पाकिस्तान पर गंभीर आरोप: बलूचिस्तान में अपहरण और हत्याओं का सिलसिला जारी

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क्वेटा, 25 दिसंबर (हि.स.)। बलूचिस्तान में मानवाधिकार उल्लंघनों को लेकर एक बार फिर पाकिस्तान पर गंभीर आरोप लगे हैं। एक प्रमुख मानवाधिकार संगठन ने दावा किया है कि प्रांत में जबरन गायब किए जाने और लक्षित हत्याओं की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं, जिनमें पाकिस्तानी सुरक्षा बलों और खुफिया एजेंसियों की संलिप्तता बताई जा रही है।

ह्यूमन राइट्स काउंसिल ऑफ बलूचिस्तान (एचआरसीबी) की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, बीते एक महीने में बलूचिस्तान में जबरन गायब किए जाने के 106 नए मामले और 42 हत्याएं दर्ज की गईं। संगठन का कहना है कि इन घटनाओं पर कार्रवाई न होने से दंडमुक्ति का माहौल बना हुआ है।

रिपोर्ट के अनुसार, मारे गए लोगों में 11 ऐसे व्यक्ति शामिल थे जिन्हें पहले ही गायब कर दिया गया था। इसके अलावा पांच लोग उसी महीने अगवा किए गए थे, जबकि छह अन्य पूर्व महीनों में लापता हुए थे। नवंबर में उठाए गए लोगों में से केवल 12 को बाद में छोड़ा गया, जबकि अधिकांश का अब तक कोई पता नहीं है।

किस पर लगे सबसे ज्यादा आरोप

एचआरसीबी का दावा है कि सबसे अधिक 60 अपहरणों में पाकिस्तान की फ्रंटियर कोर की भूमिका सामने आई है। इसके बाद पाकिस्तानी खुफिया एजेंसियों पर 23 मामलों में आरोप लगे हैं, जबकि काउंटर टेररिज्म डिपार्टमेंट (CTD) पर 17 और कथित राज्य समर्थित डेथ स्क्वॉड्स पर छह मामलों में संलिप्तता बताई गई है।

जिलों में स्थिति

जिलावार आंकड़ों में केच सबसे अधिक प्रभावित रहा, जहां 20 अपहरण दर्ज हुए। इसके बाद क्वेटा (16), पंजगुर और डेरा बुगटी (14-14) मामले सामने आए। ग्वादर में 10 और कराची में 7 जबरन गायब किए जाने की घटनाएं दर्ज की गईं। इसके अलावा मस्तुंग, खुजदार, कोहलू, हब, अवारान, सुराब, चागई, डीजी खान और कलात से भी ऐसे मामले सामने आए हैं।

हत्याओं का विवरण

नवंबर में दर्ज 42 हत्याओं में 39 पुरुष और 3 महिलाएं शामिल थीं। पांच पीड़ितों की पहचान नहीं हो सकी। रिपोर्ट के अनुसार, 11 मामले लक्षित हत्याओं के थे, 10 हिरासत में मौत के, 10 शव बरामदगी से जुड़े, 4 ऑनर किलिंग, 4 हवाई हमलों से संबंधित, 2 अंधाधुंध फायरिंग और एक व्यक्ति की बाद में चोटों से मौत हुई।

परिजनों का विरोध प्रदर्शन

बुधवार को केच जिले में एक ही परिवार के चार सदस्यों के कथित जबरन गायब किए जाने के विरोध में गुरुवार को बलूच परिवारों ने धरना दिया। इस दौरान चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (सीपीईसी) के एक अहम राजमार्ग को लगातार दूसरे दिन जाम कर दिया गया। इससे तुरबत, क्वेटा, पंजगुर, अवारान, कोलवाह और होशाप के बीच यातायात प्रभावित रहा।

लापता लोगों में दो महिलाएं और दो युवक शामिल हैं, जिनमें एक महिला आठ महीने की गर्भवती बताई गई है।

मानवाधिकार कार्यकर्ताओं की चेतावनी

बलूच यकजहती कमेटी (बीवाईसी) की नेता और मानवाधिकार कार्यकर्ता सम्मी दीन बलूच ने सोशल मीडिया पर कहा कि बलूचिस्तान में जबरन गायब किए जाने की घटनाएं बेहद चिंताजनक स्तर पर पहुंच चुकी हैं और अब महिलाएं व लड़कियां भी इसका शिकार हो रही हैं।

उन्होंने कहा, “कानून और संविधान का इस्तेमाल बलूच लोगों को गायब करने के लिए किया जा रहा है। प्रभावित परिवारों के पास विरोध के अलावा कोई रास्ता नहीं बचा है। हम सभी से अपील करते हैं कि इन परिवारों के साथ खड़े हों और उनकी आवाज़ बुलंद करें।”

यह रिपोर्ट बलूचिस्तान में मानवाधिकारों की स्थिति को लेकर अंतरराष्ट्रीय समुदाय की चिंताओं को और गहरा करती है।

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बांग्लादेश में राजनीतिक हलचल बढ़ी, तारिक आज अपने पिता जिया-उर-रहमान की कब्र पर जाएंगे

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ढाका, 26 दिसंबर (हि.स.)। बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) के कार्यवाहक अध्यक्ष तारिक रहमान को आज दोपहर लंदन से लौटे लगभग 24 घंटे पूरे हो जाएंगे। पार्टी ने देश की पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया और दिवंगत पूर्व राष्ट्रपति जिया-उर-रहमान के बेटे तारिक के आगामी कुछ दिनों के सार्वजनिक कार्यक्रम की जानकारी दी है। तारिक के लौटते ही देश में राजनीतिक हलचल भी बढ़ गई है। बांग्लादेश की अंतरिम सरकार और नागरिकों ने घरवापसी पर उनकी जैसी आवभगत की है, उससे बीएनपी का सीना फूल गया है। तारिक आज अपने पिता की कब्र पर जाकर फूल चढ़ाएंगे।

