विशेष हथकरघा प्रदर्शनी – साड़ी महोत्सव देश की हथकरघा विरासत

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वस्त्र मंत्रालय के सहयोग से राष्ट्रीय हथकरघा विकास निगम (एनएचडीसी) की ओर से नई दिल्ली के जनपथ स्थित हथकरघा हाट में विशेष हथकरघा प्रदर्शनी – साड़ी महोत्सव चल रहा है। यह प्रदर्शनी 20 दिसंबर  से दो जनवरी 2026 तक प्रतिदिन सुबह 11:00 बजे से रात 8:00 बजे तक जनता के लिए खुली रहेगी।

इस वर्ष इस साड़ी महोत्‍सव में देशभर से 90 प्रतिभागी भाग ले रहे हैं। इनमें से 72 स्टॉलों में हथकरघा उत्पादों की एक विस्तृत श्रृंखला प्रदर्शित की गई है, जिनमें मुख्य रूप से साड़ियां शामिल हैं। इसके साथ ही सलवार सूट, दुपट्टे, स्टोल, बेडशीट और ड्रेस मटेरियल भी प्रदर्शनी में रखे गए हैं, जबकि 18 स्टॉलों पर हस्तशिल्प वस्तुएं उपलब्‍ध हैं।

इस पहल का उद्देश्य भारत की समृद्ध हथकरघा विरासत को बढ़ावा देना, बुनकरों और कारीगरों को बाजार के अवसर प्रदान करना तथा पारंपरिक शिल्प क्षेत्र को मजबूत करना है। एनएचडीसी हथकरघा क्षेत्र में आजीविका बढ़ाने में मदद करने और भारत की सांस्कृतिक तथा वस्त्र परंपराओं के संरक्षण को सुनिश्चित करने पर लगातार ध्यान केंद्रित कर रहा है।

क्रिसमस पर आज शेयर बाजार बंद, कल होगा कारोबार

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नई दिल्‍ली, 25 दिसंबर क्रिसमस के अवसर पर घरेलू शेयर बाजार हफ्ते के चौथे कारोबारी दिन गुरुवार को बंद रहेगा। शेयर बाजार के दोनों प्रमुख सूचकांक बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) पर कारोबार नहीं होगा। अब शेयर बाजार शुक्रवार को खुलेगा और बीएसई और एनएसई पर ट्रेडिंग होगा।

शेयर बाजार के साथ आज इक्विटी, इक्विटी डेरिवेटिव्स, एसएलबी, करेंसी डेरिवेटिव्स और इंटरेस्ट रेट डेरिवेटिव्स सेगमेंट में कोई ट्रेडिंग नहीं होगी। इसके अलावा कमोडिटी मार्केट भी आज बंद रहेगा और ट्रेडिंग नहीं होगी। वहीं, एमसीएक्स और एनसीडीईएक्स दोनों ही एक्सचेंज में मॉर्निंग और ईवनिंग सेशन बंद रहेंगे।

उल्‍लेखनीय है कि बुधवार को शेयर बाजार उतार-चढ़ाव भरे कारोबार में लाल निशान पर बंद हुआ। बीएसई का सेंसेक्‍स 116.14 अंक यानी 0.14 फीसदी टूटकर 85,408.70 अंक पर बंद हुआ। वहीं, एनएसई का निफ्टी 37.45 अंक यानी 0.14 फीसदी अंक की गिरावट के साथ 26,139.70 के स्‍तर पर बंद हुआ था।

कैलिफोर्निया में तूफान, भारी बारिश, काफी हिस्सा बाढ़ से घिरा

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सैक्रामेंटो (कैलिफोर्निया), 25 दिसंबर (हि.स.)। कैलिफोर्निया को बुधवार को शक्तिशाली तूफान का सामना करना पड़ा। इस दौरान तेज हवा चलने लगी। कुछ देरबाद बरसात शुरू हो गई। देखते-देखते नदियां उफना गईं। कई इलाके बाढ़ से घिर गए। सड़कों में मलबा बहने लगा। कुछ जगहों पर बाढ़ में फंसे लोगों को बचाया गया। मौसम एवं विज्ञान विभाग ने कहा कि दक्षिणी कैलिफोर्निया में सालों बाद क्रिसमस पर सबसे अधिक बारिश हो सकती है।

सीबीएस न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार, अधिकारियों ने आकस्मिक बाढ़ और भूस्खलन की चेतावनी जारी की है। जनवरी में जंगल की आग से प्रभावित कुछ इलाकों में लोगों को सुरक्षित जगहों पर जाने को कहा गया। लॉस एंजिल्स काउंटी के अधिकारियों ने कहा कि जर्जर घरों में रहने वाले लगभग 380 लोगों को सुरक्षित जगहों पर भेजा गया है।

