भारत ने अमेरिकी पक्ष से वीजा देरी का मुद्दा उठाया

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नई दिल्ली, 26 दिसंबर (हि.स.)। भारत ने नई दिल्ली और वाशिंगटन डीसी में अमेरिकी अधिकारियों के समक्ष भारतीयों को वीजा जारी करने में हो रही देरी का मुद्दा उठाया है। भारत का कहना है कि देरी के कारण प्रभावित व्यक्तियों और उनके परिवारों को लंबे समय तक कठिनाइयों का सामना करना पड़ा है। इसमें शिक्षा में व्यवधान भी शामिल है।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने शुक्रवार को साप्ताहिक पत्रकार वार्ता में कहा कि सरकार इस मुद्दे को सुलझाने और भारतीय नागरिकों पर इसके प्रभाव को कम करने के लिए अमेरिकी पक्ष के साथ सक्रिय रूप से बातचीत कर रही है।

उन्होंने कहा कि भारत सरकार को भारतीय नागरिकों से कई शिकायतें मिली हैं। उन्हें अमेरिकी वीज़ा अप्वाइंटमेंट शेड्यूल या रीशेड्यूल करने में देरी और दिक्कतें आ रही हैं। हालांकि वीज़ा मामले जारी करने वाले देश के अधिकार क्षेत्र में आते हैं, फिर भी भारत ने नई दिल्ली और वॉशिंगटन डीसी में अमेरिका के अधिकारियों के सामने इसे उठाया है।

उल्लेखनीय है कि 8 दिसंबर से भारत में अमेरिकी दूतावासों ने सोशल मीडिया की कड़ी जांच की नई ज़रूरतों के कारण हज़ारों एच-1बी और एच-4 अप्वाइंटमेंट कैंसिल कर दिए। कई अप्वाइंटमेंट मार्च-जुलाई 2026 के लिए रीशेड्यूल कर दिए, जिससे रिन्यूअल के लिए घर लौटे कर्मचारी फंस गए।

वार्षिकी 2025: इस साल महाकालेश्वर मंदिर पहुंचे साढ़े पांच करोड़ श्रद्धालु, दिल खोलकर किया दान

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– महाकाल मंदिर पर चढ़ाए 13 करोड़ के आभूषण, दान पेटी और शीघ्र दर्शन से हुई एक अरब 7 करोड़ की आय

उज्जैन, 26 दिसंबर (हि.स.)। मध्य प्रदेश के उज्जैन स्थित विश्व प्रसिद्ध ज्योतिर्लिंग भगवान महाकालेश्वर के मंदिर में देश-विदेश से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। इस साल बीते 11 महीनों में 5.50 करोड़ श्रद्धालुओं ने भगवान महाकाल के दर्शन किए हैं।

इस दौरान भक्तों ने मंदिर में दिल खोलकर दान किया है। बाबा महाकाल को भक्तों ने करीब 13 करोड़ रुपये मूल्य के सोना-चांदी के आभूषण चढ़ाए गए हैं, जबकि दान के रूप में और शीघ्र दर्शन व्यवस्था से मंदिर समिति को एक अरब सात करोड़ रुपये से अधिक की आय हुई है। उज्जैन में महाकाल लोक बनने के बाद महाकालेश्वर मंदिर पहुंचने वाले श्रद्धालुओं की संख्या में लगातार वृद्धि देखने को मिल है। यहां आने वाले श्रद्धालु भगवान महाकाल के दर्शन कर दिल खोलकर दान भी करते हैं। महाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति की मानें तो महाकाल लोक बनने से पहले मंदिर में प्रतिदिन 40 से 50 हजार श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते थे, लेकिन अब यह संख्या बढ़कर रोजाना करीब डेढ़ से दो लाख श्रद्धालुओं तक पहुंच गई है। बड़ी संख्या में आने वाले श्रद्धालु सोना-चांदी के साथ-साथ नगदी भी दान कर रहे हैं।

महाकालेश्वर मंदिर समित के प्रशासक प्रथम कौशिक ने बताया कि इस साल एक जनवरी से लेकर 15 दिसंबर तक करीब साढ़े पांच करोड़ श्रद्धालुओं ने महाकाल के दर्शन किए हैं। श्रद्धालुओं की सुविधा, सहज दर्शन की व्यवस्था मंदिर समिति की ओर से की गई है। इस बार भी महाकाल मंदिर आने वाले श्रद्धालुओं ने बड़ी संख्या में आभूषण और नकद राशि दान की है।