ढाका ट्रिब्यून की रिपोर्ट के अनुसार, तारिक रहमान आज शुक्रवार को नमाज के बाद शेर-ए-बांग्ला नगर में दिवंगत राष्ट्रपति जिया-उर-रहमान की कब्र पर जाएंगे। बाद में वह मुक्ति संग्राम के शहीदों को श्रद्धांजलि देने सावर में राष्ट्रीय शहीद स्मारक जाएंगे। तारिक के आगामी तीन दिनों का कार्यक्रम गुलशन में बीएनपी अध्यक्ष खालिदा जिया के कार्यालय में आहूत संवाददाता सम्मेलन में जारी किया गया। पार्टी स्थायी समिति के सदस्य सलाहुद्दीन अहमद ने कहा कि तारिक 26 दिसंबर को शेर-ए-बांग्ला नगर का दौरा पूरा करने के बाद सावर जाएंगे।

अंतरिम सरकार ने लगभग 17 साल बाद स्वदेश लौटे तारिक रहमान को दो स्तरीय सुरक्षा (डबल लेयर सिक्योरिटी) प्रदान की है। तारिक के सावर दौरे के मद्देनजर राष्ट्रीय शहीद स्मारक के आसपास सुरक्षा के अभूतपूर्व इंतजाम किए गए हैं। पुलिस के एक हजार जवान अकेले परिसर की सुरक्षा व्यवस्था संभालेंगे। स्मारक के प्रभारी अनवर हुसैन खान अनु ने कहा, पूरे परिसर को साफकर झीलों की भी सफाई की गई है।

ढाका के वरिष्ठ पुलिस अधिकारी अराफातुल इस्लाम ने कहा, “ तारिक रहमान को बहुस्तरीय सुरक्षा प्रदान करने पर विचार किया जा रहा है। फिलहाल उन्हें डबल लेयर सिक्योरिटी प्रदान की गई है। गृह सलाहकार लेफ्टिनेंट जनरल (रिटायर्ड) मोहम्मद जहांगीर आलम चौधरी ने कहा कि तारिक रहमान की उच्चतम स्तर की सुरक्षा सुनिश्चित की गई है। इसके अलावा बीएनपी ने भी अपने स्तर सुरक्षा के इंतजाम किए हैं। रहमान की निजी सुरक्षा की जिम्मेदारी चेयरपर्सन सिक्योरिटी फोर्स संभालेगी। इस फोर्स में जातीयताबादी छात्र दल के पूर्व और वर्तमान सदस्यों को शामिल किया गया है। तारिक गुलशन एवेन्यू के मकान नंबर 196 में सपरिवार ठहरे हैं। पास में उनकी मां खालिदा का घर (फ़िरोजा) है। खालिदा लंबे से बीमार हैं। वह राजधानी के एक अस्पताल में भर्ती हैं। तारिक को 2007 में राजनीतिक बदलाव के बाद गिरफ्तार किया गया। 2008 में वे इलाज के लिए लंदन चले गए थे। 2024 में राजनीतिक बदलाव के बाद उनके बांग्लादेश लौटने का रास्ता साफ हुआ।

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विकास की पटरी पर कुचला वन्यजीवन

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– डॉ सत्यवान सौरभ

दिसंबर 2025 में असम के होजाई ज़िले में सात हाथियों—जिनमें शावक भी शामिल थे—की रेल दुर्घटना में हुई मृत्यु कोई साधारण हादसा नहीं थी। यह घटना भारत के विकास मॉडल और पर्यावरणीय संवेदनशीलता के बीच बढ़ते टकराव का प्रतीक बनकर सामने आई। तेज़ रफ्तार ट्रेन की चपेट में आकर न केवल हाथियों की जान गई, बल्कि इंजन और कई डिब्बों के पटरी से उतरने से यह भी स्पष्ट हुआ कि ऐसी घटनाएँ केवल वन्यजीवों के लिए ही नहीं, बल्कि मानव जीवन और सार्वजनिक संपत्ति के लिए भी गंभीर खतरा हैं।

हाथी भारत का “राष्ट्रीय धरोहर पशु” है और वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 की अनुसूची–I में संरक्षित है। इसके बावजूद, हर वर्ष रेलवे ट्रैक पर हाथियों की मौतें यह सवाल उठाती हैं कि क्या हमारा विकास सचमुच सतत है, या वह प्रकृति की कीमत पर आगे बढ़ रहा है। सरकारी आँकड़ों के अनुसार, पिछले दो दशकों में सैकड़ों हाथी ट्रेन दुर्घटनाओं में मारे जा चुके हैं, जिनमें असम, पश्चिम बंगाल, ओडिशा और झारखंड सबसे अधिक प्रभावित राज्य हैं।

भारत में रेलवे लाइनों, राष्ट्रीय राजमार्गों, बिजली ट्रांसमिशन लाइनों और अन्य रेखीय अवसंरचनाओं का तेज़ी से विस्तार हुआ है। यह विस्तार आर्थिक प्रगति के लिए आवश्यक माना गया, किंतु समस्या तब उत्पन्न होती है जब ये परियोजनाएँ वनों, घास के मैदानों और आर्द्रभूमियों को बिना पर्याप्त पारिस्थितिक योजना के काटती हुई आगे बढ़ती हैं। रेलवे ट्रैक विशेष रूप से घातक सिद्ध होते हैं क्योंकि ट्रेनें न तो दिशा बदल सकती हैं और न ही अचानक रुक सकती हैं। दूसरी ओर, हाथियों की दृष्टि क्षमता सीमित होती है और उनका भारी शरीर तेज़ प्रतिक्रिया में बाधक बनता है।

हाथी बड़े भूभाग में विचरण करने वाले जीव हैं और भोजन, पानी तथा प्रजनन के लिए पारंपरिक प्रवासी मार्गों पर निर्भर रहते हैं। जब रेलवे लाइनें इन गलियारों को काट देती हैं, तो हाथियों के सामने ट्रैक पार करने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचता। दुर्भाग्य से, अनेक दुर्घटना-प्रवण क्षेत्र आज भी आधिकारिक रूप से “हाथी गलियारे” घोषित नहीं किए गए हैं। असम का होजाई क्षेत्र इसका प्रत्यक्ष उदाहरण है, जहाँ वर्षों से हाथियों की नियमित आवाजाही के बावजूद कानूनी संरक्षण का अभाव रहा है।

दुर्घटनाओं का एक प्रमुख कारण ट्रेनों की अत्यधिक गति भी है। पर्यावरणीय रूप से संवेदनशील क्षेत्रों में भी ट्रेनों की रफ्तार 90 से 110 किलोमीटर प्रति घंटा तक रहती है। इतनी गति पर हाथियों को देखकर ट्रेन रोक पाना लगभग असंभव हो जाता है। अस्थायी गति प्रतिबंध और चेतावनियाँ प्रायः कागज़ी साबित होती हैं। इससे यह स्पष्ट होता है कि रेलवे संचालन में अभी भी पर्यावरणीय सुरक्षा की तुलना में समय और दक्षता को अधिक प्राथमिकता दी जाती है।