लॉस एंजिल्स दमकल विभाग ने बुधवार सुबह बताया कि दमकलकर्मियों ने उत्तर-पश्चिम में एक ड्रेनेज टनल में फंसे एक व्यक्ति को बचा लिया।

कैलिफोर्निया के गवर्नर गैविन न्यूजोम ने बुधवार को लॉस एंजिल्स, ऑरेंज, रिवरसाइड, सैन बर्नार्डिनो, सैन डिएगो और शास्ता काउंटियों में आपातकाल की घोषणा की। नेशनल वेदर सर्विस ने मंगलवार देरशाम तूफान आने की चेतावनी जारी की थी।

लॉस एंजिल्स के अधिकारियों के अनुसार, तूफान के दौरान पेड़ और बिजली के तार टूट कर गिर गए। इस वजह से कई प्रमुख सड़कें बंद हो गई हैं। नेशनल वेदर सर्विस के मौसम विज्ञानी माइक वॉफोर्ड ने कहा कि दक्षिणी कैलिफोर्निया में आमतौर पर साल के इस समय आधा इंच से एक इंच बारिश होती है, लेकिन इस हफ्ते कई इलाकों में चार से आठ इंच बारिश हो सकती है। लॉस एंजिल्स पुलिस ने लोगों से जर्जर और कमजोर हो चुके घरों में न रहने की अपील की है।

कोहरे के कारण दिल्ली हवाई अड्डे की 16 उड़ानें रद्द

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कोहरे और कम दृश्यता की स्थिति के कारण दिल्ली हवाई अड्डे पर बुधवार को कम से कम 16 उड़ानें रद्द कर दी गईं, जबकि कई अन्य उड़ानें विलंबित हुईं।

एक अधिकारी ने बताया कि कोहरे और कम दृश्यता की स्थिति के कारण इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर 11 आगमन और पांच प्रस्थान उड़ानें रद्द कर दी गईं। अधिकारी ने बताया कि हवाई अड्डे पर कई अन्य उड़ानों के आगमन एवं प्रस्थान में विलंब हुआ।

कर्नाटक के चित्रदुर्ग में लॉरी से टक्कर के बाद बस में लगी आग, नौ यात्री जिंदा जले

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चित्रदुर्ग (कर्नाटक), 25 दिसंबर (हि.स.)। कर्नाटक के चित्रदुर्ग जिले में हिरियूर तालुक के गोरलाहट्टू गांव के पास आज तड़के एक लॉरी से टक्कर के बाद बस में आग लग गई। इस हादसे में नौ से ज्यादा यात्री जिंदा जल गए। आग लगने से राख हुई निजी स्लीपर कोच बस है।

पुलिस के अनुसार, बेंगलुरु से गोकर्ण जा रही बस को एक लॉरी ने सामने से टक्कर मार दी और उसमें तुरंत आग लग गई। यह हादसा गोरलाहट्टू गांव के पास राष्ट्रीय राजमार्ग 48 पर हुआ। पुलिस का कहना है कि हादसे में मरने वालों की संख्या बढ़ सकती है। वहीं, हादसे में कई लोग गंभीर रूप से घायल हो गए, जिनका पास के ही अस्पताल में इलाज जारी है।

पुलिस की शुरुआती जांच में ट्रक चालक की लापरवाही की बात सामने आई है। चित्रदुर्ग के पुलिस अधीक्षक रंजीत ने घटनास्थल का दौरा किया। उन्होंने बताया कि हिरियूर ग्रामीण थाना में मामला दर्ज कर लिया गया है और दुर्घटना के कारणों का पता लगाने के लिए आगे की जांच जारी है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि कर्नाटक में हुई दुर्घटना में हुई जानमाल की हानि से गहरा दुख हुआ है। मृतकों के परिजनों के प्रति हमारी गहरी संवेदना है। घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना करते हैं। प्रत्येक मृतक के परिजनों को प्रधानमंत्री राष्ट्रीय सुरक्षा बल (पीएमएनआरएफ) की ओर से 2 लाख रुपये की अनुग्रह राशि दी जाएगी। घायलों को 50,000 रुपये दिए जाएंगे।