उन्होंने बताया कि इस अवधि में श्रद्धालुओं ने भगवान महाकाल को करीब 13 करोड़ रुपये मूल्य का सोना-चांदी के आभूषण दान किए है, जबकि नकद दान के रूप में 43 करोड़ 43 लाख रुपये मंदिर समिति को प्राप्त हुए हैं। वहीं शीघ्र दर्शन व्यवस्था से मंदिर समिति को करीब 64 करोड़ 50 लाख रुपये की आय हुई है। इस तरह मंदिर समिति को एक करोड़ रुपये से अधिक की राशि प्राप्त हुई है। पिछले वर्ष 2024 में भेंट पेटी और शीघ्र दर्शन से महाकाल मंदिर को कुल 92 करोड़ रुपये की आय हुई थी। पिछले साल की तुलना में इस वर्ष करीब 15 करोड़ रुप अधिक दान भगवान महाकाल को प्राप्त हुआ है।

महाकाल मंदिर प्रबंध समिति के अनुसार, इस वर्ष अब तक भक्तों द्वारा 1483.621 ग्राम सोना और 592.366 किग्रा चांदी के आभूषण भेंट किए हैं। इन आभूषणों में सोने की कीमत करीब एक करोड़ 82 लाख रुपये और चांदी की कीमत 11 करोड़ 85 लाख रुपये के आसपास है। इस तरह एक वर्ष से भी कम समय में 13 करोड़ रुपये से अधिक का दान सिर्फ आभूषण से ही आया है, जबकि भेंट पेटी और शीघ्र दर्शन से महाकाल मंदिर को 11 माह 15 दिन में एक अरब सात करोड़ 93 लाख रुपये की आय हुई है। अभी 15 दिन शेष हैं, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के महाकाल मंदिर पहुंचने की उम्मीद है। महाकाल मंदिर में अन्य स्रोतों से होने वाली आय जैसे भस्म आरती बुकिंग,अभिषेक पूजन की आय, अन्न क्षेत्र से आय, धर्मशाला बुकिंग आय, फोटोग्राफी मासिक शुल्क आय, भांग एवं ध्वजा बुकिंग से आय, उज्जैन दर्शन बस सेवा से होने वाली आय इसमें शामिल नहीं है।

महाकाल मंदिर के सहायक प्रशासक आशीष फलवाड़िया ने बताया कि सामान्य दिनों में मंदिर दर्शन के रोजाना 1.20 लाख श्रद्धालु आ रहे हैं। सप्ताह के अंतिम दिनों में डेढ़ से पौने दो लाख श्रद्धालु मंदिर पहुंच रहे हैं। क्रिसमस से शुरू हुए वेकेशन में महाकालेश्वर मंदिर में भारी उमड़ रही है। महाकालेश्वर मंदिर में वर्ष के अंतिम दिनों और नए वर्ष के पहले सप्ताह में भक्तों की भारी भीड़ उमड़ने की उम्मीद है। बढ़ती भीड़ को ध्यान में रखते हुए मंदिर समिति ने पहले से श्रद्धालुओं के सुगम दर्शन के व्यवस्थाओं के लिए 5 जनवरी तक विशेष प्लान तैयार किया था, जो आज से लागू हो गया है। आम दर्शनार्थियों को मानसरोवर द्वार से प्रवेश दिया जा रहा है। यहां से श्रद्धालु बैरिकेड्स से होते हुए टनल में प्रवेश कर गणेश मंडपम् तक पहुंच रहे हैं। दर्शन के बाद उन्हें बड़ा गणेश मंदिर की ओर बने निर्गम मार्ग से बाहर निकाला जा रहा है। शीघ्र दर्शन व्यवस्था में भी बदलाव किया गया है।

मंदिर आने वाले श्रद्धालुओं को भगवान महाकाल का प्रसाद आसानी से उपलब्ध कराने के लिए मंदिर समिति ने अतिरिक्त प्रसाद काउंटर लगाने का निर्णय लिया है। समिति हर वर्ष की तरह इस बार भी वर्ष के अंतिम दिन और नए वर्ष के पहले दिन मंदिर परिसर में स्थित आठ प्रसाद काउंटरों के अतिरिक्त काउंटर लगाएगी। ये काउंटर बड़ा गणेश मंदिर और विक्रमादित्य टीले के पास सहित अन्य आवश्यक स्थानों पर होंगे। मंदिर समिति 400 रुपये प्रति किलो के भाव से प्रसाद का विक्रय करती है। यह प्रसाद 100 ग्राम, 200 ग्राम, 500 ग्राम और एक किलो के पैक में उपलब्ध रहता है।________________

बारामूला में झेलम से बरामद हुई देवी दुर्गा की प्राचीन पत्थर की मूर्ति, पुरातत्व विभाग को सौंपी गई

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बारामूला, 26 दिसंबर(हि.स.)बारामूला में झेलम से बरामद हुई देवी दुर्गा की प्राचीन पत्थर की मूर्ति, पुरातत्व विभाग को सौंपी गई ।