दृश्यता की समस्या भी इन दुर्घटनाओं को बढ़ाती है। अधिकांश हाथी-रेल टकराव रात या तड़के होते हैं, जब कोहरा, वर्षा या घनी वनस्पति के कारण ट्रेन चालकों की दृष्टि सीमित हो जाती है। असम और पूर्वोत्तर भारत में यह स्थिति और भी गंभीर है, जहाँ मौसम की अनिश्चितता सामान्य बात है। इसके अतिरिक्त, रेलवे ट्रैक स्वयं हाथियों को आकर्षित करते हैं। यात्रियों द्वारा फेंका गया खाद्य अपशिष्ट, नमकयुक्त मिट्टी और पटरियों के आसपास पकती फसलें हाथियों को जोखिम वाले क्षेत्रों की ओर खींचती हैं, विशेषकर फसल कटाई के मौसम में।

रेलवे ट्रैक का डिज़ाइन भी कई बार समस्या को बढ़ाता है। ऊँचे तटबंध, कंक्रीट की दीवारें और बाड़ें हाथियों को ट्रैक पर फँसा देती हैं। शावक जल्दी बाहर नहीं निकल पाते, जिससे पूरा झुंड धीमा हो जाता है और दुर्घटना की संभावना कई गुना बढ़ जाती है। इसके साथ ही, वन विभाग और रेलवे के बीच समुचित समन्वय की कमी भी एक बड़ी चुनौती है। गश्ती दल द्वारा हाथियों की उपस्थिति की सूचना अक्सर समय पर रेलवे नियंत्रण कक्ष तक नहीं पहुँच पाती, जिससे दुर्घटनाएँ रोकी नहीं जा पातीं।

हर बड़ी दुर्घटना के बाद जाँच, मुआवज़ा और अस्थायी प्रतिबंध जैसे कदम उठाए जाते हैं, किंतु ये सभी प्रतिक्रियात्मक उपाय हैं। पर्यावरण प्रभाव आकलन अक्सर औपचारिकता बनकर रह जाता है और परियोजना स्वीकृति के बाद पशु व्यवहार में आए परिवर्तनों को गंभीरता से नहीं लिया जाता। आवश्यकता इस बात की है कि संरक्षण को विकास की राह में बाधा नहीं, बल्कि उसका अनिवार्य हिस्सा माना जाए।

हाथियों की सुरक्षा के लिए सभी ज्ञात प्रवासी गलियारों को कानूनी संरक्षण देना आवश्यक है, चाहे वे पहले से अधिसूचित हों या नहीं। ऐसे सभी क्षेत्रों में स्थायी गति सीमा लागू की जानी चाहिए। तकनीकी समाधान के रूप में AI आधारित इंट्रूज़न डिटेक्शन सिस्टम, जो हाथियों की गतिविधि पहचानकर समय से ट्रेन चालकों को चेतावनी देते हैं, अत्यंत प्रभावी सिद्ध हो सकते हैं। इन प्रणालियों का सीमित प्रयोग पर्याप्त नहीं है; इन्हें राष्ट्रव्यापी स्तर पर अपनाने की आवश्यकता है।

इसके साथ ही, वैज्ञानिक रूप से डिज़ाइन किए गए अंडरपास, ओवरपास और मिट्टी के रैंप हाथियों के सुरक्षित पारगमन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। पर्यावरण मंत्रालय के अनुसार, ऐसे ढाँचों से हाथियों की मृत्यु दर में उल्लेखनीय कमी संभव है। पटरियों के किनारे फलदार पेड़ों की कटाई, नियमित सफाई और ट्रेनों में शून्य–कचरा नीति अपनाना भी उतना ही आवश्यक है। “प्लान बी” जैसी योजनाएँ, जिनमें मधुमक्खियों की आवाज़ से हाथियों को दूर रखा जाता है, व्यवहारिक और मानवीय समाधान प्रस्तुत करती हैं।

अंतरराष्ट्रीय अनुभव बताते हैं कि जब संरक्षण को गंभीरता से लिया जाता है, तो विकास और वन्यजीवन के बीच संतुलन संभव है। कनाडा, ऑस्ट्रेलिया और नीदरलैंड जैसे देशों ने वन्यजीव पारगमन संरचनाओं और कठोर गति नियंत्रण से दुर्घटनाओं में भारी कमी लाई है। भारत भी इन मॉडलों को अपनी परिस्थितियों के अनुरूप अपना सकता है।

हाथियों की मौत केवल नैतिक विफलता नहीं है, बल्कि आर्थिक नुकसान भी है। ट्रेन दुर्घटनाएँ, मानवीय क्षति, संपत्ति का नुकसान और सेवा बाधाएँ—इन सबकी लागत निवारक उपायों से कहीं अधिक होती है। अंततः, रेलवे ट्रैक पर हाथियों की मौत तकनीकी नहीं, बल्कि नीतिगत असफलता का परिणाम है।

भारत को यह तय करना होगा कि उसका विकास प्रकृति को रौंदते हुए आगे बढ़ेगा या उसके साथ सह-अस्तित्व स्थापित करेगा। पर्यावरण–प्रथम इंजीनियरिंग, कानूनी संरक्षण और तकनीकी नवाचार के माध्यम से ही यह सुनिश्चित किया जा सकता है कि प्रगति की रेलगाड़ी, वन्यजीवन को कुचलती न चले।

नाइजीरिया: मस्जिद में आत्मघाती हमले का संदेह, पांच की मौत, 35 घायल

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मैदुगुरी, 25 दिसंबर (हि.स.)। नाइजीरिया के उत्तर-पूर्वी बोर्नो राज्य की राजधानी मैदुगुरी में गुरुवार को एक मस्जिद के भीतर हुए संदिग्ध आत्मघाती हमले में कम से कम पांच नमाजियों की मौत हो गई, जबकि 35 लोग घायल हो गए। यह घटना शाम की नमाज के दौरान हुई, जब एक विस्फोटक उपकरण फट गया, पुलिस ने इसकी पुष्टि की है।

