा ही दिया। ग़ौरतलब है कि मनरेगा की शुरुआत 2005 में कांग्रेस के नेतृत्व वाली यू पी ए सरकार द्वारा की गयी थी। प्रारंभ में इसका नाम जवाहर रोज़गार योजना था परन्तु बाद में कांग्रेस ने ही इस योजना को महात्मा गांधी का नाम दे दिया था। अब विपक्ष इसे गांधी का नाम हटाने की भाजपाई कोशिश बता रहा  है, जबकि सरकार के अनुसार वह गांधी के विचारों को और मज़बूत कर रही है। हालांकि सरकार ने योजना का नाम बदलने के साथ ही इस योजना में कुछ सुधार और विस्तार करने का भी दावा किया है परन्तु कांग्रेस व अन्य विपक्षी दल इसे गांधी का अपमान बता रहे हैं। कांग्रेस के अनुसार इससे योजना की मूल भावना ही बदल रही है। विपक्ष आरोप लगा रहा है कि जिस तरह अन्य कई योजनाओं,क़ानूनों,मार्गों,शहरों,स्टेशन आदि के नाम बदलना भाजपा की रणनीति का एक हिस्सा है उसी तरह महात्मा गांधी का नाम हटाना भी उसी मुहिम का एक हिस्सा है।                            भाजपा,गांधी का सम्मान करती है,सम्मान करने का दिखावा करती है या सम्मान करते हुये नज़र आना उसकी मजबूरी है यह एक ऐसी वैचारिक बहस का मुद्दा है जो गांधी की हत्या के बाद से ही छिड़ा हुआ है। गाँधी का हत्यारा कौन था,उसकी विचारधारा क्या थी ? आज उस विचारधारा के अलंबरदार कौन लोग हैं ? सत्ता से उनके क्या रिश्ते हैं यह बातें किसी से छुपी नहीं हैं। विगत दस वर्षों से तो ख़ास तौर पर जिसतरह सत्ता समर्थित अनेक सांसदों द्वारा व इसी से जुड़े अनेक संगठनों के लोगों द्वारा जिसतरह गांधी का बार बार अपमान क्या गया,यहाँ तक कि उन्हें गोली मारने का दृश्य तक दोहराया गया,गांधी के हत्यारे आतंकी नाथू राम गोडसे का महिमामंडन किया गया,उसकी प्रतिमा लगाने तक के दुष्प्रयास किये गये यह सब इस निष्कर्ष पर पहुँचने के लिये काफ़ी हैं कि वर्तमान सत्ता के साये तले महात्मा गाँधी के प्रति नफ़रत ख़ूब फली फूली है। आश्चर्य की बात तो यह है जिनके आदर्श नेताओं ने अंग्रेज़ों के तलवे चाटे थे,उनके रहम-ो-करम पर जीने को मजबूर थे वही शक्तियां आज उस गांधी के अपमान पर उतारू हैं जिन्हें पूरी दुनिया,यहाँ तक कि ख़ुद अंग्रेज़ भी झुककर सम्मान देते हैं? 

              यह पहला मौक़ा नहीं है जबकि मनरेगा से गांधी का नाम हटाया गया है। याद कीजिये 2017 में  खादी ग्रामोद्योग आयोग ने हमेशा छपने वाले अपने कैलेंडर में महात्मा गांधी की चरखा घुमाती हुई तस्वीर की जगह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की समान मुद्रा वाली फ़ोटो लगा दी थी। उस समय खादी ग्रामोद्योग के कर्मचारियों और विपक्ष ने भी इसे गांधी जी की विरासत का अपमान बताया था। उस समय सोशल मीडिया पर भी ख़ूब फ़ोटोशॉप्ड मीम्स व ट्रोलिंग हुई। भाजपा नेताओं को तो शायद गांधी का नाम भी सम्मान से लेने में परेशानी होती है। तभी अमित शाह ने महात्मा गांधी को जून 2017 को छत्तीसगढ़ के रायपुर में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान कहा था कि ‘गांधी एक चतुर बनिया था। ‘ उस समय भी कांग्रेस ने अमित शाह पर राष्ट्रपिता के लिए ‘चतुर बनिया’ शब्द का इस्तेमाल कर गाँधी का अपमान करने का आरोप लगाया था । उस समय भी कांग्रेस ने कहा था कि आज़ादी के बाद, बीजेपी ऐसा कर रही है,जैसा अंग्रेज़ों ने किया था। 

                      31 अक्टूबर 2013 को गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री के रूप में नरेंद्र मोदी ने  सरदार वल्लभभाई पटेल को समर्पित दुनिया की सबसे ऊँची प्रतिमा स्टैच्यू ऑफ़ यूनिटी का शिलान्यास गुजरात के नर्मदा ज़िले में केवड़िया के पास नर्मदा नदी के किनारे किया था । बाद में जब इसका निर्माण 2018 में पूरा हुआ तो नरेंद्र मोदी ने ही प्रधानमंत्री के रूप में इसका उद्घाटन भी किया। मूर्ति की ऊँचाई 182 मीटर है, जो आधार सहित कुल 240 मीटर बनती है। इस प्रतिमा को स्थापित करके भाजपा ने एक तीर से कई शिकार खेलने की कोशिश की। उनमें एक कोशिश यह साबित करना भी थी कि गुजरात का सबसे ऊँचा व्यक्तित्व गांधी का नहीं बल्कि सरदार पटेल का है। दूसरी यह कि नेहरू के मुक़ाबले में वह पटेल को बड़ा दिखाना चाहती थी। परन्तु अपने उन प्रयासों में वह न तो गाँधी को छोटा कर सकी न ही नेहरू-पटेल के कथित मतभेदों को हवा दे सकी। हाँ पटेल कीप्रतिमा लगाने से यह ज़रूर साबित हो गया कि संघ -भाजपा के पास अपना कोई भी नेता ऐसा नहीं था जिसकी इतनी ऊँची प्रतिमा बनवाई जा सकती। और यह भी कि गांधी-नेहरू को पटेल से छोटा दिखाने की छटपटाहट में वह यह भी भूल गयी कि स्वतंत्र भारत के पहले गृह मंत्री सरदार वल्लभभाई पटेल ने ही 30 जनवरी, 1948 को महात्मा गांधी की हत्या के तुरंत बाद राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पर बैन लगा दिया था। यह बैन 4 फ़रवरी, 1948 को तब लगाया गया था जब यह चिंता थी कि संघ की गतिविधियों ने सांप्रदायिकता फैलाई है जिससे हिंसा को बढ़ावा मिला है। पटेल ने फ़रवरी 1948 में नेहरू को लिखा, जिसमें उन्होंने बताया कि संघ के सदस्यों ने गांधी की मौत का जश्न मनाया। सर्वविदित है कि गांधी की हत्या हिंदू महासभा से जुड़े आर एस एस के ही पूर्व सदस्य नाथूराम गोडसे ने की थी, जिसके बाद सरकार ने उन संगठनों के ख़िलाफ़ तुरंत कार्रवाई की जिन्हें नफ़रत फैलाने वाला माना जाता था। पटेल नेसंघ को अस्थिर करने वाला संगठन माना, और इसकी विचारधारा को साम्प्रदायिक बताया। 