25 दिसंबर 2025 को मछुआरे नजीर अहमद लाटू पुत्र गुलाम मोहम्मद लाटू, निवासी शाल्टांग जोग्यार ने पुलिस स्टेशन शीरी, बारामूला में रिपोर्ट दी कि उसे झेलम नदी में मछली पकड़ने के दौरान एक पत्थर की मूर्ति मिली थी। मूर्ति को तुरंत पुलिस अधिकारियों के संज्ञान में लाया गया और पुलिस स्टेशन शेरी में सुरक्षित हिरासत में रखा गया।

इसके बाद, 26 दिसंबर 2025 को अभिलेखागार पुरातत्व और संग्रहालय निदेशालय जम्मू-कश्मीर से उचित प्रक्रिया और आधिकारिक निर्देशों का पालन करते हुए, देवी दुर्गा के रूप में पहचानी गई उक्त पत्थर की मूर्ति को बारामूला पुलिस ने उचित हैंडओवर/टेकओवर प्रक्रिया के माध्यम से औपचारिक रूप से पुरातत्व विंग, श्रीनगर के अधिकारियों को सौंप दिया था।

बयान में कहा गया है कि बारामूला पुलिस सांस्कृतिक विरासत की सुरक्षा के लिए अपनी प्रतिबद्धता दोहराती है और नागरिकों से ऐतिहासिक या पुरातात्विक महत्व की ऐसी किसी भी खोज के बारे में अधिकारियों को तुरंत सूचित करने का आग्रह करती है।

अमेठी में बड़े भाई की जिंदा जलाकर हत्या, छोटे भाई—भतीजों पर एफआईआर दर्ज

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अमेठी, 26 दिसंबर (हि.स.)। उत्तर प्रदेश के अमेठी जिले से एक दिल दहला देने वाली वारदात सामने आई है। जमीन विवाद को लेकर छोटे भाई पर अपने ही सगे बड़े भाई को जिंदा जलाकर मार डालने का गंभीर आरोप लगा है। यह सनसनीखेज घटना बुधवार देर रात अमेठी कोतवाली क्षेत्र के सुंदरपुर दरखा गांव की है। गंभीर रूप से झुलसे व्यक्ति की इलाज के दौरान गुरुवार को मौत हो गई। परिजन की तहरीर पर शुक्रवार को पुलिस ने मुकदमा पंजीकृत करते हुए आवश्यक वैधानिक कार्यवाही शुरू कर दी है।

जानकारी के अनुसार, गांव निवासी रामसजीवन गुप्ता (42) पुत्र राजाराम गुप्ता बुधवार की रात घर से करीब 100 मीटर दूर बने अपने छप्पर के मकान में सो रहे थे। रात करीब साढ़े नौ बजे अचानक उनके छप्पर में आग लग गई। आग की लपटें उठती देख ग्रामीण मौके पर पहुंचे और कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया, लेकिन तब तक रामसजीवन गंभीर रूप से झुलस चुके थे। परिजन उन्हें तत्काल जिला अस्पताल गौरीगंज ले गए, जहां प्राथमिक उपचार के बाद हालत गंभीर देखते हुए डॉक्टरों ने लखनऊ स्थित ट्रामा सेंटर रेफर कर दिया। वहां इलाज के दौरान गुरुवार को उनकी मौत हो गई।

मृतक की भाभी फूलपती देवी पत्नी कालिका प्रसाद गुप्ता ने कोतवाली अमेठी में तहरीर देकर आरोप लगाया है कि जमीन विवाद के चलते रामसजीवन के सगे भाई जगन्नाथ गुप्ता और उनके पुत्र सचिन व सतीश ने योजनाबद्ध तरीके से छप्पर में आग लगा दी। आग लगने पर रामसजीवन जान बचाने के लिए चीखते हुए बाहर निकले। शोर सुनकर जब वह मौके पर पहुंचीं तो आरोपियों को भागते हुए देखा। रामसजीवन की पत्नी की छह महीने पहले मौत हो चुकी थी। वह अपने चार वर्षीय पुत्र के साथ रहता था, हालांकि घटना के समय बच्चा मामा के घर होने के कारण सुरक्षित बच गया।

इस संबंध में कोतवाली प्रभारी निरीक्षक रवि कुमार सिंह ने शुक्रवार को बताया कि तहरीर के आधार पर तीन नामजद आरोपियों के खिलाफ सुसंगत धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। एक आरोपी को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है, जांच जारी है।

इग्नू में जनवरी सत्र 2026 के लिए प्रवेश प्रारम्भ

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मुरादाबाद, 26 दिसंबर (हि.स.)। इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय (इग्नू) ने जनवरी सत्र 2026 के लिए विभिन्न कार्यक्रमों में प्रवेश प्रक्रिया प्रारम्भ कर दी है। प्रवेश की अंतिम तिथि 31 जनवरी 2026 है। इस सत्र में इच्छुक अभ्यर्थी स्नातक, स्नातकोत्तर, डिप्लोमा, पीजी डिप्लोमा तथा सर्टिफिकेट कोर्स में प्रवेश के लिए आवेदन कर सकते हैं।