यह हमला ऐसे समय में हुआ है जब उत्तर-पूर्वी नाइजीरिया में सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ी हुई हैं। इस क्षेत्र में पिछले करीब 15 वर्षों से इस्लामिक उग्रवादी संगठन बोको हराम और उससे अलग हुए गुट आईएसडब्ल्यूएपी (आईएसडब्ल्यूएपी) सक्रिय हैं, जो आम नागरिकों, मस्जिदों और बाजारों को निशाना बनाते रहे हैं। हालांकि, इस ताजा हमले की जिम्मेदारी अब तक किसी संगठन ने नहीं ली है।

पुलिस के अनुसार, विस्फोट अल-अदुम मस्जिद में शाम करीब 6 बजे हुआ। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि धमाके के बाद अफरा-तफरी मच गई और घायलों को तुरंत यूनिवर्सिटी ऑफ मैदुगुरी टीचिंग हॉस्पिटल और राज्य के विशेषज्ञ अस्पताल में भर्ती कराया गया।

एक स्थानीय बाजार नेता मस्ता डालोरी ने कहा, “नमाज के दौरान अचानक विस्फोट हुआ। क्या हुआ, यह किसी को ठीक से पता नहीं है। यह अल्लाह की मर्जी थी, लेकिन घटना के बारे में कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दे सकता।”

बोर्नो राज्य के गवर्नर बाबागाना जुलुम ने हमले की कड़ी निंदा करते हुए इसे “निंदनीय, बर्बर और अमानवीय” करार दिया। उन्होंने त्योहारों के मौसम को देखते हुए धार्मिक स्थलों और सार्वजनिक स्थानों पर सतर्कता बढ़ाने की अपील की। गवर्नर ने मृतकों के परिजनों के प्रति संवेदना और घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की।

पुलिस ने बताया कि बम निरोधक दस्ते ने इलाके को घेर लिया है और तलाशी अभियान जारी है। बोर्नो राज्य पुलिस के प्रवक्ता केनेथ दासो ने कहा कि मामले की जांच की जा रही है और लोगों से शांति बनाए रखने व सतर्क रहने की अपील की गई है।

गौरतलब है कि इससे पहले अगस्त में नाइजीरिया के उत्तर-पश्चिमी कात्सिना राज्य में भी एक मस्जिद और आसपास के घरों पर हुए हमले में दर्जनों लोगों की जान चली गई थी।

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इतिहास के पन्नों में 27 दिसंबर : 1911 में ‘जन गण मन’ का प्रथम गायन

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सन् 1911 भारतीय इतिहास में एक अत्यंत महत्वपूर्ण वर्ष रहा। इसी वर्ष भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के कलकत्ता (अब कोलकाता) अधिवेशन के दौरान पहली बार ‘जन गण मन’ का सार्वजनिक रूप से गायन किया गया। यह गीत महान कवि, दार्शनिक और नोबेल पुरस्कार विजेता रवीन्द्रनाथ टैगोर द्वारा रचित था। उस समय देश ब्रिटिश शासन के अधीन था और स्वतंत्रता आंदोलन तेजी से आगे बढ़ रहा था। ऐसे माहौल में ‘जन गण मन’ का गायन भारतीयों के लिए आत्मगौरव, एकता और राष्ट्रीय चेतना का प्रतीक बनकर उभरा।

इस गीत में भारत की विविधता में एकता की भावना, विभिन्न प्रांतों, भाषाओं और संस्कृतियों का सुंदर समन्वय दिखाई देता है। कांग्रेस अधिवेशन में इसका गायन स्वतंत्रता सेनानियों और प्रतिनिधियों के मन में देशप्रेम और समर्पण की भावना भरने वाला था। बाद में, 24 जनवरी 1950 को ‘जन गण मन’ को आधिकारिक रूप से भारत का राष्ट्रगान घोषित किया गया। आज भी यह गीत देशवासियों को एकजुट होकर राष्ट्र के प्रति कर्तव्य निभाने की प्रेरणा देता है।

रवींद्रनाथ टैगोर ने इसे बांग्ला में ‘भारत भाग्य विधाता’ के नाम से लिखा और उनकी भांजी सरला देवी चौधरानी ने इसे स्वरबद्ध कर मंच से गाया। यह गीत भारत के अलग-अलग प्रांतों, नदियों, पहाड़ों और संस्कृतियों का उत्सव था। महात्मा गांधी ने भी इसे सुनकर इसकी सराहना की और इसे राष्ट्रीय एकता का प्रतीक बताया।

महत्वपूर्ण घटनाचक्र

1861 – कलकत्ता (अब कोलकाता) में पहली बार चाय की सार्वजनिक बोली संपन्न।

1911 – भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के कलकत्ता (अब कोलकाता) अधिवेशन के दौरान पहली बार ‘जन गण मन’ गाया गया।

1934 – पर्सिया के शाह ने पर्सिया का नाम बदलकर ईरान करने की घोषणा की।

1939 – तुर्की में भूकंप से लगभग चालीस हजार लोगों की मौत।

1945 – वैश्विक अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान करने के लिए विश्व बैंक की स्थापना की गई।

1945 – 29 सदस्य देशों के साथ अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष की स्थापना।

1960 – फ्रांस ने परमाणु परीक्षण किया।

1961 – बेल्जियम और कांगो के बीच राजनयिक संबंध बहाल हुए।

1972 – उत्तरी कोरिया में नया संविधान प्रभाव में आया।

1975 – झारखंड के धनबाद जिले स्थित चासनाला कोयला खदान दुर्घटना में 372 लोगों की मौत।

1979 – अफगानिस्तान ने राजनीतिक परिवर्तन एवं हफीजुल्लाह अमीन की सैनिक क्रान्ति में हत्या।

1979 – सोवियत सेना ने अफगानिस्तान पर हमला किया।

1985 – यूरोप के विएना और रोम हवाई अड्डों पर चरमपंथियों के हमले में 16 लोग मारे गए और सौ से ज्यादा घायल हुए।

2000 – आस्ट्रेलिया में विवाह पूर्व संबंधों को कानूनी मान्यता।

2001 – भारत-पाक युद्ध रोकने के लिए संयुक्त राज्य अमेरिका व रूस सक्रिय।

2001 – लश्कर-ए-तोइबा ने अब्दुल वाहिद कश्मीरी को अपना नया प्रमुख नियुक्त किया।

2001 – संयुक्त राष्ट्र ने पाक आतंकवादी संगठन ‘उम्मा-ए-तामीर ए बो’ के खाते सील करने के आदेश दिये।