                बहरहाल दुनिया भर से दिल्ली पहुँचने वाले राष्ट्राध्यक्षों व राष्ट्र प्रमुखों के दिल्ली आगमन पर राजघाट पहुंचकर उन्हें नमन करना या विश्व शांति व बंधुत्व के लिये दुनिया भर में बुलाये जाने वाले मार्च व प्रदर्शनों में गाँधी के चित्रों व उनके सद्भावनापूर्ण विचारों को सर्वोपरि रखना या फिर दुनिया के अनेक देशों में प्रमुख स्थलों पर गाँधी की आदमक़द प्रतिमाओं को सम्मान दिया जाना इस नतीजे पर पहुँचने के लिये काफ़ी है कि महात्मा गाँधी का नाम किसी योजना से हटाने,उनका नाम शौचालयों पर लिखने या नालों के किनारे उनकी फ़ोटो लगाकर उनका अपमान करने जैसे छिछोरे प्रयासों से न तो गांधी का क़द घटने वाला है न ही उनका नाम मिटने वाला है।

−तनवीर जाफरी

गणितीय जगत के बेजोड़ नक्षत्र थे रामानुजन

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बाल मुकुन्द ओझा

आज 22 दिसंबर 2025 का दिन है। आज राष्ट्रीय गणित दिवस मनाया जाता है। यह दिन महान गणितज्ञ श्रीनिवास रामानुजन की जयंती के उपलक्ष्य में मनाया जाता है। यह दिन देश के महान गणितज्ञ श्रीनिवास रामानुजन को समर्पित है जिनका जन्म 22 दिसंबर, 1887 को तमिलनाडु राज्य के इरोड नामक स्थान पर हुआ था। महान गणितज्ञ श्रीनिवास रामानुजन ने 100 साल पहले गणित की जो गुत्थियां सुलझाई थीं, वह आज भी विज्ञान की दुनिया को हैरान कर रही हैं। रामानुजन को आधुनिक काल के महान गणित विचारकों में गिना जाता है। उन्होंने अपने जीवनकाल में गणित के विश्लेषण एवं संख्या सिद्धांत के क्षेत्रों में गहन योगदान दिया। रामानुजन को गणित में कोई विशेष प्रशिक्षण नहीं मिला था इसके बावजूद इन्होंने अपनी प्रतिभा और लगन से ना केवल गणित के क्षेत्र में महत्वपूर्ण कार्य किए अपितु भारत को वैश्विक स्तर पर गौरव प्रदान कराने का भी काम किया था। राष्ट्रीय गणित दिवस को मनाने का उद्देश्य लोगों में गणित के महत्व के बारे में जागरूकता बढ़ाना है। भारत और गणित का रिश्ता बहुत अटूट रहा है। माना जाता है भारत ही वह देश है जिसने पूरी दुनिया को गणित के सबसे महत्वपूर्ण अंक ‘शून्य’, नकारात्मक संख्या, दशमलव प्रणाली, बीजगणित, त्रिकोणमिति जैसे विषयों से अवगत कराया था।

ऐसा देखा गया है हमारी आज की युवा पीढ़ी गणित के नाम से अपने पैर पीछे खींच लेती है। हम अपना हर छोटा मोटा हिसाब आजकल मोबाइल पर करने लगे है। आज भी पुरानी पीढ़ी के लोग जोड़ बाकी अँगुलियों पर करते है और नयी पीढ़ी के युवा मोबाइल का सहारा लेती है। नयी तकनीक ने हालाँकि गणित को हल करने में सरलता करदी है। इसके बावजूद गणित के प्रति हमारा रवैया सकारात्मक नहीं है। लोगों में गणित के प्रति  जागरूकता और उत्साह उत्पन्न करने के लिए इस दिवस को मानते है। इस दिन गणित के शिक्षकों और छात्रों को इस विषय को आसान बनाने और लोगों के बीच इसकी लोकप्रियता बढ़ाने के लिए ट्रेनिंग दी जाती है।