हिंदू काॅलेज मुरादाबाद में इग्नू के समन्वयक प्रो. एके सिंह ने शुक्रवार को बताया कि इग्नू देश का प्रमुख मुक्त विश्वविद्यालय है, जो गुणवत्तापूर्ण, सुलभ एवं किफायती शिक्षा प्रदान करने के लिए जाना जाता है। विश्वविद्यालय द्वारा हिन्दू काॅलेज मुरादाबाद स्थित अध्ययन केंद्र पर कला, विज्ञान, वाणिज्य, प्रबंधन, शिक्षा, सामाजिक विज्ञान, कंप्यूटर, पत्रकारिता, ज्योतिष, भगवद्गीता, हिन्दू अध्ययन, पर्यावरण, लाइब्रेरी साइंस सहित अनेक विषयों में पाठ्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं।

हिंदू काॅलेज के प्राचार्य प्रोफेसर सत्यव्रत सिंह रावत ने बताया कि प्रवेश प्रक्रिया पूर्णतः ऑनलाइन इग्नू के समर्थ पोर्टल के माध्यम से की जा रही है। इग्नू के नोएडा क्षेत्रीय केन्द्र की वरिष्ठ क्षेत्रीय निदेशक डॉ. सिरान मुखर्जी ने बताया कि इग्नू के पाठ्यक्रम नौकरीपेशा, गृहिणी, ग्रामीण क्षेत्र के विद्यार्थियों एवं उच्च शिक्षा से वंचित वर्गों के लिए विशेष रूप से उपयोगी हैं।

अधिक जानकारी एवं ऑनलाइन आवेदन हेतु अभ्यर्थी इग्नू की आधिकारिक वेबसाइट www.ignou.ac.in पर विज़िट करें या हिन्दू काॅलेज स्थित इग्नू अध्ययन केंद्र पर संपर्क करें।

प्राचीन संस्कृति व संस्कार के लिए युवा राम के अनुयायियों का अध्ययन करें-चम्पत राय

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बाराबंकी, 26 दिसंबर (हि.स.)। अगर हम लाेग भारतीय धर्म की धारा से जुड़े रहेंगे तो भारतीय संस्कार बरकरार रहेंगे। आज समय की जरूरत है कि हमारी जड़ें अपनी परंपराओं व महापुरुषों से जुड़ी रहनी चाहिए ताकि भारत काे विश्व गुरु के पद पर पुन: स्थापित किया जा सके।

ये बातें आज विश्व हिंदू परिषद के केंद्रीय उपाध्यक्ष एवं श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र न्यास के महासचिव चम्पत राय ने नगर पालिका बाराबंकी के सभागार में आयोजित धर्म रक्षा निधि समर्पण कार्यक्रम में कहीं। शुक्रवार को लगभग डेढ़ घंटे के संबोधन में विहिप के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष चंपत राय ने एक-एक कर समरसता, गौ संरक्षण, धर्मांतरण और घर वापसी जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर विषय रखते हुए कहा कि स्वामी विवेकानंद ने शिकागो के संबोधन में कहा कि हम सब भारत माता के पुत्र हैं और भारत हमारी माता है। उन्हाेंने कहा कि समाज की कठिनाइयां दूर करने के कारण दुनिया में भारत विश्व गुरु माना जा रहा था।

उन्होंने कहा कि हम सब राम के उपासक हैं और प्राचीन संस्कृति व संस्काराें काे जानने समझने के लिए युवा राम के अनुयायियों का अध्ययन करें। छुआछूत सामाजिक बुराई है जो इसी कालखंड में आ गई और इसको दूर करने के लिए विहिप निरंतर सामाजिक समरसता के क्षेत्र में कार्य कर रहा है। विहिप नेता ने कहा कि किसी काल में किसी परिस्थिति में हमसे अलग होकर भटक गए लाेगाें काे वापस हिंदू समाज में वापस है। अपने जीवन मूल्यों की रक्षा के लिए जीना चाहिए। भारतीय धर्मधारा से जुड़े रहेंगे तो संस्कार बरकरार रहेंगे।

कार्यक्रम में उपस्थित लोगों को राम भक्ति की याद कराते हुए उन्हाेंने कहा कि भगवान राम ने माता शबरी के झूठे बेर खाए; गिद्धराज जटायू की गर्दन गोद में उठाया। बंदर, भालू, निषाद राज को गले लगा कर समरसता का जागरण किया। जन सहयोग से श्रीराम जन्मभूमि पर मंदिर बना है। आज 2 साल से लगातार 70 से 80 हजार लोग रोज रामलाल के दर्शन करते हैं।