तमिलनाडु में तिरुचिरापल्ली नेशनल हाइवे पर बस दो कारों से टकराई, नौ की मौत

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कदालूर (तमिलनाडु), 25 दिसंबर (हि.स.)। तमिलनाडु में तिरुचिरापल्ली-चेन्नई राष्ट्रीय राजमार्ग पर रात को हुए सड़क हादसे में सात लोगों की जान चली गई। यह हादसा टायर फटने से अनियंत्रित हुई तमिलनाडु राज्य एक्सप्रेस ट्रांसपोर्ट कॉर्पोरेशन की बस के दो कारों से टकराने की वजह से हुई। अस्पताल में भर्ती कराए गए घायलों में से दो और लोगों के दम तोड़ देने से मृतकों की संख्या बढ़कर नौ हो गई।

मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने दुर्घटना में मारे गए व्यक्तियों के परिवारों और उनके संबंधियों के प्रति अपनी गहरी संवेदना व्यक्त की है। उन्होंने हर मृतक के परिवार को तीन लाख रुपये और गंभीर रूप से घायल लोगों को एक-एक लाख रुपये मुख्यमंत्री सार्वजनिक राहत निधि से देने का भी आदेश दिया है।

पुलिस के अनुसार, राहत और बचाव कार्य के दौरान सात लोग मौके पर ही मृत मिले। गंभीर रूप से घायल छह लोगों को उपचार के लिए पेरम्बलूर सरकारी अस्पताल भेजा गया। वहां दो लोगों ने दम तोड़ दिया ।बाकी चार लोगों की हालत गंभीर बनी हुई है। मृतकों में कार सवार उद्यमी राजरत्नम (67), उनकी पत्नी राजेश्वरी (57), कारचालक जयकुमार (30) के रूप में हुई है। दूसरी कार के हताहत लोगों की भी पहचान हो गई है। उनमें तिरुची के तिरुवारंपथ कत्तूर के मोहम्मद फारूक (45), उनकी पत्नी रिबाना (33), उनकी बेटी ताज्बिर्का (10) और बेटा अब्दुल पाठा (सात) हैं। अस्पताल में दम तोड़ने वालों में पुडुकोत्तई के कालिप नगर के सिराजुद्दीन की पत्नी गुरजिस फातिमा (32) और उनका बेटा अजिज अहमद (तीन) हैं।

पुलिस ने बताया कि गंभीर रूप से घायल पिल्लई टनेरिन पंडाल के मोहम्मद कासिम, उनकी पत्नी अमीशा (52) और सिराजुद्दीन के पुत्र अक़्तुल अजीज (आठ) और अब्दुल अहमद (छह) का इलाज चल रहा। दुर्घटना में घायल मोहम्मद कासिम के बेटे सिराजुद्दीन को चेन्नई हवाई अड्डे से कनाडा जाना था। मोहम्मद फारूक और मोहम्मद कासिम का परिवार उन्हें छोड़ने के लिए कार से चेन्नई गया था। वह लोग सिराजुद्दीन को हवाई अड्डे पर छोड़कर कारसे घर लौट रहे थे।

पुलिस अधिकारियों के अनुसार, यह बस तिरुचिरापल्ली से चेन्नई जा रही थी। कदालूर जिले के तिट्टुकुड़ी के उपतूरू इलाके में अचानक बस का टायर फट गया। इससे चालक का बस से नियंत्रण खो गया। अनियंत्रित बस बैरियर तोड़ते हुए विपरीत दिशा में चली गई और चेन्नई से तिरुचिरापल्ली जा रही दो कारों से टकरा गई। दोनों कारें बस के नीचे फंसकर चकनाचूर हो गईं।

बहुमुखी प्रतिभा के धनी कलाकार सतीश गुजराल

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सतीश गुजराल भारतीय कला जगत के एक ऐसे बहुमुखी प्रतिभा के धनी कलाकार थे जिन्होंने चित्रकला, मूर्तिकला, वास्तुकला और लेखन के क्षेत्र में अपनी अमिट छाप छोड़ी। उनका जन्म २६ दिसंबर १९२५ को झेलम, पंजाब में हुआ था, जो अब पाकिस्तान में है। वे भारत के पूर्व प्रधानमंत्री इंद्र कुमार गुजराल के छोटे भाई थे। बचपन में एक दुर्घटना के कारण वे लगभग बहरे हो गए थे, लेकिन इस शारीरिक चुनौती ने उनकी रचनात्मकता को कभी बाधित नहीं किया, बल्कि उन्होंने अपनी कला के माध्यम से अपनी अभिव्यक्ति को और भी सशक्त बनाया।