देश के पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह ने 22 दिसंबर 2012 को चेन्नई में महान गणितज्ञ श्रीनिवास अयंगर रामानुजन की 125वीं वर्षगाठ के मौके पर आयोजित एक कार्यक्रम में श्रीनिवास रामानुजन को श्रद्धांजलि देते हुए वर्ष 2012 को राष्ट्रीय गणित वर्ष और साथ ही उनके जन्मदिन के अवसर पर 22 दिसंबर को राष्ट्रीय गणित दिवस घोषित किया। तभी से  22 दिसंबर को हर साल राष्ट्रीय गणित दिवस मनाया जाता है। इस अवसर पर शिक्षण संस्थाओं में विभिन्न आयोजनों के माध्यम से रामानुजन को याद किया जाता है और गणित के महत्त्व की जानकारी दी जाती है। रामानुजन को  बचपन से ही  गणित में काफी रूचि थी। उन्होंने किसी भी तरह की कोई औपचारिक शिक्षा नहीं ली थी लेकिन उन्होंने अपने जीवन में ऐसी-ऐसी खोजें कीं कि बड़े-बड़े गणितज्ञ हतप्रभ रह गए। रामानुजन ने 12 साल की उम्र में त्रिकोणमिति में महारत हासिल कर ली थी और बिना किसी की सहायता के खुद से कई प्रमेय भी विकसित किए। उनका यह कार्य ऐतिहासिक माना गया था। रामानुजन की प्रतिभा का पता इसी से लगाया जा सकता है कि जब वह  सातवीं कक्षा में पढ़ते थे तो उसी समय ये बी. ए. के छात्रों को गणित पढ़ाया करते थे। लोनी के द्वारा प्रसिद्ध त्रिकोणमिति जिसे हल करने में बड़े-बड़े गणितज्ञ असफल हो जाया करते थे, मगर इन्होंने अपनी मात्र 13 वर्ष की अल्पायु में ही हल करके अपनी प्रतिभा को प्रमाणित कर दिया था। उनके बारे में यह कहा जाता था कि वे  गणित के किसी भी प्रश्न को सबसे अधिक तरीके से हल कर सकते थे। उनकी इसी विलक्षण प्रतिभा ने इनको विश्व में गणित का गुरु होने का दर्जा दिलाया था। गणित के क्षेत्र में किये गए कार्यों की वजह से इनका नाम इतिहास के पन्नों में स्वर्णिम अक्षरों में अंकित किया गया है। इन्होंने अपने कार्यो के द्वारा भारत के सम्मान में भी चार चाँद लगाया। टीबी की बीमारी की वजह से रामानुजन का 32 साल की उम्र में उनका निधन हो गया।

बाल मुकुन्द ओझा

वरिष्ठ लेखक एवं पत्रकार

.32, मॉडल टाउन, मालवीय नगर, जयपुर

भारतीय संगीत के अनमोल रत्न: वसंत देसाई

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22 दिसंबर जिनकी पुण्य तिथि है

भारतीय चित्रपट संगीत के स्वर्ण युग में कई ऐसे दिग्गज हुए जिन्होंने अपनी स्वर लहरियों से जन-मानस को मंत्रमुग्ध कर दिया। इन्हीं में से एक ऐसा नाम है जिसने शास्त्रीय संगीत की मर्यादा और सुगम संगीत की सरलता के बीच एक सेतु का निर्माण किया—वसंत देसाई। वे केवल एक संगीतकार ही नहीं, बल्कि एक निष्ठावान साधक थे, जिनके संगीत में शुद्धता, सात्विकता और राष्ट्रीयता की स्पष्ट झलक मिलती थी।

​जन्म और प्रारंभिक जीवन

​वसंत देसाई का जन्म ९ जून, १९१२ को महाराष्ट्र के सिंधुदुर्ग जिले के कुदाल नामक स्थान पर हुआ था। उनका बचपन कोंकण की प्राकृतिक सुंदरता के बीच बीता, जिसका प्रभाव उनके संगीत में भी सदैव दिखाई दिया। उनकी प्रारंभिक शिक्षा स्थानीय स्तर पर हुई, किंतु बचपन से ही उनका रुझान कला और संगीत की ओर था। वे केवल सुरों के ही प्रेमी नहीं थे, बल्कि अभिनय में भी उनकी गहरी रुचि थी। यही कारण था कि उन्होंने अपने करियर की शुरुआत एक अभिनेता के रूप में की थी।

​प्रभात फिल्म कंपनी और कलात्मक यात्रा

​वसंत देसाई के व्यक्तित्व को निखारने में ‘प्रभात फिल्म कंपनी’ का बहुत बड़ा योगदान रहा। वे कोल्हापुर चले आए और प्रसिद्ध फिल्म निर्माता वी. शांताराम के सानिध्य में कार्य करना प्रारंभ किया। प्रारंभ में उन्होंने फिल्मों में छोटे-मोटे अभिनय किए और कोरस (सामूहिक गायन) में हिस्सा लिया। महान संगीतज्ञ मास्टर कृष्णराव और उस्ताद अमीर खान जैसे दिग्गजों के संपर्क में आने से उनकी संगीत प्रतिभा को एक नई दिशा मिली। उन्होंने संगीत की बारीकियों को बहुत गहराई से सीखा और धीरे-धीरे पार्श्व संगीत और स्वतंत्र संगीत निर्देशन की ओर कदम बढ़ाया।

​संगीत शैली और विशेषताएँ

​वसंत देसाई का संगीत अपनी सादगी और गहराई के लिए जाना जाता है। उन्होंने कभी भी संगीत में शोर-शराबे या अनावश्यक वाद्ययंत्रों का प्रयोग नहीं किया। उनका मानना था कि संगीत की आत्मा उसके शब्दों और रागों की शुद्धता में होती है। उन्होंने भारतीय शास्त्रीय रागों का प्रयोग फिल्मी गानों में इतनी कुशलता से किया कि वे आम आदमी की जुबान पर चढ़ गए।
​उनकी संगीत रचनाओं में भक्ति रस, देशभक्ति और प्रकृति के प्रति प्रेम स्पष्ट रूप से झलकता है। उन्होंने लोक संगीत और शास्त्रीय संगीत का जो सम्मिश्रण प्रस्तुत किया, वह आज भी संगीत के विद्यार्थियों के लिए एक शोध का विषय है।

​अमर कृतियाँ और मील के पत्थर

​वसंत देसाई ने कई ऐतिहासिक फिल्मों में कालजयी संगीत दिया। फिल्म ‘झनक झनक पायल बाजे’ में उनका संगीत नृत्य और शास्त्रीयता का अद्भुत संगम था। इसी प्रकार, फिल्म ‘दो आँखें बारह हाथ’ का गीत “ऐ मालिक तेरे बंदे हम” आज भी भारतीय विद्यालयों और संस्थानों में प्रार्थना के रूप में गाया जाता है। यह गीत उनके संगीत की आध्यात्मिक शक्ति का सबसे बड़ा प्रमाण है।
​उनकी अन्य महत्वपूर्ण फिल्मों में ‘शकुंतला’, ‘गूँज उठी शहनाई’, ‘आशीर्वाद’ और ‘गुड्डी’ शामिल हैं। फिल्म ‘गुड्डी’ का गीत “हमको मन की शक्ति देना” आज भी नैतिकता और संकल्प की अनौपचारिक प्रार्थना बन चुका है। ‘गूँज उठी शहनाई’ में उन्होंने उस्ताद बिस्मिल्लाह खान की शहनाई का जिस प्रकार उपयोग किया, उसने फिल्म संगीत को एक नई ऊँचाई प्रदान की।