2002 – ‘ईव’ नामक पहले मानव क्लोन ने संयुक्त राज्य अमेरिका में जन्म लिया।

2004 – भारत ने तीसरे और अन्तिम वनडे में बांग्लादेश को हराकर श्रृंखला 2-1 से जीती।

2007 – रावलपिंडी के पास पाकिस्तान की पूर्व प्रधानमंत्री बेनजीर भुट्टो की गोली मारकर हत्या।

2008 – वी. शान्ताराम पुरस्कार समारोह में तारे जमीं पर को सर्वश्रेष्ठ फ़िल्म का पुरस्कार मिला।

2008 – आशा एण्ड कम्पनी का नाम लिम्का बुक ऑफ रिकार्ड में दर्ज किया गया।

जन्म

1797 – गालिब – उर्दू-फारसी के प्रख्यात कवि।

1895 – उज्जवल सिंह – पंजाब के प्रमुख सिक्ख कार्यकर्ता थे।

1927- नित्यानंद स्वामी, उत्तराखंड के पहले मुख्यमंत्री।

1942- लांस नायक अल्बर्ट एक्का परमवीर चक्र सम्मानित भारतीय सैनिक।

1965 – सलमान खान, बॉलीवुड अभिनेता।

1987 – गिरिजा ओक – एक भारतीय अभिनेत्री हैं जो हिंदी, मराठी और कन्नड़ फिल्म उद्योगों में काम करती हैं।

1993 – नितीश राणा – भारतीय क्रिकेटर।

निधन

1994 – मैरेम्बम कोइरंग सिंह – भारतीय राज्य मणिपुर के प्रथम मुख्यमंत्री थे।

1998 – वांगकान धांग – चीन के परमाणु कार्यक्रम के जनक।

2013- फारुख शेख – बॉलीवुड के प्रसिद्ध अभिनेता

2020 – सुनील कोठारी – प्रसिद्ध भारतीय नृत्य इतिहासकार, विद्वान और आलोचक थे।

श्रीलंका के खिलाफ तीसरे टी20 के लिए दीप्ति शर्मा फिट, चयन के लिए उपलब्ध: अमोल मजूमदार

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तिरुवनंतपुरम, 25 दिसंबर (हि.स.)। भारतीय महिला क्रिकेट टीम की ऑफ-स्पिन ऑलराउंडर दीप्ति शर्मा श्रीलंका के खिलाफ खेले जाने वाले तीसरे टी20 अंतरराष्ट्रीय मुकाबले के लिए पूरी तरह फिट हैं और चयन के लिए उपलब्ध रहेंगी। टीम की यह जानकारी मुख्य कोच अमोल मजूमदार ने मैच की पूर्व संध्या पर दी।

दीप्ति शर्मा विशाखापत्तनम में खेले गए दूसरे टी20 मुकाबले में हल्के बुखार के कारण नहीं खेल पाई थीं। उस मैच में भारत ने श्रीलंका को सात विकेट से हराया था। मजूमदार ने प्री-मैच प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि बीसीसीआई की मेडिकल टीम उनकी सेहत पर लगातार नजर रखे हुए थी और अब वह पूरी तरह ठीक हैं।

कोच ने तेज गेंदबाज रेणुका सिंह ठाकुर को अब तक प्लेइंग इलेवन में मौका न मिलने को अलग-अलग संयोजनों को आजमाने की रणनीति बताया। उन्होंने कहा कि रेणुका टीम की अहम सदस्य हैं और पिछले दो वर्षों में उनके योगदान से सभी वाकिफ हैं, लेकिन इस सीरीज में कुछ प्रयोग किए जा रहे हैं।

मजूमदार ने यह भी बताया कि बल्लेबाज जेमिमा रोड्रिग्स ने एहतियातन अभ्यास सत्र में हिस्सा नहीं लिया। उन्होंने कहा कि जेमिमा को हल्की परेशानी थी, लेकिन वह अब ठीक हैं और यह सिर्फ अनिवार्य आराम का फैसला था। टीम प्रबंधन और फिजियो उनकी स्थिति पर नजर रखे हुए हैं और अंतिम एकादश का फैसला मैच के दिन किया जाएगा।

यह मुकाबला ग्रीनफील्ड इंटरनेशनल स्टेडियम, तिरुवनंतपुरम में खेला जाएगा, जहां भारतीय महिला टीम पहली बार कोई अंतरराष्ट्रीय मैच खेलेगी। मजूमदार ने कहा कि टीम नई परिस्थितियों को समझने और पिच का आकलन करने के बाद ही रणनीति तय करेगी।

उन्होंने कहा कि यह चुनौती से ज्यादा परिस्थितियों को पहचानने की बात है—चाहे पहले बल्लेबाजी करनी हो या गेंदबाजी। अभ्यास सत्र के दौरान टीम पिच और मैदान को अच्छे से परखेगी और उसी आधार पर मैच की रणनीति बनाई जाएगी।

दलित-शोषित मुक्ति मंच ने मनु स्मृति को पहले पैरों तले रौंदा, फिर जलाया

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धनबाद, 25 दिसंबर (हि.स.)। दलित-शोषित मुक्ति मंच के बैनर तले मंच के लोगों ने गुरुवार को धनबाद के रणधीर वर्मा चौक पर मनु स्मृति को लेकर उच्च न्यायालय के फैसले को गलत ठहराते हुए न सिर्फ मनु स्मृति को पैरों तले रौंदा, बल्कि उसकी प्रतियों को जलाया भी। इतना ही नही, देश में विद्या की देवी के रूप में पूजनीय मां सरस्वती को लेकर भी विवादित बयान दिया।

इस विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे शिवबालक पासवान ने कहा कि आज ही के दिन 25 दिसंबर 1927 को डॉ भीमराव अंबेडकर ने मनु स्मृति का दहन किया था। यह मनु स्मृति मनुवादियों की सोच से भरी ग्रंथ है, जो जाती आधारित लोगों के रहन-सहन और शिक्षा को लेकर भेदभाव से भरा है, इस ग्रन्थ में बहुजनों को नीच माना गया है।

उन्होंने कहा कि यह मनु स्मृति एक ऐसा ग्रन्थ है, जो इंसान को इंसान से अलग करता है। उन्होंने कहा कि बड़े ही दुख के साथ कहना पड़ रहा है कि आरएसएस के गर्भ से पैदा हुआ भाजपा आज मनु स्मृति को लागू करने की कोशिश कर रही है, मनु स्मृति के तहत उच्च न्यायालय से दिया गया फैसला पूरी तरह से गलत है।