सतीश गुजराल की प्रारंभिक शिक्षा लाहौर में हुई। उन्होंने मायो कला विद्यालय, लाहौर से कला की शिक्षा प्राप्त की। १९४७ के विभाजन ने उनके जीवन को गहराई से प्रभावित किया। विभाजन की त्रासदी और हिंसा ने उनकी कला में एक गहन संवेदनशीलता और मानवीय पीड़ा के प्रति सजगता को जन्म दिया। इस कठिन समय के अनुभवों ने उनकी कलाकृतियों में एक विशिष्ट गहराई और भावनात्मक तीव्रता प्रदान की। विभाजन के बाद वे अपने परिवार के साथ भारत आ गए और यहीं से उनकी कलात्मक यात्रा का नया अध्याय शुरू हुआ।
उच्च शिक्षा के लिए गुजराल ने मुंबई के जे जे कला विद्यालय में प्रवेश लिया और बाद में वे मैक्सिको गए जहां उन्होंने प्रसिद्ध भित्ति चित्रकार डिएगो रिवेरा और डेविड सिकेरोस के साथ कार्य किया। मैक्सिको में बिताए गए समय ने उनकी कला शैली को व्यापक आयाम दिए। वहां के जीवंत रंगों, सामाजिक यथार्थवाद और भित्ति चित्रण की परंपरा ने उन्हें गहराई से प्रभावित किया। इस अनुभव ने उनकी कला में बड़े आकार के चित्रों और साहसिक रंग योजनाओं का समावेश किया।
सतीश गुजराल की कला में विभिन्न शैलियों और माध्यमों का अद्भुत संगम देखने को मिलता है। उन्होंने तैल चित्रण, जल रंग, भित्ति चित्र, मूर्तिकला, चीनी मिट्टी के बर्तन और अन्य कई माध्यमों में काम किया। उनकी कलाकृतियों में भारतीय परंपरा और आधुनिक पश्चिमी कला का सुंदर मेल देखा जा सकता है। उनके चित्रों में रंगों का प्रयोग बेहद साहसिक और प्रभावशाली था। वे गहरे और चटकीले रंगों का उपयोग करते थे जो दर्शकों को तुरंत अपनी ओर आकर्षित करते थे।
उनकी कला में विभाजन की पीड़ा, मानवीय संघर्ष, सामाजिक विषमताएं और जीवन के विभिन्न पहलू प्रमुखता से दिखाई देते हैं। उनके चित्रों में अक्सर विकृत आकृतियां, तीव्र भावनाएं और गहरी मानवीय पीड़ा की अभिव्यक्ति मिलती है। विभाजन की त्रासदी उनकी अनेक कृतियों का केंद्रीय विषय रही। उन्होंने अपनी आत्मकथा में भी इस दौर के अनुभवों को बहुत मार्मिकता से व्यक्त किया है।
वास्तुकला के क्षेत्र में भी सतीश गुजराल ने महत्वपूर्ण योगदान दिया। उन्होंने अनेक भवनों, होटलों और सार्वजनिक स्थानों का डिजाइन तैयार किया। बेल्जियम में भारतीय दूतावास की इमारत उनकी वास्तुकला कौशल का एक उत्कृष्ट नमूना है। उन्होंने वास्तुकला में कला को समाहित करने का अनूठा प्रयास किया और भवनों को केवल निर्माण न मानकर उन्हें कलात्मक अभिव्यक्ति का माध्यम बनाया।
मूर्तिकला में भी उनका योगदान उल्लेखनीय रहा। उन्होंने कांस्य, लकड़ी और अन्य सामग्रियों से बेहतरीन मूर्तियां बनाईं। उनकी मूर्तियां भी उनके चित्रों की तरह ही भावनात्मक रूप से सशक्त और विचारोत्तेजक होती थीं। उन्होंने परंपरागत और आधुनिक दोनों शैलियों में मूर्तिकला का कार्य किया।
सतीश गुजराल को उनके असाधारण योगदान के लिए अनेक पुरस्कार और सम्मान प्राप्त हुए। १९५४ में उन्हें राष्ट्रीय कला प्रदर्शनी में स्वर्ण पदक मिला। १९७२ में भारत सरकार ने उन्हें पद्म श्री से सम्मानित किया। १९९९ में उन्हें कला जगत में उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए पद्म विभूषण से नवाजा गया, जो भारत का तीसरा सर्वोच्च नागरिक सम्मान है।
उनकी कलाकृतियां विश्व भर के प्रमुख संग्रहालयों और निजी संग्रहों में सुरक्षित हैं। उनकी प्रदर्शनियां भारत और विदेशों में लगीं और सराही गईं। उनकी कला ने न केवल भारतीय कला जगत को समृद्ध किया बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी भारतीय कला का सम्मान बढ़ाया।
लेखन के क्षेत्र में भी सतीश गुजराल ने अपनी प्रतिभा का परिचय दिया। उनकी आत्मकथा बहुत प्रशंसित हुई जिसमें उन्होंने अपने जीवन संघर्ष, विभाजन की त्रासदी और कला यात्रा का मार्मिक वर्णन किया। उनका लेखन उतना ही सशक्त और प्रभावशाली था जितनी उनकी कलाकृतियां।
सतीश गुजराल का निधन २३ मार्च २०२० को दिल्ली में हुआ। वे ९४ वर्ष की आयु में इस संसार से विदा हुए। उनकी मृत्यु के साथ भारतीय कला जगत ने एक महान कलाकार को खो दिया, लेकिन उनकी कलाकृतियां और उनका योगदान हमेशा भारतीय कला के इतिहास में अमर रहेगा। वे एक ऐसे कलाकार थे जिन्होंने अपनी शारीरिक सीमाओं को कभी अपनी रचनात्मकता पर हावी नहीं होने दिया और जीवन भर कला साधना में लीन रहे। उनका जीवन और कार्य आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बना रहेगा।(सोनेट)