​राष्ट्रभक्ति और सामाजिक योगदान

​वसंत देसाई केवल फिल्मों तक ही सीमित नहीं रहे। उनके भीतर राष्ट्रभक्ति कूट-कूट कर भरी थी। उन्होंने सामूहिक गान (कोरस) की परंपरा को बहुत बढ़ावा दिया। उनका मानना था कि सामूहिक गायन से एकता और अनुशासन की भावना जागृत होती है। उन्होंने हज़ारों बच्चों को एक साथ देशभक्ति के गीत गाने के लिए प्रशिक्षित किया। उन्होंने महाराष्ट्र राज्य के सांस्कृतिक विभाग में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और लोक कलाओं के संरक्षण हेतु निरंतर कार्य किया।

​सादगीपूर्ण व्यक्तित्व और सम्मान

​वसंत देसाई अपने व्यक्तिगत जीवन में भी अत्यंत सरल और सौम्य स्वभाव के धनी थे। वे प्रचार-प्रसार से दूर रहकर अपनी साधना में लीन रहते थे। संगीत जगत में उन्हें जो सम्मान मिला, वह उनके कठिन परिश्रम और कला के प्रति अटूट निष्ठा का प्रतिफल था। उन्हें अपने जीवनकाल में कई पुरस्कारों से सम्मानित किया गया, किंतु उनके लिए सबसे बड़ा पुरस्कार श्रोताओं का वह अटूट प्रेम था जो उनकी रचनाओं को आज भी जीवित रखे हुए है।

​जीवन का दुखद अंत

​भारतीय संगीत का यह दैदीप्यमान नक्षत्र २२ दिसंबर, १९७५ को एक अत्यंत दुखद दुर्घटना में सदा के लिए अस्त हो गया। एक लिफ्ट दुर्घटना में उनकी असामयिक मृत्यु हो गई। उनके निधन से भारतीय संगीत जगत में जो रिक्तता उत्पन्न हुई, उसे कभी भरा नहीं जा सका। भले ही वे आज हमारे बीच भौतिक रूप से उपस्थित नहीं हैं, किंतु उनकी स्वर लहरियाँ और उनके द्वारा रचित अमर प्रार्थनाएँ आने वाली पीढ़ियों को सदैव शांति और शक्ति प्रदान करती रहेंगी।
​वसंत देसाई का जीवन हमें यह सिखाता है कि कला का उद्देश्य केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि आत्मा की शुद्धि और समाज का कल्याण होना चाहिए। उनका संगीत आज भी भारतीय संस्कृति की सुगंध बिखेर रहा है। (जैमिनी)

भारत विकसित@2047 तब होगा जब हर घर, गांव, शहर और राज्य विकसित और आत्मनिर्भर हो: मनोहर लाल

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केंद्रीय आवास एवं शहरी मामलों के मंत्री मनोहर लाल की अध्यक्षता में शहरी विकास मंत्रियों की भोपाल में आयोजित तीसरी क्षेत्रीय बैठक मेंं क्षेत्रीय बैठकों के अनुरूप, विचार-विमर्श, शहरी विकास के प्रमुख मुद्दों, चुनौतियों और अवसरों पर केंद्रित थे ताकि सामूहिक रूप से आगे बढ़ने का मार्ग प्रशस्त किया जा सके।

भारत सरकार के आवास एवं शहरी मामलों के मंत्रालय ने मध्य प्रदेश सरकार के शहरी विकास विभाग के सहयोग से इस क्षेत्रीय बैठक का आयोजन किया। इस बैठक में उत्तर मध्य राज्यों, छत्तीसगढ़, दिल्ली, मध्य प्रदेश, राजस्थान और उत्तर प्रदेश के अतिरिक्त मुख्य सचिव और प्रधान सचिव सहित शहरी विकास मंत्री और अन्य वरिष्ठ अधिकारी एक साथ आए। केंद्रीय मंत्री ने विभिन्न केंद्रीय मिशनों की प्रगति की समीक्षा की।

स्वच्छ भारत मिशन-शहरी (एसबीएम-यू) के अंतर्गत, माननीय मंत्री जी ने डंपसाइट रेमेडिएशन एक्सेलेरेटर प्रोग्राम (डीआरएपी) के ढांचे के अंतर्गत राजनीतिक और प्रशासनिक नेतृत्व द्वारा डंपसाइटों को अपनाने की आवश्यकता पर बल दिया जिसमें सुधार प्रयासों में तेजी लाने पर विशेष ध्यान दिया गया। सभी भागीदार राज्यों से यह सुनिश्चित करने को कहा गया कि वे मेंटर और मेंटी शहरों के बीच प्रभावी समन्वय के माध्यम से स्वच्छ शहर जोड़ी (एसएसजे) के तहत तैयार की गई कार्य योजनाओं का समयबद्ध कार्यान्वयन करें।

अटल पुनर्जीवन एवं शहरी परिवर्तन मिशन (एएमआरयूटी) के अंतर्गत, माननीय मंत्री जी ने जमीनी स्तर पर कार्यान्वयन को सुदृढ़ करने, शहरी जल एवं स्वच्छता संसाधनों की गुणवत्ता और स्थिरता में सुधार करने तथा उपचारित अपशिष्ट जल के पुन: उपयोग को अधिकतम करने की आवश्यकता पर बल दिया। सभी भागीदार राज्यों से परियोजना कार्यान्वयन में तेजी लाने, समन्वय बढ़ाने और नल जल आपूर्ति एवं सीवरेज कवरेज में संतृप्ति प्राप्त करने का आग्रह किया गया।