जिला मंत्री राहुल कुमार ने कार्यक्रम का संचालन किया। इस अवसर पर प्रांत संगठन मंत्री विजय प्रताप, विभाग संगठन मंत्री इंद्रेश, जिला अध्यक्ष रामनाथ मौर्य, जिला मंत्री राहुल कुमार , नेहा मिश्रा, राजेंद्र प्रताप सिंह, अमित कुमार गुप्ता, राहुल विक्रम सिंह, अखिलेश प्रताप सिंह, अखंड प्रताप सिंह, विनय वर्मा, तुलसीराम चौहान सहित बडी संख्या में लोग उपस्थित थे।

टीवी सीरियल के कलाकारों ने शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद से लिया आशीर्वाद

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-सुदर्शन गौड़ कला फेस्टिवल के कलाकारों ने शंकराचार्य महाराज के समक्ष दी प्रस्तुति

वाराणसी, 26 दिसंबर (हि.स.)। उत्तर प्रदेश की धार्मिक नगरी वाराणसी में मुंबई से आए टीवी सीरियल के कलाकारों ने शुक्रवार को केदारघाट स्थित श्रीविद्या मठ में ज्योतिष्पीठाधीश्वर शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती से आशीर्वाद लिया। टीवी सीरियल के अभिनेता व आल इंडिया आर्टिस्ट एसोशिएशन के अध्यक्ष रोहिताश्व गौड़, उपाध्यक्ष रेखा गौड़, राष्ट्रपति पुरस्कार प्राप्त तबलावादक अशोक पाण्डेय आदि ने शंकराचार्य से आशीर्वाद लेने के बाद उनके समक्ष अपनी कला का भी प्रदर्शन किया। कलाकार अशोक पाण्डेय ने अपने सहयोगी वायलिन वादक सुखदेव मिश्र के साथ शंकराचार्य के समक्ष प्रभावशाली प्रस्तुति दी।

भरत नाट्यम गुरु कलाश्री डॉ. लता सुरेन्द्र ने शिव स्तुति पर प्रस्तुति दी। बिहार के कलाकारों ने नाटिका मास्टर गनेशी राम की प्रस्तुति दी। कलाकार राहुल कुमार ने शिव वंदना पर कथक नृत्य प्रस्तुत कर लोगों को मंत्रमुग्ध कर दिया। इस दौरान अभिनेता रोहिताश्व गौड़ ने कहा कि हम लोगों के पूर्व जन्म में किए पुण्यकर्मों के उदित हुए फल के परिणामस्वरूप सचल शिव शंकराचार्य महाराज का दर्शन प्राप्त हो रहा है। आध्यात्मिक नगरी काशी से हमारा पुराना नाता रहा है। इस बार शंकराचार्य महाराज का कृपा प्राप्त होने से हम लोगों में असीम आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार हो रहा है।

शंकराचार्य महाराज ने सभी कलाकारों को अंगवस्त्रम, रुद्राक्ष माला व प्रसाद देकर आशीर्वाद दिया। मठ में ही 71वें अखिल भारतीय नृत्य प्रतियोगिता के पोस्टर सहित ऋषि लाहौरी प्रोडक्शन के बैनर तले निर्देशक दीपक की गुरु गोविंद सिंह के छोटे साहिबजादों के बलिदान पर केंद्रित गीत के पोस्टर का लोकार्पण शंकराचार्य महाराज ने किया। इस दौरान श्री विद्या मठ की साध्वी पूर्णांबा, ब्रम्हचारी परमात्मानंद, परमेश्वर दत्त शुक्ल, हजारी सौरभ शुक्ला, देव दत्त पाण्डेय, मठ के मीडिया प्रभारी संजय पांडेय भी मौजूद रहे।

योत्ता ने आईपीयू के साथ एमओयू पर किए हस्ताक्षर

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नई दिल्ली, 26 दिसंबर (हि.स.)। भारत की प्रमुख स्वायत्त क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर और प्लेटफॉर्म सर्विसेज- योत्ता डेटा सर्विसेज ने शुक्रवार को गुरु गोबिंद सिंह इंद्रप्रस्थ विश्वविद्यालय (आईपीयू) के साथ एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किया।

योत्ता डेटा सर्विसेज के सह-संस्थापक और सीईओ सुनील गुप्ता ने कहा कि इस समझौते का उद्देश्य भारत की उच्च शिक्षा प्रणाली के लिए एक एआई-सक्षम शिक्षा वितरण मॉडल विकसित करना है। योत्ता के इनफ्रास्ट्रक्चर, सर्वर्स और प्लेटफॉर्म समर्थन से आईपीयू से संबद्ध 125 से ज्यादा कॉलेजों के 2,00,000 से अधिक छात्रों को बिना किसी लागत के 350 से अधिक एआई-सक्षम शैक्षिक पाठ्यक्रम प्रदान किए जाएंगे।