समकालीन भारतीय कलाकारों में एक महत्त्वपूर्ण शख्सियत, चित्रकार, मूर्तिकार, वास्तुकार और ग्राफिक डिज़ायनर के रूप में प्रख्यात सतीश गुजराल भारत के पूर्व प्रधानमन्त्री इन्द्र कुमार गुजराल के छोटे भाई हैं। 25 दिसम्बर, 1925 को पंजाब के झेलम (अब पाकिस्तान) में जन्मे सतीश गुजराल को बचपन में पैर फिसलने के कारण टांगों और सिर में काफी चोट आई जिसके कारण इन्हें कम सुनाई पड़ने लगा था। अपनी शारीरिक व्यथा के बावजूद संघर्षशील कला सृजन से उन्होंने जीवन में सफलता पाई जो उनकी कला जिजीविषा का परिणाम है। उन्होंने लाहौर के मेयो स्कूल ऑफ आर्ट में कला अध्ययन के पश्चात बॉम्बे में प्रसिद्ध सर जे जे स्कूल आफ आर्ट में दाखिला लिया और एक छात्रवृत्ति मिलने के बाद मैक्सिको के प्लेसिया नेशनल डी बेल्लास आर्ट्स में प्रसिद्ध कलाकार दिएगो रिवेरा और डेविड एलफेरो सिक्विरो के साथ काम किया। इसके बाद उन्होंने इंग्लैण्ड के इम्पीरियल सर्विस कॉलेज विंडसर में भी कला का विधिवत अध्ययन किया। सतीश गुजराल ने अपनी रचना यात्रा में कभी भी सीमाएं नहीं खींचीं और माध्यमों के क्षेत्र में व्यापक प्रयोग किये। रंग और कूची के साथ साथ सिरामिक, काष्ठ, धातु और पाषाण — उन्होंने हर माध्यम के प्रयोग से अपनी कलात्मक रचनाशीलता का परिचय दिया। भारत विभाजन को देखने-समझने वाले सतीश गुजराल के इस विषय पर चित्रों में तत्कालीन समाज में व्याप्त त्रासदी व पीड़ा रूपक के रूप में प्रस्तुत होती रही हैं। धूसर, काला और सफेद रंगो से बने ऐसे चित्रों में एक तैलचित्र ‘विनाश का गीत’ है जिसमें एक आतंकित पुरुष के चेहरे पर भय, क्रोध और पीड़ा का मिलाजुला भाव दिखाया है। अपने वैविध्यपूर्ण रचनाक्रम में अमूर्त चित्रण और चटकीले रंगों के सुन्दर संयोजन के अलावा वे आकृति प्रधान चित्रों के लिये जाने जाते हैं। जब वे विशेष रूप से निर्मित खुरदुरी सतह पर एक्रेलिक से चित्रांकन करते हैं, तब ये आकृतियां एक दूसरे में विलीन होकर विभिन्न ज्यामितीय आकारों में स्थित होकर रंगों के परस्पर संगत प्रभाव और विभिन्न बिम्बों के आकर्षण से चित्रों की मोहकता बढ़ाती है। उन्होंने अपनी कलाकृतियों में जीव-जन्तुओं और पक्षियों को सहज स्थान देने के साथ इतिहास, लोक कथाओं, पुराणों, प्राचीन भारतीय संस्कृति और विविध धर्मों के प्रसंगों से भी प्रेरणा लिया। पचास के दशक में उन्होंने कृष्ण मेनन, अपने पिता, जवाहरलाल नेहरू और लाला लाजपतराय जैसे कई व्यक्ति चित्र भी बनाए हैं। साठ के दशक में उनके चित्रों की रचना शैली और संरचना बदलने के बाद साल 1968 का कागज के ऊपर काली स्याही और पेन्सिल से बनाया गया श्वेत-श्याम चित्र उनकी आकृतिपरक चित्रकारी का उम्दा नमूना है। एक वास्तुकार के रूप में उन्होंने दुनियाभर के अनेक इमारतों की शानदार वास्तु परियोजनाएं तैयार की हैं। दिल्ली हाईकोर्ट, शास्त्री भवन, गोवा विश्वविद्यालय, लखनऊ का आम्बेदकर मेमोरियल इत्यादि की वास्तुकला उनके बहुप्रशंसित कार्यों में शामिल हैं। उन्होंने नई दिल्ली स्थित बेल्जियम के दूतावास का भी डिजाईन बनाया जिसे ‘इंटरनेशनल फोरम ऑव आर्किटेक्ट्स’ द्वारा बीसवीं सदी की सर्वश्रेष्ठ इमारतों की सूची में स्थान दिया गया है। कला के क्षेत्र में उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए उन्हें 1999 में पद्म विभूषण, तीन बार कला का राष्ट्रीय पुरस्कार (दो बार चित्रकला और एक बार मूर्तिकला के लिये), मेक्सिको का ‘लियो नार्डो द विन्ची’ और बेल्जियम के राजा का ‘आर्डर ऑफ़ क्राउन’ जैसे अनेक पुरस्कारों से सम्मानित किया गया है। सतीश गुजराल की आत्मकथा के अतिरिक्त उनके व्यक्तित्व व कृतित्व पर तीन और पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं और कई वृत्तचित्र भी बनी हैं। उनकी बड़ी बेटी अल्पना ज्वेलरी डिज़ाइनर तथा दूसरी बेटी रसील एक इंटीरियर डिज़ाइनर हैं।