‘सभी के लिए आवास’ अभियान के अंतर्गत माननीय केंद्रीय मंत्री ने निर्माणाधीन प्रधानमंत्री आवास योजना – शहरी (पीएमएवाई-यू) के घरों के निर्माण को पूरा करने और पीएमएवाई-2.0 के घरों की नींव रखने पर जोर दिया। उन्होंने राज्य के अधिकारियों को एएचपी (सभी के लिए आवास) घरों में अधिभोग सुनिश्चित करने और लाभार्थियों को गृह ऋण उपलब्ध कराने के लिए भी प्रोत्साहित किया। इस उद्देश्य के लिए, अंगीकार अभियान मार्च 2026 तक जारी रहेगा और पीएमएवाई लाभार्थियों को विभिन्न लाभों का एकीकरण करने के लिए जनसंपर्क अभियान चलाया जाएगा।पीएम-ईबस सेवा योजना से संबंधित मुद्दों के साथ-साथ मेट्रो नेटवर्क के सघनीकरण और शहरी परिवहन के अंतर्गत फर्स्ट-लास्ट माइल कनेक्टिविटी पर चर्चा की गई।

राज्य मंत्रियों ने क्षेत्रीय परामर्शों के माध्यम से राज्यों के साथ सहयोगात्मक रूप से जुड़ने के लिए गृह मंत्रालय (एमओएचयूए) के दृष्टिकोण की सराहना की। भारत के शहरी परिवर्तन की यात्रा को गति देने के लिए साझा प्राथमिकताओं, क्षेत्रीय अवसरों की पहचान करने और सहकर्मी सीखने के लिए सुधार के रास्ते तय करने के लिए देश के अन्य क्षेत्रों में भी इस प्रकार की क्षेत्रीय बैठकें आयोजित की जाएंगी।

इस बैठक में मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव, मध्य प्रदेश के माननीय शहरी विकास एवं आवास विभाग मंत्री कैलाश विजयवर्गीय, मध्य प्रदेश की माननीय शहरी विकास एवं आवास राज्य मंत्री सुश्री प्रतिमा बागड़ी, छत्तीसगढ़ के माननीय उप मुख्यमंत्री एवं शहरी प्रशासन एवं विकास मंत्री अरुण साओ, राजस्थान के माननीय शहरी विकास एवं स्थानीय स्वशासन विकास राज्य मंत्री झबर सिंह खर्रा, उत्तर प्रदेश के माननीय शहरी विकास, शहरी रोजगार एवं गरीबी उन्मूलन एवं ऊर्जा मंत्री अरविंद कुमार शर्मा, उत्तर प्रदेश के माननीय शहरी विकास राज्य मंत्री राकेश राठौर और संबंधित राज्य सरकारों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। बैठक में आवास एवं शहरी मामलों के मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल हुए।

केंद्रीय वित्त मंत्री ने वित्त मंत्रालय और कॉर्पोरेट कार्य मंत्रालय के चिंतन शिविर की अध्यक्षता की

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केंद्रीय वित्त और कॉर्पोरेट कार्य मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण ने, केंद्रीय कॉर्पोरेट मामलों के राज्य मंत्री हर्ष मल्होत्रा के साथ, आज कर्नाटक के विजयनगर जिले के हम्पी में वित्त मंत्रालय और कॉर्पोरेट कार्य मंत्रालय के चिंतन शिविर की अध्यक्षता की।चर्चा में प्रक्रियाओं को आसान बनाने, नियामक पूर्वानुमेयता, विभागों के बीच तालमेल से काम करना, कुशल फंड फ्लो, भविष्य के लिए तैयार कर प्रशासन, लगातार प्रगति के लिए फाइनेंसिंग के तरीके, और पारदर्शिता, दक्षता और जवाबदेही के लिए डिजिटल उपकरणों का इस्तेमाल करना शामिल था।

वित्त मंत्रालय और कॉर्पोरेट कार्य मंत्रालय के सभी सचिव, केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) और केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर एवं सीमा शुल्क बोर्ड (सीबीडीटी) चेयरमैन, और भारत सरकार के मुख्य आर्थिक सलाहकार भी मौजूद थे, साथ ही वित्त मंत्रालय और कॉर्पोरेट कार्य मंत्रालय और संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित रहे।

“एआई, ईज़ ऑफ डूइंग बिजनेस और विकसित भारत के लिए फाइनेंसिंग” के कार्यक्रम में, चर्चा इस विषय पर केंद्रित थी कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, टेक्नोलॉजी-इनेबल्ड सिस्टम और प्रक्रिया सुधार का इस्तेमाल करके ईज़ ऑफ डूइंग बिजनेस को बेहतर बनाने के लिए संस्थागत क्षमता और पॉलिसी बनाने को कैसे मजबूत किया जा सकता है।

अपने संबोधन में, वित्त मंत्री श्रीमती सीतारमण ने विजयनगर क्षेत्र के ऐतिहासिक महत्व पर बात की, और कहा कि यह लगभग 500 वर्ष पहले अपने चरम पर रहे एक भारतीय साम्राज्य के सबसे करीबी उदाहरणों में से एक है, जिसके निशान पूरे उपमहाद्वीप के बड़े हिस्सों में दिखाई देते हैं।

भोपाल मेट्रो का उद्घाटन

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केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल और मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने आज भोपाल मेट्रो का उद्घाटन किया।भोपाल मेट्रो नेटवर्क संचालित होने वाला भारत का 26वां शहर बन गया । अब भारत की कुल संचालित मेट्रो लंबाई 1,090 किमी पहुंच गई।आज भोपाल मेट्रो के पहले चरण, ऑरेंज लाइन प्राथमिकता कॉरिडोर का आज उद्घाटन किया गया। इसकी लगभग 7 किमी लंबे इस प्राथमिकता खंड में आठ ऊंचे स्टेशन शामिल हैं−AIIMS, अलकापुरी,डीआरएम ऑफिस, रानी कमलापति, एमपी नगर, बोर्ड ऑफिस चौराहा, केंद्रीय विद्यालय और सुभाष नगर।यह कॉरिडोर शहर के कुछ सबसे व्यस्त मार्गों पर यातायात प्रवाह को सुगम बनाएगा, प्रदूषण स्तर को कम करने में मदद करेगा और सुरक्षित व आरामदायक यात्रा अनुभव प्रदान कराएगा।केंद्रीय मंत्री ने नई मेट्रो लाइन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया और मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री के साथ सुभाष नगर मेट्रो स्टेशन से एम्स मेट्रो स्टेशन तक मेट्रो की सवारी की।