वहीं उन्होंने विद्या की देवी माँ सरस्वती को लेकर कहा, “सरस्वती देवी हमारे देश मे एक भावनात्मक तस्वीर है, लेकिन हम कहते हैं कि जिस सरस्वती देवी की बात आप कर रहे हैं, वो सरस्वती कौन से कॉलेज में पढ़ी थी, जब ग्रंथो का छेड़छाड़ किया जाएगा तो सरस्वती विद्या दाता कही जाती है ये अलग बात है, लेकिन विद्या देने वाली अगर कोई पहली महिला है तो वो सावित्री बाई फुले है।”

वहीं, इस संबंध में धनबाद के सांसद ढुल्लू महतो ने कहा कि जो भी सनातन के खिलाफ काम करेगा, वैसे व्यक्ति को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। चाहे वो कोई भी व्यक्ति हो। जो सनातन संस्कृति को ठेस पहुचाने का प्रयास कर रहे हैं, वैसे लोगों का विनाश तय है।

वहीं, झारखंड के पूर्व नेता प्रतिपक्ष अमर कुमार बाउरी ने कहा कि ये समाज के विकृत लोग हैं। बंग्लादेश में एक दलित युवक दीपू चंद्र दास की जला कर हत्या कर दी गई । उस हिन्दू दलित के लिए इनके मुंह से एक शब्द नही निकलेगा। ये पूरी तरह से प्रायोजित लोग हैं, जो देश को खंडित करने, देश की समरसता को खंडित करने के लिए और देश में कैसे भेद को पैदा कर के राजनीति जो विदेशों से संचालित हो रही है। कांग्रेस के रूप में उसका कैसे उसका कैसे ये लोग साथ दे सके, बस यही इन लोगों की मंशा है, समाज ने ऐसे लोगों को बहिष्कृत कर दिया है, लेकिन सुर्खियों में बने रहने के लिए ये सभी ऐसा करते हैं।

वा तेजी से खेलों की ओर आकर्षित हो रहे हैं, यह भारत के उज्ज्वल खेल भविष्य का संकेत: साइना नेहवाल

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– सतना में सांसद खेल महोत्सव 2025 के भव्य समापन समारोह में शामिल हुईं बैडमिंटन स्टार

सतना, 25 दिसंबर (हि.स.)। ओलंपिक कांस्य पदक विजेता एवं अंतरराष्ट्रीय बैडमिंटन स्टार साइना नेहवाल ने कहा कि मुझे उम्मीद है कि जब वर्ष 2036 में ओलिंपिक का आयोजन होगा, तब भारत पदक तालिका में चीन, अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों से भी अधिक पदक हासिल करे और वर्ल्ड नंबर-1 बने। आज देश में खेलों के प्रति सोच बदली है और युवा तेजी से खेलों की ओर आकर्षित हो रहे हैं, जो भारत के उज्ज्वल खेल भविष्य का संकेत है।

साइना नेहवाल गुरुवार को मध्य प्रदेश के सतना में आयोजित सांसद खेल महोत्सव 2025 के समापन समारोह को गुरुवार को संबोधित कर रही थीं। उन्होंने देश में खेलों के प्रति युवाओं के बढ़ते रुझान पर संतोष जताया और अपने संघर्ष और प्रेरणा को साझा किया। उन्होंने कहा कि उनकी मां हाउस वाइफ थीं, इसके बावजूद उन्होंने हमेशा उन्हें खेल के लिए प्रेरित किया और हर कदम पर समर्थन दिया। उसी समर्थन और विश्वास के बल पर वह इस मुकाम तक पहुंच सकीं।

क्रिकेट के साथ अन्य खेलों के लिए भी स्टेडियम बनें

साइना ने मंच से अपील की कि देश में केवल क्रिकेट स्टेडियमों का निर्माण न किया जाए, बल्कि अन्य खेलों के लिए भी बेहतर स्टेडियम और सुविधाएं विकसित की जाएं। इससे ही विभिन्न खेलों में भारत के पदकों की संख्या बढ़ सकेगी।

हमारा शरीर फिट रहेगा तो अच्छी सोच रख सकेंगे

साइना ने खिलाड़ियों का उत्साहवर्धन करते हुए कहा कि बच्चे मोबाइल फोन से दूर होकर मैदान में जाकर किसी न किसी खेल का अभ्यास जरूर करें। जितना फिट हमारा शरीर रहेगा, उतना ही फिट हम सोच सकेंगे। खेल हमें अनुशासन, एकाग्रता और दबाव सहने की क्षमता सिखाता है। उन्होंने कहा कि फोकस को ध्यान (मेडिटेशन) से जोड़ने पर कोई हरा नहीं सकता। अच्छे कोच, स्टेडियम और स्पॉन्सरशिप की जरूरत पर जोर देते हुए साइना ने कहा कि खिलाड़ियों को जॉब सिक्योरिटी मिलनी चाहिए ताकि वे पूरी तरह खेल पर फोकस कर सकें।

सतना के दादा सुखेन्द्र सिंह स्टेडियम में सांसद गणेश सिंह द्वारा आयोजित सांसद खेल महोत्सव 2025 का गुरुवार को भव्य समापन हुआ। बैडमिंटन स्टार साइना नेहवाल सांसद खेल महोत्सव के समापन समारोह की मुख्य अतिथि रहीं, जबकि नगरीय विकास एवं आवास राज्यमंत्री प्रतिमा बागरी ने समारोह की अध्यक्षता की। कार्यक्रम में विधायकगण सुरेंद्र सिंह गहरवार व श्रीकांत चतुर्वेदी, महापौर योगेश ताम्रकार, जिला पंचायत अध्यक्ष रामखेलावन कोल, उपाध्यक्ष सुष्मिता सिंह, पूर्व राज्यमंत्री रामखेलावन पटेल, नगर निगम अध्यक्ष राजेश चतुर्वेदी, जिलाध्यक्ष भगवती प्रसाद पाण्डेय सहित कई जनप्रतिनिधि, गणमान्यजन, खिलाड़ी एवं कोच बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।