इतिहास के पन्नों में 26 दिसंबर : 2004 में हिंद महासागर की सुनामी दुनिया को हिला दिया

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26 दिसंबर, 2004 को विश्व इतिहास की सबसे भीषण प्राकृतिक आपदाओं में से एक ने एशिया और हिंद महासागर क्षेत्र को झकझोर कर रख दिया। रिक्टर पैमाने पर 9.3 तीव्रता का शक्तिशाली भूकंप इंडोनेशिया के सुमात्रा तट के पास आया। इसके बाद उठी भीषण सुनामी लहरों ने कई देशों में अभूतपूर्व तबाही मचाई।

इस आपदा का सबसे ज्यादा असर इंडोनेशिया, श्रीलंका, भारत, थाईलैंड, मलेशिया, मालदीव और आसपास के तटीय क्षेत्रों में देखा गया। कई जगहों पर समुद्र की लहरें बस्तियों में कई किलोमीटर तक घुस गईं, जिससे घर, सड़कें, पुल और पूरा का पूरा बुनियादी ढांचा तबाह हो गया।

आंकड़ों के अनुसार, इस सुनामी में करीब दो लाख 30 हजार लोगों की जान गई, जबकि लाखों लोग बेघर हो गए। भारत में तमिलनाडु, अंडमान-निकोबार द्वीपसमूह, आंध्र प्रदेश और केरल के तटीय इलाकों में भारी नुकसान हुआ। श्रीलंका और इंडोनेशिया में भी हजारों गांव पूरी तरह नष्ट हो गए।

इस महाविनाश ने न केवल जन-जीवन को प्रभावित किया, बल्कि आपदा प्रबंधन की वैश्विक सोच को भी बदल दिया। इसके बाद हिंद महासागर क्षेत्र में सुनामी चेतावनी प्रणाली स्थापित की गई, ताकि भविष्य में ऐसी त्रासदियों से समय रहते बचाव किया जा सके। यह सुनामी आज भी मानव इतिहास की सबसे दर्दनाक आपदाओं में गिनी जाती है और यह हमें प्रकृति की अपार शक्ति तथा सतर्कता और तैयारी के महत्व की याद दिलाती है।

महत्वपूर्ण घटनाचक्र

1748 – फ्रांस और आस्ट्रिया के बीच दक्षिणी हॉलैंड को लेकर समझौते पर हस्ताक्षर किये गये।

1904 – दिल्ली से मुंबई के बीच देश की पहली क्रॉस कंट्री मोटरकार रैली का उद्घाटन।

1925 – तुर्की में ग्रेगोरियन कैंलेडर अपनाया गया।

1925 – भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी की स्थापना।

1977 – सोवियत संघ ने पूर्वी कजाख क्षेत्र में परमाणु परीक्षण किया।

1978 – भारत की पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को जेल से रिहा किया गया।