भोपाल मेट्रो मध्य प्रदेश की राजधानी शहर के लिए एक बड़ा कदम है, जो नागरिकों के लिए शहरी यात्रा को तेज, स्वच्छ और अधिक सुविधाजनक बनाने का लक्ष्य रखता है। माननीय प्रधानमंत्री जी के नेतृत्व में विकसित यह परियोजना स्मार्ट, हरित और टिकाऊ गतिशीलता की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि का प्रतीक हैभोपाल मेट्रो की कुल लंबाई 30.8 किमी है, जिसमें दो कॉरिडोर और एक डिपो शामिल हैं।

  • ऑरेंज लाइन: 16.74 किमी
  • ब्लू लाइन: 14.16 किमी

शहर के प्रमुख व्यावसायिक और आवासीय क्षेत्रों को जोड़ने के लिए डिज़ाइन की गई यह मेट्रो ट्रैफिक जाम को कम करने और निवासियों के समग्र जीवन स्तर को इससे बेहतर बनाने की उम्मीद है।

भोपाल मेट्रो की प्रमुख विशेषताएं

भोपाल मेट्रो आधुनिक, उपयोगकर्ता-अनुकूल और सुरक्षा-केंद्रित सुविधाओं से लैस है, जिनमें शामिल हैं:

  • आधुनिक सुविधाएं: सभी स्टेशनों पर उच्च-गति लिफ्ट और एस्केलेटर सभी के लिए सुलभ:
  • दिव्यांगजनों के लिए समर्पित व्हीलचेयर स्थान और आसान पहुंच सुरक्षा सबसे पहले:
  •  एआई-आधारित सीसीटीवी निगरानी, आपातकालीन संचार बटन, प्लेटफॉर्म स्क्रीन डोर और ग्रेड-4 सिग्नलिंग सिस्टम स्मार्ट तकनीक:
  • ऑडियो-विजुअल यात्री सूचना प्रणाली और हाई-टेक संचालन नियंत्रण केंद्र
  • यात्री आराम: पूर्णतः वातानुकूलित कोच, आरामदायक सीटें और मोबाइल चार्जिंग पॉइंट

भोपाल मेट्रो शहर की टिकाऊ शहरी विकास की दिशा में प्रगति का प्रतीक है। स्मार्ट, सुरक्षित और पर्यावरण-अनुकूल गतिशीलता को बढ़ावा देकर, यह दैनिक यात्रा को काफी हद तक आसान बनाएगा और स्वच्छ शहरी वातावरण में योगदान देगा।

मेट्रो सेवाओं की शुरुआत के साथ, भोपाल एक आधुनिक, हरित और सुलभ राजधानी शहर बनने की दिशा में निर्णायक कदम साबित होने जा रहा है।

अमरावती में वीआईटी-एपी विश्वविद्यालय में आंध्र प्रदेश के पहले जेनरेशन-जेड परिवर्तित परिसर डाकघर का उद्घाटन

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ग्रामीण विकास एवं संचार राज्य मंत्री डॉ. पेम्मासानी चंद्र शेखर ने  कैंपस डाकघरों के आधुनिकीकरण और उन्हें  छात्र-केंद्रित सेवा केंद्रों में बदलने की राष्ट्रव्यापी पहल के अंतर्गत, जेनरेशन-जेड विषय पर आधारित वीआईटी-एपी विश्वविद्यालय उप डाकघर का अमरावती स्थित वीआईटी-एपी विश्वविद्यालय परिसर में आज उद्घाटन किया 

यह पहल भारत डाक अभियान के एक  महत्वपूर्ण कदम का प्रतिनिधित्व करती है जो  युवा भारत से जुड़ती है, वित्तीय समावेशन को बढ़ावा देती और कैंपस परिवेश के भीतर आधुनिक, सुलभ सेवाएं प्रदान करती है।

यह पहल इंडिया पोस्ट के परिवर्तन के सफर में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है, जिसका उद्देश्य पारंपरिक डाकघरों को समकालीन, भविष्य के लिए तैयार संस्थानों के रूप में पुनर्परिभाषित करना और युवा पीढ़ी के साथ जुड़ाव को मजबूत करना है। नए सिरे से तैयार किए गए डाकघर को सोच-समझकर जेनरेशन-जेड  की सोच के अनुरूप डिजाइन किया गया है, जिसमें कार्यक्षमता, रचनात्मकता, नवाचार और आधुनिक सौंदर्यशास्त्र का संयोजन है।

उद्घाटन समारोह में आंध्र प्रदेश सर्कल की मुख्य पोस्टमास्टर जनरल सुश्री बीपी श्रीदेवी, आईपीओएस; वीआईटी-एपी विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. पी. अरुलमोलीवरमन; गुंटूर जिले की कलेक्टर और जिला मजिस्ट्रेट श्रीमती ए. थमीम अनासरिया, आईएएस; वीआईटी-एपी विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार डॉ. जगदीश चंद्र मुदिगंती; विजयवाड़ा क्षेत्र के पोस्टमास्टर जनरल डॉ. वेन्नम उपेंद्र, आईपीओएस; आंध्र प्रदेश सर्कल के महाप्रबंधक (वित्त) श्री के. विनोद कुमार, आईपी एंड टीएएफएस; और लेखा निदेशक श्री अभिलाष पासम, सहित कई गणमान्य व्यक्ति, वरिष्ठ अधिकारी और संकाय सदस्य उपस्थित थे।

इस अवसर पर  संबोधित करते हुए डॉ. पेम्मासानी चंद्रशेखर ने कहा कि यह पहल डाक विभाग की डाकघरों को युवा नागरिकों की बदलती आकांक्षाओं के अनुरूप जीवंत सेवा केंद्रों में बदलने की प्रतिबद्धता को दर्शाती है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि ऐसी पहल छात्रों को आवश्यक डाक, वित्तीय और डिजिटल सेवाओं से सुलभ और रुचिकर तरीके से परिचित कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