हार न मानने वाला कभी नहीं हारताः प्रतिमा बागरी

अध्यक्षीय उद्बोधन में राज्यमंत्री प्रतिमा बागरी ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के फिट इंडिया और खेलो इंडिया अभियान की सराहना की। उन्होंने कहा कि जो अपने जीवन में कभी हार नहीं मानता, उसे हरा पाना मुश्किल होता है। जिले के खिलाड़ियों की उपलब्धियों को कई वर्षों की मेहनत का परिणाम बताते हुए उन्होंने संघर्ष और लक्ष्य प्राप्ति पर जोर दिया।

सांसद गणेश सिंह ने साइना नेहवाल की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए बताया कि वे लंदन ओलंपिक 2012 में कांस्य पदक जीतने वाली पहली भारतीय महिला बैडमिंटन खिलाड़ी हैं और विश्व रैंकिंग में नंबर-1 रह चुकी हैं। उन्होंने खेल महोत्सव की शुरुआत 2011 से होने की जानकारी दी, जो अब देशभर में लोकप्रिय है और अब तक एक करोड़ से अधिक खिलाड़ियों ने इसमें भाग लिया है। इस वर्ष महोत्सव की शुरुआत 30 अगस्त को राष्ट्रीय खेल दिवस पर हुई। 116 दिनों में 7963 खिलाड़ियों ने पंजीयन कराया। 11 खेलों (वॉलीबॉल, फुटबॉल, कबड्डी, खो-खो, बास्केटबॉल, रस्साकशी, टेनिस बॉल क्रिकेट, दिव्यांगजन ट्राइसाइकिल रेस, कुश्ती एवं एथलेटिक्स) का आयोजन तीन चरणों में हुआ। कुल हजारों खिलाड़ियों ने उत्कृष्ट प्रदर्शन किया।

कार्यक्रम में विधायक सुरेन्द्र सिंह गहरवार, श्रीकांत चतुर्वेदी और महापौर योगेश ताम्रकार ने भी खिलाडियों का उत्साहवर्धन करते हुए संबोधित किया। समापन पर मुख्य अतिथि साइना नेहवाल एवं अन्य अतिथियों ने विजेता एवं उपविजेता खिलाड़ियों को पुरस्कार वितरित कर सम्मानित किया। यह आयोजन खेल भावना को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण साबित हुआ।

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स्व. अटल जी के सार्वजनिक जीवन में शुचिता और पारदर्शिता रही सर्वोपरि : अमित शाह

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– केन्द्रीय मंत्री शाह ने रीवा के बसामन मामा गौअभयारण्य में किया प्राकृतिक खेती के प्रकल्प का शुभारंभ

भोपाल, 25 दिसंबर (हि.स.)। केंद्रीय गृह और सहकारिता मंत्री अमित शाह ने कहा कि भारत रत्न पूर्व प्रधानमंत्री स्व. अटल बिहारी वाजपेयी के सार्वजनिक जीवन में शुचिता और पारदर्शिता का स्थान सर्वोपरि रहा है। उन्होंने सुशासन की स्थापना के लिये अपने कार्यों से नये आयाम स्थापित किये। उन्होंने जो कहा उसे धरातल साकार करके दिखाया। भारतीय राजनीति में स्व. वाजपेयी का स्थान और योगदान दोनों ही अद्वितीय है। स्व. अटलजी को रीवा से सदैव विशेष लगाव रहा।

केन्द्रीय मंत्री शाह गुरुवार को मध्य प्रदेश के रीवा जिले के बसामन मामा गौ वन्य विहार अभयारण्य में प्राकृतिक खेती के प्रकल्प का शुभारंभ कर कृषक सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि बसामन मामा प्राकृतिक खेती प्रकल्प विंध्य के किसानों के लिये मार्गदर्शक बनेगा। केंद्रीय मंत्री शाह ने सम्मेलन में हितग्राहियों को हितलाभ एवं संकल्प पत्रों को वितरण किया।

शाह ने कहा कि मध्य प्रदेश का रीवा क्षेत्र धीरे-धीरे विकसित क्षेत्र बन रहा है। आज एशिया का सबसे बड़ा सोलर प्लांट रीवा में है। रीवा से जबलपुर तक सड़कों के जाल सहित इंदौर और दिल्ली के लिये वायु सेवा का भी विस्तार हुआ है। अब रीवा एयरपोर्ट से इंदौर और दिल्ली के लिए 24 घंटे हवाई सेवा उपलब्ध है। रीवा में बसावन मामा गौवंश वन्य विहार के रूप में अनुकरणीय प्रकल्प तैयार किया गया है। यहां गोबर से बने खाद से प्राकृतिक खेती की जा रही है। एक एकड़ में सवा लाख रुपये की आय देने का यह प्रयोग छोटे किसानों को बड़ा लाभ प्रदान करेगा। किसान इस मॉडल को अपनाएंगे तो उनकी आय बढ़ेगी। राज्य सरकार प्रगतिशील किसानों को इस परंपरागत मॉडल से अवगत कराने के लिये उनका भ्रमण कराए।

उन्होंने कहा कि एक देशी गाय से 21 एकड़ रकबे में प्राकृतिक खेती होती है। किसान ही अन्नदाता है। अन्नदाता को प्राकृतिक खेती के लिये प्रेरित करने के साथ ही प्रोत्साहित करने के समग्र प्रयास हम सबको समन्वित तरीके से करना है। उन्होंने चिंता व्यक्त करते हुये कहा कि अनाज के उत्पादन में रासायनिक खाद और कीटनाशकों के अत्यधिक प्रयोग के कारण कई तरह की बीमारियां बढ़ रही हैं। इससे बचाव के लिये जरूरी है कि हम सभी प्राकृतिक के संवर्धन में अपना योगदान दें।