सुनील गुप्ता ने कहा, “हम शिक्षा को अधिक व्यक्तिगत और प्रभावी बनाने के लिए प्रतिबद्ध हैं, साथ ही विश्वविद्यालयों को अधिक कुशलता से संचालित करने में मदद कर रहे हैं। यह भारत की राष्ट्रीय शिक्षा नीति और डिजिटल इंडिया दृष्टिकोण के साथ संरेखित है।”

आईपीयू के कुलपति डॉ. महेश वर्मा ने कहा कि एआई प्लेटफॉर्म एआईसीटीई संस्थानों के छात्रों के लिए एक मुख्य गेटवे के रूप में काम करेगा और योत्ता के सहयोग से एक शिक्षण-शिक्षण संग्रहालय स्थापित करने की योजना बना रहे हैं, जिससे देश के एक हजार से अधिक विश्वविद्यालय सामग्री प्राप्त कर सकेंगे।

प्रो. वर्मा ने कहा कि इस पहल से शिक्षा की गुणवत्ता वास्तव में स्केलेबल, सुलभ और किफायती हो जाएगी। योत्ता इस परियोजना के लिए तकनीकी सहायता प्रदान करेगा और आईपीयू के परामर्श से अन्य विश्वविद्यालयों में इस मॉडल को बढ़ाने में मदद करेगा।

दुनिया भर के लिए बड़ी चुनौती बना पर्यावरण संकट

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– कुलभूषण उपमन्यु

पिछली डेढ़ शताब्दी, जब से औद्योगिक क्रांति ने विकास की गति तेज की और प्रकृति को जीतने की होड़ मच गई, मशीनों ने बंधक-निर्माण-शक्ति मानव के हाथ में दे दी तब से विकास की परिभाषा भी धीरे-धीरे बदल गई। गुणात्मक जीवन के बजाय बाहुल्य को विकास माना जाने लगा। प्रकृति के साथ दुर्व्यवहार का अंतहीन सिलसिला आरंभ हो गया। प्रकृति के दोहन से ही बाहुल्य के लिए सामान बनाए जा सकते थे इसलिए प्राकृतिक संसाधनों के असीमित दोहन की शुरुआत हो गई। उपनिवेशवाद के दौर में कम मशीनी शक्ति वाले देशों पर तथाकथित विकसित देशों द्वारा कब्जे किये गए और उनके संसाधनों को बेदर्दी से नष्ट किया गया। सभ्य कहलाने वाले देशों द्वारा कमजोर देशों के मूल निवासियों को किस तरह प्रताड़ित किया, उनकी सभ्यताओं को असभ्य घोषित करके नष्ट करने का कार्य किया गया, वह अपने आप में घिनौना इतिहास है। इसके अवशेष अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया के मूल निवासियों के रूप में देखे जा सकते हैं। किन्तु यह आधुनिक सभ्यता अब अपने ही भार से भस्मासुर की तरह नष्ट होने की दिशा में बढ़ती प्रतीत हो रही है। इस सभ्यता ने अपने ही मूल पर आघात करना शुरू कर दिया है।

वैज्ञानिक समझ के विकास के चलते सब गलत दिशा को समझ भी रहे हैं किन्तु विज्ञान का दुरूपयोग प्रकृति विनाशक शक्ति के रूप में किया जा रहा है। दुनिया के सबसे विद्वान् वैज्ञानिकों की बहुसंख्या युद्ध विज्ञान के विकास में संलग्न कर दी गई है क्योंकि निर्णय लेने वाले लोग आदिम क्रूर मानसिकता के ही वाहक बने हुए हैं जिनके हाथ में मशीन और विज्ञान, प्रकृति एवं प्राणी समाज के साथ मनमानी करने का हथियार बन गया है। ज्ञान, सुख और शांति का वाहक बनने के बजाय युद्ध और क्रूरता का वाहक बन गया है। इस स्थिति में संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम के सातवें अधिवेषण में नैरोबी में प्रस्तुत की गई ग्लोबल आउटलुक 2025 रिपोर्ट पर्यावरण के साथ किये जा रहे दुर्व्यवहार को संरेखित करती है और अपने तौर-तरीकों पर मानव समाज को पुनर्विचार करके संशोधित करने की दिशा दिखलाती है।