उद्घाटन समारोह में आंध्र प्रदेश सर्कल की मुख्य पोस्टमास्टर जनरल सुश्री बीपी श्रीदेवी, आईपीओएस; वीआईटी-एपी विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. पी. अरुलमोलीवरमन; गुंटूर जिले की कलेक्टर और जिला मजिस्ट्रेट श्रीमती ए. थमीम अनासरिया, आईएएस; वीआईटी-एपी विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार डॉ. जगदीश चंद्र मुदिगंती; विजयवाड़ा क्षेत्र के पोस्टमास्टर जनरल डॉ. वेन्नम उपेंद्र, आईपीओएस; आंध्र प्रदेश सर्कल के महाप्रबंधक (वित्त) श्री के. विनोद कुमार, आईपी एंड टीएएफएस; और लेखा निदेशक श्री अभिलाष पासम, सहित कई गणमान्य व्यक्ति, वरिष्ठ अधिकारी और संकाय सदस्य उपस्थित थे।

उपराष्ट्रपति ने हैदराबाद में राज्य लोक सेवा आयोगों के अध्यक्षों के राष्ट्रीय सम्मेलन के समापन सत्र को संबोधित किया

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उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने आज हैदराबाद में राज्य लोक सेवा आयोगों के अध्यक्षों के सम्मेलन के समापन सत्र में भाग लिया और भारत की शासन प्रणाली की गुणवत्ता, ईमानदारी और प्रभावशीलता को आकार देने में लोक सेवा आयोगों की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित किया ।उपराष्ट्रपति ने कहा कि संविधान में प्रतिष्‍ठापित लोक सेवा आयोगों की स्‍वतंत्रता, सरकारी भर्ती में योग्‍यता, निष्पक्षता और पारदर्शिता बनाए रखने में महत्‍वपूर्ण भूमिका निभाती आई है। उन्होंने कहा कि दशकों से, केंद्र और राज्‍य स्‍तर पर आयोगों ने प्रशासनिक निरंतरता, संस्‍थागत स्थिरता और लोक सेवकों का तटस्‍थ चयन सुनिश्चित करते हुए जनता के भरोसे को मज़बूत किया है।

इस अवसर पर उपराष्ट्रपति ने अपने संबोधन में कहा कि जिस तरह भारत विकसित भारत@2047 के विज़न की ओर बढ़ रहा है,ऐसे में शासन की गुणवत्‍ता, और उससे भी कहीं ज्‍यादा महत्‍वपूर्ण संस्‍थानों को चलाने वाले लोगों की गुणवत्‍ता निर्णायक सिद्ध होगी। उन्होंने लोक सेवा आयोगों को संवैधानिक संस्‍थाएँ करार दिया, जिन्हें देश की सेवा करने के लिए योग्‍य, निष्पक्ष और नैतिक लोगों को चुनने की अहम ज़िम्मेदारी सौंपी गई है।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि संविधान में प्रतिष्‍ठापित लोक सेवा आयोगों की स्‍वतंत्रता, सरकारी भर्ती में योग्‍यता, निष्पक्षता और पारदर्शिता बनाए रखने में महत्‍वपूर्ण भूमिका निभाती आई है। उन्होंने कहा कि दशकों से, केंद्र और राज्‍य स्‍तर पर आयोगों ने प्रशासनिक निरंतरता, संस्‍थागत स्थिरता और लोक सेवकों का तटस्‍थ चयन सुनिश्चित करते हुए जनता के भरोसे को मज़बूत किया है।

लोक सेवाओं के संबंध में बदलती मांगों पर ज़ोर देते हुए उन्होंने इस बात को रेखांकित किया कि डिजिटल शासन, सामाजिक समावेशन, अवसंरचना विकास, जलवायु कार्रवाई और आर्थिक परिवर्तन जैसी राष्‍ट्रीय प्राथमिकताओं को कुशलतापूर्वक कार्यान्वित करना आज चुने गए प्रशासनिकों की गुणवत्‍ता पर निर्भर करता है।

नैतिक मानकों के महत्व को रेखांकित करते हुए श्री सी. पी. राधाकृष्णन ने कहा कि निष्पक्षता सरकारी भर्ती का नैतिक आधार है और भेदभाव खत्म करने के लिए पारदर्शिता ज़रूरी है। उन्होंने कहा कि यहाँ तक कि छोटी-मोटी गड़बड़ियाँ भी संस्थानों की विश्वसनीयता कम कर सकती हैं, और उन्होंने सार्वजनिक परीक्षाओं में गड़बड़ी को कतई बर्दाश्‍त न करने का आह्वान किया।

उपराष्ट्रपति ने इस बात पर भी ज़ोर दिया कि आज प्रभावशाली शासन के लिए शैक्षणिक दक्षता के साथ-साथ मज़बूत नैतिक फ़ैसले, भावनात्मक बुद्धिमत्ता, नेतृत्‍व क्षमता और टीमवर्क वाले लोक सेवकों की ज़रूरत है। उन्होंने सुझाव दिया कि लोक सेवा आयोग ज्ञान पर आधारित परीक्षाओं के साथ-साथ व्यवहार और नैतिक योग्‍यता के निष्पक्ष और सुनियोजित आकलन की संभावनाओं के बारे में विचार कर सकते हैं।

इस बात पर ज़ोर देते हुए कि केवल भर्ती आजीवन बेहतरीन कार्य किया जाना सुनिश्चित नहीं कर सकती, श्री सी. पी. राधाकृष्णन ने कहा कि संस्‍थागत ईमानदारी बनाए रखने के लिए प्रदर्शन का आकलन, सतर्कता एवं निगरानी और समय-समय पर समीक्षा करने के तरीकों को बिना किसी भेदभाव के तथा पारदर्शी तरीके से लागू किया जाना चाहिए। उन्होंने आगे कहा कि चरित्र और नैतिक व्यवहार राष्‍ट्र निर्माण और जनता के भरोसे की बुनियाद हैं।

भारत के जनसांख्यिकीय लाभाँश का उल्‍लेख करते हुए उपराष्ट्रपति ने लोक सेवा आयोगों को प्रतिभा मानचित्रण और रोजगार क्षमता बढ़ाने के लिए प्रतिभा सेतु जैसी पहल सहित नवोन्‍मेषी तरीके तलाशने के लिए प्रोत्‍साहित किया, ताकि सही प्रतिभा को सही भूमिका मिल सके।