केंद्रीय मंत्री शाह ने कहा कि प्राकृतिक खेती को अपनाने से उत्पादन कम नहीं होता है। मैंने स्वयं अपने खेतों में प्राकृतिक खेती को अपनाया है। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में सहकारिता मंत्रालय के अंतर्गत वृहद स्तर पर प्राकृतिक खेती की उपज के प्रमाणीकरण का कार्य किया जा रहा है। केंद्र सरकार ने प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिये प्राकृतिक खेती के माध्यम से उत्पादित उपज के सर्टिफिकेशन, पैकेजिंग और मार्केटिंग की व्यवस्था की है। आगामी समय में देश में 400 से अधिक प्रयोगशालाएं किसान को प्राकृतिक खेती से संबंधित प्रमाण-पत्र प्रदान करेंगी। इन सभी प्रयासों से प्राकृतिक खेती अपनाने वाले किसानों की आय डेढ़ गुना तक बढ़ जाएगी। दुनियाभर में प्राकृतिक खेती का बड़ा बाजार है। आर्गेनिक अनाज खाने से स्वास्थ्य अच्छा रहता है। भूमि परीक्षण से सर्टिफिकेशन, उपज का परीक्षण, बेहतर पैकेजिंग और मार्केटिंग किसानों को उपज का बेहतर मूल्य दिलाएंगी। हम किसानों की आय को बढ़ाने के लिए समुचित प्रयास प्राथमिकता से कर रहे हैं। निदर्शन फॉर्म आने वाले समय में प्राकृतिक खेती के लिए किसानों का मार्गदर्शन करेंगे।

उन्होंने कहा कि प्रकृति की अनेक प्रकार से सेवा हो सकती है। हमें बसावन मामा की स्मृति में पीपल के वृक्ष रोपित करने का संकल्प लेना चाहिए। दु्निया से चले जाने के बाद भी यह पीपल वृक्ष लोगों को ऑक्सीजन देता रहेगा। पीपल का वृक्ष लगाना पुण्य कार्य है, जिसमें स्वयं भगवान विष्णु का वास होता है।

केन्द्रीय मंत्री शाह के मार्गदर्शन में सहकारिता से बढ़ा रहे हैं किसानों की आय: मुख्यमंत्री

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने संबोधित करते हुये कहा कि केन्द्रीय सहकारिता मंत्री शाह के मार्गदर्शन में मध्य प्रदेश के किसानों की आय को बढ़ाने के लिये राज्य सरकार द्वारा समन्वित तरीके से सतत समग्र प्रयास किये जा रहे हैं। उन्होंने कृषकों से प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिये बढ़-चढ़कर सहभागिता करने का आहवान किया।

उन्होंने बताया कि बसावन मामा गौवंश वन्य विहार के भ्रमण के दौरान केंद्रीय मंत्री शाह के द्वारा 35 साल पहले गुजरात में जैविक खेती संवर्धन के लिये जानकारी मिली। उनके द्वारा 35 साल पहले शुरू किये गये कार्य को राज्य सरकार आगे बढ़ाने में कोई कसर नहीं रखेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार किसान कल्याण के लिए निरंतर कार्य कर रही है। केंद्रीय मंत्री शाह के मार्गदर्शन में सहकारिता के माध्यम से किसानों की आय बढ़ाई जा रही है। प्रदेश के किसानों की आय को बढ़ाने के लिये उन्हें दुग्ध उत्पादन के लिये भी प्रेरित किया जा रहा है। इसके लिये डॉ. भीमराव अम्बेडकर कामधेनु योजना से किसानों को लाभांवित किया जा रहा है। प्रदेश में दुग्ध उत्पादन बढ़ाने के लिए नेशनल डेयरी डेवलपमेंट बोर्ड से एमओयू किया गया है। इससे किसानों को सीधे लाभ मिलेगा। राज्य सरकार दूध उत्पादन बढ़ाने के लिए नस्ल सुधार जैसे अनेक कार्य भी कर रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार दूध उत्पादन बढ़ाने के लिए नस्ल सुधार जैसे अनेक कार्य भी कर रही है। राज्य में दूध खरीद का आंकड़ा निरंतर बढ़ रहा है। साल भऱ में प्रति दुग्ध संघ दूध खरीदी में 25 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। राज्य सरकार ने प्रदेश स्तर पर कुल दुग्ध उत्पादन को 9 प्रतिशत से बढ़ाकर 20 प्रतिशत तक करने का लक्ष्य रखा है।

उन्होंने कहा कि गौमाताओं के संरक्षण के लिए प्रति गाय आहार अनुदान को 20 से बढ़ाकर 40 रुपये किया गया है। अटलजी की जन्म जयंती के अवसर पर ग्वालियर में दो लाख करोड़ से अधिक के निवेश से अनेक कार्यों के लिए भूमि-पूजन किया गया है। राज्य सरकार आगामी वर्ष 2026 को कृषि वर्ष के रूप में मनाने जा रही है। हमारी सरकार किसान कल्याण के लिए कृत संकल्पित है। सम्मेलन में उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ला और भाजपा प्रदेशाध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने भी संबोधित किया।

हंगरी के प्रधानमंत्री विक्टर ऑर्बन ने रूस-यूक्रेन तनाव बढ़ाने का ईयू पर लगाया आरोप

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बुडापेस्ट, 25 दिसंबर (हि.स.)। हंगरी के प्रधानमंत्री विक्टर ऑर्बन ने यूरोपीय संघ (ईयू) पर रूस और यूक्रेन के बीच तनाव को जानबूझकर बढ़ावा देने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि ईयू की मौजूदा नीतियां युद्ध को शांत करने के बजाय उसे और भड़काने का काम कर रही हैं।

ऑर्बन ने मीडिया से बातचीत के दौरान कहा कि रूस-यूक्रेन युद्ध अब एक निर्णायक मोड़ के करीब पहुंच रहा है। उन्होंने दावा किया कि हाल के हफ्तों में युद्ध की गति को धीमा करने और किसी समाधान की दिशा में बढ़ने के संकेत मिले थे, लेकिन इसके बावजूद ईयू की नीतियों ने हालात को और जटिल बना दिया है।

हंगरी के प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि उनका देश संघर्ष को सुलझाने के लिए संवाद और कूटनीति के पक्ष में है। उन्होंने कहा, “हमें हथियारों की आपूर्ति और टकराव बढ़ाने के बजाय शांति प्रक्रिया को मजबूत करने पर ध्यान देना चाहिए।”

ऑर्बन ने यह भी दोहराया कि हंगरी रूस के खिलाफ प्रतिबंधों और युद्ध को लंबा खींचने वाली नीतियों का लगातार विरोध करता रहा है। उनके अनुसार, युद्ध का खामियाजा न केवल संबंधित देशों को बल्कि पूरे यूरोप को आर्थिक और सामाजिक रूप से भुगतना पड़ रहा है।

प्रधानमंत्री ऑर्बन के इस बयान से एक बार फिर यूरोपीय संघ के भीतर रूस-यूक्रेन युद्ध को लेकर मतभेद उजागर हो गए हैं।