जलवायु परिवर्तन, प्रकृति के साथ किये जा रहे दुर्व्यवहार की प्रतिक्रिया के रूप में एक बड़े खतरे के रूप में चुनौती पेश कर रहा है। मशीनीकरण को चलाए रखने के लिए जिस उर्जा की बड़े पैमाने पर जरूरत है, वह जीवाश्म ईंधन से पैदा की जा रही है। इस उत्पादन प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर धुआं और जहरीली गैसें उत्सर्जित होती हैं जो हरित प्रभाव पैदा करके वायुमंडल के तापमान में अप्रत्याशित वृद्धि कर रही हैं। तापमान वृद्धि से पूरा जलवायु का संतुलन हिल गया है। कहीं अतिवृष्टि हो रही है तो कहीं अनावृष्टि हो रही है। ग्लेशियर पिघल कर समाप्त होने की ओर अग्रसर हैं जो आसन्न जल संकट का कारण बनेंगे। रिपोर्ट के अनुसार हरित प्रभाव गैसों के उत्सर्जन से अभी 1.5 डिग्री सेंटीग्रेड तक तापमान में वृद्धि हुई है जो साल 2024 में 1.55 डिग्री सेंटीग्रेड हो गई है। इस गति से वृद्धि होने पर जलवायु पर बहुत बुरा प्रभाव पड़ रहा है जो आगे बढ़ता जाएगा। यदि तापमान वृद्धि को रोका नहीं गया तो इसके कारण जैव विविधता पर भी बुरा असर पड़ने वाला है। जिससे 10 लाख प्रजातियों के विलुप्त होने का खतरा पैदा हो गया है। 20 से 40% प्रतिशत भू-भाग वैश्विक स्तर पर अनुपजाऊ होने के कगार पर है, जिससे 300 करोड़ लोग प्रभावित होंगे।

जलवायु से जुड़ी भीषण घटनाओं के कारण जनधन की भारी हानि हो रही है। आर्थिक रूप में वार्षिक 14300 करोड़ डॉलर की हानि पिछले दो दशकों से हो रही है। वायु प्रदूषण के कारण साल 2019 में स्वास्थ्य संबंधी आर्थिक नुकसान 8.1 ट्रिलियन डॉलर आंका गया, जो वैश्विक अर्थ व्यवस्था का 6.1 प्रतिशत है। 90 लाख मौतें प्रदूषण संबंधी कारणों से हुईं। 80 हजार लाख टन प्लास्टिक कचरा फैला हुआ है, जिससे गंभीर रासायनिक तत्वों से संपर्क हो रहा है और इससे 1.5 ट्रिलियन डॉलर की आर्थिक हानि प्रति वर्ष हो रही है। नैनो प्लास्टिक तत्व मानव शरीर तक पहुंच कर स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं पैदा कर रहे हैं। अनुमान है कि यदि साल 2040 तक तापमान वृद्धि 2 डिग्री सेंटीग्रेड तक पंहुच गई तो जलवायु परिवर्तन के कारण पारिस्थितिक-व्यवस्था का अपूरणीय विनाश हो सकता है जिससे बड़े पैमाने पर विस्थापन होगा। अर्थव्यवस्थाएँ चौपट हो सकती हैं और बेरोजगारी, गरीबी और अस्थिरता बढ़ेगी। उपजाऊ जमीनों के नष्ट होने से भूख, विविधता विनाश, पौष्टिक आहार की कमी, अकाल और सामाजिक असंतोष के हालात बनेंगे।

इस स्थिति से निपटने के लिए तत्काल गंभीर प्रयास करने की जरूरत है। किन्तु जलवायु नियंत्रण समझौतों के विषय में बहुत से देश विमुखता दिखा रहे हैं। जो मान भी रहे हैं वे भी हरित प्रभाव गैसों के उत्सर्जन में कटौती के लिए स्व घोषित लक्ष्य ही मानने तक सीमित रहना चाहते हैं। इस स्थिति से बाहर निकल कर कुछ आवश्यक कदम उठाने होंगे। ख़ासकर हरित प्रभाव गैसों के उत्सर्जन में भारी कटौती करनी होगी। जिसके लिए कार्बन मुक्त उर्जा विकल्पों की ओर मुड़ना होगा। सौर उर्जा, पवन उर्जा, हाइड्रो काइनेटिक उर्जा आदि विकल्प उपलब्ध और विकसित करने होंगे। पेट्रोल, डीज़ल पर दी जा रही सब्सिडी को हरित उर्जा की ओर मोड़ना पड़ेगा।

अत्यधिक संसाधन दोहन और दुरूपयोग को नियंत्रित करने के लिए “यूज़ एंड थ्रो” उत्पाद पद्धति को बदल कर टिकाऊ और मरम्मत किये जा सकने योग्य उत्पाद बनाने होंगे। बेकार पदार्थों और कचरे के पुन: चक्रीकरण की व्यवस्थाओं को प्रोत्साहित करना संसाधनों के अत्यधिक दोहन को रोकने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होगा। वायु प्रदूषण को रोकना, पारिस्थितिक तंत्र को बचाना और पुनर्जीवित करने पर जोर देना पड़ेगा।

जलवायु परिवर्तन से मुकाबला करने के लिए इसे रोकने के जरूरी कदम उठाने के साथ-साथ जलवायु अनुकूलन की विधियाँ तलाशनी होंगी। परिवहन के कारण होने वाले भारी प्रदूषण से निपटने के लिए टिकाऊ सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को आरामदायक बनाते हुए उसे विकसित करना पड़ेगा। समस्याएँ तो आती रहेंगी किन्तु समाधान के लिए प्रकृति आधारित हल प्राथमिकता से ढूंढे जाएं तो हालत सुधरने में मदद जरूर मिलेगी।