अपने संबोधन का समापन करते हुए श्री सी. पी. राधाकृष्णन ने विश्‍वास व्‍यक्‍त किया कि लोक सेवा आयोग सुशासन की नींव मज़बूत करते रहेंगे तथा विकसित और आत्मनिर्भर भारत बनने की दिशा में देश की यात्रा में अहम भूमिका निभाएंगे।

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने उत्तर प्रदेश में किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी के दीक्षांत समारोह को संबोधित किया

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केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री श्री जगत प्रकाश नड्डा ने आज लखनऊ में किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (केजीएमयू) के 21 वें वार्षिक दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए स्नातक छात्रों को बधाई दी और भारत में चिकित्सा विज्ञान शिक्षा और रोगी देखभाल को बढ़ावा देने में केजीएमयू के योगदान की सराहना की। उन्होंने कहा, “केजीएमयू को 2025 की एनआईआरएफ रैंकिंग में 8वां स्थान मिला है और इसके 12 संकाय सदस्यों को स्टैनफोर्ड विश्वविद्यालय द्वारा शीर्ष 2 प्रतिशत वैज्ञानिकों में शामिल किया गया है। यह एक उल्लेखनीय उपलब्धि है।”

श्री नड्डा ने पिछले दशक में भारत के स्वास्थ्य सेवा और चिकित्सा शिक्षा क्षेत्र में हासिल की गई उल्लेखनीय प्रगति का उल्लेख करते हुए कहा कि जहां पिछली शताब्दी के अंत में देश में केवल एक एम्स था वहीं आज पूरे भारत में 23 एम्स संस्थान हैं। यह हर क्षेत्र में गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवा और चिकित्सा प्रशिक्षण का विस्तार करने के लिए सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

उन्होंने कहा कि पिछले 11 वर्षों में देश में मेडिकल कॉलेजों की संख्या 387 से बढ़कर 819 हो गई है। इसी प्रकार, स्नातक मेडिकल सीटों की संख्या 51,000 से बढ़कर 1,19,000 और स्नातकोत्तर सीटों की संख्या 31,000 से बढ़कर 80,000 हो गई है। श्री नड्डा ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के निर्देशानुसार, 2029 तक स्नातक और स्नातकोत्तर दोनों स्तरों पर 75,000 अतिरिक्त सीटें जोड़ी जाएंगी, जिनमें से 23,000 से अधिक सीटें एक वर्ष में ही जोड़ी जा चुकी हैं।

श्री नड्डा ने इस बात का भी उल्‍लेख किया कि आज देश में 18 लाख से अधिक आयुष्मान आरोग्य मंदिर कार्यरत हैं जो लोगों को व्यापक प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान कर रहे हैं। उन्होंने यह भी बताया कि विश्व की सबसे बड़ी स्वास्थ्य बीमा योजना, आयुष्मान भारत – पीएमजेएवाई योजना के तहत भारत की 40 प्रतिशत से अधिक आबादी यानी 62 करोड़ से अधिक लोगों को पांच लाख रुपये तक का स्वास्थ्य बीमा कवर मिल रहा है।

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने कहा “बुनियादी शिक्षा हर किसी का जन्मसिद्ध अधिकार है, लेकिन व्यावसायिक शिक्षा एक विशेषाधिकार है जो समाज केवल कुछ ही लोगों को प्रदान करता है।” उन्होंने यह उल्‍लेख किया कि सरकार प्रत्येक एमबीबीएस छात्र पर 30 से 35 लाख रुपये खर्च करती है और नए डॉक्टरों से आग्रह किया कि वे अपने पेशेवर करियर की शुरुआत करते ही समाज के प्रति अधिक जिम्मेदारियां निभाएं।

श्री नड्डा ने अपने संबोधन के समापन में, स्नातक छात्रों से अकादमिक और शोध क्षेत्र में सक्रिय योगदान देने और अपने पेशेवर और नैतिक आचरण में उत्कृष्टता के माध्यम से केजीएमयू की प्रतिष्ठित विरासत को बनाए रखने का आग्रह किया। उन्होंने उन्हें आजीवन सीखने वाले और नवप्रवर्तक बने रहने, चिकित्सा विज्ञान को आगे बढ़ाने और करुणा के साथ समाज की सेवा करने के लिए प्रोत्साहित किया।

श्री ब्रजेश पाठक ने युवा डॉक्टरों को उनकी उपलब्धियों पर बधाई देते हुए कहा कि केजीएमयू 120 वर्षों से अधिक समय से चिकित्सा शिक्षा, शोध और मानवता की सेवा के क्षेत्र में एक मिसाल कायम कर रहा है। उन्होंने उत्तर प्रदेश के चिकित्सा क्षेत्र में हुई प्रगति का जिक्र करते हुए कहा “2017 में सरकारी क्षेत्र में केवल 17 और निजी क्षेत्र में 23 मेडिकल कॉलेज थे  और आज राज्य में कुल 81 पूरी तरह से कार्यरत मेडिकल कॉलेज हो गए हैं।” उन्होंने आगे कहा “आज सभी 75 जिलों में डायलिसिस और सीटी स्कैन की सुविधा उपलब्ध है, एनएचएम के माध्यम से 5,000 से अधिक आबादी वाले क्षेत्रों में आयुष्मान आरोग्य मंदिर स्थापित किए गए हैं, और अतिरिक्त आईसीयू बेड के माध्यम से तृतीयक चिकित्सा सुविधाओं को मजबूत किया गया है।

इस अवसर पर उत्तर प्रदेश की राज्यपाल श्रीमती आनंदीबेन पटेल, उप मुख्यमंत्री एवं चिकित्सा शिक्षा, चिकित्सा, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री ब्रजेश पाठक, केन्द्रीय वित्त राज्य मंत्री पंकज कुमार, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री मयंकेश्वर शरण सिंह और केन्द्र सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार प्रोफेसर अजय कुमार सूद, केजीएमयू की कुलपति प्रो. सोनिया नित्यानंद (पद्म श्री पुरस्कार से सम्मानित), केजीएमयू की डीन और विश्वविद्यालय विधानसभा एवं कार्यकारी परिषद की सदस्य प्रो. अपजीत कौर तथा केंद्र सरकार और उत्तर प्रदेश सरकार के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।