1997 – उड़ीसा की प्रमुख पार्टी, बीजू जनता दल (बीजद) की स्थापना वरिष्ठ राजनेता बीजू पटनायक के पुत्र नवीन पटनायक ने की।

2002 – संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिक्षद ने डेमोक्रेटिक रिपब्लिक आफ़ कांगो में पुन: संघर्ष शुरू होने की सूचना दी।

2003 – रिक्टर पैमाने पर 6.6 की तीव्रता वाले भूकंप से ईरान के दक्षिणी पूर्वी शहर बाम में भारी तबाही।

2004 – रिक्टर पैमाने पर 9.3 की तीव्रता वाले भूकंप से आई सुनामी के कारण श्रीलंका, इंडिया, इंडोनेशिया, थाईलैंड, मलेशिया, मालदीव और आस पास के क्षेत्रों में भारी तबाही। दो लाख तीस हजार लोगों की मौत।

2006 – शेन वार्न ने अंतर्राष्ट्रीय टेस्ट क्रिकेट में 700 विकेट लेकर इतिहास रचा।

2007 – तुर्क विमानों ने इराकी कुर्द ठिकानों पर हमले किये।

2008 – कृतिका को हराकर तानिया संयुक्त शीर्ष पर पहुँची।

2012 – चीन की राजधानी बीजिंग से ग्वांग्झू शहर तक बनाए गए दुनिया के सबसे लंबे हाई स्पीड रेलमार्ग को खोला गया।

जन्म

1666 – सिखों के दसवें गुरु गाेविन्द सिंह का जन्म।

1716 – थॉमस ग्रे – 18वीं शताब्दी के प्रसिद्ध अंग्रेज़ी कवियों में से एक।

1899 – अमर शहीद ऊधम सिंह – स्वतंत्रता सेनानी।

1929 -तारक मेहता – गुजराती साहित्यकार थे।

1935 – माबेला अरोल – भारतीय समाज सेवी महिला थीं।

1935 – विद्यानंद जी महाराज – प्रसिद्ध संत-महात्माओं में से एक हैं।

1948 – प्रकाश आम्टे – प्रसिद्ध सामाजिक कार्यकर्ता तथा चिकित्सक हैं।

निधन

1530 – बाबर – मुगल सम्राट

1831 – हेनरी लुईस विवियन डेरोजियो – कवि का कलकत्ता(अब कोलकाता)।

1961 – भूपेंद्रनाथ दत्त – भारत के स्वतंत्रता संग्राम के प्रसिद्ध क्रांतिकारी, लेखक तथा समाजशास्त्री थे।

1966 – गोपी चन्द भार्गव – ‘गांधी स्मारक निधि’ के प्रथम अध्यक्ष, गाँधीवादी नेता, स्वतंत्रता सेनानी और पंजाब के प्रथम मुख्यमंत्री।

1976 – यशपाल – हिन्दी के यशस्वी कथाकार और निबन्ध लेखक

1986 – बीना दास – भारत की महिला क्रांतिकारियों में से एक।

1989 – के. शंकर पिल्लई – जिन्हें शंकर के नाम से जाता है, प्रसिद्ध भारतीय कार्टूनिस्ट थे।

1998 – राम स्‍वरूप, वैदिक परम्परा के प्रमुख बुद्धिजीवी थे।

1999 – शंकरदयाल शर्मा – भारत के नवें राष्ट्रपति।

2011 – एस. बंगरप्पा – भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के राजनीतिज्ञ तथा कर्नाटक के भूतपूर्व 12वें मुख्यमंत्री थे।

2015 – पंकज सिंह – समकालीन हिन्दी कविता के महत्त्वपूर्ण कवि।

2024 – मनमोहन सिंह – भारत के पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह का निधन।

महत्वपूर्ण दिवस

-वीर बाल दिवस।

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हिन्दुस्थान समाचार / आकाश कुमार राय

आरक्षण पर डकैती डालने का काम कर रही सरकार : लाल बिहारी यादव

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आरक्षण के मुद्दे पर सपा सदस्यों ने नारेबाजी करते हुए सदन से किया वाकआउट

लखनऊ,24 दिसम्बर (हि.स.)। शीतकालीन सत्र के दौरान विधान परिषद में बुधवार को नियम 105 के तहत चर्चा के दौरान समाजवादी पार्टी के सदस्यों ने नौकरियों में आरक्षण का मुद्दा उठाया। नेता विरोधी दल लाल बिहारी यादव ने कहा कि प्रदेश सरकार खुलेआम आरक्षण पर डकैती डालने का काम कर रही है। इनकी कथनी करनी में अंतर है। ईडब्ल्यू एस को 10 प्रतिशत आरक्षण दिया जा रहा है। हम लोगों को इससे भी कम दिया जा रहा है। 40 प्रतिशत सीटों को सामान्य वर्ग के लिए आरक्षित कर दिया जा रहा है।