(लेखक, जाने-माने पर्यावरण विद् हैं।)

जम्मू क्षेत्र में इस साल 1.47 करोड़ से ज़्यादा पर्यटक, इनमें 12,000 विदेशी भी शामिल थे

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जम्मू, 26 दिसंबर हि.स.। पाकिस्तान प्रायोजित आतंकी हमलों (पहलगाम), ऑपरेशन सिंदूर और अप्रत्याशित बारिश और बाढ़ से बुरी तरह प्रभावित होने के बावजूद जम्मू और कश्मीर के जम्मू क्षेत्र में इस साल 1.47 करोड़ से ज़्यादा पर्यटक आए जिनमें 12,000 विदेशी भी शामिल थे जिन्होंने विभिन्न जगहों का दौरा किया।

जम्मू और कश्मीर में पर्यटन क्षेत्र इस साल अप्रैल में पहलगाम आतंकी हमले उसके बाद मई में ऑपरेशन सिंदूर और अगस्त महीने में भारी बारिश और अचानक आई बाढ़ के कारण प्रभावित रहा जिसने बड़े पैमाने पर जम्मू डिवीजन को प्रभावित किया। माता वैष्णो देवी, शिवखोरी मंदिर, पटनीटॉप, सनासर, भद्रवाह सहित पर्यटन स्थल सबसे ज़्यादा प्रभावित हुए।

अधिकारियों के अनुसार इस साल अब तक कुल 1,47,32,552 टूरिस्ट जिनमें 12889 विदेशी शामिल हैं जम्मू क्षेत्र में आए। अधिकारियों ने बताया कि इसमें से 63,68,233 तीर्थयात्रियों ने रियासी जिले की त्रिकुटा पहाड़ियों में स्थित श्री माता वैष्णो देवी की पवित्र गुफा मंदिर का दौरा किया जिसमें 12885 विदेशी शामिल थे।

अधिकारियों ने बताया कि इस साल जनवरी में 1404306 पर्यटकों ने जम्मू क्षेत्र का दौरा किया और फरवरी में यह आंकड़ा 1116986 था मार्च में यह 1580161 तक पहुंच गया और अप्रैल में 1738413 पर्यटकों ने जम्मू क्षेत्र के हिस्सों का दौरा किया।

मई में भारत-पाकिस्तान तनाव (ऑपरेशन सिंदूर) के दौरान जो अप्रैल में पहलगाम आतंकी हमले के बाद शुरू हुआ था सबसे कम 897622 पर्यटकों ने जम्मू क्षेत्र का दौरा किया लेकिन जून (2138056) और जुलाई (1622169) में यह आंकड़ा बढ़ गया।

हालांकि अगस्त महीने में भारी बारिश और बाढ़ के कारण पर्यटकों की संख्या में गिरावट आई और 1132762 आगंतुक दर्ज किए गए इसके बाद सितंबर में 441010, अक्टूबर में 743117 और नवंबर महीने में 1905061 पर्यटक आए।

अधिकारियों ने कहा कि 14 अगस्त को किश्तवाड़ जिले के चोसिटी गांव में बादल फटने से आई अचानक बाढ़, जिसमें 68 लोगों की मौत हो गई और 300 से ज़्यादा लोग घायल हो गए और 26 अगस्त को कटरा में श्री माता वैष्णो देवी मंदिर के रास्ते में हुए भूस्खलन जिसमें 34 लोगों की जान चली गई ने भी इस साल जम्मू क्षेत्र में पर्यटन के मौसम को काफी प्रभावित किया।

खास बात यह है कि 2021 से 2024 तक जम्मू और कश्मीर में कुल 7,49,70,943 पर्यटक आए जिनमें जम्मू में श्री माता वैष्णो देवी मंदिर और कश्मीर में अमरनाथ गुफा मंदिर के तीर्थयात्री शामिल हैं।

2021 में कुल 1,13,16,534 पर्यटकों ने जम्मू और कश्मीर का दौरा किया और इसमें से जम्मू में 1,06,50,757 जबकि कश्मीर में 6,65,777 आगंतुक आए। 2022 में, टूरिस्ट की संख्या 1,88,84,317 थी, जिसमें से 1,62,10,875 जम्मू गए, जबकि कश्मीर में 26,73,442 टूरिस्ट आए और इसी तरह, 2023 में, कुल 2,11,80,011 टूरिस्ट में से 1,80,24,176 जम्मू गए और 31,55,835 कश्मीर गए।

2024 में जब 2,35,90,081 टूरिस्ट जम्मू और कश्मीर आए तो जम्मू में 2,00,91,379 और कश्मीर में 34,98,702 टूरिस्ट आए। जम्मू और कश्मीर में विदेशी टूरिस्ट की संख्या में कई गुना बढ़ोतरी हुई है।