लाल बिहारी यादव ने कहा कि 69 हजार शिक्षक भर्ती में गड़बड़ी हुई। अभ्यर्थी सड़कों पर धरना दे रहे हैं। यह सरकार भ्रष्टाचार में आकंठ डूबी हुई है। सरकार आरक्षण समाप्त करना चाहती है। नौजवानों को रोजगार मिले यह सरकार नहीं चाहती। यूपी में नौजवानों को बेरोजगार करने की साजिश रची जा रही है। पिछड़े,दलित,अल्पसंख्यकों के आरक्षण पर डाका डाला जा रहा है। लेखपाल भर्ती में आरक्षण का पालन नहीं किया गया।

नेता विरोधी दल ने कहा कि सरकार संविधान का उल्लंघन कर रही है। ओबीसी,एससी,एसटी को नौकरी में आरक्षण की व्यवस्था है। सरकार इसका पालन क्यों नहीं करती। सरकार आरक्षण में गड़बड़ी करने वाले उन अधिकारियों पर कार्रवाई क्यों नहीं करती। सरकार के सह पर पिछड़े व अनुसूचित जाति के लोगों का गला घोंटा जा रहा है। उन्होंने एसजीपीजीआई में सहायक अध्यापक के पद पर ओबीसी व एससी के विज्ञापन में आरक्षण का अनुपालन नहीं किया गया। इसके जवाब में जब नेता सदन केशव प्रसाद मौर्य बोलने खड़े हुए तो सपा सदस्यों ने सरकार विरोधी नारेबाजी करते हुए सदन से वाकआउट किया।

अटल जी ने राष्ट्र को सेवा के लिए सत्ता का मंत्र दिया: धर्मपाल सिंह

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लखनऊ, 24 दिसम्बर (हि.स.)। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेयी की जयन्ती की पूर्व संध्या पर बुधवार को प्रदेश भारतीय जनता पार्टी मुख्यालय पर पार्टी पदाधिकारियों व कार्यकर्ताओं ने अटल जी को दीपांजलि अर्पित करते हुए नमन किया। इसके साथ ही प्रदेश में अटल जी के सभी स्मारकों तथा जिला भाजपा कार्यालयों में दीपांजलि अर्पित करके सुशासन के अग्रदूत को नमन किया।

प्रदेश भाजपा मुख्यालय में प्रदेश महामंत्री (संगठन) धर्मपाल सिंह ने बडी संख्या में पार्टी पदाधिकारियों, कार्यकर्ताओं तथा स्थानीय नागरिकों के साथ दीपांजलि अर्पित करके श्रद्धेय अटल जी को नमन किया। धर्मपाल सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री के रूप में अटल जी ने सुशासन, राष्ट्रीय सुरक्षा, अर्थिक सुदृढ़ता तथा भारत की वैश्विक प्रतिष्ठा को नई ऊंचाईयों तक पहुंचाया । पोखरण परीक्षण से लेकर ग्राम सड़क योजना तक उनके निर्णयों ने आत्मनिर्भर और सशक्त भारत की नींव रखी। उनकी वाणी में कविता थी और कर्म में राष्ट्र। उन्होंने सेवा के लिए सत्ता का मंत्र राष्ट्र को दिया।

प्रदेश भाजपा मुख्यालय पर दीपांजलि अर्पित करने वालों में प्रदेश उपाध्यक्ष कान्ताकर्दम, प्रदेश महामंत्री अनूप गुप्ता,संजय राय, राम प्रताप सिंह चौहान, प्रदेश मंत्री शंकर लोधी, प्रदेश मुख्यालय प्रभारी भारत दीक्षित, प्रदेश मुख्यालय सह प्रभारी अतुल अवस्थी, चौधरी लक्ष्मण सिंह सहित बडी संख्या में पार्टी कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

प्रदेश मीडिया सह प्रभारी हिमांशु दुबे ने बताया कि अटल जी की जन्म जयन्ती 25 दिसम्बर से एक दिन पूर्व बुधवार को प्रदेश में श्रद्धेय अटल जी के सभी स्मारकों पर पार्टी के कार्यकर्ताओं, पदाधिकारियों, जनप्रतिनिधियों ने स्थानीय नागरिकों के साथ स्वच्छता की तथा पुष्पार्चन किया। सायंकाल स्मारकों तथा भाजपा जिला कार्यालयों पर दीपांजलि अर्पित करते हुए श्रद्धेय अटल जी को कृतज्ञ नमन किया।